एक घर, दो एक्स्ट्रा फ्लोर्स और सीधा सुप्रीम कोर्ट। लेकिन असली कहानी सिर्फ शाहरुख खान के घर की नहीं है। मुंबई के बैंद्रा में समुंदर के किनारे बना मन्नत सिर्फ शाहरुख खान का घर नहीं बल्कि फैंस के लिए एक लैंडमार्क है। हर रोज हजारों लोग इस बंगलों के बाहर सिर्फ एक झलक पाने के लिए खड़े रहते हैं।
लेकिन इस बार चर्चा शाहरुख खान की नहीं बल्कि उनके घर की रेनोवेशन की थी। सवाल था क्या मन्नत के रनोवेशन में एनवायरमेंटल रूल्स फॉलो किए गए थे? यहीं से ये पूरा लीगल डिस्प्यूट शुरू हुआ।
जनवरी 2025 में मन्नत के रिनोएशन के लिए कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन सीआरजी क्लीयरेंस मिल गया था। इस अप्रूवल के बाद बंगलो में सेवंथ और एट्थ फ्लोर बनाने की परमिशन भी दे दी गई। अप्रूव्ड प्लान के मुताबिक बिल्डिंग बेसमेंट से लेकर एथ फ्लोर तक जा सकती है और इसकी हाइट 37 मीटर से ज्यादा होगी।
लेकिन एनवायरमेंटल एक्टिविस्ट संतोष डोंटकर ने इस अप्रूवल को चैलेंज कर दिया। उनका कहना था कि किसी भी प्रोजेक्ट की कॉस्ट अगर 5 करोड़ से ज्यादा हो तो सिर्फ सीआरजी क्लीयरेंस काफी नहीं होता। ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज से एनवायरमेंटल क्लीयरेंस भी जरूरी होता है। पिटिशनर के आरोप थे कि अप्रूवल लिया ही नहीं गया। लेकिन कंट्रोवर्सी सिर्फ इतनी ही नहीं थी। पिटिशनर ने यह भी दावा किया कि जिस प्लॉट पर मन्नत बना है, उसे पहले डेवलपमेंट प्लान में आर्ट गैलरी के लिए रिजर्व किया गया था।
बाद में इस कंडीशन को हटा दिया गया। लेकिन उनके मुताबिक यह प्रोसेस प्रॉपर परमिशन के बिना हुआ। इसके अलावा उन्होंने एलगेशन लगाया कि कंस्ट्रक्शन के दौरान दो हेरिटेज स्ट्रक्चर को भी बिना जरूरी अप्रूवल के डिमोलिश किया गया। यानी उनके हिसाब से सिर्फ रेनोवेशन नहीं पूरी अप्रूवल प्रोसेस ही सवालों के घेरे में है। यह मामला पहले एनजीटी पहुंचा यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल। [संगीत] सितंबर 2025 में एनजीटी ने पिटीशन डिसमिस कर दी।
इसके बाद पिटिशनर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और एनजीटी के फैसले को चैलेंज किया। सुप्रीम कोर्ट में पिटिशनर के लॉयर ने कहा कि रूल्स को इग्नोर नहीं किया जा सकता। चाहे सामने देश का कितना ही बड़ा एक्टर क्यों ना हो। लेकिन हियरिंग के दौरान सुप्रीम कोर्ट का नजरिया कुछ और था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पिटिशनर की नियत पर ही सवाल उठा दिए। कोर्ट ने कहा हमें आपकी बोना फाइट्स पर सीरियस डाउट है और जब हमें किसी पिटीशन की नियत पर ही डाउट हो जाए तो हम उसे एंटरटेन नहीं करेंगे।
जब हेरिटेज स्ट्रक्चर वाले इशू दोबारा उठाया गया। बेंच ने भी साफ कहा कि पुराने मुद्दों को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। पिटिशनर की यह रिक्वेस्ट भी ठुकरा दी गई कि मैटर को दोबारा एंटीटी भेजा जाए। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट [संगीत] ने अपील डिसमिस कर दी। इसका मतलब यह हुआ कि मन्नत के रनोवेशन के खिलाफ यह लीगल चैलेंज फिलहाल खत्म हो गया और सीआरजी क्लीयरेंस बरकरार रहा।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक सिर्फ शाहरुख खान या मन्नत नहीं यह केस दिखाता है कि जब किसी सेलिब्रिटी का नाम किसी लीगल मैटर से जुड़ता है तो हर अप्रूवल और हर फैसला नेशनल डिस्कशन का हिस्सा बन जाता है। और शायद इसीलिए आज भी एक सवाल बाकी है। क्या सेलिब्रिटी होने की वजह से हर प्रोजेक्ट को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी फेस करनी चाहिए या कानून के सामने हर इंसान की पहचान सिर्फ एक सिटीजन की होनी चाहिए