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शेख हसीना की वापसी पर भारत के बयान को सुन हिल जाएगा बांग्लादेश !

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बांग्लादेश की राजनीति में चाहे कितना भी बड़ा भूचाल आ जाए, सरकारें बदलें, नेता बदलें या फिर सत्ता में वापसी की अटकलेंतेज हो जाए, लेकिन भारत ने अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। उसकी विदेश नीति किसी एक चेहरे पर नहीं बल्कि दोनों देशों के रिश्तों पर आधारित है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

लेकिन इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने सभी अटकलों पर विराम लगा [संगीत] दिया है। भारत ने साफ कहा है कि शेख हसीना लौटे या ना लौटे भारत का रुख नहीं बदलेगा। आखिर विदेश मंत्रालय ने ऐसा क्यों कहा है? भारत क्या संदेश देना चाहता है और इसका भारत बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? यह आपको बताते हैं।

दरअसल, शेख हसीना के संभावित वापसी को लेकर सवाल उठ रहे थे। क्या अगर वह फिर बांग्लादेश लौटती हैं तो भारत का रवैया भी बदल जाएगा। इन सवालों पर विदेश मंत्रालय की तरफ से बिल्कुल साफ शब्दों में जवाब दे दिया गया है।

भारत ने कहा है कि शेख हसीना का लौटना पूरी तरह बांग्लादेश का आंतरिक मामला हैऔर इससे भारत की नीति में कोई भी बदलाव नहीं आएगा।

यानी भारत की विदेश नीति किसी एक नेता या किसी राजनीतिक दल पर नहीं टिकी हुई है बल्कि पड़ोसी देश के साथ [संगीत] उसके दीर्घकालिक रिश्तों पर आधारित है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत और बांग्लादेश [संगीत] के साथ स्थिर सकारात्मक और सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सीमा सुरक्षा हो, व्यापार हो या फिर जल बंटवारे जैसे कई अहम मुद्दे हो।

दोनों देशों के बीच बातचीत [संगीत] और सहयोग पहले की तरह ही जारी रहेगा। दरअसल भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सिर्फ राजनीतिक नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच करीब 4000 कि.मी. लंबी एक साझा सीमा है। यानी दोनों का साझा बॉर्डर है।

व्यापार, रेल और सड़क संपर्क, ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा जैसे कई ऐसे मुद्दे हैं जो दोनों देशों को एक दूसरे के साथ जोड़ते हैं और यही वजह है कि भारत किसी भी राजनीतिक बदलाव के बावजूद संस्थागत [संगीत] रिश्तों को प्राथमिकता देता है।

विदेश नीति में अक्सर एक बात कही जाती है कि सरकारें तो बदलती हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित नहीं बदलते और भारत के ताजा बयान में [संगीत] भी यही सोच साफ दिखाई देती है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत अच्छे [संगीत] पड़ोसी संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है। यानी बांग्लादेश में चाहे जो भी राजनीतिक हालात हो, जो भी परिस्थितियां बने, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और द्विपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है।

और एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए भारत और बांग्लादेश के मजबूत रिश्ते बेहद अहम हैं। इसीलिए भारत ने किसी राजनीतिक घटनाक्रमपर टिप्पणी करने के बजाय इसे बांग्लादेश का आंतरिक मामला बताया है और अपने आधिकारिक रुख को भी साफ किया है और दोहराया है।

शेख हसीना की वापसी हो या बांग्लादेश की बदलती राजनीति। भारत कासंदेश बिल्कुल साफ है कि भारत का रुख नहीं बदलेगा और दोनों देशों के बीच।

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