] जरा देख ले आ गुजरे जमाने के एक सदाबहार रोमांटिक अभिनेता जिन्हें किंग ऑफ रोमांस की उपाधि मिली थी नजट को जुल्फ से पानी ये मोती एक दौर में जिनकी पहचान एक चार्मिंग हीरो के तौर पर होती थी और लाखों लड़कियां इनकी दीवानी थी हमदम तुम मेरे [गाना गाने की आवाज़] मान भी जाओ कहना मैं लेकिन जब एक गाने में इन्होंने युवती बनकर डांस किया तो इनके चाहने वाले भौचक्के रह गए थे कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला [संगीत] कजरे ने ले हिंदी सिनेमा में 60 70 के दशक में टॉप के पांच नायकों की फहरिस्त में इनका नाम शामिल किया जाता था और और यह स्वाभाविक अभिनय और आकर्षक व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। पुकारता [संगीत] [गाना गाने की आवाज़] चला हूं मैं गलीगली। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले यह कार्टूनिस्ट और पेंटर थे। तो आप अखबार देखकर तस्वीर बनाते हैं? जी हां। यह मेरा शौक है। क्या आपको पता है कि इन्होंने घर वालों से छिपकर अपनी पहली फिल्म की थी? लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो इन्हें गुस्से से घर से निकाल दिया गया। आज से इस घर में इसके लिए कोई जगह नहीं है। यह मैं साबित कर दूंगा कि मेरी रगों में भी आप ही का खून है। मुझे आशीर्वाद दो मां ताकि मैं अपने दिए हुए वचन को पूरा कर सकूं। और क्या आप यकीन करेंगे कि मासूम से दिखने वाले इस एक्टर पर अपनी एक को एक्ट्रेस को बिना बताए फिल्म सेट पर 5 मिनट तक किस करने का आरोप लगा था। जो उस दौर में अखबारों की सुर्खियां बन गया और इनकी खूब आलोचना हुई। ये ये झूठ है। झूठ कमबख्त एक तू ही सत्यवादी पैदा हुआ है मेरे मुंह पर काली पोतने के लिए। तो कौन थे ये अभिनेता? और क्यों बेहद चार्मिंग और हैंडसम होने के बावजूद इन्हें हिंदी सिनेमा में वो मुकाम नहीं हासिल हो पाया जिसकी हर एक्टर को चाहत होती है। दिल में [संगीत] प्यार प्यार किया है एक बेवफा से और क्यों दर्जनों हिट फिल्में देने के बावजूद यह कभी सफलता का शिखर नहीं छू पाए जिसकी तमन्ना में फिरता हूं बेकरार [गाना गाने की आवाज़] बताएंगे और भी बहुत कुछ आप बस बने रहिए हमारे साथ नमस्कार दोस्तों मैं प्रियंक वाजपेयी हूं और आप देख रहे हैं डार्क बॉलीवुड तुम्हारी नजर क्यों खफा हो गई खता बखश दो। दोस्तों आज हम जिस वेटरन एक्टर की कहानी बयां कर रहे हैं वो है 1960 और 70 के दशक के जानेमाने सदाबहार अभिनेता विश्वजीत। हुए हैं तुम पे [संगीत] आशिक हम भला मानो बुरा मानो कमर पतली नजर बिजली विश्वजीत का पूरा नाम विश्वजीत देव चटर्जी था। इनका जन्म 14 दिसंबर 1936 को कोलकाता में हुआ था।
विश्वजीत के पिता आर्मी में डॉक्टर थे। मां गृहिणी थी। पिता की जॉब की वजह से इनका बचपन लाहौर, लखनऊ, मेरठ और कराची जैसे कई अलग-अलग शहरों में बीता और हिंदी भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ बन गई। विश्वजीत की मां को अभिनय में बेहद दिलचस्पी थी। इसलिए इनका झुकाव भी एक्टिंग की तरफ होने लगा। जाए आप कहां जाएंगे? ये लेकिन जब यह 13 साल के थे तब मां का निधन हो गया। फिर यह अपने मामा ऋषिकेश बनर्जी के करीब आए जो ड्रामा के संस्थापक थे और उनके साथ कई प्रोफेशनल एक्टर भी काम करते थे। विश्वजीत ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर करना भी शुरू कर दिया। इनके घर में थिएटर करने की परमिशन तो थी लेकिन फिल्मों में जाने की मनाही थी। उस दौर में इनके कई पुरुष दोस्त महिलाओं का किरदार करते थे क्योंकि तब बहुत कम महिलाएं ही फिल्मों में आती थी और इसे इज्जत की नजरों से नहीं देखा जाता था। इसलिए विश्वजीत ने घरवालों से छिपकर फिल्मों में काम करने की सोची। यह बांग्ला फिल्में थी जिनमें विश्वजीत को ज्यादातर कृष्ण के रोल मिल रहे थे। तब इनकी उम्र 20-22 साल की थी और साल 1958 में विश्वजीत ने कंगसा 1959 में डाक हरारा और साल 1960 में नूतन फसल नाम की बांग्ला फिल्मों में इन्होंने काम किया। संतान रे हेमुग्ध जननी बंगाली को माननी। लेकिन इनकी पहली फिल्म रिलीज होने से पहले ही घर में सबको जानकारी हो गई और बखेड़ा खड़ा हो गया।
