विदेशी फंडिंग होती है उनको और इसी के आधार पर वो देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। वो सरकार के खिलाफ देश में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश के तहत यह आंदोलन करते हैं। जब वो अपनी मौत की बात करते हैं तो वो कहते हैं कि मुझे मरने का कोई गम नहीं है। बस मैं चाहता हूं कि 20 जुलाई तक जिंदा रहूं ताकि जो संसद भवन तक मार्च निकालने की हमारी तैयारी है, वो मार्च कामयाब हो सके। अगर वो मार्च कामयाब नहीं होता है, वो प्रदर्शन कामयाब नहीं होता है तो मैं भूत बनकर वापस लौटूंगा। ये सोनम मांगचू कहते हैं और उसके बाद वो मुस्कुरा देते हैं। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन दिनों एक शख्स सुर्खियों में बना हुआ है और वो सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे देश के हर शहर में लोगों की जो लोग जागरूक हैं, जो लोग खबरों में बने रहते हैं, जो खबरें देखते हैं, वह लगातार उस शख्स के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। Google पर उसके बारे में पता कर रहे हैं। टेलीविजन चैनल्स पर, न्यूज़ चैनल्स में उसके बारे में जानकारी ले रहे हैं कि वह शख्स महफूज़ है या नहीं। उसकी जिंदगी महफूज़ रहेगी या नहीं, वह स्वस्थ है या नहीं? कहीं वो बहुत ज्यादा सीरियस तो नहीं है। उसकी हालत चिंताजनक तो नहीं है। उस शख्स के बारे में सब लोग जानना चाहते हैं। दरअसल राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली में जंतरमंतर ऐतिहासिक जंतरमंतर पर 28 जून को एक धरना प्रदर्शन शुरू होता है। या फिर यह कहें कि एक अनशन शुरू होता है। यह अनशन होता है केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ या कहें कि केंद्र सरकार के खिलाफ। मांग उठती है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से बाहर किया जाए। या तो वह खुद इस्तीफा दें या प्रधानमंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से बाहर करें। दरअसल देश में जो शिक्षा के क्षेत्र में या कहें कि जो परीक्षाओं को लेकर जो धांधली की बातें आई हैं, जो पेपर लीक की घटना हुई है, खासतौर पर नीट पेपर लीक का मामला जो पिछले लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ है। इसी को लेकर बार-बार धर्मेंद्र प्रधान पर सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग वो बेहतर तरीके से नहीं संभाल पा रहे हैं।
एक पेपर लीक जैसी घटना केंद्र सरकार नहीं मैनेज कर पा रही है। उसे कंट्रोल नहीं कर पा रही है तो भला शिक्षा मंत्रालय चलेगा कैसे और इसी को लेकर 28 जून को जंतरमंतर पर अनशन शुरू होता है। अनशन करने वाले थे लद्दाख के इंजीनियर सोशल एक्टिविस्ट या कहें कि पर्यावरण को लेकर काम करने वाले सोनम वांगचुक। सोनम वांगचुक का नाम सब लोग जानते हैं या फिर बहुत लोग अब जो धीरे-धीरे जान रहे हैं उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। सोनम वांगचुक लद्दाख में ही काफी समय से चर्चा में रहे और उसके बाद से पिछले दिनों जब लद्दाख में वो अनशन कर रहे थे। उस दौरान फिर उनकी गिरफ्तारी होती है तो बहुत सारी घटनाओं के बाद वो विवादों में आ गए। यानी कुछ दिन पहले कुछ समय पहले तक जब वो एक हीरो के तौर पर जाने जाते थे। अचानक से उनके प्रदर्शन को लेकर उनके आमरण अनशन को लेकर उनकी जब गिरफ्तारी हुई उसके बाद वह अचानक से विवादों में आए। कहा गया बहुत सारे सत्ता पक्ष के लोग जो सरकार में बैठे लोग हैं उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग होती है उनको और इसी के आधार पर वह देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। वह सरकार के खिलाफ देश में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश के तहत यह आंदोलन करते हैं। वही सोनम वांछुक दिल्ली में हैं। 