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अजिंक्या रहाणे ने अचानक किसके दबाव में लिया संन्यास?

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2 मिनट 45 सेकंड का वीडियो अजिंक्य रहणे के आंसुओं के साथ खत्म हुआ। और इस वीडियो में जो आखिरी शब्द गूंजे वह थे कैप 278 साइनिंग ऑफ। माने अब हमें कंसिस्टेंसी, एक्यूरेसी और कामनेस का वो संगम नहीं दिखेगा जिसे लेकर अजिंक्य रहाणे क्रिकेट के मैदान में उतरते थे। क्योंकि अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट, वन डे, टेस्ट और T20 इंटरनेशनल से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। अजिंक्य के रिटायरमेंट पर BCCI ने उनका वीडियो शेयर करते हुए आगे की जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दी। दिग्गज सुनील गावस्कर ने लिखा, भारतीय क्रिकेट में एक शानदार अध्याय खत्म हो गया है। वे मैदान पर कभी भी बहुत ज्यादा शोरशराबा करने वाले खिलाड़ी नहीं रहे बल्कि उन्होंने हमेशा अपने बल्ले और अपने व्यवहार से अपनी बात रखी। ऑस्ट्रेलिया में उनकी शांत कप्तानी हमेशा भारतीय क्रिकेट के सबसे बेहतरीन पलों में से एक रहेगी। सिर्फ क्रिकेट जगत के दिग्गज ही नहीं बल्कि हाल ही में चर्चा में रही कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से भी अजिंक्य रहाणे को शुभकामनाएं दी गई। सीजेपी ने अपने एक्स अकाउंट पर रह रहाणे के स्टैट्स शेयर किए। खैर, 2 मिनट 54 सेकंड के वीडियो में अजिंक्य ने अपने 20 साल के करियर को समेटने की कोशिश की। टीममेट्स, कोचेस, फ्रेंचाइजीज और अपने परिवार को थैंक यू कहते हुए भावुक भी हुए। लेकिन रह रहाणे की कहानी सिर्फ 3 मिनट में दर्ज नहीं हो सकती। इस कहानी में कई चैप्टर्स हैं। मुंबई के वानखेड़े से लेकर ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड तक के चैप्टर्स। इन चैप्टर्स को अजिंक्य रहणे ने अपने बल्ले से कैसे उसी की कहानी सुनाएंगे इस वीडियो में। नमस्कार, मेरा नाम है रविशंकर। आप देख रहे हैं खबर गांव। साल 2020 टीम इंडिया के कप्तान थे विराट कोहली और उपक्तान थे अजिंक्य रहणे। टीम थी ऑस्ट्रेलिया में और मौका था बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी का। 17 दिसंबर को पहला मैच एडिलेड में शुरू हुआ।

उम्मीद थी दो दिग्गज टीमों के बीच पांच दिन का जबरदस्त मुकाबला होगा। लेकिन 19 तारीख आते-आते ऑस्ट्रेलिया जीत चुकी थी। यहां असली दिक्कत थी भारतीय टीम की भयंकर बेइज्जती या कहें तो सदमा क्योंकि पूरी टीम दूसरी पारी में महज 36 रन पर ढेर हो गई थी। सोशल मीडिया पर लिखे जाने लगे शर्मनाक, अपमानजनक और टॉप ऑर्डर फेल। मगर सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हुई वो अजिंक्य रहणे और विराट कोहली के बीच मिसअंडरस्टैंडिंग की। जब विराट कोहली पहली पारी में रन आउट हो गए। फैंस और क्रिटिक्स ने इसे टर्निंग पॉइंट बताया। अजिंक्य को निशाने पर ले लिया। बहुत आलोचना हुई। लेकिन अजिंक्य ने संयम नहीं खोया। दूसरे मैच का इंतजार किया। 26 दिसंबर से होने वाले दूसरे मैच के लिए टीम मेलबर्न पहुंची। हालांकि अब सीरीज के बाकी मैचों के लिए विराट कोहली टीम का हिस्सा नहीं थे क्योंकि वह पिता बनने के कारण पेटरनिटी लीव पर भारत वापस आ गए थे। यानी कप्तानी की जिम्मेदारी मिली अजिंक्य रहाणे को। यानी जिम्मेदारी दो गुनी। टीम के खिलाड़ियों को 36 रन वाले सदमे से बाहर निकालना है और किसी भी हाल में यह मैच जीतकर सीरीज बराबरी पर लानी है। सबसे जरूरी अपनी परफॉर्मेंस से विराट के रन आउट को मैनेज करना है। मैच शुरू हुआ। टीम इंडिया ने पहले गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया को 195 रन पर ढेर कर दिया। इंडिया की बैटिंग आई तो शुरुआत खराब रही। मयंक अग्रवाल जीरो और चेतेश्वर पुजारा 17 रन बनाकर आउट हो गए। अब जिम्मेदारी थी अजिंक्य रहणे पर वो डट गए। अजिंक्य ने पहले शतक पूरा किया और फिर अपनी पारी को आगे बढ़ाया। हालांकि 112 रन बनाकर रन आउट हो गए। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया 200 रन बना पाई। माने टीम इंडिया को जीत के लिए चाहिए थे सिर्फ 70 रन। टीम इंडिया ने दो विकेट खोकर आसानी से मैच जीत लिया। इसमें अजिंक्य रहाणे ने नाबाद 27 रन बनाए थे। अजिंक्य रहाणे की बेहतरीन कप्तानी, उनकी बैटिंग और टीम को जीत दिलाकर सीरीज में वापसी करना क्रिटिक्स को सदा हुआ जवाब था। इसके बाद तीसरा मैच ड्रॉ रहा और चौथा मैच जीतकर टीम इंडिया ने सीरीज जीत ली। इन सभी मैचों में अजिंक्य रहणे ने कप्तानी की और टीम इंडिया को ऐसे सदमे से निकाला