आखिरकार विश्वजीत को घर छोड़कर जाना पड़ गया। [गाना गाने की आवाज़] [संगीत] इन्होंने बांग्ला फिल्मों में काम करना जारी रखा। लेकिन सिर्फ एक जैसे ही किरदार निभाने की वजह से इन्हें सब कैस्ट्रो कह कर बुलाने लगे। फिर विश्वजीत ने 1960 में माया मृग और 1961 में दुई भाई जैसी सफल बंगाली फिल्मों में अभिनय किया और इनके सितारे चमक उठे। तब विश्वजीत ने हिंदी फिल्मों का रुख किया और कोलकाता से मुंबई आ गए। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने बंगाली फिल्मों के सफल अभिनेता को सिर आंखों पर बैठाया इसलिए बेहद कम वक्त में ही विश्वजीत की झोली हिंदी फिल्मों से भर गई। हमदम मेरे मान भी जाओ [गाना गाने की आवाज़] कहना मेरे 1962 में विश्वजीत की पहली हिंदी फिल्म रिलीज हुई 20 साल बाद जिसने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान बना दिए। कहीं दीप जले कहीं दिल [संगीत] जरा देख ले आ। बीरन नाग डायरेक्टर इस फिल्म से विश्वजीत ने हिंदी सिनेमा में एंट्री की और सुनहरे पर्दे पर छा गए। बेकरार करके हमें यूं ना जाइए। [संगीत] आपको हमारी पसंद लौट आई। फिर साल 1964 में इनकी फिल्म शहनाई आई जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। एक सुर जिंदगी का साहिल है। इसके बाद विश्वजीत ने कई अच्छी फिल्में दी जिनमें मजबूर कोहरा यह रात फिर ना आएगी। बीवी और मकान, आसरा, नई रोशनी और पैसा या प्यार शामिल रहीं। आपसे मैंने [गाना गाने की आवाज़] मेरी जान मोहब्बत की। देखते ही देखते विश्वजीत हिंदी फिल्मों के तेजी से उभरते हुए अभिनेता बन गए और इनके चाहने वालों ने इन्हें किंग ऑफ रोमांस की उपाधि भी दे दी। हुए हैं तुम पे आशिक हम भला मानो [संगीत] बुरा मानो। [गाना गाने की आवाज़] इन पर फिल्माए गए गीतों की लोकप्रियता ने इनके फिल्मी करियर में चार चांद लगा दिए और इन्हें प्रसिद्धि की ऊंचाइयों पर बैठा दिया। फिर मिलोगे [गाना गाने की आवाज़][संगीत] कभी इस बात का वादा। फिल्म 20 साल बाद की सफलता के बाद विश्वजीत ने कई यादगार फिल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाई जिनमें मेरे सनम, अप्रैल फूल, दो कलियां और शरारत आदि फिल्में सुपरहिट रहीं। आप जब हैं
तो मेरे पास मेरा सब कुछ विश्वजीत को उस समय की लगभग सभी बड़ी हीरोइनों के साथ अभिनय करने का मौका मिला। रोका कई बार मैंने [संगीत] दिल की उमंग को क्या करूं मैं अपनी निगाह। खासकर आशा पारिक, मुमताज, माला सिन्हा और राजश्री के साथ इनकी रोमांटिक जोड़ी बेहद पसंद की गई। मैं झटका जुल्फ से पानी ये मोती फूट जाए। हिंदी फिल्मों में मिली सफलता के बाद भी विश्वजीत ने बंगाली फिल्म में अभिनय नहीं छोड़ा। तुम मुझे बहुत याद आती हो मां। सोचा कि मां से जरा मीठी-मीठी बातें कर लूं। यह कोलकाता आते जाते रहे और चुनिंदा बंगाली फिल्मों में अभिनय करते रहे। जिनमें सुपरहिट फिल्म चौरंगी मशहूर रही। अभिनय के अनुभव के बाद विश्वजीत ने अपनी रचनात्मकता दिखाने की सोची और निर्देशन की तरफ भी रुख किया। साल 1975 में प्रदर्शित फिल्म कहते हैं मुझको राजा के निर्माण और निर्देशन दोनों की जिम्मेदारी विश्वजीत ने ही संभाली। धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा