और पेपर लीक बिल पर बोलेंगे राहुल प्रियंका परीक्षा सुधार के हर कदम का समर्थन यह कांग्रेस की तरफ से कहा गया है और पर हमें जवाब चाहिए यह कांग्रेस ने कहा है। के मुद्दे को कांग्रेस उठा रही है। लगातार सरकार भरोसा दे तो चर्चा को तैयार। कांग्रेस पेपर लीक बिल के खिलाफ नहीं है।
कांग्रेस ने स्टैंड तो साफ कर दिया है कि वह बिल के खिलाफ नहीं है। लेकिन यह भी कांग्रेस का दावा है कि इस्तेमाल किया गया। उस पर वह जवाबदेही चाहते हैं सरकार से। जी बिल्कुल। का इस्तेमाल हो या लगे डंडों का इस्तेमाल हो या लाठी चार्ज की बात हो या फिर का इस्तेमाल हो। इन मामलों को लेकर कांग्रेस पार्टी का लगातार यह कहना है कि सरकार इस पर जवाबदेही अपनी तय करे। किसने आदेश दिए, किसने इंप्लीमेंट किया, यह चीज़ सामने आनी चाहिए। तो कांग्रेस पार्टी कहना है चर्चा के लिए वो तैयार है।
लेकिन सरकार से वो अश्योरेंस चाहेगी कि इन मामलों पर वो जवाब दे और सूत्रों के मुताबिक अगर चर्चा होती है तो राहुल गांधी प्रियंका गांधी के वेणुगोपाल और तरुण गोरव गोपाल भी माफ़ कीजिएगा ये लोग जो है कांग्रेस की तरफ से वक्ता होंगे और अखिलेश यादव भी समाजवादी पार्टी की ओर से इस चर्चा में हिस्सा लेंगे लेकिन अब इंडिया ब्लॉक की बैठक इस समय चल रही है।
कांग्रेस ने अपना स्टैंड विपक्षी दलों के तमाम जो अन्य फोर फ्लोर लीडर्स हैं उनके सामने रख लिया है। समाजवादी पार्टी, टीएमसी, शिवसेना, उद्धव ठाकरे इन सबके नेता यहां पर मौजूद हैं। तो ऐसे में अंतिम फैसला आने में चंद मिनटों की देरी है।
क्या विपक्ष फैसला करता है? ठीक है। आप नजर बनाकर रखिए कुमार आपसे आगे भी बात करते रहेंगे। अरविंद सर किस तरह से आप कांग्रेस पार्टी की और पूरे अपोजिशन की इन डिमांड्स को देख रहे हैं। जहां तक एंटी पेपर लीक बिल का सवाल है 2024 में भी कांग्रेस पार्टी ने समर्थन किया था।
इस बार भी समर्थन करती हुई नजर आ रही है। लेकिन यह जो पैेट गन का मुद्दा है, लाठी चार्ज का मुद्दा है, क्या आपको लगता है कि अगर बिल पर चर्चा आज शुरू होती है तो वो चर्चा इन मुद्दों की वजह से डिरेल हो सकती है या फिर इन मुद्दों को परे रखकर अपोजिशन इस चर्चा में एक सार्थक तरीके से पार्टिसिपेट करता हुआ नजर आएगा। देखिए बिल जिस तरह से बना है और जिस तरह से सहमति बनती दिख रही है मुझे नहीं लगता कि उसमें कोई ज्यादा दिक्कत आएगी संख्या के हिसाब से भी और बहस के भी मुद्दे मेरे ख्याल से बिल में जो प्रस्ताव सुनाई दे रहे हैं उसमें बहस की बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं।
असली सवाल यही है कि यह जो पुलिस एक्शन हुआ जो पैेट गन आया इस मसले को कितना जोर दिया जाएगा या इस पे गृह गृह मंत्री बयान दें और सफाई दें। यह सवाल अगर उसके साथ जोड़ा जाता है और इस पे स्कोर करने की कोशिश विपक्ष करेगा तब दिक्कत आएगी। अदरवाइज उस बिल में और मुमकिन है जवाब दे भी दिया जाए सरकार की तरफ से। अगर पैेट गन का मुद्दा बार-बार अपोजिशन उठा रहा है चर्चा के दौरान। क्या यह मुमकिन है कि अमित शाह की तरफ से गृह मंत्री की तरफ से उसका जवाब दे दिया जाए? असली सवाल पहले कौन आए?