जहां से निकलना बहुत मुश्किल था। यानी 2020-21 की बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी इतिहास के पन्नों में लिख दी गई अजिंक्य रहाणे के नाम के साथ। बीजीटी 2020-21 का किस्सा अजिंक्य रहाणे का नाम का अर्थ पूरी तरह सार्थक करता है। अजिंक्य यानी कभी ना हारने वाला। रिटायरमेंट के लिए वीडियो बनाते वक्त अजिंक्य ने इस बात का जिक्र भी किया। हालांकि उन्होंने कहा कि मैं कई बार हारा हूं लेकिन दोबारा उठा। अजिंक्य रहाणे की कहानी मुंबई के दूरदराज इलाके डोबीवली से शुरू होती है। पिता एक सरकारी कर्मचारी थे और नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे सारा समय टीवी देखने में बिताएं। इसलिए अजिंक्य को क्रिकेट और कराटे की क्लास में डाला। ने महज 12 साल की उम्र तक कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर ली थी। और यही वो डिसिप्लिन था जो आगे चलकर उनके क्रिकेट में भी दिखा। क्रिकेट सीखने के लिए उन्हें हर दिन डोमीवली से दक्षिण मुंबई के मैदानों तक सफर करना पड़ता था जो करीब 50 कि.मी. दूर था। मुंबई की लोकल ट्रेनों की भीड़ में एक छोटा सा बच्चा अपनी भारीभरकम किटबैक लेकर खड़ा रहता था। उन शुरुआती दिनों में रह रहाणे इतने छोटे थे कि वे ट्रेन में अपने सीनियर्स की गोद में बैठकर सफर पूरा करते थे। जब वे थोड़े बड़े हुए तो उनके पिता उनके साथ जाते थे। लेकिन अजिंक्य को पता नहीं होता था कि उनके पिता उनके ठीक पीछे वाले डिब्बे में बैठकर उन पर नजर रख रहे हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। रह रहाणे के बचपन का एक बहुत ही मशहूर किस्सा है। जब पता चला था कि रहणे में क्रिकेट के लिए कितना जुनून और हिम्मत है। बात 90 के दशक के आखिर की है। दक्षिण मुंबई के किसी मैदान पर एक मैच हुआ। गेंदबाज़ी की शुरुआत की अन्ना नाम के शख्स ने। एक लंबा और मजबूत शरीर वाला आदमी। उम्र शायद 20-25 साल के बीच रही होगी। वहीं पास उडुपी रेस्टोरेंट में वेटर का काम करता था। अन्ना की बात कर रहे हैं। अन्ना को नई गेंद से बॉलिंग का बहुत शौक था। अन्ना के हाथ में गेंद थी और सामने थे अजिंक्य। तब उम्र शायद 10 साल की भी नहीं होगी। उनका बल्ला हाथ में बहुत बड़ा मालूम हो रहा था। हेलमेट भी सर के साइज से बहुत ज्यादा था। ढीला सा मालूम हो रहा था। अन्ना ने गेंद फेंकी और बाउंस होकर सीधा आजिंक के सर पर जा लगी। आजिंग जमीन पर गिर पड़े। साथी खिलाड़ी घबरा गए। लगा कि सर फट गया है। लोग भागकर मैदान पर पहुंचे तो रहणे जोर-जोर से रो रहे थे। को पानी पिलाया गया। रह रहाणे लगातार रोते रहे करीब 15 मिनट तक। परेशान होकर अंपायर ने अल्टीमेटम दिया कि या तो वह खेल शुरू करें या मैदान से बाहर जाएं। आखिरकार रहणे ने फैसला किया कि वो फिर से खेलेंगे। तभी अन्ना ने रहाणे से कहा कि वो नहीं खेल पाएंगे। वो बाहर चले जाएं। लेकिन रहणे किसी और मोड़ में थे। इस बार फिर रहणे के सामने अन्ना थे। लेकिन इस बार गेंद हेलमेट पर नहीं लग रही थी बल्कि बाउंड्री पर रखी रस्सियों को चूम रही थी। बेहद सुंदर कवर ड्राइव स्मूथ फ्लिक के जरिए ने अन्ना को चार लगातार चौके मारे। इस किस्से को याद करते हुए कहते हैं दर्द हो रहा था

