एक जो 62 साल बाद भी है पहेली। महज 39 की उम्र में सिनेमा की दुनिया से छीन गया सबसे चमकदार सितारा। की दूसरी औरत से मोहब्बत और बीवी बच्चों से दूरी। जीते जी नर्क बनी हिंदी सिनेमा के सबसे महान फिल्म मेकर की जिंदगी। के में बीवी को दी , अगले दिन आई की मनहूस खबर।
इंडस्ट्री में मचाहड़कंप। यूं तो हर अपने साथ दुखों का सैलाब लाती है। लेकिन कुछ अपने पीछे ढेरों सवाल छोड़ जाती हैं। और ऐसा ही कुछ हुआ था गुरुदत्त के साथ। गुरुदत्त को गुजरे आज 62 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है।
लेकिन इतना लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी उनकी मौत के किस्से को लोग भुला नहीं पाए हैं। गुरुदत्त की बेवख़्त मौत आज भी पहेली है जिसके जवाब उनके चाहने वालों को कभी नहीं मिले।
50 के दशक में गुरुदत्त हिंदी सिनेमा के सबसे महान फिल्म मेकर्स में से एक थे, जिन्होंने इंडस्ट्री को कई कल्ट क्लासिक फिल्में दी, लेकिन उनकी निजी जिंदगी दुखों से भरी रही। महज 39 साल की उम्र में गुरुदत्त का निधन हुआ था। वो अपने कमरे में पाए गए थे।
किसी ने कहा कि नाकाम मोहब्बत, शादीशुदा जिंदगी में दरार और बेटी से दूरी से तंग आकर उन्होंने खुद मौत को गले लगा लिया। तो किसी ने कहा कि उनकी मौत एक महज हादसा थी। उनके जाने के साथ ही उनकी आखिरी इच्छा भी हमेशा हमेशा के लिए अधूरी रह गई। वो इच्छा थी अपनी बेटी को आखिरी बार देखना। जी हां, गुरुदत्त अपनी ढाई साल की बेटी से मिलना चाहते थे।
उसे देखना चाहते थे, लेकिन पारिवारिक कलह ने उन्हें और उनकी पत्नी गीता दत्त को इतना दूर कर दिया था कि गुरुदत्त ने मौत को गले लगा लिया। बता दें कि गुरुदत्त ने दिग्गज सिंगर गीता दत्त से शादी की थी। एक तरफ गीता जहां बॉलीवुड का बड़ा नाम थी, वहीं गुरुदत्त स्ट्रगल कर रहे थे। दोनों की शादी कुछ साल तक ही चली। लेकिन फिर धीरे-धीरे गीता और गुरुदत्त के बीच दूरियां बढ़ने लगी। इन दूरियों की एक वजह वहीदा रहमान को भी कहा गया। कहा जाता है कि फिल्म प्यासा की शूटिंग के दौरान गुरुदत्त और वहीदा रहमान करीब आ गए थे।
जिसके बाद गुरुदत्त की शादी में भी दरार आ गई थी। गुरुदत्त का घर टूटते देख वहीदा रहमान ने उनसे दूरियां बढ़ा ली थी। लेकिन ना गुरुदत्त वहीदा रहमान को भुला पाए और ना ही गीता दत्त अपने पति के लिए धोखे को। गुरु द अनसटिस्फाइड स्टोरी किताब में इस बात का जिक्र है कि गुरु की लाइफ में महिदा के आने के बाद गीता ने कहा था जब से वह हमारी जिंदगी में आई है तब से जिंदगी नर्क हो गई है। गीता दत्त अपने तीनों बच्चों को लेकर घर छोड़कर चली गई थी। गुरुदत्त के करीबी दोस्त अबार अलवी के मुताबिक 9 अक्टूबर को गुरुदत्त और गीता के बीच फोन पर एक बड़ा झगड़ा हुआ था।
गुरुदत्त अपनी बेटी से मिलना चाहते थे। लेकिन गीता दत्त ने बेटी को उनसे मिलवाने से इंकार कर दिया था। कहते हैं कि तब गुस्से में आकर गुरुदत्त ने गीता से फोन पर अपने आखिरी शब्द कहे थे कि अगर तुमने मुझे बेटी का मुंह नहीं देखने दिया तो तुम अब सीधा मेरी लाश ही देखोगी।
कहा जाता है कि गीता से झगड़े के बाद उस रात गुरुदत्त ने खुद को बुरी तरह से नशे में डुबो लिया था। और फिर अगले दिन यानी 10 अक्टूबर 1964 की सुबह जब उनके कमरे का दरवाजा खुला तो लोग सन रह गए। गुरुदत्त अपने बेड पर बेजान पड़े थे। उनके बेड के किनारे एक गिलास रखा था। साथ ही बेड के पास उन्हें नींद की गोलियों की एक शीशी मिली। जिसके बाद कहा गया कि जिंदगी की परेशानियों से तंग आकर गुरुदत्त ने खुद अपनी जिंदगी को खत्म कर लिया।