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क्यों मरते दम तक इंदिरा के घर नहीं गए फिरोज गांधी?

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दुनिया में ऐसा कौन शख्स होगा जिसका ससुर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का पहला प्रधानमंत्री हो और उसकी पत्नी और उसका बेटा भी उसी महान देश का प्रधानमंत्री बना हो लेकिन उसकी जिंदगी जितने गुमनामी में बीती उससे ज्यादा उसकी मौत गुमनामी में रही है आज अनसुनी कहानियां में चर्चा उसे शख्स की जिसने वर्तमान गांधी परिवार की न्यू राखी जिसने देश के पहले प्रधानमंत्री की बेटी से प्यार किया और उसे प्यार की कीमत भी चुका लेकिन उसी प्यार में उसे शख्स को दुनिया के महानतम स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी का सर नेम दिला दिया आज हम सुनी कहानियां में बात भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति राजीव गांधी के पिता राहुल और प्रियंका गांधी के दादा फिरोज जहांगीर गांधी की फिरोज़ के बारे में एक बार महात्मा गांधी ने कहा था की अगर फिरोज़ जैसे साथ लड़के हो गए तो मैं सात दिनों में भारत को स्वराज दिला सकता हूं चलिए आपको फिरोज गांधी की अनसुनी कहानियां बताते हैं 12 सितंबर 1912 को जन्मे फिरोज गांधी इतने बुरे और लाल द की पहली नजर में लगता था की किसी अंग्रेज घर का लड़का है इंदिरा गांधी से फिरोज़ का प्यार किसी फिल्मी पर्दे की कहानी से कम नहीं है जहां खुद इंदिरा गांधी की मां कमला नेहरू ने फिरोज को पसंद कर लिया था दरअसल इलाहाबाद की कड़ी धूप में कमला नेहरू अपने साथियों के साथ आंदोलन के लिए जा रही थी इस दौरान बगल के चार तिवारी पर बैठे

फिरोज़ और उनके साथियों ने सत्याग्रहियों का मजा लेना शुरू कर दिया वही भीषण गर्मी की वजह से कमला नेहरू बेहोश हो गई फिरोज़ के कुछ दोस्त भाग निकले लेकिन फिर उसने कमला नेहरू को उठाकर एक घनी पिंड की छांव में लेताया और भाग कर पानी लाया पानी की छिनती मरने के बाद कमला नेहरू को होश आया तूने आनंद भवन तक छोड़ा कमला नेहरू फिरोज़ गांधी से प्रभावित हो गई उन्होंने दूसरे दिन उन्हें और उनके साथियों को आनंद भवन बुलाया फिर कमला नेहरू के आदेश के बाद फिर उसने कांग्रेस कार्यालय जाकर स्वयं सेवकों के रूप में अपना नाम लिखा लिया यहीं से युवा फिरोज कमला नेहरू की मुहिम के प्रति समर्पित हो गए और कांग्रेस के साथ देश सेवा की मुहिम जुट गए यही वो दौर था जब फिरोज गांधी की मुलाकात इंदिरा गांधी से हुई धीरे-धीरे मुलाकातों का दौर बढ़ाने लगा दोस्ती हुई दोस्ती प्यार में बदली आनंद भवन में फिरोज गांधी का आना चना लगा रहता था 1935 की बात है कमला नेहरू काफी बीमार हो गई तो उन्हें इलाज के लिए जर्मनी ले जया गया तब इंदिरा शांति निकेतन में पद्धति थी लेकिन उन्होंने पढ़ाई छोड़कर मां की सेवा करने के लिए जाने का फैसला लिया कमला नेहरू और इंदिरा के विदेश चले जाने के बाद फिर उसे बहुत चिंतित और उदास रहने लगे उन्होंने अपनी मौसी से कहा की वो पढ़ने के लिए विदेश जाना चाहते हैं फिरोज की मौसी ने तुरंत उनकी बात मां ली क्योंकि इलाहाबाद में रहकर फिरोज़ पढ़ाई लिखाई के अलावा राजनीति में ज्यादा व्यस्त रहते द ऐसे में मौसी ने