लेकिन अंदर से मुझे लग रहा था कि मैं वो दर्द दिखाना नहीं चाहता। तब मुझे ज्यादा कुछ नहीं पता था लेकिन बस अपना समय लेना चाहता था। मैंने खुद से कहा कि मैं मैदान से बाहर नहीं जाऊंगा। मैं बॉलर को अपनी पीठ नहीं दिखाना चाहता था। बड़ी बात नहीं कि लोगों ने के चार चौकों को एक बदले और मजबूत लड़के के तौर पर देखा हो। लेकिन सही मायने में रहणे ने अपने डिसिप्लिन और शॉट सिलेक्शन का एक नमूना दिखाया था। क्योंकि उनका एक भी शॉट क्रॉस बैट से नहीं आया था। जब तक खेले कभी क्रॉस बैट से नहीं खेले। यहां तक आईपीएल जैसे तेजतर्रार फॉर्मेट में भी नहीं। आप चाहे 2026l देखिए या फिर 2025 का या फिर उससे पहले जहां मौजूदा वक्त में वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा या फिर फिन एलन जैसे बल्लेबाज आते ही फुल पावर यूज़ करके मारने की कोशिश करते हैं। वहीं इन लोगों के बीच अजिंक्य रहाणे बगैर पावर जनरेट किए सिर्फ अपनी टाइमिंग, बैट की सही पोजीशन और रणनीति के तहत खेलते हुए दिखाई देते हैं। खैर वापस चलते हैं।णे ने अपने क्रिकेट की शुरुआत मुंबई के लिए खेलते हुए की। घरेलू क्रिकेट में उनकी परफॉर्मेंस शानदार है। महज 22 साल की उम्र तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 4000 से ज्यादा रन बना लिए थे और औसत करीब 69 का था। बावजूद इसके उन्हें टीम इंडिया के दरवाजे पर काफी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इंटरनेशनल क्रिकेट में उनका सफर 2011 में शुरू हुआ। उन्होंने अपना पहला टी20 मैच 31 अगस्त 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेला। अपने पहले ही मैच में उन्होंने 31 गेंद पर 69 रनों की धुआंधार पारी खेलकर सबको इंप्रेस किया। इसके कुछ ही दिनों बाद 3 सितंबर 2011 को चेस्ट स्ट्रीट में इंग्लैंड के खिलाफ ही उनका वन डे डेब्यू हुआ। यह राहुल द्रविड़ का आखिरी वाइट बॉल मैच था और रहणे ने इसमें 40 रन बनाए थे। लेकिन टेस्ट क्रिकेट का सफर इतना आसान नहीं था। रहणे को अपनी पहली टेस्ट कैप हासिल करने के लिए करीब 16 टेस्ट मैचों तक बेंच पर बैठना पड़ा। आखिरकार 22 मार्च 2013 को दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्हें टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। लेकिन यह डेब्यू किसी बुरे सपने जैसा था। वे दोनों पारियों में फ्लॉप रहे और केवल एक और सात रन ही बना सके। उस समय के महान दिग्गजों ने उनकी बहुत आलोचना की जिससे रह रहाणे टूट गए। उनके कोच प्रवीण आमरे ने उस समय को याद करते हुए कहा था वो टेस्ट रह रहाणे के नाम पर एक क्रॉस की तरह था और वहां से वापसी करना बहुत मुश्किल था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खराब डेब्यू के बाद उन्हें टीम से बाहर होने का डर था लेकिन उन्होंने अपनी तकनीक पर काम किया। प्रवीण आमरे ने सीजन के बीच में ही उनका बैकलिफ्ट बदलवाया जो एक बहुत बड़ा जोखिम था। आपको बता दें कि बैकलिफ्ट किसी भी बल्लेबाज के लिए सबसे जरूरी हिस्सा होता है क्योंकि यहीं से तय होता है कि गेंद और बल्ले का संपर्क कैसे होगा। दरअसल बैकलिफ्ट बल्लेबाजी का वो हिस्सा है जब बल्लेबाज शॉट के लिए अपने बल्ले को उठाकर पीछे की तरफ ले जाता है। लेकिन रहाणे की मेहनत रंग लाई और दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उन्होंने डरबन टेस्ट में 51 और 96 रनों की शानदार पारियां खेलकर टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। इसके बाद रहणे ने ऐसा खेला कि सेना देशों यानी दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बन गए। 2014 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उनका शतक आज भी याद किया जाता है। जिसकी बदौलत भारत ने वहां 28 साल बाद कोई टेस्ट जीता था। उसी साल मेलबर्न और न्यूजीलैंड में भी उनके शतकों ने उन्हें दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों की कतार में ला खड़ा किया। हालांकि 2022 की शुरुआत में उन्हें खराब फॉर्म की वजह से टेस्ट टीम से बाहर कर दिया गया था।

