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सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, कर दी बड़ी मांग।

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और देखिए बड़ी खबर ये है कि सोनम वांगचुक की चिट्ठी सामने आई है। जेपी नड्डा जितेंद्र सिंह को सोनम वांगचुक ने वेदांता अस्पताल से चिट्ठी लिखी है। क्या कुछ है इस चिट्ठी में वो भी आपको बताएंगे। लेकिन सरकार के लोगों ने पहले उनसे मुलाकात की और अब सोनम वांगचुक ने इन तमाम इंसिडेंट्स के बाद सरकार को चिट्ठी लिखी है।

लगातार कांग्रेस का धरना प्रदर्शन पूरे देश में जारी है। सीजेपी लगातार जंतरमंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहा है और उस चिट्ठी की तस्वीरें हम आपको दिखा रहे। उसकी खास बातें भी आपको बताएंगे। लेकिन वोंगचुक ने जेपी नड्डा, देश के स्वास्थ्य मंत्री और पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को एक चिट्ठी लिखी।

ये दोनों मिनिस्टरर्स ने अस्पताल जाकर उनसे मुलाकात भी की थी। तो इस चिट्ठी में क्या कुछ लिखा गया है वो भी आपको दिखाएंगे। आपको समझाएंगे। लेकिन वश की तरफ से यह चिट्ठी साजनी की गई है जो उन्होंने सरकार को लिखी है और इस पूरे अनशन के दौरान यह पहला ऐसा मौका होगा जब अस्पताल जाकर सरकार के मंत्रियों ने सोनम वांगमचुक से मुलाकात की है। वो चिट्ठी यहां पर आ चुकी है। देखिए उस चिट्ठी को दिखाने की आपको कोशिश करते हैं और पढ़ के सुनाएंगे क्या कुछ लिखा है चिट्ठी में। सबसे पहले देखिए टू श्री जेपी नड्डा एंड श्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह जूनियर मिनिस्टर डियर नड्डा जी एंड डियर जितेंद्र सिंह जी थैंक यू फॉर विजिटिंग मी मेरे पास आने के लिए आपका शुक्रिया आप बीती रात अस्पताल मुझसे मिलने आए योर अर्लियस्ट अपील दैट आई एंड माय फर्स्ट आपने मुझसे अपील की कि मैं अपना अनशन खत्म करूं ड्यूरिंग आवर डिस्कशन यू एश्यर्ड मी दैट द गवर्नमेंट वुड पॉजिटिवली कंसीडर द फॉलोइंग आपने मुझसे बातचीत के दौरान यह मुझको एश्योर किया है कि जो मांगे हैं हम उनको कंसीडर करेंगे। इसके अलावा क्या कुछ कहा गया है वो देखिए।

एडुकेट कंपनसेशन फॉर द फैमिलीज़ ऑफ स्टूडेंट्स हु कमिटेड सुसाइड फॉलोइंग द एग्जामिनेशन पेपर लीक। वो छात्र जो पेपर लीक के बाद सुसाइड किए हैं उनके लिए मुआवजे की बात कही गई थी। उसको आप कंसीडर करेंगे। इसके अलावा एक बार अगर संभव हो तो उसको रोकिएगा जरा। अ मीनिंगफुल डिस्कशन इन पार्लियामेंट टू इंश्योर अकाउंटेबिलिटी। दिनेश सबसे पहले यही जानना चाहूंगा मीटिंग की खास इस चिट्ठी की खास बातें क्या है? उस मीटिंग में क्या-क्या डिस्कस हुआ? और सबसे बड़ी बात कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र इस चिट्ठी में नहीं है।