फिर उसकी बात मां ली और पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेज दिया फिरोज लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ने के लिए चले गए जहां से वह हर छुट्टी के दिन जर्मनी पहुंच जाते और पूरी लगन से कमलाची की सेवा करते यही वो वक्त था जब इंदिरा को लगने लगा की फिरोज़ जैसा उन्हें भला कोई और मिल सकता है क्या क्योंकि विदेश में फिरोज़ के रूप में उन्हें एक सहारा मिल गया जर्मनी में कमला नेहरू उठ गए तो 1936 में पंडित नेहरू ने उन्हें सुरक्षित लैंड में लोसन के पास एक दूसरे सेनेटोरियम में ले गए यही ला पलस स्कूल में इंदिरा गांधी का एडमिशन कर दिया गया जिससे मां की सेवा के साथ पढ़ाई भी चलती रही लेकिन अचानक 28 फरवरी 1936 को उनका निधन हो गया

लुसान में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया जब कमला नेहरू का निधन हुआ तो पंडित जवाहरलाल नेहरू इंदिरा और फिरोज तीनों ही उनके पास द पत्नी के निधन के बाद जवाहरलाल नेहरू ने भारत आना उचित समझा और इंदिरा ब्रिस्टल के बैडमिंटन स्कूल में मैट्रिक की पढ़ाई के लिए चली गई ब्रिस्टल के बाद उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया इंदिरा को पहली की तरफ फिर उसकी दोस्ती और स्नेह मिलता रहा दरअसल इंदिरा के ऑक्सफोर्ड जाने की असली वजह फिरोज गांधी द पिछली बार फिरोज भारत लौटने से पहले पेरिस इंदिरा से मिलने के लिए गए द जहां मार्च की सीडीओ पर इंदिरा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो इंद्र ने फौरन हकीकत दिया ऑक्सफोर्ड लौटने पर जीवन और पढ़ लिखाई सब मजे से चल रहा था लेकिन 1940 में इंदिरा ब्लू ऋषि बीमारी से पीड़ित हो गई डॉक्टर ने सलाह दिया की उन्हें लैंड की अब वह हवा में जाना चाहिए उधर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इंग्लैंड में जर्मन बमबारी से स्थिति खराब होने लगी अंत में सपने सलाह दी की इंदिरा का ऑक्सफोर्ड लौटना ठीक नहीं होगा तो उन्होंने 1941 में भारत लौटने का फैसला लिया इंदिरा का भारत लौटना काफी खतरनाक था क्योंकि जर्मन पनडुब्बियों मित्र देशों के कई पनडुब्बियों को डब चुकी थी लेकिन फिर उसने तमाम तरह की कोशिश की और दौड़ भाग कर एक फौजी जहाज में इंदिरा को सीट तिलकर भारत भेज दिया है जून 1941 में इंदिरा भारत लौटती और जेल में बंद पिता से मिलने पहुंची तथा उन्होंने पहली बार अपने पिता से कहा की वो फिरोज़ से शादी करना चाहती है इंदिरा की बात सुनकर पंडित नेहरू खुश नहीं हुए और उन्होंने कहा अभी पहले अपनी सेहत ठीक करो और हां इत्मीनान से कुछ और लोगों को जानने समझने की कोशिश करो पंडित नेहरू ने लाख समझने की कोशिश की लेकिन इंदिरा ने भी मां बना लिया था जो महात्मा गांधी को पंडित नेहरू की नाराजगी के बारे में पता चला तो उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को समझाया महात्मा गांधी ने फिर उसे गांधी को गोद ले लिया और अपना सर नेम दे दिया जिसके बाद नेहरू शादी के लिए माना नहीं कर पाए आखिरकार 26 मार्च 1942 को फिरोज और इंदिरा की शादी हो गई हालांकि फिर रोज चाहती थी की शादी बेहद सादगी के साथ केवल परिवारजन के बीच बिना किसी शोर शराबी में की जाए लेकिन गांधी जी का आदेश था की बहुत