लेकिन रह रहाणे ने हार नहीं मानी। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मेहनत की और 2023 के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए फिर से टीम में वापसी की। जहां उन्होंने 89 और 46 रनों की जुझारू पारियां खेली। यह उनकी आखिरी बड़ी सफलता थी। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2023 में इंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला गया था। एक टेस्ट मैच था। यह तो अजिंक्य रहणे का खेल था। लेकिन उनके करियर में गोल्डन पीरियड रहा। उनकी कैप्टेंसी जब उन्होंने साल 2020-21 बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में इतिहास रच दिया। इस सीरीज का पूरा किस्सा हमने आपको शुरुआत में ही सुनाया। कैसे टीम इंडिया पहले मैच में सिर्फ 36 रन पर ऑल आउट हो गई थी। फिरणे कप्तान बने और टीम ने इतिहास रच दिया जिससे सीरीज एक-एक की बराबरी पर आ गई। अजिंक्य रहणे की कप्तानी रिकॉर्ड इतना शानदार है कि कोई भी अन्य भारतीय कप्तान उसकी बराबरी नहीं कर पाया है। उन्होंने कुल छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिसमें से भारत ने चार जीते और दो ड्रॉ रहे। वे कभी कोई टेस्ट नहीं हारे। वन डे में भी उन्होंने तीन मैचों में कप्तानी की और तीनों में भारत को जीत मिली। इनमें भी एक यादगार टेस्ट मैच अफगानिस्तान के साथ था जो ना ही कभी अफगानिस्तान भूल सकता है और ना हिंदुस्तान और ना ही क्रिकेट को चाहने वाला दुनिया का कोई भी फैन। 15 जून 2018 को बेंगलुरु में अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेला गया। भारत ने वो मैच 2 दिनों में ही जीत लिया था। लेकिन जब ट्रॉफी के साथ फोटो खिंचवाने की बारी आई तो रहणे ने अफगानिस्तान की पूरी टीम को भारत के साथ आकर फोटो खिंचवाने के लिए आमंत्रित किया। रह रहाणे ने कहा था जीत और हार खेल का हिस्सा है। मैदान पर और मैदान के बाहर आप जो सीखते हैं वह बेहद महत्वपूर्ण है। शायद यही कारण है कि अजिंक्य के लिए हमेशा प्रेरणा रहे। राहुल के बारे में कहते हैं जो भी उनके साथ खेलता है, वह जानता है कि वे एक सख्त जान लड़के हैं। उनके अंदर एक फौलाद है। माइकल वॉन ने तो अजिंक्य को भारतीय टीम का सबसे ज्यादा तकनीकी रूप से सक्षम खिलाड़ी बताया था। अगर रह रहाणे के करियर के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो टेस्ट क्रिकेट में 85 मैच खेले हैं। करीब 39 की औसत से 577 रन बनाए हैं। 12 शतक और 26 अर्धशतकों की मदद से। इसके अलावा वनडे की बात करें तो 90 मैचों में करीब 36 की औसत से 2962 रन बनाए हैं। जिसमें तीन शतक और 24 अर्धशतक दर्ज हैं। T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 20 मैच खेले हैं और 375 रन बनाए हैं। की बात करें तो 212 मैचों में करीब 31 की औसत से 5367 रन बनाए हैं। जिसमें दो शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। अजिंक्य रहणेl में कोलकाता नाइटराइडर्स, राजस्थान रॉयल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों का हिस्सा रहे। आजक रहाणे काl सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। जगजाहिर है कि आजक रहाणे को कभी भी T20 का बहुत अच्छा बल्लेबाज नहीं माना गया है। इस बारे में उनके कोच प्रवीण आमरे कहते हैं जब मैंने एकl फ्रेंचाइजी को रह रहाणे का नाम सुझाया तो उन्होंने साफ तौर पर मना करते हुए कहा था कि वो T20 का खिलाड़ी नहीं है। यहां तक कि मुंबई इंडियंस में रहते हुए भी

