पिता की मौत नहीं रोई एक्ट्रेस बेटी। आंख से नहीं गिरा एक भी आंसू। अंतिम संस्कार में जाने से भी किया मना। पिता के निधन का नहीं मनाया गम। पूछा सवाल तो बोली मैं शो क्यों मनाऊं? हमारी यह बातें सुन आप भी हैरान हो गए होंगे और जरूर जानना चाह रहे होंगे कि आखिर वो कौन [संगीत] सी एक्ट्रेस है जिसे अपने पिता की मौत का ना सदमा लगा ना उसकी आंख से आंसू बहे| यहां तक कि पिता के अंतिम संस्कार में जाना भी उस एक्ट्रेस [संगीत] ने जरूरी नहीं समझा। आपको बता दें कि वह एक्ट्रेस कोई और नहीं बल्कि रेखा [संगीत] है। जी हां, रेखा। बॉलीवुड की उमराओ जान और
एवर ग्रीन ब्यूटी रेखा जिन्होंने सिनेमा के पहले पर्दे पर राज किया लेकिन उनकी [संगीत] असल जिंदगी की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है। रेखा की जिंदगी से जुड़े कई किस्से ऐसे हैं जो गाहे बगाहे चर्चा में छा जाते हैं। इन्हीं में से एक किस्सा है रेखा का जानबूझकर अपने पिता के अंतिम संस्कार [संगीत] में ना जाना। पिता की मौत का शोक भी नहीं मनाना। जब रेखा को अपने पिता के निधन की खबर मिली तब उनकी आंखों [संगीत] से एक आंसू भी नहीं गिरा। दरअसल रेखा के इस फैसले के पीछे की वजह [संगीत] थी वो तिरस्कार जो उन्हें अपने पिता जैेमिनी गणेशन से मिला था।
यह तो सभी जानते हैं कि रेखा के पिता तमिल सुपरस्टार रहे जेमिनी गणेशन थे। लेकिन जैेमिनी गणेशन ने रेखा को अपनी बेटी और उनकी मां पुष्पावली को अपनी पत्नी के तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया था। यही वजह थी कि रेखा के अपने पिता जैेमिनी गणेशन के साथ रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे। एक इंटरव्यू में खुद रेखा ने स्वीकार किया था कि उन्हें पिता शब्द का [संगीत] अर्थ तक नहीं पता था क्योंकि उन्होंने अपना पूरा बचपन अपने पिता के बिना गुजारा। वहीं [संगीत] जब 22 मार्च 2005 को रेखा के पिता जैमिनी गणेशन का निधन हुआ तब रेखा [संगीत] पिता के आखिरी दर्शन करने तक नहीं गई थी।
दरअसल उस वक्त रेखा हिमाचल प्रदेश [संगीत] के कुल्लू मनाली में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रही थी। जब पिता के निधन की दुखद खबर उन्हें मिली तब उन्हें सदमा [संगीत] नहीं लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेखा की आंखों से दुख का एक आंसू तक नहीं निकला। वहीं बाद में जब एक इंटरव्यू में रेखा से पिता के [संगीत] अंतिम संस्कार में ना जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया कि उनके पास पिता की मौत का शोक मनाने [संगीत] की कोई वजह नहीं है। रेखा ने कहा कि मैं उनके लिए शोक क्यों मनाऊं? जबकि वह हमेशा मेरे एक हिस्से के रूप में मौजूद हैं। मैं शोक क्यों मनाऊं? जब मैं उनके जींस, उनकी सीख, उनकी स्मृद्ध, जिंदगी और सिर्फ [संगीत] उनके अस्तित्व के लिए आभारी हूं। शोक किस बात का? मुझे खुशी है कि मुझे उनके साथ कोई अप्रिय पल साझा नहीं करने पड़े। मेरे लिए वह हमेशा मेरी कल्पना में मौजूद रहे और वह हकीकत से कहीं ज्यादा खूबसूरत था। [संगीत] मैं जो कुछ भी पसंद करती हूं वह सांसारिक तौर से कहीं ज्यादा आगे है। बाद में सिममी ग्रेवाल के शो में भी रेखा
ने पिता के साथ अपने रिश्ते को लेकर बात की थी। रेखा ने सिममी के शो में कहा था जब आपने कभी किसी चीज का अनुभव ही नहीं किया हो तो आपको उसकी कमी भी महसूस नहीं होती। मैं बहुत छोटी थी जब वह चले गए। मुझे पिता शब्द का मतलब [संगीत] ही नहीं पता था। बता दें कि पिता को लेकर रेखा की जिंदगी का सबसे [संगीत] भावुक पल साल 1994 में आया था। जब 1994 के 41वें फिल्म फेयर अवार्ड्स में जैेमिनी [संगीत] गणेशन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा था और यह अवार्ड उन्हें देने के लिए मंच पर उनकी बेटी [संगीत] रेखा को बुलाया गया था। रेखा जब मंच पर पहुंची तब उन्होंने सबसे पहले अपने पिता के पैर [संगीत] छुए। इसके बाद उन्होंने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सौंपा। तब जैमिनी गणेशन ने पहली बार रेखा को पब्लिकली माय डियर चाइल्ड फ्रॉम बॉम्बे कहकर पुकारा [संगीत] था। पिता के मुंह से यह लाइन सुनकर रेखा भावुक भी हो गई थी और उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का प्राउडेस्ट [संगीत] मोमेंट बताया था। ब्यूरो रिपोर्ट ई2