अमिताभ बच्चन के शुरुआती संघर्ष के दिनों में अभिनेता-निर्माता महमूद उन लोगों में थे जिन्होंने उनका खुलकर साथ दिया। कई पुराने इंटरव्यू और फिल्मी लेखों के अनुसार, महमूद ने न सिर्फ अमिताभ को अपनी फिल्म “बॉम्बे टू गोवा” (1972) में मुख्य भूमिका दिलाई, बल्कि कुछ समय तक उन्हें अपने घर में भी ठहरने की सुविधा दी।
उस फिल्म की सफलता ने अमिताभ के करियर को नई दिशा दी।बाद में जब अमिताभ सुपरस्टार बन गए, तो महमूद ने कुछ इंटरव्यू में शिकायत जताई कि सफलता मिलने के बाद अमिताभ ने उनसे पहले जैसा संपर्क नहीं रखा। इसी नाराज़गी में उन्होंने उन्हें “एहसान फरामोश” तक कह दिया था।
हालांकि, अमिताभ बच्चन ने सार्वजनिक रूप से कभी महमूद के प्रति अनादर की बात नहीं कही और हमेशा उनके योगदान का सम्मान किया।फिल्मी जानकारों का मानना है कि यह विवाद ज़्यादातर आपसी अपेक्षाओं और दूरियों का परिणाम था, न कि किसी बड़े सार्वजनिक टकराव का।
समय के साथ दोनों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखा और यह मुद्दा भी धीरे-धीरे शांत हो गया।इसलिए “एहसान फरामोश” वाला बयान महमूद की उस समय की नाराज़गी को दर्शाता है, लेकिन इसे दोनों के रिश्ते की पूरी कहानी नहीं माना जा सकता।