देखिए सुप्रीम कोर्ट अगर कुछ युवाओं के हित में कर रही है तो हम वेलकम करते हैं ऐसे ऑर्डर्स को या जजमेंट्स को लेकिन सुप्रीम कोर्ट जो कर रही है वो अपने तरीके से कर रही है। अपने आईडिया के हिसाब से कर रही है। वो करते रहे। हम लोग ग्राउंड पे थे बहुत टाइम से। हम लोगों की कुछ डिमांड्स थी एंड वो डिमांड्स पूरे होने चाहिए वो सबसे इंपॉर्टेंट बात है। हमारा जो की एक और एक जो की डिमांड था वो था कि एफआईआर सारे विथड्रॉ होंगे सारे प्रोटेस्टर्स के खिलाफ एंड फ्यूचर में भी कोई ऐसे एक्शन रिटालिएटरी मेजर कोई भी एक्शन सरकार नहीं लेगी किसी भी प्रोटेस्टर के खिलाफ। अगर एंड ये लिखित में जो रिटन गारंटी होना चाहिए वो आ जाना चाहिए आज तक मतलब कि ट्यूसडे तक आ जाना चाहिए। तो जितने भी सारे डिटेनीस थे अरेस्ट अरेस्टीस थे उन सबको फ्री करना चाहिए।
यह हमारा एक मुख्य डिमांड था। अब अगर उस पे हम लोगों ने यह नहीं बोला कि कोई माइनर है तो तभी आप उसको रिलीज करिए या किसी के ऊपर पहले से एफआईआर है तो उनको मत रिलीज करिए। ये सब हमारा कोई डिमांड नहीं था। एंड सरकार को भी समझना चाहिए कि हमारा जो डिमांड है वो जैसा गारंटी दिया था जैसे देश के सामने उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों मिनिस्टरर्स ने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के बिहाफ पे जो एग्री किया था वैसे ही डिमांड आपको रखना पड़ेगा। अभी अगर सुप्रीम कोर्ट बोल रही है कि जिनके ऊपर एफआईआर्स है पहले से उनको मत छोड़िए तो वो हमें मंजूर नहीं है। हमारा जो डिमांड है वो क्लियर है एंड उसी के हिसाब से होना चाहिए क्योंकि उसी चीज पे एग्रीमेंट भी हुई थी।
देखिए कल हमें बहुत सारे रिपोर्ट्स मिल रहे थे स्पेशली बिहार से कि बहुत सारे बच्चों को डिटेन किया जा रहा है, अरेस्ट किया जा रहा है, जेल भेजा जा रहा है। तो इसके वजह से हमें लगा कि शायद सरकार अपने गारंटीज पे अमल नहीं करेगी। इसलिए हम लोगों ने कल शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया एंड उसमें हमने ऐलान किया कि अगर सरकार अपना जो उन्होंने जबान दिया है वो नहीं रखती है तो हमें हम फोर्स हो जाएंगे।
फिर से एक बड़ा प्रोटेस्ट कॉल करने का दिल्ली में। तो फिर क्या हुआ कि कुछ घंटे बाद सरकार के जो रिप्रेजेंटेटिव्स हैं उन्होंने रीच आउट किया। उन्होंने बोला कि बातचीत करनी है। तो हम मिले रात 10:00 बजे मिले। 1:00 बजे तक वो मीटिंग चली। एंड उसमें यही डिसाइड हो रहा था कि क्या कैसे रिलीज होंगे। कौन-कौन गवर्नमेंट्स ऐसे गारंटी यू नो रिटन गारंटी वो लोग नोटिफिकेशन निकालेंगे। आपने देखा कि बिहार ने भी निकाला, आसाम ने भी निकाला। तो हम लोग उसी चीज पे चर्चा कर रहे थे। कौन-कौन से ऐसे स्टेट गवर्नमेंट्स होंगे जो निकालेंगे एंड क्या लैंग्वेज यूज़ होना चाहिए उसमें क्योंकि हमें यही आशंका थी कि अगर हम लोग कुछ केवीआड डाले या कंडीशंस डाले कि पहले के एफआईआर्स नहीं होने चाहिए या या पीसफुल प्रोटेस्ट मतलब कि पीसफुल वर्ड यूज़ किया तो फिर पुलिस के पास पूरे पावर्स आ जाएंगे कि किसी को भी जो वो पसंद नहीं करते उसको नॉन पीसफुल प्रोटेस्टर बोल देंगे। तो हमने बोला कि सारे प्रोटेस्टर्स जो भी इस मूवमेंट में जुड़े थे उनके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं होना चाहिए।