और रेखा अभिनीत इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस भी किया। इस बीच डायरेक्शन के साथ-साथ विश्वजीत हिंदी फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं भी निभाते रहे। तुमने तो मेरे मन को विचलित कर दिया था। तुम्हारे पहले नेत्र बाण से मैं तो घायल हो गया था। [हंसी] विश्वजीत का नाता विवादों से भी इस बीच खूब रहने लगा। जिसमें एक्ट्रेस रेखा के साथ किसिंग सीन को लेकर विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि यह मामला अखबारों की सुर्खियां बन गया और यह फिल्म सेंसर बोर्ड की ओर से बैन कर दी गई। चलिए अब आपको यह बताते हैं कि क्या था पूरा माजरा। दरअसल किस्सा कुछ यूं है कि रेखा साल 1969 में फिल्म अनजाना सफर से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही थी।
तब उनकी उम्र 15 साल थी और वह फिल्मों में काम करने को लेकर बिल्कुल भी खुश नहीं थी। बल्कि अपनी मां द्वारा फोर्स किए जाने की वजह से ही काम करने को तैयार हुई थी। घर चलाने की खातिर रेखा को ना चाहते हुए भी फिल्म में काम करना पड़ा। फिल्म के प्रोड्यूसर थे कुलजीत पाल और इसे डायरेक्ट कर रहे थे राजा नवाथे। इस फिल्म में रेखा के अपोजिट हीरो थे विश्वजीत और फिल्म की शूटिंग महबूब स्टूडियो में हो रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के डायरेक्टर राजा नवाथे ने एक्टर विश्वजीत के साथ मिलकर एक किस्सिंग सीन की प्लानिंग की थी। और फिर विश्वजीत ने रेखा के साथ वो किया जिसके बाद शायद किसी भी एक्ट्रेस को इनके साथ काम करने से मना कर देना चाहिए था। जी हां, विश्वजीत ने रेखा की मर्जी के खिलाफ उन्हें बिना बताए 5 मिनट तक किस किया था। और फिर विवाद बढ़ता देख पूरे मामले से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने सिर्फ वही किया, जो डायरेक्टर ने करने के लिए कहा था। अगर इतना सब जानने के बावजूद भी आपको लगता है कि यह कोई फेक न्यूज़ रही होगी, तो आपको बता दें कि जाने-माने राइटर यासिर उस्मान ने रेखा की बायोग्राफी रेखा द अनटोल्ड स्टोरी में फिल्म के इस किसिंग सीन और उस पर मचे बवाल के बारे में विस्तार से लिखा है। किताब में उस घटना के बारे में लिखा गया है कि उस दिन रेखा और विश्वजीत के बीच एक रोमांटिक सीन फिल्माया जाना था। शूट से पहले सारी स्ट्रेटजी प्लान कर ली गई थी। कैमरे भी तैयार थे। जैसे ही डायरेक्टर ने एक्शन बोला, वैसे ही विश्वजीत ने रेखा को अपनी बाहों में भरकर किस करना शुरू कर दिया था। इस किस के बारे में रेखा को कुछ भी नहीं बताया गया था। कैमरा चलता रहा, ना तो डायरेक्टर ने कट बोला और ना ही विश्वजीत रेखा को किस करने से रुके। करीब 5 मिनट तक विश्वजीत चटर्जी रेखा को किस करते रहे और क्रू मेंबर्स सीटियां मारते रहे और तालियां बजाते रहे।
रेखा रोने लगी थी, लेकिन उन्होंने अपनी आंखें बंद की हुई थी। गिराया कि इससे पहले कि इस किस सीन को लेकर डायरेक्टर रेखा को मना पाते यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। एक मैगजीन ने रेखा और विश्वजीत चटर्जी के किसिंग सीन की तस्वीर और उसका पूरा किस्सा छाप दिया। लाइव मैगजीन के एशियन एडिशन में अप्रैल 1970 में यह किस्सा इस तरह छपा कि हर तरफ विश्वजीत के बारे में तरह-तरह की बातें बनने लगी। कहा जाने लगा कि विश्वजीत के साथ काम करने से अब कोई भी एक्ट्रेस डरेगी। