धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले मोदी सरकार ने आखिरी दांव खेला था। सरकार चाहती थी कि धर्मेंद्र प्रधान से सिर्फ शिक्षा मंत्रालय वापस ले लिया जाए लेकिन वो कैबिनेट में बने रहे। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने इस ऑफर को ठुकरा दिया। सीजेपी अपनी एक ही मांग पर अड़ा था।
वो थी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। आखिरकार सरकार को यह बात मांगनी पड़ी और 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इंडिया टुडे से जुड़े हिमांशु मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी और सीजेपी के सोर्सेस के हवाले से बताया है कि शनिवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सीजेपी के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत की। बैठक में सरकार ने प्रस्ताव दिया कि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया जाए। लेकिन उनकी जगह नया शिक्षा मंत्री नियुक्त कर दिया जाए। लेकिन उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में बरकरार रखा जाए। बातचीत के दौरान सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि किसी मंत्री को हटाना या उसका विभाग बदलना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है।
हालांकि सीजेपी ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया और कहा कि आंदोलन तभी खत्म होगा जब धर्मेंद्र प्रधान पूरी तरह मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगे। सरकारी सूत्रों का दावा यह भी है कि सीजेपी की दो अन्य प्रमुख मांगे पहले ही मान ली गई यानी 20 जुलाई को स्वीकार कर ली गई थी। इसमें प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने और पेपर लीक और परीक्षाएं रद्द होने के बाद जान देने वाले बच्चे यानी जो नीट एस्पिरेंट थे उनके परिवार को मुआवजा देने की मांग यह दो मांगे पहले ही मान ली गई थी। सरकार के मुताबिक मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी और उम्मीद थी कि शिक्षा मंत्रालय में बदलाव का प्रस्ताव सीजेपी स्वीकार कर लेगा।
हालांकि कई दौर की बातचीत के बाद कोई सहमति नहीं बन सकी। प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम रहे और बढ़ते सार्वजनिक दबाव के बीच सरकार ने अंततः धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को स्वीकार किया। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया जिसके बाद सीजेपी ने दिल्ली में 36 दिनों से चल रहे अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की। इस्तीफे के दो दिन बाद यानी सोमवार को संसद पहुंचने पर एनडीए सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान का जोरदार स्वागत किया। भाजपा सांसद संसद परिसर के मकरद्वार पर उनका इंतजार करते रहे। धर्मेंद्र प्रधान के पहुंचने पर उन्हें संसद के भीतर तक ले जाया गया।
उनका अभिनंदन किया गया और समर्थन के प्रतीक के तौर पर उन्हें एक पारंपरिक टोपी भी पहनाई गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद 27 जुलाई को यानी सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की बात पर रिएक्शन देते हुए कहा, आई एम अ स्ट्रीट फाइटर नॉट एन एसी रूम एक्टिविस्ट। असल में सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तब कांग्रेस नेता जयराम रमेश उनसे सहानुभूति प्रकट करने पहुंचे थे। जयराम रमेश ने प्रधान से कहा कि इट हैपेंस। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत जवाब दिया नथिंग हैपेंस।
इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने उनसे कहा कि आई एम अ स्ट्रीट फाइटर नॉट एन एसी रूम एक्टिविस्ट। अब मानसून सत्र के शुरुआती छ दिन हंगामे की भेंट चढ़ने के बाद 28 जुलाई यानी आज जब हम ये वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा होने की संभावना है। नीट पेपर लीक विवाद और उसके बाद देशव्यापी छात्र आंदोलन के बीच लाए गए इस विधेयक में परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामलों में सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव है। संशोधन के तहत अधिकतम जेल की जो सजा है वो 5 साल से बढ़ाकर 10 साल की जाएगी और जो जुर्माना है अभी तक ₹50 लाख था उसको और बढ़ाया जाएगा।
1 करोड़ के आसपास करने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जो है वह सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को बढ़ाना और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
तो अब इस बिल पर चर्चा होगी और खबर यह भी आई थी कि सभी दल के लोग इसे समर्थन देने के लिए राजी हैं।