28 जून से वो आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आमरण अनशन पर बैठने के बाद हालत यह हो गई कि वहां पर अब लोगों की भीड़ जुटने लगी। जाहिर तौर पर सोना मांगशुक जब बैठे थे तो बहुत सारे लोग उनके समर्थन में खड़े हो गए। बहुत सारे लोग उनके समर्थन में वहां इकट्ठा होने लगे। जंतरमंतर पर भीड़ जुटने लगी और भीड़ जुटने के साथ-साथ सोनम वांछु का हौसला और बढ़ा और वह अडिग हो गए कि यह अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से बाहर ना कर दे। जुलाई के पहले हफ्ते में सोनम वांगचुक की तबीयत धीरे-धीरे बिगड़नी शुरू होती है। इसलिए बिगड़ती है क्योंकि जाहिर तौर पर आमरण अनशन पर थे। कुछ अन्न जल का उन्होंने त्याग कर रखा था तो तबीयत बिगड़नी शुरू होती है। इसी दौरान दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले को संज्ञान में लेती है और दिल्ली हाई कोर्ट केंद्र सरकार को और दिल्ली सरकार को निर्देशित करती है कि सोनम वांछु की सेहत की रोज जानकारी ली जाए। रोज डॉक्टर्स उनकी जांच करें और पता करें कि कहीं उनकी सेहत बिगड़ तो नहीं रही है। जुलाई के दूसरे हफ्ते में आते-आते सोनम वांगचुक की तबीयत थोड़ी और खराब होती है और उसके बाद जो विपक्ष के तमाम नेता हैं या विपक्ष के जो दल हैं वह सोनम वांगचुक से मिलने का सिलसिला शुरू करते हैं। बहुत सारे लोग मिलते हैं। कांग्रेस की तरफ से पवन खेड़ा जाते हैं सोनम वांगचुक से मिलने। हाल ही में उनकी मुलाकात हुई है। उसके बाद समाजवादी पार्टी की तरफ से डिंपल यादव अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव पहुंचती हैं। वह सन मांशु से मिलती हैं। किसान नेता राकेश टिकटैत उनसे मुलाकात करने पहुंचते हैं। उसके बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल उनसे मुलाकात करते हैं। अरविंद केजरीवाल जब मिलने पहुंचते हैं तो लोगों की जिज्ञासा और बढ़ती है। लोगों की नजरें और ज्यादा इस खबर पर टिक जाती हैं कि आखिर सोनम मांगचुक जो कर रहे हैं
उसमें उनको कितनी सफलता मिलेगी या फिर क्या होने वाला है। अरविंद केजरीवाल के बाद से यह सुर्खियों में इसलिए ज्यादा आते हैं क्योंकि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में जब राजनीति में एक्टिव हुए उससे पहले उन्होंने भी एक आंदोलन किया था। जिसमें अन्ना हजारे भी उनके साथ थे। अन्ना हजारे को फेस बनाकर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। सबको वह दौर याद होगा जब दिल्ली का रामलीला मैदान जहां लाखों की भीड़ जुटती थी। पहले अन्ना हजारे अनशन पर थे। उसके बाद अरविंद केजरीवाल भी वहां अनशन पर बैठे और उस अनशन के बाद उस धरना प्रदर्शन के बाद वहां से एक राजनीतिक पार्टी का जन्म होता है आम आदमी पार्टी का। वही आम आदमी पार्टी जो दिल्ली में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आती है। तो अरविंद केजरीवाल के बारे में तो सारे लोग जानते हैं और वही अरविंद केजरीवाल जब सोनम मांगचुक से मिले तो लोगों को लगा कि अब बहुत बड़ी ताकत