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि जाने-माने अमेरिकन जर्नलिस्ट जेम्स शेफर्ड भारत आए और इस मुद्दे पर रेखा का इंटरव्यू किया तो रेखा ने भी इस विवाद पर खुलकर अपनी राय रख दी। फिर तो इस किसिंग सीन पर इतना बवाल मच गया कि लगभग हर न्यूज़ पेपर विश्वजीत की धज्जियां उड़ाने में लग गया। हंगामा इतना बढ़ गया कि फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बैन कर दिया और इसकी रिलीज़ पर पाबंदी लग गई। दरअसल तब रेखा की उम्र महज 15 साल थी। पर्दे पर एक कम उम्र की लड़की के साथ ऐसे सीन फिल्माए जाने के वजह से सेंसर बोर्ड ने इसकी रिलीज़ पर रोक लगा दी। रेखा और विश्वजीत की यह फिल्म 10 साल तक सेंसर के जाल में अटकी रही और फिर कुछ जरूरी कट के साथ साल 1979 में इसे नाम बदलकर दो शिकारी के नाम से रिलीज़ किया गया। हालांकि काफी लंबे समय के बाद इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए विश्वजीत ने कहा था कि हां यह सच है कि रेखा को इस बात की जानकारी नहीं थी। उन्होंने निर्देशक के कहने पर ऐसा किया था। मीडिया में यह जो बात लिखी गई है कि इसके बाद रेखा खूब रोने लगी थी और उन्होंने मेरे साथ फिर काम करने से इंकार कर दिया था। इसमें तनिक भी सच्चाई नहीं है। हकीकत में मैं कैसा आदमी हूं उन्हें पता है और इसके बाद भी हमने लगातार कई फिल्मों में काम किया। खैर हकीकत चाहे जो हो इस मामले में विश्वजीत की खूब फजीहत हुई थी और लंबे समय तक इंडस्ट्रीज में इस हंगामे की गूंज मौजूद रही थी। चलिए अब बात करते हैं विश्वजीत की पर्सनल लाइफ की। तो विश्वजीत का निजी जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इन्होंने दो शादियां की हैं।
इनकी पहली शादी हुई थी रत्ना चटर्जी से जिनसे इन्हें बेटे प्रसेनजीत और बेटी पल्लवी हुई। जब दोनों बच्चों की उम्र बेहद कम थी तभी यह पत्नी से अलग हो गए और दूसरी शादी रचा ली। पिता से मिली अभिनय की विरासत को प्रसेनजीत आगे ले जा रहे हैं और वह पिछले एक दशक से बंगाली फिल्मों के सुपरस्टार की कुर्सी पर विराजमान हैं। बेटी पल्लवी चटर्जी भी बंगाली फिल्म उद्योग में एक्टर हैं। हालांकि विश्वजीत की पहली पत्नी रत्ना से अलगाव के बाद उनके अपने बच्चों के साथ संबंध ठीक नहीं रहे। अब विश्वजीत मुंबई में अपनी दूसरी पत्नी ईरा चटर्जी और बेटी रायमा चटर्जी के साथ रहते हैं। पत्नी ईरा एक निर्माता निर्देशक, मंच नाटकों की लेखिका और ड्रीम थिएटर की ओनर हैं। वहीं बेटी एक डांसर और एक्ट्रेस के तौर पर अपना करियर बनाने की कोशिश कर रही है। साल 2014 में आम चुनावों में विश्वजीत ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में नई दिल्ली से चुनाव लड़ा था। लेकिन महज 909 वोट हासिल करके सातवें नंबर पर रहे। इसके बाद 2019 में भारतीय जनता पार्टी में यह शामिल हो गए। बीते रोज विश्वजीत की एक ऑटोबायोग्राफी की भी चर्चा थी जो वो खुद लिख रहे थे
और इनका पूरा परिवार मुंबई में ही रहता है। विश्वजीत ने हिंदी सिनेमा के उस दौर में काम किया जब बॉलीवुड को गोल्डन पीरियड ऑफ फिल्म कहा जाता था। हिंदी फिल्मों में विश्वजीत का सफर बेहद नपातुला और साधारण रहा। वो ना ही कभी बहुत हिट हीरोज़ की लिस्ट में शुमार किए गए ना ही फ्लॉप हीरो का टैग उन पर लगा। वो सफलता का शिखर तो नहीं छू पाए लेकिन दर्शकों के बीच छाए जरूर [संगीत] रहे और सालों तक उनका मनोरंजन करते रहे। तो दोस्तों, आपको आज का हमारा यह एपिसोड कैसा लगा? कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा। साथ ही यह भी बताइएगा कि विश्वजीत और रेखा के विवाद पर आपकी राय क्या है? आपको इस बारे में कोई और जानकारी है तो उसे भी लिखना मत भूलिएगा। इस तरह के कुछ और किस्से कहानियों को जानने के लिए आप हमारे चैनल डार्क बॉलीवुड को लाइक और सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। मैं प्रियंक वाजपेयी जल्द नए वीडियो में मिलता हूं आपसे। तब तक के लिए शुक्रिया। नमस्कार।