इसके मायने क्या है? ऐसा ये पहले भी हुआ था जब सफरदर जंग हॉस्पिटल से उन्होंने अपनी बातों को जाहिर किया था। जिसमें वो क्या-क्या चाहते हैं ये जाहिर किया था और उसमें भी यह दिखाई नहीं दे रहा था कि क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बारे में वो डायरेक्टली कह रहे हैं क्या। लेकिन बाद में ये स्पष्ट किया गया कि उनका मंतव्य वो बेशक ना कह रहे हो लेकिन धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। अब यहां पर देखिए ये जो बातें कही जा रही हैं ये जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह जी को संबोधित करते हुए उन्होंने लेटर लिखा है और उन्होंने ये जो आपने बातें कही उसको रीटरेट कर रहा हूं मैं। दो महत्वपूर्ण बिंदु हैं। एडिक्वेट कंपनसेशन फॉर द फैमिलीज़ ऑफ़ स्टूडेंट्स हु कमिटेड सुसाइड फॉलोइंग द एग्जामिनेशन पेपर लीक। जिन लोगों के परिजनों ने यह देखा है कि उनके बच्चों ने सुसाइड कर लिया उनको एडिक्वेटली कंपनसेट किया जाए।

उनको मुआवजा मिले। पहला तो यह और दूसरा मीनिंगफुल डिस्कशन इन पार्लियामेंट टू इंश्योर अकाउंटेबिलिटी इंक्लूडिंग कंसीडरेशन ऑफ द रेिग्नेशन ऑफ ऑनरेबल एजुकेशन मिनिस्टर। यहां पर यह बात अपने आप में स्पष्ट करती है कि वो क्या चाहते हैं। क्या वो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से अलग हट गए हैं या नहीं हट गए? रेिग्नेशन ऑफ ऑनरेबल एजुकेशन मिनिस्टर वो ये दूसरे पॉइंट में स्पष्ट कर रहे हैं कि इसमें यह भी शामिल है अ मीनिंगफुल डिस्कशन इन पार्लियामेंट टू एनश्योर अकाउंटेबिलिटी इंक्लूडिंग कंसीडरेशन ऑफ रेिग्नेशन ऑफ ऑनरेबल एजुकेशन मिनिस्टर। ऐसी चर्चा संसद में होनी चाहिए जिससे अकाउंटेबिलिटी इंश्योर हो जिसमें यह भी शामिल हो सकता है एजुकेशन मिनिस्टर का इस्तीफा। अब जैसे राहुल गांधी जो कह रहे हैं, वह कह रहे हैं नॉन नेगोशिएबल है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्योंकि वह सिंबॉलिक फेस हैं। एजुकेशन मामले में जो गड़बड़ियां हुई हैं उसका इसलिए उनका इस्तीफा होना चाहिए। यहां पर कहा जा रहा है इंक्लूडिंग कंसीडरेशन ऑफ रेजिग्नेशन ऑफ़ ऑनरेबल एजुकेशन मिनिस्टर। यह भी उसमें शामिल है। यह कहा गया है। अब यहां पर जो दूसरी बात कही गई है, देयर फॉर आई रिस्पेक्टफुली रिक्वेस्ट इन अनइक्वीवोकल अशोरेंस फ्रॉम द गवर्नमेंट दैट नन ऑफ द यंग प्रोटेस्टर्स विल फेस एनी प्यूनेटिव और रिटेलिएटरी लीगल एक्शन फॉर पार्टिसिपेटिंग इन दिस मूवमेंट। देयर ओनली ऑफेंस हैज़ बीन टू रेज़ देयर वॉइस फॉर अ फेयर एंड अकाउंटेबल अकाउंटेबल एजुकेशन सिस्टम।