नहीं लेकिन शादी में थोड़ी धूमधाम तो जरूर होनी चाहिए शादी के बाद इंदिरा और फिरोज हनीमून के लिए कश्मीर चले गए जहां पहुंचकर तो उन्होंने पंडित नेहरू को तार भेजा और उसमें लिखा था काश हम आपको यहां से ठंडी हवाओं के झोंके भेज पाते नेहरू ने जवाब दिया धन्यवाद लेकिन तुम्हारे पास आम कहां है दरअसल इंदिरा को आम बेहद पसंद द इसी वजह से पंडित नेहरू ने चढ़ाते हुए जवाब दिया कश्मीर से इलाहाबाद आने पर फिरोज़ और इंदिरा ने अपने प्यारे से घर में प्यार और अरमानों के बीच नई जिंदगी की शुरुआत की दोनों बेहद खुश द लेकिन आजादी की लड़ाई जोर पकड़ने लगी 7 अगस्त 1942 को मुंबई में बैठक हुई जिसमें पंडित जी के अलावा इंदिरा और फिरोज भी शामिल हुई पंडित नेहरू की गिरफ्तारी की बात फिरोज ने इंदिरा को इलाहाबाद भेज दिया और खुद लखनऊ चले गए वहीं कुछ दिन बाद इलाहाबाद में तिरंगा यात्रा के दौरान पुलिस ने लाठी चार्ज किया जिसमें इंदिरा की पीठ और हाथों पर लाठिया लगी फिर उसको जब जानकारी मिली तो वो तुरंत लखनऊ से इलाहाबाद पहुंच गए और इंदिरा से मुलाकात की वही एक रैली के दौरान अंग्रेज पुलिस ने सभा स्थल को चारों तरफ से घर लिया लेकिन एंट्रेस बोलती नहीं इस दौरान एक पुलिस वाले ने इंदिरा पर बंदूक तन दिया जैसे ही फिरोज़ की नजर पड़ी तो वो भीड़ को चीरते हुए इंद्रप्रस्थानी बंदूक के सामने खड़े हो गए जबकि वो भूल गए की उन्हें भूमिगत रहकर कार्य करना था अंत में पुलिस ने इंदिरा और फिरोज को गिरफ्तार कर लिया शादी के 6 महीने भी नहीं हुए द की पति पत्नी को जेल में बंद कर दिया गया शादी को साल भर भी नहीं बिता था की इंदिरा और फिरोज में मतभेद शुरू हो गए इंदिरा गांधी ने फिर उसके साथ रहने की बजाय अपने पिता पंडित नेहरू के साथ रहना शुरू कर दिया इंदिरा दिल्ली में रहती थी जबकि फिरोज लखनऊ में रहते द शायद इसी वजह से फिरोज़ का नाम कई महिलाओं के साथ जोड़ा जाने लगा इस बारे में पत्रकार रशीद भाई का कहना था इंदिरा दिल्ली में रहती थी जबकि फिरोज़ लखनऊ में रहते द इसी वजह से उनमें एकाकीपन रहा होगा दोनों के बीच एक आदर्श पति-पत्नी का संबंध कभी नहीं बन पाया फिरोज स्मार्ट द बोलते अच्छा द सेंस ऑफ हमार बहुत अच्छा था इसलिए महिलाएं उनकी तरफ खींची चली जाती थी नेशनल हेराल्ड में कम करने वाली एक लड़की के साथ उनके संबंधों की अफवाह उड़ी थी इसके बाद उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ मुस्लिम मंत्री की बेटी के साथ भी फिरोज गांधी का नाम जुड़ा जिससे नेहरू विचलित हो गए और उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रफ़ी अहमद किदवई को लखनऊ भेजा किदवई ने फिरोज गांधी और मंत्री की बेटी को समझने की भरपूर कोशिश की लेकिन फिरोज नहीं मणि दोस्तों यह तक जाता है की उसे वक्त फिरोज़ गांधी और मंत्री की बेटी में प्यार इतना प्रगाढ़ हो गया था