सोनम वांगचुक को मिल रही है। पहले कांग्रेस के नेता मिलते हैं। फिर समाजवादी पार्टी की नेता मिलती हैं। फिर आम आदमी पार्टी के नेता मिलते हैं। सब सोनम वांगचु को लेकर चिंतित नजर आते हैं। सब यह अपील करते हैं और सब मांग करते हैं कि केंद्र सरकार को तत्काल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लेना चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से अब तक ऐसी कोई सुगबुगाहट नहीं है। अब तक ऐसी कोई चर्चा नहीं है। यहां तक कि सोनम मांगचुक को लेकर कोई कुछ कह भी नहीं रहा है। हां, एक चीज जरूर हुआ है कि डॉक्टर्स लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि 20 जुलाई की तारीख जो है वह तय की गई है कि सोनम वांछुक जिस मकसद से आंदोलन कर रहे हैं। जिस मकसद से वह अनशन कर रहे हैं। उसी मकसद के तहत एक बड़ा मार्च निकालने की तैयारी है। दिल्ली में मार्च जंतरमंतर से निकल कर बताया जा रहा है कि संसद भवन तक जाएगा। संसद भवन का घेराव करने की कोशिश होगी। इसकी तारीख 20 जुलाई तय की गई है। यानी एक बहुत बड़ी भीड़ जो है वह संसद भवन की तरफ अग्रसर होगी और मांग वही कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें या फिर उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। अब सोनम वांगचुक डॉक्टर्स यही कह रहे हैं या फिर मीडिया के लोग जब उनसे पूछ रहे हैं तो वह यही कह रहे हैं कि भाई मेरी तो बस इतनी इच्छा है कि मैं 20 जुलाई तक कैसे भी जिंदा रहूं। सोनम वांगचुक जब यह कहते हैं तो उनके समर्थन में और भी ज्यादा लोग खड़े हो जाते हैं। क्योंकि आप यह कह सकते हैं कि एक भावनात्मक बात करना या भावनाओं में लोगों को बहा कर ले जाना यह बहुत बड़ी चीज होती है और यह बड़े-बड़े लोग करते भी रहे हैं। सोनम मांगचुक भी शायद वही कर रहे हैं। क्योंकि जब वह अपनी मौत की बात करते हैं तो वह कहते हैं कि मुझे मरने का कोई गम नहीं है। बस मैं चाहता हूं कि 20 जुलाई तक जिंदा रहूं ताकि जो संसद भवन तक मार्च निकालने की हमारी तैयारी है वो मार्च कामयाब हो सके। बल्कि वह मजाक में हंसते हुए यह भी कहते हैं कि अगर वो मार्च कामयाब नहीं होता है, वह प्रदर्शन कामयाब नहीं होता है, तो मैं भूत बनकर वापस लौटूंगा। यह सोनम मांगचू कहते हैं और उसके बाद वह मुस्कुरा देते हैं। उनकी मुस्कुराहट तो दिखती है लेकिन उसके साथ-साथ उनके प्रति लोगों के इमोशंस भी और गहरा जाते हैं। लोगों को लगता है कि कहीं सोनम वांगचुक को कुछ हो तो नहीं जाएगा। लोग चिंतित हैं इस बात को लेकर कि सोनम वांगचुक कहीं अपनी जान तो नहीं गवा देंगे इस आंदोलन में। डॉक्टर्स के बयान जो है वह बता रहे हैं कि सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ रही है। डॉक्टर्स यह कह रहे हैं कि सोनम वांगचुक को तत्काल अपना अनशन तोड़ना चाहिए क्योंकि किसी भी वक्त ऑर्गन फेलियर हो सकता है और अगर ऑर्गन फेलियर होता है तो उनकी जान जा सकती है। डॉक्टर्स ये कह रहे हैं लेकिन सोनम मांगचुक तैयार नहीं है। केंद्र सरकार इस पर कोई सुध नहीं ले रही है। हाई कोर्ट की नजर जरूर इस पर बनी हुई है कि आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हो रहा है। इसीलिए हाई कोर्ट ने यह कह दिया है सरकार को कि किसी भी सूरत में उनका उनकी मेडिकल रिपोर्ट जो है वो रोज देखी जाएगी। रोज उनकी मेडिकल रिपोर्ट आनी चाहिए कि उनकी सेहत कैसी है। दरअसल आपको बताते हैं कि सोनम वांगचुक जो हैं वो दिल्ली क्यों पहुंचे। सोनम वांगचुक ने जब लद्दाख में प्रदर्शन किया था