दूसरा वो ये भी कह रहे हैं कि जो छात्र आंदोलन के दौरान पकड़े गए और जिनके ऊपर धाराएं लगाई गई हैं उनके ऊपर कोई प्यूनेटिव एक्शन ना लिया जाए क्योंकि उन्होंने केवल एक ही अपराध किया है कि उन्होंने एक जायज मुद्दे को आवाज दी है। तो सोनम वांगचुक का यहां मेदांता अस्पताल जाने के बाद वहां से यह चिट्ठी लिखना जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह का इस बात के लिए धन्यवाद करना कि आप मुझसे मिलने के लिए आए। लेकिन साथ में यह भी बताना कि यह जो है ड्यूरिंग द डिस्कशन यू असर्ड मी दैट द गवर्नमेंट वुड पॉजिटिवली कंसीडर द फॉलोइंग। मतलब उन्होंने इस बात को सार्वजनिक किया। जाहिर है तब जो बात मुलाकात हुई होगी वो मौखिक रूप से हुई होगी। उसको औपचारिक रूप देने के लिए उसको लिखित में लाने के लिए उन्होंने यह लेटर लिखा है और इस लेटर को सार्वजनिक किया है। जिनको यह लेटर गया है जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनको तो गया ही है। लेकिन इसके अतिरिक्त इसको सार्वजनिक भी किया गया है ताकि यह बात वक्त आने पर जो कहते हैं ताकि यह सनद रहे ताकि ये ज्ञात रहे कि उस समय मौखिक रूप से आपके साथ जो डिस्कशन हुआ था उसमें कौन सी दो महत्वपूर्ण बातें थी ।

जिसको लेकर आपने मुझे अश्योर किया था वो दो महत्वपूर्ण बातें हैं। एक तो कंपनसेशन दिया जाना उन लोगों को उन परिजनों को जिनके घर के किसी छात्र ने सुसाइड की है और दूसरा यह कि पार्लियामेंट में अकाउंटेबिलिटी के लिए प्रयास किए जाएं जिसमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल होगा एजुकेशन मिनिस्टर का। तो क्या इसको ऐसा माना जाए कि विपक्ष की जो आवाज है या सीजेपी से थोड़ी सी अलग लाइन है क्योंकि सोनम वांगचुक सीजेपी के प्रोटेस्ट का सबसे बड़ा चेहरा है। अनशन उन्होंने किया। 20 दिन तक सैक्रिफाइस उन्होंने किया और इस पूरे मसले पर नजर हाई कोर्ट की भी रही है। लेकिन अब यह आंदोलन जिस तरफ बढ़ रहा है क्या सोनम वाकचू की लाइन विपक्ष और सीजेपी से थोड़ी सी इधर आपको नजर आ रही है? मोटे तौर पे तो मुझे लाइन वही नजर आ रही है क्योंकि वहां पर भी अगर देखें अगर आप अभी राहुल ने जो अभी से कुछ देर पहले ये प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उसमें तीन जो महत्वपूर्ण बातें कही हैं हम उसमें जाहिर है ये एक्सजेजरेशन जो कि पॉलिटिकली अपोनेंट होने की वजह से लीडर ऑफ अपोजिशन होने की वजह से और जाहिर है वहां वो सियासी प्रतिद्वंदिता भी शामिल है।

