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युवाओं को मैसेज देते वक्त ये क्या बोल गए CM योगी?मचा हड़कंप!

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मित्रों हम सबको याद रखना होगा कि भविष्य तभी सांझा होता है जब अवसर सांझा होते हैं और अवसर तब साझा होते हैं जब उस सोच की कोई सरकार हो और देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य होने के नाते हमें इस बात पर गौरव की अनुभूति होती है कि देश के अंदर ही नहीं बल्कि दुनिया के अंदर सबसे ज्यादा युवा वर्क फोर्स हमारे पास है।

और इस युवा फोर्स को अगर कोई मुझसे कहता है यह आपके लिए क्या चैलेंज नहीं है? मैं कहता हूं नहीं। यूपी की यह उपलब्धि है कि अपनी युवा शक्ति के बल पर यह हमारी डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में हम इसका उपयोग करते हैं। हां, इस स्केल को स्किलिंग के साथ जोड़ के हम यूपी की इकोनमी को अब आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। और आज उसके परिणाम हम सबके सामने आए हैं।

2017 आप में से जितने युवा हैं तब आप अपने मां-बाप के साथ बच्चे रहे होंगे। यानी 10 वर्ष पहले स्वाभाविक रूप से मां-बाप के ऊपर पूरी तरह आश्रित ना वर्तमान की चिंता ना भविष्य की चिंता। और हर मां-बाप अपने बच्चे को किसी भी अपशकुन से बचा बचाती है। लेकिन दुर्भाग्य से 2017 के पहले तत्कालीन राज्य सरकार ही प्रदेश की सबसे बड़ी अपशकुन बन चुकी थी।

युवाओं के लिए शिक्षा चौपट थी। कौशल विकास की कोई व्यवस्था नहीं थी। मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ युवाओं को जोड़ने के लिए कोई भी प्रयास नहीं थे। स्कूली शिक्षा हो या कोई भी अभियान ये सभी नदारद थे। असुरक्षा का वातावरण था।

ना बेटी सुरक्षित थी, ना व्यापारी सुरक्षित था। युवा के सामने पहचान का संकट था। अगर किसी ने कोई डिग्री ले ही ली कहीं से कोई जाकर के प्रयास करके कोई डिग्री कोई डिप्लोमा कोई सर्टिफिकेट प्राप्त कर भी दिया तो यूपी के अंदर तो काम नहीं था। यूपी के बाहर जाता था तो यूपी के नाम पर लोग वैसे चिढ़ते थे। इसलिए यूपी के बाहर कोई सम्मान भी नहीं था। यह पहचान का संकट था।

सरकारी नौकरी पर एक खानदान का अधिकार था। या तो नौकरी निकलती नहीं थी। नौकरी निकल गई तो चाचा भतीजे की जोड़ी वसूली के लिए भी निकल पड़ती थी और बिना पैसे के कुछ काम होता नहीं था। न्यायालय को स्टे करना होता था। उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे करके बीमारू राज्य होता गया। बीमारू यूपी नहीं हुआ था। तत्कालीन सरकार की मानसिकता बीमार थी।

उनके कृत बीमारू मानसिकता के प्रतीक थे। युवाओं के लिए नौकरी नहीं। जो सरकार अपने युवा की उपेक्षा करती हो, अपने कारीगर को प्लान करने के लिए मजबूर करती हो, अपने अन्नदाता किसान का अपमान करती हो, उस सरकार के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। सरकार नहीं वह सिस्टम के नाम पर एक कलंक है और 2017 के पहले यही होता था

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