तब भी वह लद्दाख में भी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ही प्रदर्शन कर रहे थे। उस वक्त भी उन्हें केंद्र सरकार की नीतियों से ऐतराज था और तभी केंद्र सरकार की एजेंसीज ने जांच पड़ताल की थी। उनको गिरफ्तार किया था और पता करके बाद में यह बताया गया था कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि सोनम मानचुक विदेशी शक्तियों से मिले हुए हैं। विदेशी ताकतों के साथ मिलकर विदेशी फंडिंग की ताकत पर वो यह सारे प्रदर्शन और अनशन करते हैं और सरकार के खिलाफ एक मुहिम चलाते हैं। तो केंद्र सरकार की नजर तो पहले ही उन पर टेढ़ी है। केंद्र सरकार पहले से ही मानकर चल रही है कि सोनम मानचुक जो हैं वो जानबूझकर सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। डिरेल करना चाहते हैं। इसीलिए केंद्र सरकार बहुत ज्यादा सिंपैथी नहीं रखती। लेकिन हां, कोर्ट का दबाव जरूर है। क्योंकि अगर सोनम वांगचुक को इस अनशन के दौरान कुछ होता है तो सरकार को फिर जवाब देना मुश्किल होगा। सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ जाएंगी। ऐसे में जाहिर तौर पर सोनम वांगचुक को लेकर सरकार भी यही चाहेगी कि कैसे भी करके उनका अनशन टूट जाए। बहुत दिनों से यह चर्चा भी हो रही है कि केंद्र सरकार भी चाहती है कि हां अगर विवाद बहुत बढ़ रहा है तो कुछ मंत्रिमंडल में बदलाव किया जाए। लेकिन अभी तक यह आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं है कि मंत्रिमंडल में बदलाव होता है तो क्या धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी जाएगी? धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा विभाग से शिक्षा मंत्रालय से हटेंगे। क्या वह मंत्रिमंडल से ही बाहर हो जाएंगे या फिर उनका विभाग बदलकर कोई और विभाग उनको दे दिया जाएगा। विवाद बहुत है। मैं आपको बता दूं कि नीट पेपर लीक का जब मामला आया था उस वक्त बड़ी फजीहत हुई सरकार की क्योंकि यह सिर्फ पहला मामला नहीं था कि नीट का पेपर लीक हुआ था। हालत यह है कि देश के तमाम बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं हुई। तमाम बड़ी परीक्षाओं में धांधली की बात सामने आई और इसी को लेकर सरकार उठे। अभी हाल ही में जून महीने में ही नीट की परीक्षा दोबारा से ली गई और दोबारा से जब ली गई तो उसमें सबने देखा कि क्वेश्चन पेपर ले जाने के लिए इंडियन एयरफोर्स की मदद ली गई। अब आप समझिए कि एक परीक्षा का प्रश्न पत्र भेजा जाना है अलग-अलग प्रदेशों में और उसके लिए केंद्र सरकार अपने सिस्टम में अपने स्तर पर सक्षम नहीं नजर आई और केंद्र सरकार को भारतीय वायु सेना की मदद लेनी पड़ी। भारतीय वायुसेना का विमान उड़ान भरता है। क्वेश्चन पेपर लेकर अलग-अलग प्रदेशों में जाता है और क्वेश्चन पेपर देकर आता है। ऐसे में यह सवाल उठने लगे। विपक्ष यह सवाल उठाने लगा कि जो सरकार एक परीक्षा बिना सेना के देश की सेना की मदद के नहीं करा सकती तो क्या आप पूरे देश के सिस्टम को हर प्रदेश की व्यवस्था को सारी चीजें क्या सेना के हवाले कर देंगे? क्या ऐसी नौबत आ गई है कि इस देश में सेना के अलावा कोई नहीं है। कोई पुलिस नहीं है। कोई एजेंसी नहीं है जो पेपर लीक की घटना को रोक सके। और इसी पर सरकार की बड़ी फजीहत हुई थी।