तो बाद में उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अह प्यूनिटिव एक्शन को एग्जीक्यूट किया, जिन लोगों ने लाठी चार्ज किया, वह लोग अकाउंटेबल होल्ड किए जाएं और साथ में उन्होंने ये तक कह दिया कि प्रधानमंत्री को इस संदर्भ में माफी मांगनी चाहिए क्योंकि वो सिस्टम रन कर रहे हैं। उन बातों का जिक्र जरूर यहां पर नहीं है। लेकिन मोटे तौर पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए। ये यहां पर भी रिफ्लेक्ट कर रहा है। अह और दूसरे ये भी रिफ्लेक्ट कर रहा है कि वो इसमें अकाउंटेबिलिटी चाहते हैं संसद की तरफ से और यह चाहते हैं कि इसमें कुछ ऐसा किया जाए जो निर्णायक हो। हम अब आगे दिनेश इस पूरे मामले में आपको क्या होता नजर आ रहा है क्योंकि राहुल गांधी ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की लगभग सवा घंटे वो बोले हैं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कल विपक्ष के नेताओं की बैठक सदन तीन दिन से चल नहीं पा रहा है। सीजेपी का प्रोटेस्ट जारी है और सीजेपी की तरफ से यह कहना कि अब इस पूरे मामले में वो सरकार से बातचीत करने के लिए नहीं जाएंगे बल्कि सरकार को बातचीत करने के लिए किसी कॉमन प्लेस या फिर जंतरमंतर पर आना पड़ेगा। इस चिट्ठी की खास बातें देखिए। मांग नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। सोनम वचुक की चिट्ठी की खास बातें हम आप को बता रहे हैं और कुमार विक्रांत भी हमारे साथ लाइव जुड़ गए हैं। एक बार उनका भी रुख करूंगा। दिनेश आपके साथ-साथ विक्रांत क्या मायने हैं? एक तरफ पूरा विपक्ष लामबंद सड़क से लेकर संसद तक बवाल मचा हुआ है। बिल्कुल संसद की कारवाई तीन दिन से चल नहीं रही है।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस विपक्ष की बैठक और सोनम वांगचुक की चिट्ठी के मायने कैसे देखा जाए और विपक्ष कैसे रिलेट कर रहा है खुद को इस चिट्ठी से? देखिए राहुल गांधी ने बार-बार यह कहा यह मेरी तीन मांगे नहीं है। ये छात्रों की मांगे हैं। मैं इसके साथ खड़ा हूं और पहली मांग उसमें वही है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए क्योंकि वो सिंबॉल हैं। दूसरी बात वह करते हैं कि जिन लोगों ने अह लाठी चलाने के या पैलेट गन चलाने के या जो भी मारपीट करने के आदेश दिए और जिन लोगों ने इनको इसको पालन किया उनको अकाउंटेबल बनाया जाए और तीसरा उन्होंने सबसे बड़ी बात कही कि प्रधानमंत्री पूरे सिस्टम को रन कर रहे हैं तो प्रधानमंत्री को छात्रों से छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। तो ये तीन बातें राहुल गांधी ने ये भी कहा कि यह नॉन नेगोशिएबल है और आज जिस तरीके से संसद में मलिकार्जुन खरगे ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लीजिए उसके बाद चर्चा शुरू कीजिए छात्रों के मुद्दे पर। लेकिन जब राहुल गांधी से पूछा गया कि क्या अगर इस्तीफा नहीं होता है तो संसद इसी तरह नहीं चलेगी तो राहुल गांधी ने कहा यह दोनों अलग मैटर हैं। यह तीनों मांगे हमारे लिए नॉन नेगोशिएबल हैं। हम छात्रों के साथ हैं। लेकिन जहां तक संसद चलने की बात है, मैं अकेले फैसला नहीं ले सकता। तमाम विपक्षी दलों से जो सुबह हमारी बैठक होती है 10:00 बजे, उसमें चर्चा करने के बाद क्या फैसला होता है, वहां पर यह फैसला होगा। मैं यहां पर पहले से कोई फैसला कर दूं। यह ठीक नहीं है। ये ये गठबंधन धर्म का पालन नहीं है। देखिए अब सोनम वाचिंग ने भी चिट्ठी लिखी है। सरकार के दोनों मंत्रियों ने बीती रात उनसे मुलाकात की है और यह चिट्ठी सार्वजनिक भी हुई है और बकायदा इन बातों को इंक्लूड किया गया है। लगभग लगभग मुझे वही बातें नजर आ रही हैं जो राहुल गांधी कह रहे हैं। विक्रांत आपके पास लौटूंगा एक बड़ी खबर। उसका रुख कर लेते हैं नड्डा और जितेंद्र सिंह को सोनम वांगचुक ने चिट्ठी लिखी है। वांगचुक ने लिखा आपने मुझे आश्वासन दिया है। सरकार के मंत्रियों ने मुझसे मुलाकात की है। मुआवजे के लिए आश्वासन दिया था। बीती रात बात हुई।

हुई इस्तीफे पर चर्चा का आश्वासन है। यह देखिए यह इस चिट्ठी की खास बातें हैं। इस्तीफे पर चर्चा का आश्वासन दिया गया है। संसद में चर्चा करने की मांग कर रहे हैं छात्रों के मुआवजे की बात और खास बात यह है कि इस घायल छात्र और प्रदर्शनकारियों पर कोई मुकदमा कोई कार्रवाई ना की जाए। वापस लौटते है l

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