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हीरो बनने आए किरण कुमार को इंदिरा गांधी ने दिया वो दर्द, जिसे आज भी नहीं भूल पाए एक्टर

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फिल्मी दुनिया में कई ऐसे एक्टर्स हैं जो बनने तो हीरो आए थे लेकिन किस्मत ने उन्हें विलेन के किरदार में फिट कर दिया। हालांकि उन्होंने नाम कमाया लेकिन एक अफसोस हमेशा रह गया। ऐसा ही कुछ अजय देवगन की फिल्म भोला के एक एक्टर के साथ हुआ था। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा।

तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। फिल्मी दुनिया में बहुत से कलाकार लीड एक्टर के तौर पर कैरियर बनाने की चाहत लेकर आते हैं। कुछ को जहां मौका मिल जाता है वहीं कुछ के हाथ में फिल्में आने के बाद भी किस्मत पलट जाती है। ऐसा ही कुछ मशहूर बॉलीवुड एक्टर जीवन के बेटे किरण कुमार के साथ हुआ। बचपन से फिल्मी दुनिया देखने वाले किरण का भी सपना फिल्मी दुनिया में नाम कमाने का ही था। लेकिन वो हमेशा हीरो बनने का सपना देखा करते थे। लेकिन किस्मत ने उनके साथ ऐसा खेल खेला कि वह इंडस्ट्री के फेमस विलेन बन गए। किरण कुमार बचपन से ही शरारती थे और स्कूल कॉलेज के दिनों में काफी मस्ती किया करते थे।

उनकी शिकायतें अक्सर पिता जीवन के पास आती रहती थी। जिसे लेकर वह परेशान रहते थे। फेमस फिल्म मेकर ख्वाजा अहमद अब्बास एक बार किरण से उनकी बदमाशी को लेकर मिले थे और इसी दौरान उन्होंने किरण को अपनी एक फिल्म का प्रस्ताव दिया। जिसमें वो अमिताभ बच्चन को लेना चाहते थे। लेकिन डेट्स ना होने के कारण अमिताभ ने फिल्म के लिए इंकार कर दिया था। किरण कुमार के लिए अब्बास की 1971 में आई फिल्म दो बूंद पानी खांस बन गई और हीरो के तौर पर उन्हें देखा जाने लगा। किरण को दूसरी फिल्म जोगिंदर सैली ने दी बंदिया और बंदूक जो साल 1972 में आई। इसके बाद उनकी फिल्म जंगल में मंगल आई जो हिट रही। किरण को अपना हीरो बनने का सपना पूरा होता दिख रहा था और कई फिल्म मेकर्स ने उन्हें अपनी फिल्मों में साइन कर लिया था।

किरण ने 1973 और 74 के बीच एक साथ छह फिल्में साइन की और यह सभी फिल्में कुछ ही समय के अंतराल में बनकर तैयार भी हो गई थी। किरण की जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा था और उनकी छह फिल्मों की रिलीज डेट भी निश्चित हो गई थी। लेकिन इसी बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को इमरजेंसी की घोषणा कर दी और इस कारण फिल्मों पर भी रोक लगा दी गई। इसमें किरण की वो छह फिल्में भी लपेटे में आ गई जो उन्हें इंडस्ट्री का सुपरस्टार बना सकती थी। बस यहीं से उनका सपना टूट गया और एक वक्त ऐसा आया कि किरण के पास कोई काम नहीं था।

आशा पारेख ने एक दफा अपनी गुजराती फिल्म के लिए किरण को विलेन के किरदार का प्रस्ताव दिया। डूबते करियर के लिए किरण ने इसके लिए हामी भर दी और यहीं से वो नकारात्मक भूमिका की तरफ मुड़ गए। इसके बाद वह बॉलीवुड में 1987 में आई खुद गर्ज में विलिलेन के तौर पर नजर आए। वहीं 1988 में तेजाब में जब उन्होंने लोटिया पठान का किरदार निभाया तो उनके लिए बॉलीवुड में नए रास्ते खुल गए। हाल ही में किरण अजय देवगन की फिल्म भोला में भी नजर आए थे। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर। हम्म।

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