सरकार का कहना है कि हम प्रयास कर रहे हैं। हमारे प्रयासों में कोई कमी नहीं है। सरकार का कहना है कि हमारी नियत साफ है। हमारी नियत में कोई खोट नहीं है। सरकार का कहना है कि पेपर लीक को रोकने के लिए हम बहुत सख्त हैं। और इसी सख्ती के साथ हम इस पेपर लीक को रोकेंगे भी और जो इसका एक रैकेट बना हुआ है जो एक गठजोड़ बना है जो पेपर लीक कराता है या परीक्षा में धांधली कराता है इसको हम खत्म करेंगे। लेकिन वो हो नहीं रहा है और यही वजह है कि सोनम वांगचुक का यह प्रदर्शन, सोनम वांगचुक का यह आंदोलन, उनका अनशन इस वक्त सबसे ज्यादा लोगों की नजरों में है। लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि सोनम वांगचुक की मौत से पहले यह मौत मैं इसलिए कह रहा हूं कि सोनम वांगचुक की सेहत डॉक्टर्स भी कह रहे हैं कि बिगड़ रही है और ऑर्गन फेलियर हो सकता है। सोनम वांगचुक खुद कह रहे हैं। हालांकि सोनम वांगचु के हौसले की भी दाद देनी पड़ेगी। 28 जून से जो शख्स अनशन पर बैठा हो, 28 जून से जो शख्स अन्न जल का त्याग करके रखा हो, वही शख्स आज यह कह रहा है कि मैं ऊपर से कमजोर जरूर हुआ हूं शरीर से लेकिन अंदर से मेरी ताकत नहीं खत्म हुई है। अभी भी मेरी ताकत है कि मैं बुराई के खिलाफ, गलत के खिलाफ और अगर सरकार की नीतियां खराब है, गलत हैं तो उनके खिलाफ मैं लड़ सकता हूं। सोनम वांगचुक के इस हौसले की सब दाद दे रहे हैं। सोनम वांगचुक के बारे में सब लोग यही चाहते हैं कि वह स्वस्थ रहें और अगर वह अनशन कर रहे हैं तो सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल हो। या तो उनसे बातचीत की जाए या उनका अनशन तोड़ने की एक पहल की जाए। अगर सोनम वांगचुक को लेकर सरकार को यह लगता है कि वह विदेशी शक्तियों से मिले हैं। विदेशी हाथों की कठपुतली हैं तो सरकार फिर एक्शन ले। सरकार के पास एजेंसीज हैं। सरकार जांच कराए और जांच के हिसाब से कारवाई करें। लेकिन यह सरकार को ध्यान देना पड़ेगा कि जंतरमंतर पर ऐसी कोई अनहोनी ना हो जाए जो
सरकार के माथे पर एक कलंक का टीका लगा दे। ऐसा कोई बुरा ना हो जाए जो सरकार पर ऐसा धब्बा लगा दे कि फिर विपक्ष के साथ-साथ लोगों को आम लोगों को भी कहने का मौका मिल जाए कि यह सरकार किसी के मरने और जीने से इसको फर्क नहीं पड़ता। इसीलिए शायद दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया है और सरकार को कहा है कि सोनम मानच की सेहत का ध्यान रखें। फिलहाल हम सब या बाकी देश के लोग भी यही दुआ कर रहे हैं कि कम से कम कोई मिसहपेनिंग ना हो, कोई अनहोनी ना हो, सोना मांगचुक स्वस्थ रहे। लेकिन सब यह भी चाहते हैं कि इसका समाधान किसी सड़क पर हंगामे से प्रदर्शन से नहीं बल्कि शांति से हो जाए कि आखिर समाधान क्या है। सरकार को इस पर पहल करनी चाहिए। सोनम मांगचुक पर के विषय पर बात करनी चाहिए और इसका कोई समाधान निकलना चाहिए। यह हम सबकी भी उम्मीदें हैं। तो सोनम आंशू को लेकर, उनकी सेहत को लेकर जब भी कोई अपडेट आएगा हम आपको जरूर बताएंगे। लेकिन फिलहाल जैसा कि मैंने कहा कि हम सब यह दुआ करते हैं कि वह स्वस्थ रहें और अगर वह अनशन कर रहे हैं तो अपने मकसद में कामयाब हो या फिर सरकार पहल करके उनका अनशन तुड़वाए। फिलहाल इजाजत दीजिए और जी बिहार झारखंड के इस प्लेटफार्म पर आप बने रहिएगा। हमारे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म को फॉलो करिए। उसे सब्सक्राइब करें और लाइक करें, कमेंट्स करें हमारे वीडियो पर ताकि हमारा भी हौसला बढ़े।