राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर का। दरअसल राजेश खन्ना की कहानी शर्मिला टैगोर सुनाने वाली हैं। सालों पहले एक लेख शर्मिला टैगोर ने लिखा था और उस लेख में उन्होंने राजेश खन्ना के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई थी जो शायद आपको जाननी चाहिए। और हुआ कुछ यूं कि राजेश खन्ना का जो डाउनफॉल आया वो डाउनफॉल क्यों आया? यह राजेश खन्ना को करीब से जानने वाली शर्मिला टैगोर ने बताया था। दिवंगत एक्टर राजेश खन्ना को भारत के पहले सुपरस्टार का दर्जा हासिल है।
उनके व्यक्तित्व, खूबसूरती और करियर के शुरुआती दिनों में फिल्मों के चुनाव ने उन्हें रातोंरात ऐसी कामयाबी दिलवाई कि उसे आज तक कोई दोहरा ही नहीं पाया। यानी कि बैक टू बैक 15 सुपरडुपर हिट फिल्में राजेश खन्ना के बाद किसी दूसरे एक्टर ने नहीं दी। राजेश खन्ना के फैंस की फैन फॉलोइंग भी अच्छी खासी थी। खासकर महिलाओं के बीच उनका हेयर स्टाइल एक ट्रेंड बन गया और काका लगभग सनसनी बनकर छा गए।
दुर्भाग्य से राजेश खन्ना का पतन उनकी सफलता जितनी ही तेजी से हुआ। यानी कि जितनी तेजी से राजेश खन्ना कामयाब हुए थे, उतनी ही तेजी से या यूं कहिए कि उतने ही कम समय में उनके करियर का ग्राफ नीचे भी आया और कई फिल्मों में उनकी सह कलाकार रही शर्मिला टैगोर ने बताया कि किस तरीके से सुपरस्टार राजेश खन्ना अपनी सफलता को समझ नहीं पाए।
शर्मिला टैगोर ने राजेश खन्ना की जीवनी डार्क स्टार द लोनलीनेस ऑफ बीइंग राजेश खन्ना की प्रस्तावना लिखी। और यह जीवनी गौतम चिंतामणि की लिखित और रूपा पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित है और इस प्रस्तावना में शर्मिला टैगोर बताती हैं उनके सह कलाकार अपनी प्रसिद्धि को क्यों बरकरार नहीं रख पाए जो मुकाम राजेश खन्ना ने हासिल किया था वो उस पर बहुत समय तक टिक क्यों नहीं पाए यह बात शर्मिला टैगोर ने बताई और उन्होंने किताब में लिखा कि अपनी दोस्ती की तरह काका ने अपने स्टारडम को भी नहीं बख्शा और उसे अपनी मुट्ठी से फिसलने दिया उन्होंने यह नहीं देखा कि दर्शक बदल रहे थे और उनके रोल्स पुराने होते जा रहे थे। काका या तो खुद को बनाए रखने के लिए खुद को नया रूप नहीं दे पाए या उन्होंने खुद को नया रूप दिया ही नहीं।
और इतना ही लोग उनका मजाक तक उड़ाने लगे। राजेश खन्ना वही पुराने किरदार में थे और पीढ़ी बदल रही थी। लोगों की चॉइस बदल रही लेकिन राजेश खन्ना एक ही तरह के रोल कर रहे थे। राजेश खन्ना दोस्तों के लिए बहुत करते थे। शर्मा टैगोर ने यह भी देखा कि राजेश खन्ना अपने कुछ दोस्तों के साथ बहुत ज्यादा उदार थे। वो उन्हें महंगे तोहफों से लात देते थे। यहां तक कि उन्हें फ्लैट तक भी दे देते थे। आराधना में राजेश खन्ना के साथ काम कर चुकी शर्मिला टैगोर आगे लिखती हैं कि लेकिन बदले में वह बहुत ज्यादा उम्मीदें रखते थे जिससे रिश्तों में तनाव आ गया और शर्मिला टैगोर ने पूरी ईमानदारी से लिखा कि उन्हें सबके चहेते राजेश खन्ना की कौन सी बात ना पसंद थी.
शर्मिला टैगोर लिखती हैं लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से उनकी काम पर देर से आने की आदत से बहुत परेशानी थी मैं सुबह 8:00 बजे स्टूडियो जाती थी और रात 8:00 बजे तक अपने परिवार के साथ वापस पहुंच जाना चाहती थी। लेकिन यह नामुमकिन था क्योंकि काका सुबह 9:00 बजे की शिफ्ट के लिए दोपहर 12:00 बजे से पहले कभी नहीं आते थे। और हम कभी भी समय पर काम खत्म नहीं कर पाते थे। नतीजतन पूरी यूनिट मुझ पर ओवरटाइम करने और शेड्यूल पूरा करने का दबाव बनाती थी। यह आम बात हो गई थी और क्योंकि राजेश खन्ना के साथ मेरी कई फिल्में थी.
इसलिए मुझे बहुत परेशानी होती थी। शर्मिला टैगोर आगे लिखती हैं इसलिए हमारी जोड़ी इतनी सफल होने के बावजूद मैंने दूसरे एक्टर्स के साथ ज्यादा से ज्यादा काम करना चुना। शायद राजेश खन्ना को भी लगा होगा कि एक ही अभिनेत्री के साथ इतनी सारी फिल्में करना अच्छा नहीं है और ऐसा करने से नीरस लगने का खतरा भी रहता है। खैर जो भी हो हमने पाया कि हम साथ में कम ही फिल्में कर रहे हैं और मुझे सच में स्वीकार करना होगा कि यह एक बड़ी राहत की बात थी क्योंकि अब सेट पर जिस हीरो के साथ मैं काम किया करती थी चाहे वो जो भी हो वो देरी से नहीं आते थे और देरी से आते थे तो कम से कम इतनी देरी से नहीं आते थे जितना राजेश खन्ना लेट आते थे राजेश खन्ना और शिवनाथ टैगोर की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित ऑन स्क्रीन जोड़ियों में से एक 1960 और 1970 के दशक के अंत में कई यादगार फिल्में उनकी केमिस्ट्री ने आराधना, अमर प्रेम, दाग, आविष्कार जैसी क्लासिक फिल्मों में काम किया और आज भी यह फिल्में 50 55 बरस बीतने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे वैसी की वैसी ही हैं।
और आज भी दर्शक पीढ़ी बदलने के बाद भी पसंद कर रहे हैं। यह खासियत थी राजेश खन्ना की और यह खासियत थी शर्मिला टैगोर की।