की फिरोज़ इंदिरा गांधी से अलग होकर उसे लड़की से शादी करने को भी तैयार हो गए द लेकिन बाद में मामला सुलझा लिया गया वक्त के साथ इंदिरा गांधी और फिरोज में दूरियां बढ़ती चली गेली ये हो गया की दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते द पत्रकार इंद्र मल्होत्रा की माने तो 1959 में जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गांधी ने केरल की कम्युनिस्ट सरकार को गैर संवैधानिक तरीके से गिरा दिया बीवी में जबरदस्त झगड़ा हुआ इंदर मल्होत्रा कहते हैं की उसी शान फिरोज गांधी मुझसे मिले और कहा इससे पहले की लोग तुम्हें बताएं मैं तुम्हें बताता हूं की हमारे बीच तेज झगड़ा हुआ और आज के बाद में कभी प्रधानमंत्री के घर पर नहीं जाऊंगा और उसे दिन के बाद मृत्यु तक फिरोज गांधी इंदिरा के सरकारी घर नहीं गए इंदिरा से विवाद के बाद फिरोज गांधी राजनीतिक तौर पर और आक्रामक हो गए अपने भाषणों से फिरोज़ सबका ध्यान अपनी ओर खींचने लगी है मुंद्रा कांड पर फिर उसने अपने ससुर जवाहर लाल नेहरू की सरकार पर इतना जोरदार हमला बोला की नेहरू के करीब तत्कालीन वित्त मंत्री ट कृष्णम चारी को अपने पद से इस्तीफा देना पद गया इस दौरान सियासी गलियारों में यह चर्चा होने लगी की कांग्रेस में रहते हुए भी फिरोज़ विपक्ष के और ऑफिशल नेता हैं फिरोज के नजदीक रहे ओंकार नाथ भार्गव फिरोज गांधी के बारे में कहते हैं मुझे अच्छी तरह याद है की फिरोज़ के निधन के बाद मैं संसद भवन गया था वहां के सेंट्रल हॉल में एक लॉबी थी जो फिरोज गांधी कॉर्नर कहलाता था वहां फिरोज गांधी और दूसरे संसद बैठकर बहस की रणनीति बनाते द बताओ संसद फिरोज गांधी बेहद लोग प्रिया द लोग उनके भाषणों को सुनना चाहते द क्योंकि फिर उसको हर चीज की गहराई में जाना पसंद था 192 में वो रायबरेली से बड़े अंतर से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंचे द वहीं 1997 के चुनाव में 21 सब बेहद मशहूर है जिसे पता चलता है की फिरोज गांधी मां के धनी व्यक्ति द दरअसल 1997 के चुनाव के दौरान फिर उसे गांधी को पता चला की उनके पुराने प्रतिद्वंद्वी नंदकिशोर नई के पास चुनाव में जमानत भरने के लिए पैसे नहीं है तो उन्होंने नंदकिशोर को बुलाकर अपनी चिप से जमानत के पैसे दिए ओंकार भर्गो कहते हैं वो हमारे संसद तो द ही सोनी पर सुहाग यह था की उनका संबंध जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी से था अपने क्षेत्र में बराबर घूमते द कहीं लाइव चना खा लेते द कहीं चैट खाते द कहीं किसी की चारपाई पर जाकर बैठ जाते द बतौर पिता फिरोज गांधी ने अपने बेटे राजीव और संजय में वैज्ञानिक सोच पैदा करने में बड़ा योगदान निभाया वो अपने बेटे से मिलकर खिलौने को तोड़ने के लिए कहते और फिर जुड़ने के लिए कहते पत्र रशीद किदवई ने कहा फिरोज गांधी एक अलग कसम के बाप द उन्हें बच्चों को खिलौने देने में यकीन नहीं था अगर कोई उन्हें तो मैं खिलौने दे भी देता तो कहते की इन्हें तोड़कर फिर से छोड़ो राजीव और संजय दोनों का टेक्निकल माइंड था वो फिरोज गांधी के ही दिन थी संजय गांधी ने बाद में जो मारुति कर बनाने की पहल की है उसके पीछे कहीं ना कहीं फिरोज गांधी की भूमिका थी अपने हसमुख अंदाज़ से लोगों के मां में मुस्कान पैदा करने वाला एक जिंदादिली इंसान और जनता के प्रति समर्पित इंसान फिरोज गांधी अपने अंतिम वक्त में खुद अपनी कर चला कर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर खोसला अभी उन्हें देख ही रहे द की वह बेहोश हो गए आज सितंबर 1960 को जब

