जीनत अमान की खूबसूरती और व्यक्तित्व के दीवाने लाखों लोग थे। लेकिन उनके चाहने वालों में दिग्गज अभिनेता देवानंद भी शामिल थे। देवानंद ने अपनी आत्मकथा में खुलकर स्वीकार किया है। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। देवानंद सिर्फ हिंदी सिनेमा के सदाबहार सुपरस्टार नहीं थे बल्कि लाखों दिलों की धड़कन भी थे। उनकी मुस्कान और अंदाज पर फैंस इस कदर फिदा थे कि उनसे जुड़े किस्से आज भी सुनाए जाते हैं। लेकिन पर्दे पर रोमांस के बादशाह रहे देवानंद अपनी असली जिंदगी में एक ऐसा प्यार भी दिल में छिपाए रहे जिसका इज़हार वो कभी नहीं कर सके। कहा जाता है कि वो जीनत अमान से बेइंतहा मोहब्बत करने लगे थे। लेकिन राज कपूर से जुड़ी एक घटना ने उन्हें अपने जज्बात जाहिर करने से रोक दिया। आज के पडकास्ट में हम जानेंगे देवानंद और जीनत अमान की उस अधूरी प्रेम कहानी का दिलचस्प किस्सा। देवानंद ने 50 और 60 के दशक में अपनी शानदार अदाकारी, स्टाइल और रोमांटिक अंदाज से इंडस्ट्री पर राज किया। 1946 में फिल्म हम एक है से अपने करियर की शुरुआत करने वाले देवानंद ने छह दशकों से भी ज्यादा समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं जीनत अमान के करियर में साल 1971 में आई फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा बड़ा टर्निंग पॉइंट रही। इसी फिल्म में देवानंद ने जीनत अमान के साथ काम किया था। जीना अमान को सिर्फ फैंस ही नहीं बल्कि उनके कई कोस्टार्स भी पसंद करते थे।
उनमें से एक देवानंद भी थे। देवानंद ने अपनी ऑटोबायोग्राफी रोमांसिंग विद लाइफ में जीनत अमान के लिए उनके प्यार के बारे में लिखा है। उन्होंने यह तक बताया है कि जीनत अमान से अपनी फीलिंग कहने के लिए उन्होंने रोमांटिक डेट प्लान की थी। लेकिन यह काम नहीं आई और उनका दिल टूट गया। इसका कारण राज कपूर थे। देवानंद ने किताब में लिखा है कि राज कपूर ने सबके सामने जीनत अमान को चूमा था और यह देखकर देव साहब सन्न रह गए थे। हालांकि जीनत अमान ने इस बात को झूठ बताया था। 2007 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में देवानंद ने लिखा अचानक एक दिन मुझे लगा कि मैं जीनत से बेइंतहा प्यार करने लगा हूं और मैं उससे सचमुच एक बात कहना चाहता था।
रोमांस के लिए बनी एक बहुत ही खास एक खास जगह पर मैं दिल की बात कहना चाहता था। मैंने शहर के सबसे ऊपर ताज होटल में रैंडेव को चुना जहां हमने पहले एक बार साथ में खाना खाया था। देवानंद ने आगे लिखा कि उनका यह प्यार पूरा ना हो सका। मेट्रो सिनेमा में इश्क इश्क इश्क के प्रीमियर के बाद राज कपूर ने वहां आए दर्शकों के सामने जीनत को चूमा। फिल्म में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें बधाई दी। इससे उनकी शाम और भी ज्यादा शानदार हो गई होगी। फिर भी मैं उनसे ईर्ष्या करता था कि उन्होंने मेरी एकमात्र चाहत मेरी खोज मेरी मुख्य नायिका को चूमने की इच्छा की। उन्होंने आगे लिखा कि यह बात मुझे अचानक कुछ ज्यादा ही जानी पहचानी लगी और जिस तरह से उसने उसके गले लगने का जवाब दिया, वह सिर्फ विनम्र और शिष्टता से कहीं ज्यादा लग रहा था। उसके चेहरे पर और भी शर्मिंदगीगी साफ झलक रही थी और जीनत अब मेरे लिए वह जीनत नहीं रही। मेरा दिल टूट गया।
मेरे दिमाग में उस मुलाकात का कोई मतलब ही नहीं रह गया था। मैं चुपके से वहां से निकल गया। देवानंद की किताब में किए गए इस दावे से जीनेत अमान काफी नाराज हो गई थी। और इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था कि ईमानदारी से कहूं तो मैं नाराज थी। मुझे अपमानित आहत और निराशा महसूस हुई कि देव साहब मेरे बहुत बड़े गुरु एक ऐसे व्यक्ति जिन्हें मैं प्यार करती थी और जिनकी मैं बहुत प्रशंसा करती थी। ना केवल सच्चाई से रहित ऐसी कहानी पर विश्वास करेंगे बल्कि फिर इसे दुनिया के सामने प्रकाशित भी करेंगे। कई हफ्तों तक मेरे फोन लगातार बजते रहे क्योंकि मेरे दोस्त मुझसे पूछते रहे कि वास्तव में क्या हुआ था और किताब के कुछ अंश साझा करते रहे। हालांकि मैंने आज तक इस किताब को नहीं पढ़ा और अपने गुस्से में मैंने जो कॉपी मुझे भेजी गई थी उसे स्टोर रूम में रख दिया। साल 2018 में जीनत अमान ने एक इंटरव्यू में देव आनंद के प्यार के बारे में बात करते हुए कहा था कि मैं देव साहब की बहुत रिस्पेक्ट करती हूं। उनकी वजह से ही मैं फिल्मों में आई।
लेकिन मैं यहां यह कहना चाहूंगी कि यह उनका पर्सपेक्टिव था जो उस शाम को हुआ। उन्होंने अंदाजा लगाया लेकिन वह मेरी तरफ से बिल्कुल अलग था। जीनत ने आगे कहा था कि मैंने देवानंद के साथ बहुत सारी फिल्मों में काम किया। मैंने राज जी के साथ भी काम किया। उस दिन दोनों एक ही जगह पर एक ही समय में थे। तब मैं राज जी के पास गई और उन्हें मैंने ग्रीट किया। क्यों ना करूं वो मेरे कोस्टार जो थे। हम साथ में काम कर रहे थे। मुझे नहीं पता उस दिन ऐसा क्या हुआ जो कि देव साहब मुझसे दूर चले गए। वह बात मेरे लिए भी बड़ी अजीब थी। मुझे एहसास हुआ था। लेकिन मुझे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह उस शाम मुझे शादी के लिए प्रपोज करने वाले थे। देववानंद सिर्फ एक शानदार अभिनेता ही नहीं बल्कि बेहतरीन लेखक, निर्माता और निर्देशक भी थे। हिंदी सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके ठीक 1 साल बाद साल 2002 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया। उनकी आखिरी फिल्म चार्जशीट 2011 में रिलीज हुई थी। और उसी साल 3 दिसंबर को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।