शादी के सात फेरे, साथ जीने मरने के वादे और फिर एक ऐसा खत जिसे पढ़कर पूरा परिवार टूट गया। आजकल अक्सर खबरें आती हैं। पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी या पतिप के रिश्ते में धोखा हो गया या बाथरूम में पति को गाड़ दिया या फिर वो जिसमें प्रेमी के साथ मिलकर ड्रम में रख दिया।
लेकिन कानपुर से आई यह कहानी बिल्कुल अलग है। यह इस खबर में पत्नी विलन नहीं है। इस बार विलन एक ऐसी बीमारी है जिसने एक हंसते खेलते परिवार की खुशियां छीन ली। एक पत्नी जिसने दुनिया छोड़ने से पहले पति और ससुराल के लिए शिकायत नहीं सिर्फ प्यार लिखा। सी मामले पर विस्तार से बात करेंगे।
पत्नी ने लिखा हमेशा साथ निभाने का वादा तोड़कर जा रही हूं। दुखी मत होना। बढ़िया नसीब होता है। तब ऐसी ससुराल मिलती है। यह किसी फिल्म का डायलॉग नहीं है। यह उस पत्नी के आखिरी शब्द हैं जिसनेदुनिया छोड़ने से पहले अपने पति और पूरे ससुराल को धन्यवाद कहा है। मामला कानपुर के रावतपुर इलाके का है। शिवम शुक्ला की शादी 3 साल पहले निक्की उर्फ़ वैष्णवी से हुई थी।
घर में सासससुर देवर ननद सब थे और निक्की सबकी लाडली बन गई। लेकिन रीड की हड्डी की गंभीर बीमारी धीरे-धीरे उसकी जिंदगी पर भारी पड़ने लगी। परिवार ने इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। कानपुर से लेकर दिल्ली तक इलाज कराया गया। पति रेलवे की नौकरी करते हैं। फिर भी हर संभव कोशिश जारी रही। लेकिन बीमारी सिर्फ शरीर नहीं तोड़ती। कई बार इंसान का हौसला भी तोड़ देती है। निक्की ने हाल ही में दिल्ली पुलिस की लिखित परीक्षा भी पास की थी।
फाइनल टेस्ट बाकी था लेकिन उसे लगता था कि वह ठीक नहीं हो पाएगी। यही डर शायद उसके मन पर इतना भारी पड़ा कि उसने जिंदगी से हार मान ली। सबसे भावुक हिस्सा उसका आखिरी नोट।
उसने लिखा मेरे जेवर देवर की होने वाली पत्नी को दे देना। स्कूटी भी उसी को दे देना। मेरा फोन मांजी को दे देना। और उनका फोन पुराना हो गया है। मैंने इसे साफ करके रख दिया। सोचिए जो लड़की अपनी आखिरी चिट्ठी में भी घर वालों की छोटी-छोटी जरूरतें याद रख रही है उसके दिल में कितना अपनापन रहा होगा। पुलिस का कहना है कि पहली नजर में यह मामला बीमारी से परेशान होकर उठाए गए कदम का लग रहा है।
मायके और ससुराल दोनों पक्षों ने किसी भी तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है। रिपोर्ट के बाद आगे की कार्यवाही पुलिस करेगी। लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि निक्की ने ऐसा कदम क्यों उठाया? सवाल यह है कि क्या हम अपने आसपास ऐसे लोगों की खामोशी सुन पाते हैं जो बाहर से मुस्कुराते हैं लेकिन अंदर ही अंदर टूट रहे होते हैं?
बीमारी सिर्फ शरीर की नहीं होती है। मन भी बीमार पड़ता है और जब मन हार जाता है तो कई बार सबसे मजबूत रिश्ते भी किसी को रोक नहीं पाते। अगर आप या आपका कोई अपना लंबे समय से मानसिक तनाव, निराशा या बीमारी से जूझ रहा है तो उसे अकेले ना रहने दें। भरोसेमंद परिवार, दोस्तों या किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है।