हमारे गांव के अनुराग थे। ये आईपीएस थे और त्रिपुरा में डीजीपी थे। तो हमको तो पुलिस आई वहां बताया कि ऐसेसे दुर्घटनी हो गया। क्या पता चला भाई? इतने पुलिस मीडिया वाले ही आए थे। उनसे ही हमें पता चला पुलिस वाला। क्या लग रहा है आपको पहले?
नहीं कोई नहीं। ये तो बहुत शरीफ है। बहुत ही अच्छे इंसान। ईमानदार आदमी। ईमानदार आदमी बहुत ही ज्यादा। बहुत ही अच्छे। हां। लास्ट बार मुलाकात हुई। मेरे तो काफी दिन हो गए। मैं सीएसएम में था उसके मिले थे तो उसके बाद मेरे कैसा ये अनुराग धनकर जी थे
और ये इन्होंने बहुत मेहनत करी अपनी मेहनत से इन्हें सफलता पाकर ये आईजी तक पहुंचे और इस बारे में हम कुछ कह नहीं सकते। क्या फर्क है? क्या कहेंगे इस? हां जी यह यह बहुत दुखद घटना है इस बारे में देखो पता लगा पहले तो कि आईजी साहब ने अपना मतलब आत्महत्या कर ली हां डीजीपी साहब ने और कह रहे थे कि ये भी आया कि उसमें फोन में के फंदे से लटके मिले तो हां जी बहुत दुखद घटना है हमारे गांव के अनुराग थे ये आईपीएस थे और त्रिपुरा में डीजीपी थे
तो हमको तो पुलिस आई वहां बताया कि ऐसेसे दुर्ग हो गया। क्या पता चला भाई? इतने पुलिस मीडिया वाले ही आए थे। उनसे हमें पता चला पुलिस क्या लग रहा है पहले? नहीं कोई नहीं। ये तो बहुत शरीफ है। बहुत अच्छे हैं। ईमानदार आदमी ईमानदार आदमी बहुत ही ज्यादा। बहुत ही लास्ट बार मुलाकात। मेरे तो काफी दिन हो गए। मैं सीएसएम में था। उसके मिले थे। तो उसके बाद मेरे को यह अनुराग धनकर जी थे और यह इन्होंने बहुत मेहनत करी। अपनी मेहनत से सफलता पाकर ये आईजी तक पहुंचे