देश में पेपर लीक पर सख्ती का सबसे बड़ा कदम उठने जा रहा है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर अब सरकार आर-पार के मूड में दिख रही है। सोमवार को संसद में पेपर लीक संशोधन बिल पेश होने वाला है और इस बार नियम सिर्फ सख्त नहीं बल्कि बेहद करे बनाए गए हैं। कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और अब संसद में इस पर चर्चा के बाद इसे कानून का रूप दिया जा सकता है।
इस बिल का मकसद साफ है। पेपर लीक माफियाओं पर पूरी तरह लगाम लगाना क्योंकि बीते समय में कई बड़ी परीक्षाओं में लीक के मामले ने सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए। छात्रों के गुस्से और सड़कों पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार अब एक्शन मोड में है और इसी बीच प्रधानमंत्री का भी सख्त संदेश सामने आया। उन्होंने साफ कहा कि पेपर लीक कोई मामूली अपराध नहीं बल्कि यह लाखों युवाओं के सपनों पर हमला है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब आपको बताते हैं इस नए संशोधन बिल में आखिर क्या-क्या बदलेगा। सबसे बड़ा बदलाव सजा और जुर्माने को लेकर किया गया है और अब पेपर लीक जैसे अपराध में शामिल लोगों को 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है।
जबकि पहले यह सजा 3 से 5 साल थी। जुर्माना भी कई गुना बढ़ाया गया है। आम आरोपी के लिए यह अब ₹50 लाख तक हो सकता है। वहीं अगर कोई संगठित गिरोह इस अपराध में शामिल पाया जाता है तो उस पर ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
अगर उनकी मिलीभगत पाई गई तो उन पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना और कई साल तक परीक्षा से बैन लगाया जा सकता है। यानी अब सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क पर कारवाई होगी। इस बिल में सिर्फ सजा ही नहीं बल्कि जांच और न्याय की प्रक्रिया को भी तेज करने की कोशिश की गई है।
अब किसी भी पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद 2 महीने के भीतर जांच पूरी करना जरूरी होगा। जांच एजेंसियों में पुलिस के साथ-साथ सीबीआई और एसटीएफ को भी शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार स्पेशल टास्क फोर्स भी बना सकती है। इसके अलावा सबसे अहम बात फास्ट ट्रैक कोर्ट यानी अब ऐसे मामलों की सुनवाई लंबी नहीं खींचेगी। रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर फैसला आना जरूरी होगा। खास पब्लिक प्रोसकटर नियुक्त किए जाएंगे ताकि केस मजबूत तरीके से लड़ा जा सके।
इतना ही नहीं अगर किसी को फैसले के खिलाफ अपील करनी है तो उसके लिए भी समय सीमा तय की गई है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में 30 से 90 दिनों के भीतर अपील दाखिल करनी और वहां भी 3 महीने के अंदर फैसला देने की कोशिश होगी। अब यह सवाल यह है कि क्या इस कानून से वाकई पेपर लीक पर लगाम लगेगी?
तो जानकारों का मानना है कि सख्त सजा और भारी जुर्माना निश्चित तौर पर डर पैदा करेगा। लेकिन इसके साथ सिस्टम की पारदर्शिता और टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है।
क्योंकि जब तक परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी तब तक खतरा बना रहेगा। फिर भी यह बिल एक बड़ा संदेश देता है कि अब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने सख्त इरादा दिखाया है। अब नजर इस बात पर होगी कि इसे जमीन पर कितनी मजबूती से लागू किया जाता है।