थालापति विजय ने अपने स्टारडम के दम पर वह कर दिखाया जिसके बारे में कोई सोच नहीं रहा था। मुश्किल से 2 साल पहले राजनीति में आए और सीधे मुख्यमंत्री बन गए। बस जरा सी चूक हो गई कि बहुमत से कम 108 पर टीवी की रह गई। फिर भी विजय ने अलायंस का जाल बिछाकर सरकार अब मजबूती से वह चला रहे हैं। विजय स्टालिन को हराकर सरकार में आए। स्टालिन ने विजय को जीत की बधाई तो दी लेकिन यह वादा भी किया था कि वह अभी सरकार चलने देंगे।
लेकिन अब जो हुआ उसने सनसनी फैला दी है। सीएम सी जोसेफ विजय की नई सरकार को गिराने की एक बहुत बड़ी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। चेन्नई पुलिस ने ₹35 करोड़ की रिश्वत और होस्ट ट्रेनिंग के आरोप में तीन लोगों को ध दबोचा है और इस पूरे खेल के पीछे डीएमके के बाहुबली नेता वी सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार का नाम सामने आ रहा है। कैसे 2 महीने पुरानी विजय सरकार को पलटने का यह चक्रव्यूह रचा गया। स्टालिन इसके पीछे क्या कहते रहे और कौन है वह सेंथिल बालाजी जो इस वक्त पूरी स्क्रिप्ट के विलिअन बनकर उभरे हैं।
कहानी की शुरुआत विधानसभा चुनाव नतीजों से होती है। जहां विजय की पार्टी टीवी ने 108 सीटें जीतकर डीएमके एआईएडीएमके के दशकों पुराने किले को ढहा दिया। जब मई 2026 में विजय सीएम बनने जा रहे थे तब एम के स्टालिन ने कहा था कि वह राज्य में कोई संवैधानिक संकट नहीं चाहते। उन्होंने कहा था कि हम विजय को सरकार बनाने देंगे और 6 महीने तक उन्हें बिना परेशान किए सिर्फ देखेंगे। आगे स्टालिन ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अपने उन पुराने सहयोगियों कांग्रेस और बीसीके को भी विजय का समर्थन करने से नहीं रोका था।
ऐसा इसलिए कि तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन ना लगे और बीजेपी को पिछले दरवाजे से सत्ता में आने का मौका ना मिले। विजय की सरकार को भरे 6 महीने भी नहीं बीते लेकिन पर्दे के पीछे चल रही बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि पर विजय की सरकार गिनाने की साजिश रचने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे आरोप इसलिए कि उनका ही एक करीबी विजय की सरकार गिराने की साजिश में पकड़ा गया है। सरकार बनाने के बाद अलायंस की एकजुटता को आगे ले जाने के लिए विजय जब मीटिंग कर रहे थे तब चेन्नई में बड़ा भांडा फूटा।
उथंग राई से टीवीके के विधायक डॉक्टर एन इलिया राजा को कुछ दिन पहले थिरुक रासू नाम के एक शख्स का फोन आया। कॉलर ने खुद को एक पोलिंग एजेंसी का हेड बताया और एक बड़ी राजनीतिक पार्टी की तरफ से सीधे ₹35 करोड़ की भारी भरकम रिश्वत का ऑफर भी दिया। शर्त सिर्फ इतनी थी कि विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के खिलाफ विपक्ष जो अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला है विधायक उसके पक्ष में वोट कर दे या पाला बदल ले। जब इलया राजा ने इस डील को लात मार दी तो उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी गई। विधायक की शिकायत पर चेन्नई पुलिस ने जाल बिछाया और थिना वुकरासु नरेश और थियाग राजन नाम के तीन गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में जो सच सामने आया उसने पूरी डीएमके को हिलाकर रख दिया।
गिरफ्तार आरोपी नरेश की मुलाकात चेन्नई में डीएमके के गद्दावर नेता और कोयंबटूर दक्षिण से विधायक वी सेंथल बालाजी के भाई वी अशोक कुमार से हुई थी। कॉल रिकॉर्ड से साफ हो गया कि यह पूरा ऑपरेशन सेंथल बालाजी और उनके भाई के सीधे निर्देशों पर चलाया जा रहा था। पुलिस ने अब बालाजी के भाई अशोक कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। टीवी के का आरोप है कि स्टालिन और उदयनिधि के इशारे पर पिछले 40 दिनों से उनके 10 से 15 विधायकों को खरीदने और सरकार गिराने की कोशिश हो रही थी। विधायकों को 10 से ₹50 करोड़ तक के ऑफर दिए गए और मना करने पर धमकाया गया।
स्टालिन और उदयनिधि इस पूरी साजिश के पीछे हैं। सेंथिल बालाजी को तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा दल बदलू या राजनीतिक अवसरवादी माना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एआईएडीएमके से की। जयललिता सरकार में परिवहन मंत्री रहे। जयललिता के निधन के बाद वह टीटीवी दिनकरण की अम्मा मक्कड़ मुनेत्र कजगम में गए और फिर पाला बदलकर डीएमके में शामिल हो गए। जहां स्टालिन सरकार में बिजली और उत्पाद शुल्क मंत्री बने। 2014-15 में जब वह जलेतर सरकार में परिवहन मंत्री थे तब उन पर नौकरी के बदले नोट लेने का गंभीर आरोप लगा। ईडी ने उन्हें जून 2023 को गिरफ्तार किया था। वो 15 महीने से ज्यादा वक्त तक जेल में रहे जिसके बाद उन्हें जमानत मिली थी। तब भी स्टालिन ने उन्हें मंत्री बनाए रखा। जब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने की वार्निंग दी तब जाकर सरकार से इस्तीफा दिया।
मतलब जेल जाने के बाद भी स्टालिन बालाजी एक दूसरे के लिए लॉयल बने रहे। राजनीतिक करियर में स्टालिन के लिए इतना कुछ करने के बाद भी सेंथिल बालाजी ने फिर स्टालिन के लिए लॉयल्टी साबित करने का जोखिम लिया। सेंथिल बालाजी कोयंबटूर के बाहुबली कहे जाते हैं। पश्चिमी तमिलनाडु में उन्हें डीएमके का सबसे बड़ा संकटमोचक और मनी मसल को मैनेज करने वाला माना जाता है।
चुनाव मैनेजमेंट और विरोधियों को नापने साधने में बेजोड़ महारथ के लिए जाने जाते हैं। सितंबर 2025 में कुरूर में विजय की जिस रैली में भगदड़ से 41 लोगों की हुई उसमें भी टीवी ने सेंथिल बालाजी का ही हाथ माना। जेल से बाहर आते ही सेंथिल बालाजी एक बार फिर कैश और पॉलिटिक्स के उसी पुराने खेल में सक्रिय हो गए हैं जिसने उन्हें पहले सलाखों के पीछे पहुंचाया था। 35 करोड़ के इस वीडियो और कॉल रिकॉर्ड्स ने एमके स्टाइलिन की राजनीति को बैकफुट पर धकेल दिया है।
अब देखना यह है कि कानून के शिकंजे से सेंथल बालाजी खुद को और अपने भाई को कैसे बचा पाते हैं और सीएम विजय इस हॉर्स ट्रेडिंग को कितनी सीरियसली लेते हैं।