उन्होंने ज्यादा मौके नहीं हासिल किए। लेकिन रहणे ने हार नहीं मानी और राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़कर अपनी किस्मत बदली। IPL 2012 उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जहां उन्होंने 560 रन बनाए और सबको दिखा दिया कि क्लासिकल बल्लेबाजी से भी T20 में रन बनाए जा सकते हैं।णे ने खुद माना था कि जो काम घरेलू क्रिकेट में 4000 रन नहीं कर पाए वो आईपीएल के 500 रनों ने कर दिखाया और उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी। के राजस्थान रॉयल्स में जाने के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। सितंबर 2010 में रहणे ने बोर्ड प्रेसिडेंट 11 के लिए खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 111 गेंदों पर नाबाद 113 रनों की तूफानी पारी खेली थी। इस पारी से शेन वाटसन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत अपनी फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स को रह रहाणे का नाम सुझाया। वहीं राहुल द्रविड़ तो रहणे को पसंद करते ही थे। द्रविड़ के मार्गदर्शन में रहाणे ने सीखा कि टी20 खेलने के लिए उन्हें अपनी शैली बदलने या जबरदस्ती बिग हिटर बनने की जरूरत नहीं है। इस तरह रह रहाणे का करियर आगे बढ़ा थोड़ा वक्त बीता तो अजिंक्य रहाणे ने आईपीएलl में कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया जिनमें कोलकाता नाइटराइडर्स भी शामिल है। केकेआर के कप्तान के तौर पर उन्होंने हमेशा टीम को खुद से ऊपर रखा। जब आलोचक उनकी बल्लेबाजी शैली पर सवाल उठाते थे तो उनका सीधा जवाब होता था

लोगों को बात करने दो। अब अगर रहणे की व्यक्तिगत जिंदगी में लौटेंगे, तो सचिन तेंदुलकर के साथ उनका एक यादगार हिस्सा 2013 का है। जब सचिन अपना आखिरी टेस्ट खेल रहे थे। रिटायरमेंट के भावुक पलों के बीच सचिन ने ड्रेसिंग रूम में रहणे को रोक कर कहा था, “अब जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।” सचिन ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि उन्होंने रहणे से कहा था कि भले ही उन्हें करियर में अब तक कम मौके मिले हो, लेकिन अगर वे ईमानदारी से खेल की सेवा करेंगे, तो क्रिकेट उनका ख्याल रखेगा। इसी तरह मुरली विजय के साथ भी रहाणे के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। खिलाड़ियों से रिश्तों के अलावा रहाणे के अनुशासन और मेहनत के कई किस्से मशहूर हैं। राजस्थान रॉयल्स के डायरेक्टर जुबिन भरूचा बताते हैं

बल्लेबाजी को लेकर इतने जुनूनी थे कि एक बार रात के 2:00 बजे उन्होंने मेरे होटल का दरवाजा खटखटाया ताकि वे अपनी बल्लेबाजी पर चर्चा कर सकें। बात अगर आिंक की निजी जिंदगी की करेंगे तो उनकी पत्नी राधिका का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। जिनका जिक्र अजिंक्य ने अपनी रिटायरमेंट वीडियो में भी किया। हालांकि बाकी खिलाड़ियों की तरह राधिका बहुत लैमलाइट में नहीं रहती। और उनकी पत्नी अक्सर मीडिया के कैमरों से दूर ही रहते हैं। फिलहाल आिंक ने रिटायरमेंट ले ली है। अपने वीडियो में रह रहाणे ने कहा, “आजिंक्य का मतलब है अजय। लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हार दिखाई है। एक क्रिकेटर के तौर पर हम सफल होने से ज्यादा फेल होते हैं। मेरी टीम मैच हारी है। मैंने गलतियां की हैं लेकिन एक जगह है जहां मैं कभी नहीं हारा और वो है आपके दिल में। 38 साल के रह रहाणे ने भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ दिया हो लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में वह खेलते रहेंगे। आप रह रहाणे को कैसे याद करते हैं? हमें कमेंट करके जरूर बताइए। इस पूरे वीडियो को रिकॉर्ड किया है तौफीक ने। शुक्रिया।

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