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भारत-इंडोनेशिया डील से चीन का 70% व्यापार ठप? क्यों घबराए जिनपिंग !

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समंदर के बीचोंबीच चीन की नाक के ठीक नीचे भारत ने एक ऐसा रणनीतिक चक्रव्यूह रच दिया है जिसने बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक खलबली मचा दी है। जी हां, जकार्ता की धरती पर कदम रखते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐसा भव्य और ऐतिहासिक स्वागत हुआ कि पूरी दुनिया देखती रह गई। खुद इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोगो सुबियानतो प्रोटोकॉल तोड़कर अगवानी के लिए खड़े थे। लेकिन इस ग्रैंड वेलकम के पीछे छिपी थी वो महा डील जिसकी गूंज से इस वक्त पूरी दुनिया के डिफेंस एक्सपर्ट्स हैरान। समंदर में चीन के सबसे संवेदनशील रास्ते मलक्का स्टेट के पास मौजूद सवांग पोर्ट अब भारत के साथ मिलकर विकसित होगा। यही नहीं भारत की अचूक अस्त्र और सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलें

अब इंडोनेशिया की सरजमी और समंदर की हिफाजत करेंगी। स्वागत के इस शाही शोर के बीच भारत और इंडोनेशिया ने पांच ऐसे ऐतिहासिक समझौते पर मोहर लगा दी है जो एशिया का भूगोल और इतिहास दोनों बदलने वाले हैं। आखिर क्या है ये पांच बड़े ऐलान और कैसे भारत ने जकार्ता में चीन को चारों खाने चित कर दिए। आइए आपको सुनाते हैं इस ऐतिहासिक दौरे की पूरी इनसाइड स्टोरी। कहानी शुरू होती है सोमवार की शाम से जो पीएम मोदी का विमान जकार्ता एयरपोर्ट पर उतरा। इंडोनेशिया में इस वक्त नया नेतृत्व है। नए राष्ट्रपति प्रोबोगो सुबियानतो है। लेकिन भारत के लिए उनका सम्मान और दोस्ती का जज्बा बिल्कुल अटूट दिखा। एयरपोर्ट से लेकर जकार्ता की सड़कों तक भारतीय समुदाय ने पलकें बिछा रखी थी और फिर आया मंगलवार का वो ऐतिहासिक सवेरा जब पीएम मोदी को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर और अभूतपूर्व औपचारिक स्वागत दिया गया। दोनों नेताओं के चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि पर्दे के पीछे कुछ बहुत बड़ा पक रहा है

और हुआ भी कुछ ऐसा ही। जैसे ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत खत्म हुई एक के बाद एक पांच ऐसे बड़े ऐलानों की झड़ी लग गई जिसने भारत को ग्लोबल लीडर के रूप में और मजबूत कर दिया है। चलिए सबसे पहले बात करते हैं उस समझौते की जिसने भारत की टेक्नोलॉजी का लोहा मनवाया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हमारे इस लोकतांत्रिक ताकत की रीड है हमारी ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन। अब भारत इंडोनेशिया की मदद करेगा उनके लिए खासतौर पर ईवीएम तैयार करने में। यानी इंडोनेशिया के चुनावों में अब भारतीय तकनीक का डंका बजेगा। लेकिन जो दूसरा समझौता है उसने ड्रैगन यानी चीन के हलक में जान अटका दी है। वो है सबांग पोर्ट। भारत और इंडोनेशिया मिलकर इस रणनीतिक बंदरगाह को डेवलप करेंगे। नक्शे पर देखिए यह पोर्ट मलक्का स्टेट के बिल्कुल मुहाने पर है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से चीन का 70% से ज्यादा व्यापार और तेल सप्लाई हो रहा है। और सबसे बड़ी बात यह सवांग पोर्ट भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से मात्र 100 मील दूर है। यानी अब इस समुद्री इलाके में भारत की ताकत दोगुनी होने जा रही है। अब बात करते हैं उस मानक क्षमता की जिसका तोड़ दुनिया के किसी देश के पास नहीं है। डिफेंस के सेक्टर में भारत ने इंडोनेशिया के साथ दो महा डील की है। पहली डील है भारत की स्वदेशी अस्त्र मिसाइल की।

हवा से हवा में मार करने वाली इस मिसाइल ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में वह तबाही मचाई थी कि इंडोनेशिया इसका कायल हो गया। जकार्तन ने बिना वक्त गवाए आधिकारिक तौर पर भारत से अस्त्र मिसाइलें खरीदने का बड़ा फैसला सुना दिया है और इसके साथ ही भारत की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को लेकर भी डील पक्की हो गई है। इंडोनेशिया अपनी सुरक्षा के लिए अपने ब्रह्मोस मिसाइल के स्टॉक को बढ़ा रहा है और भारत उसे और अधिक मिसाइल बैटरीियों की सप्लाई करने जा रहा है। यह दोनों डिफेंस डील्स बताती है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं बल्कि दुनिया को हथियार बेचने वाला डिफेंस हब भी बन चुका है। अब बात उस पांचवें समझौते की जो आने वाले भविष्य की अर्थव्यवस्था को तय करेगा। आज की तारीख में जिसके पास क्रिटिकल मिनरल्स यानी जरूरी खनिज है वही दुनिया के टेक इंडस्ट्री पर राज करेगा। ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन के एकाधिकार को तोड़ने के लिए भारत अब इंडोनेशिया में स्टील, निकल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट की मैन्युफैक्चरिंग यानी निर्माण में बड़ा निवेश करने जा रहा है।

इसका सीधा फायदा यह होगा कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां यानी कि ईवी, मोबाइल और हाईटेक गैजेट्स बनाने के लिए भारत को किसी तीसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। तो जकार्ता की सरजमी से पीएम मोदी ने दोस्ती, लोकतंत्र, समंदर और मिसाइलों का एक ऐसा कॉकटेल तैयार किया है जिसने भारत के विरोधियों की रातों की नींदें उड़ा दी है। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती। इंडोनेशिया का यह चक्रव्यूह तो सिर्फ शुरुआत है। यहां से प्रधानमंत्री मोदी सीधे ऑस्ट्रेलिया के लिए उड़ान भरेंगे। जहां प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर महामंथन होना है। और इसके तुरंत बाद 11 जुलाई को वो न्यूजीलैंड की धरती पर होंगे। लेकिन आज का सबसे बड़ा सवाल जिसे आपको सोचना होगा। जकार्ता में हुए इस मिसाइल और कोर्ट डील के बाद क्या हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में चीन की दादागिरी हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म हो जाएगी और ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड में पीएम मोदी के कदम रखने के बाद डिप्लोमेसी का कौन सा नया इतिहास लिखा जाने वाला है। इन दोनों देशों से आने वाली हर खबर हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे। आप देखते रहिए वन इंडिया हिंदी। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।

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