यह है और पॉलिटिकल लड़ाई जब होती है तो उसमें यही मसले बड़े बन जाते हैं और छोटी-छोटी चीजों पे जिद और फाइनल उसी के हिसाब से होता है। तो इसलिए ये कहां पर कल तक तो लग रहा था कि यह मसला बड़ा होगा। लेकिन कल शाम के बाद से अब लग रहा है कि नहीं बिल ऊपर हो गया है। तो कायदे से अभी तो बिल का ही अह की उम्मीद करनी चाहिए कि बिल पास करना सबकी प्रायोरिटी में रहेगा और जल्दी उस दिशा में पहल हो और मेरे ख्याल से कांग्रेस या विपक्ष का कोई भी यह नहीं चाहेगा कि उसकी इमेज ये बने कि वो सख्ती और सख्त कानून के खिलाफ है।
इसलिए वो सब उसमें आएंगे। एक चीज बिल्कुल यह सारे विषय जरूर हैं। लेकिन राम कृपाल जी एक सवाल मेरा यह भी है कि इस पूरे मामले में एक बहस यह भी चल रही थी कि कहीं ना कहीं जब स्थितियां आगे बढ़ी तो बीजेपी की लीडरशिप ने यह एक प्लान बनाया कि इसका क्रेडिट कांग्रेस को या दूसरे राजनीतिक दलों को ना जाए। इसलिए डायरेक्ट सीजेपी के साथ इंगेज किया गया। क्या आप भी देखते हैं कि पॉलिटिकली विपक्ष को जो इसका फायदा मिल सकता था उसको किसी तरीके से सरकार ने नियंत्रित किया या मैनेज किया? देखिए मैं एक बात यह कह रहा हूं जो अभी बात हो रही है कि क्या जो बैठक चल रही है कल शाम को से लेकर के आज सवेरे तक तो कोई नया डेवलपमेंट नहीं हुआ है कोई घटना नहीं हुई है तो जो भी चीजें कल शाम को जिनजिन मुद्दों पर सहमति बनी है हम उससे अगर कोई भी पीछे जा रहा है तो यह गलत है और अगर यह बात करनी थी तो कल शाम को इसी को उठाना चाहिए था कि पहले यह मुद्दा होगा पैलेट गन पर बात हो जाएगी उसके बाद यह जो बिल है उस पे बात होगी। मुझे लगता है कि सब्सक्वेंटली फिर सोच समझ करके जो कल शाम को आपने एक सहमति पर पहुंचे हैं उस पे अमल करना चाहिए। और रही बात कि इसका लाभ और हानि।
मैं एक बात कहता हूं यह जो घटना हुई है इसका सबक सत्ता पक्ष भी ले और विपक्ष को लिए भी बहुत बड़ा सबक है। हम सबक आगे है। अभी जिस तरह से चीजें आएंगी तो लाभ किसको मिला, किसको नहीं मिला यह तो वक्त बताएगा। ठीक बात है। लेकिन सबक दोनों के लिए है। ये ये जो चीजें आ रही हैं अब सिर्फ संसद के अंदर जो जो चीज होगा उससे नहीं होगा। हां।
बिल्कुल सही बात है। अपोजिशन भी अपोजिशन भी ये चाहेगा नहीं कि एंटी पेपर लीक बिल जब आ रहा है ऐसे वक्त में जब सरकार 2024 के कानून को और ज्यादा कड़ा बनाने जा रही है। सजा बढ़ाई गई है। जुर्माने की रकम बढ़ाई गई है। ऐसे में अपोजिशन नहीं चाहेगा कि वो इस बिल पर समर्थन करता हुआ नजर ना आए संसद के भीतर