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सिया के,घर की तलाशी दौरान मिले बड़े सबूत !जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे

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केतन अग्रवाल केस में पुणे पुलिस सिया गोयल के घर तलाशी के लिए पहुंची। पुलिस हिरासत खत्म होने से पहले अहम सबूत जुटा रही है। लाइ की भी तैयारी है। तो आखिर केतन अग्रवाल की जांच कहां तक पहुंची है? क्या है ताजा अपडेट? सब कुछ आपको मिलेगा इस वीडियो में। चर्चित केतन अग्रवाल केस में अब जांच अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुंच गई है।

आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत खत्म होने वाली है। ऐसे में पुणे पुलिस हर उस सबूत को जुटाने में लगी है जो इस की गु्थी पूरी तरह से सुलझा सके। इसी कड़ी में पुलिस सोमवार को सिया गोयल को उसके घर लेकर पहुंची जहां करीब डेढ़ घंटे तक तलाशी और पंचनामा की कारवाई चली। पुलिस की टीम सिया को लेकर उसके घर पहुंची और पूरे घर की बारीकी से जांच की। अधिकारियों ने कई कमरों की तलाशी भी ली और कुछ अहम सामान भी बताया जा रहा है कि जब्त किए गए हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि बरामद जो सामान किया गया है उसमें क्या-क्या शामिल है।

लेकिन माना जा रहा है कि यह जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस कारवाई के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत करते हुए सिया के पिता ने कहा है कि उन्होंने पुलिस की कारवाही में कोई दखल नहीं दिया। उनका कहना था कि पुलिस अपना काम करने आई थी और करीब सवा से डेढ़ घंटे तक घर में रही। उन्होंने कहा कि मैं किसी से नहीं मिला।

मेरी तबीयत ठीक नहीं है। डॉक्टर ने आराम करने की सलाह दी है। पुलिस ने उनसे कुछ पूछताछ नहीं की। वह अपने कमरे में ही थे और पुलिस अपना काम करके चली गई। सिया के पिता ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी बेटी से भी कोई बातचीत नहीं की और ना ही पुलिस कारवाई के दौरान उससे मुलाकात की। पुलिस का दावा है कि लोहागढ़ किले पर दोनों आरोपियों के साथ क्राइम सीन रिकक्रिएशन कराया जा चुका है।

जांच के दौरान कई अहम जानकारियां भी सामने आई है। हालांकि अभी भी कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका स्पष्ट जवाब पुलिस के पास नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हत्या की पूरी साजिश में किसकी भूमिका सबसे अहम थी? क्या पूरा प्लान सिया ने बनाया था या फिर चेतन चौधरी ने? या फिर दोनों ने मिलकर हर कदम की योजना बनाई थी। पुलिस इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है और जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कई अहम बिंदुओं पर दोनों आरोपियों के बयान एक दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। कुछ डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी पूरी तस्वीर साफ नहीं कर पा रहे और इसी वजह से पुणे पुलिस ने अदालत से दोनों आरोपियों का लाइट डिटेक्टेड टेस्ट कराने की अनुमति मांगी है।

पुलिस का कहना है कि इस वैज्ञानिक जांच से हत्या की साजिश घटना स्थल पर दोनों की भूमिका और हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिशों से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस के सामने ऐसे खुलासे भी हो रहे हैं जिसने इस पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है।

पुलिस का दावा है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर हुई हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं थी बल्कि पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस की पड़ताल में यह भी सामने आया कि की साजिश वारदात से एक दिन पहले ही रची गई थी। आरोपी की 17 जून की शाम को पुणे के कोडवा इलाके के एक कैफे में आरोपी सिया और चेतन चौधरी ने मुलाकात की और हत्या की पूरी प्लानिंग तैयार की थी।

यहां पर कथित तौर पर कोडवर्ड तय किए गए और वारदात को अंजाम देने की पूरी स्ट्रेटजी रणनीति बनाई गई और पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना वाले दिन केतन अग्रवाल को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में उसकी जान जाने वाली है। जांच में यह भी सामने आया कि जैसे ही तीनों किले के उस हिस्से में पहुंचे जहां गहरी खाई थी। सियान ने पहले से तय संकेत देने के लिए जमीन पर वह बैठ गई। यही इशारा मिलते ही पीछे चल रहा चेतन चौधरी आगे बढ़ा और केतन को पीछे से धक्का देकर के गहरी खाई में गिरा दिया।

पुलिस का कहना है कि केतन को संभलने का या बचने का कोई मौका नहीं मिला और जांच अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सिया और चेतन ने शुरुआत में एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की। चेतन ने पहले यह दावा किया कि वह किले पर मौजूद था लेकिन जिस जगह से केतन को धक्का दिया गया वह वहां पर नहीं गया था और उसे घटना की कोई जानकारी नहीं है।

पूछताछ के दौरान पुलिस ने आरोपियों से यह भी सवाल किया कि अगर दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे तो उन्होंने घर से भागकर शादी क्यों नहीं कर ली? पुलिस के अनुसार आरोपियों ने जवाब दिया कि ऐसा करने से दोनों परिवारों की बदनामी होती। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची। जांच में यह भी सामने आया कि 18 जून की घटना पहली कोशिश नहीं थी। पुलिस का दावा है कि इससे पहले भी सिया दो बार केतन को लोहागढ़ किले पर लेकर गई थी। जहां उसे मारने की कोशिश की गई थी। लेकिन दोनों ही प्रयास असफल रहे। और तीसरी बार आरोपियों ने पूरी तैयारी के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। लेकिन जरा सोचिए सोची समझी साजिश के तहत केतन अग्रवाल को धक्का देकर के मौत के घाट उतार दिया गया। सिर्फ इसलिए क्योंकि यदि वह घर से भाग जाते तो दोनों परिवारों की बदनामी होती। लेकिन अब वो कानून की सलाखों के पीछे हैं।

उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। देखने वाली बात होगी कि केतन अग्रवाल को कब तक इंसाफ मिलता है और सिया और चेतन चौधरी के खिलाफ आगे किस तरह से एक्शन लिया जाता है और जिस तरह के रोजाना खुलासे होते हैं अब कौन सा नया राज खुलेगा।

सबकी नजरें इस पर टिकी हुई है। इस पूरे हत्याकांड को लेकर के आपको क्या लगता है? लगातार इस तरह के मामले सामने क्यों आ रहे हैं कि प्रेमी के साथ मिलकर के मंगेतर को अपने पतियों को के घाट उतार दिया जा रहा है।

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