शासक या शासन से ज्यादा जनमानस जनता के दिल तक संदेश पहुंचाता है और कोई भी सरकार हो कोई भी शासन हो वो जनता की सुनते हैं चाहे मेरी ना सुने या आंदोलन जो करते हैं उनकी ना भी सुने तो यह जो उनका तजुर्बा था एक एक्सपेरिमेंट था उसे फिर सफल होते देखा मैंने इससे पहले पांच छ सालों में लद्दाख के स्तर पर हम इस प्रयोग का गांधी जी के इस प्रयोग का उपयोग करते उस पे अभ्यास करते आए हैं और उसे बहुत उपयुक्त बहुत प्रासंगिक देखा।
मगर मुझे देश के स्तर पर नहीं पता था और इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह आज भी देश के स्तर पर 100 साल बाद भी और शायद 100 साल या हजार साल बाद भी प्रसंगिक रहेगा। इसीलिए मैं भारत की जनता और विश्व की जनता से यही कहूंगा कि वो बापू के दिखाए हुए शांति के रास्ते पे ही अपनी व्यथा अपनी फरियाद सुनाएं और उसका हल जरूर होता है। देर से होता है मगर अंधेर नहीं होता है यह हमने देखा। एक बार में आप सफल हो जरूरी नहीं है। मगर अधिकतर आप सफल होते हैं। अगर इस रास्ते पे चलते हुए खुद को पीड़ा दें।
खुद के शरीर पे पीड़ा लें और किसी दूसरे को पीड़ा ना लें तो वो किसी भी कठोर से कठोर दिल को भी पिघला सकता है। यह हमने फिर देखा है। मैं बधाई देना चाहता हूं इस देश की युवा पीढ़ी को। इस देश के जनसाधारण और सभी नागरिकों को बड़े बूढ़े छोटे बड़े और जो आयोजक युवा थे जिन्होंने इस आंदोलन को बहुत ही शांतिपूर्ण तरीकों से आगे लिया उन सबको बधाई देना चाहता हूं। हमें यह समझना होगा कि यह अगर हल कुछ हुआ है, कुछ उपलब्धि हुई है तो वह हमारे बाजुओं की ताकत से या हमारे लाठियों या पत्थर से नहीं हुआ है। यह हमारे शांति की अपील से हुआ है। खुद पर जो हमने पीड़ा ली उससे हुआ है। बल्कि जो लाठियां और पत्थर हैं उनसे तो बात और बिगड़ने का डर था।
बहुत डर था। जिसके कारण मुझे यह शांतिपूर्ण पथ को समय से पहले ही रोकना भी पड़ा क्योंकि हम सब शांतिपूर्ण रहे यही मैं चाहता था चाहता रहूंगा और यही संदेश दूंगा कि यह प्रयोग बहुत ही सफल प्रयोग है। आज के भारत में भी कल के भारत और विश्व में भी इसी पथ पे हम चलना चाहेंगे और देश को भी यही संदेश देंगे। इसीलिए हम यहां पर प्रणाम करने उन्हें याद करने आए हैं। सर पूरा जो करनी रही। सबसे बड़ा इसमें अध्याय रहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ।
आपको क्या लगता है इस्तीफे के बाद अब ये सिस्टम में वो सुधार जो जरूरी थे वो हो जाएंगे। इस्तीफे पर क्या कहना है? मुझे पूरी उम्मीद है। वरना इस्तीफे का कोई मतलब नहीं है। इस्तीफा एक शुरुआत है। इसके बाद कुबूल होने के बाद इसका इलाज हो तो हमारा देश एक बेहतर देश बनेगा। जो कि मेरे ख्याल से शुरू हो रहा है। अभी इस पे चर्चा चल रही है और मुझे उम्मीद है एक बहुत ही सकारात्मक चर्चा के बाद देश के लिए जो भी उपयुक्त हो उसे अपनाया जाएगा और प्यार मोहब्बत से हम एक बेहतरीन प्रणाली को अपना पाएंगे।
आज बिल भी लाया जा रहा है सर। सर पार्लियामेंट में बिल भी लाया जा रहा है। बहुत अच्छी बात है। अच्छी बात है। उस पे चर्चा हो और चर्चा के बाद जो भी उपयुक्त हो अच्छी तरह चर्चा करके उसे अपनाया जाए। एक और मुद्दा है बीजेपी ने यह कहा है लगातार एक्शन हो रहा है। सर सर सर सर सीजेपी यह कह रही है कि जो एक्शन हो रहा है पुलिस ने और सरकार ने वादा किया था कुछ एक्शन नहीं होगा लेकिन एक्शन हो रहा है आज 5:00 बजे उम्मीद है मुझे उम्मीद है कि वादे निभाए जाएंगे जो शांतिपूर्ण शांतिपूर्ण जो प्रदर्शन कर रहे हैं उन पर कोई एक्शन नहीं होगा। अगर शरारती तत्व हो जो साफ शरारत के लिए कर रहे हो तो हम यह नहीं कह सकते हैं कि कहीं भी कुछ ना हो और कुछ भी हो मगर यह बहुत साफ करना चाहूंगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हमारा संवैधानिक अधिकार है उसको आदर किया जाए बाकी न्याय नाकाम 20 जुलाई को जो हुआ सर विपक्ष यह कह रहा है गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए जो गोली चलाई गई है पैेट गन का इस्तेमाल हुआ विपक्ष भी यही कह रहा है सर जहां भी कुछ भी होता है।
लोकतंत्र में हर एक नेता हर एक मंत्री जवाबदेह तो होते ही हैं और जवाब हो तो क्यों ना दें ये होनी चाहिए मैं यह कहूंगा जहां भी जनता सवाल करे उसका जवाब हो जवाबदेही की जगह हो और वो सांसद और विधानसभाएं हैं मैं ज्यादा गांधी जी के इस पवित्र स्थल पर ज्यादा विवादों में नहीं फंसना चाहूंगा आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद पीएम से माफी की मांग कांग्रेस पार्टी कर रही है सर बहुत उत्साहित है।
सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं कई लोग। अच्छा कुछ देश में हुआ तो उसको खुशी मनाएं। मगर विजय में भी विनम्रता हो। ऐसे ना करें कि किसी के दिल को दुखे। तो इसलिए मैं यही चाहूंगा कि बड़े दिल के साथ और प्यार और मोहब्बत के साथ आगे बढ़े। बहुत-बहुत आप सभी का धन्यवाद जो आप यह संदेश आगे ले जा रहे हैं। बहुत-ब बड़े दिल के साथ आगे बढ़े। कह रहे हैं सोनम वांगचुक जो अस्पताल से छुट्टी मिलते ही सीधे राजघाट पहुंचे जो परिवर्तन हुआ