एफआईआर विड्रॉ होने चाहिए। फ्यूचर में भी कोई एक्शन नहीं होना चाहिए। इसलिए मैं बोल रहा था अभी हम लोग वेट कर रहे हैं। आज ट्यूसडे है आज डेडलाइन है। सरकार जितना मुझे लगता है कि अमल तो करना चाहिए सरकार को। हम लोग अभी भी वेट कर रहे हैं। फाइनल जो नोटिफिकेशन है इन सारे स्टेट से। एंड दिल्ली पुलिस जो एलजी है वह निकालेंगे एंड सेंट्रल गवर्नमेंट के जो एजेंसीज हैं सारे उसके लिए भी सेंट्रल गवर्नमेंट एक नोटिफिकेशन निकालेगी। तो हम लोग अभी वेट कर रहे हैं इस चीज का एंड आशा है कि वो करेंगे। लेकिन इसीलिए मैं बोल रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट अगर कुछ कंडीशंस डाल रहा है तो वो हमें मंजूर नहीं है। हम अगर सुप्रीम कोर्ट कुछ भी बोले तो वो इन एडिशन टू आवर डिमांड्स होने चाहिए।
हम लोगों ने जो बोला वो होना चाहिए। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट जो बोले जो रिलीफ दे वो सरकार को कंप्लाई करना चाहिए। ये हमारी डिमांड है। देखिए सुप्रीम कोर्ट का जो भी ऑर्डर हो ऑफ कोर्स वो मानना तो पड़ेगा। एंड लेकिन सरकार को ये नहीं पिक एंड चूज़ वाला नहीं होना चाहिए सरकार को कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बोला तो अब हमें वो मानना पड़ेगा। जो आपने अश्योरेंस और गारंटी दिया देश भर के सामने युवाओं को सारे प्रेस के सामने वो सबसे पहले आप निभाओगे। उसके बाद जो भी सुप्रीम कोर्ट बोले जो भी कुछ रिलीफ या आर्डर दे वो फिर आप मानोगे। यह है बोलने का मतलब देखिए कंगना रनौत जी को अब उनके पार्टी वाले ही ज्यादा नहीं पूछते हैं।
ज्यादा सीरियसली नहीं लेते हैं उनको तो हम लोग भी क्यों सीरियसली ले? मुझे नहीं लगता जैन जी में या जैन अल्फा में या कोई भी यंगर जनरेशन में उनको सीरियसली कोई लेता है या उनकी बात सुनता है।
अ वो पॉलिटिशियन है, नेता बन गई है। उनके तो कुछ वीडियोस भी थे जहां पे वो हिमाचल में जब अपने सीट में उन्होंने विजिट किया था तो उन्होंने बोला था कि मैं तो मैंने सोचा था कि थोड़ा बहुत ही काम करना पड़ेगा। यहां पे तो इतना ज्यादा काम करना पड़ता है एमपी बनके। तो ये उनका सीरियसनेस दिखाता है। वो हमें अनसीरियस जनरेशन बोल रही है। लेकिन उनका सीरियसनेस उन्होंने ही खुद को एक्सपोज कर दिया था।
इस पे ज्यादा मैं कुछ बोलूंगा नहीं। शब्दावली सही नहीं है। शब्दावली संभाल लेना चाहिए नेताओं को। अपने पद का गरिमा भी बना के रखना चाहिए। आपसे कई गुना ज्यादा जेजी ने इस देश के लिए किया है, कर रहे हैं। अ इस देश के लोकतंत्र में भरोसा फिर से जगाने का काम जजी ने किया है। आपने नहीं किया है। तो यह आप जरूर याद रखिए।