इंदिरा गांधी उनके बगल में मौजूद थी तब उन्होंने कुछ देर के लिए अपनी आंखें खोल ली थी पूरी रात इंद्र अपने पति के बगल में बिना कुछ खाए पिए बैठी रही आंख खुलने पर फिरोज़ ने उनसे कुछ खाने के लिए कहा लेकिन इंसान ने माना कर दिया और फिरोज फिर बेहोश हो गए इस बार आंखें बंद हुई तो कभी नहीं खुली सुबह 7:43 पर उन्होंने आखिरी सांस ली इंदिरा फिर उसके पार्थिव शरीर के साथ तीन मूर्ति भवन पहुंची इंदिरा से झगड़ा की बात पहली बार फिरोज़ प्रधानमंत्री के घर पहुंचे द लेकिन वह ना कुछ देख सकते द ना वह बोल सकते द ना कुछ कह सकते द क्योंकि इंदिरा के घर फिर उसने ही बल्कि उनका पार्थिव शरीर पहुंचा था इंद्र ने तीन मूर्ति भवन के निचली मंजिल से सारे फर्नीचर हवा दिए और गलियों पर सफेद चादर भिजवा दी संजय और राजीव पलटी मारकर सफेद चादर पर बैठे हुए द नेहरू अपने कमरे में अकेले बैठे हुए द उनका चेहरा पीला पड़ा हुआ था धर्म ग्रंथ के पाठ के बीच नेहरू फिरोज़ के पार्थिव शरीर को देखने पहुंचे तो वहां मौजूद भीड़ देखकर वे अचंभित हो गए और उनके मुंह से निकाला मुझे नहीं पता था की फिरोज़ लोगों के बीच जितने लोकप्रिय हैं पति का पार्थिव शरीर सामने पड़ा था इंदिरा खुद को नियंत्रित दिखाने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर से बुरी तरह हिली हुई थी और आंखों से आंसू गिरते जा रहे द 9 सितंबर को तिरंगे में लिप फिर उसके पार्थिव शरीर के साथ इंदिरा राजीव संजय और फिर उसकी बहन तहमीना एक ट्रक के साथ निगम बहुत घाट की तरफ बढ़े 16 साल के राज्यों ने पिता फिरोज को मुखाग्नि दी पारसी परिवार में जन्मे फिरोज़ का हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया दरअसल जब फिरोज को दिल का दौरा पड़ा था तब उन्होंने अपने दोस्तों से कह दिया था की वो हिंदू तरीके से अंतेष्टि करवाना पसंद करेंगे क्योंकि उन्हें अंतिम संस्कार का पार से तरीका पसंद नहीं था

2 दिन बाद फिरोज़ के अस्थि कलश को लेकर एक ट्रेन से इलाहाबाद ले जया गया जहां एक भाग को संगम में प्रवाहित कर दिया गया इस दौरान नेहरू जी स्वयं मौजूद द जबकि बचे हुए अस्थि को इलाहाबाद के पारसी के प्रकार में दफनातीय गया फिरोज गांधी के अंतिम संस्कार के दौरान इंदिरा सफेद साड़ी पहनी हुई थी क्योंकि भारत में सफेद रंग को शो कर रंग माना जाता है फिर उसके निधन के कई सालों बाद तक इंदिरा सफेद रंग के कपड़े पहनी रही इंद्र ने इस बारे में कहा था जब फिरोज ऊपर गए तो मेरी जिंदगी में सारे रंग भी मेरा साथ छोड़ गए जिस मौत ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया वो मेरे पति फिरोज की मौत थी मैंने अपनी आंखों से अपने दादा माता और पिता को मरते देखा लेकिन फिरोज की मौत इतनी अचानक हुई की उसने मुझे पूरी तरह से हिला दिया मैं शायद फिरोज को पसंद नहीं करती थी लेकिन मैं उन्हें प्यार करती थी फिरोज गांधी के अनसुनी कहानियों की इस वीडियो में इतना ही आपको यह वीडियो कैसा लगा कमेंट कर जरूर बताइएगा [संगीत] [संगीत] नमस्कार मैं हूं मानक गुप्ता अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें और हां हमें सब्सक्राइब और फॉलो करना ना भूल ताकि आप देश और दुनिया की कोई खबर मिस ना करें तो जुड़े रहिए हमारे साथ और देखते रहिए

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