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8 लोगों को मारने वाला ‘साइको’ हर अर्थी को देता था कंधा, फिर जो करता था आपकी आंखे फटी रह जाएंगी !

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गांव में जब किसी की अर्थी उठती है तो सबसे पहले उसका कंधा पहुंचता था। सबसे ज्यादा आंसू उसी की आंखों में होते थे। मरने वाले की बेबस मां के सिर पर हाथ रखकर वो कहता था हिम्मत रखो माई सब ऊपर वाले की मर्जी है और वो मां उसके सीने से लगकर फूट-फूट कर रोती आंसुओं से उसका कुर्ता भीग जाता।

लेकिन उस बदकिस्मत मां को क्या पता था कि जिस सीने से लगकर वो रो रही है उसी सीने के पीछे उसके बेटे की की कहानी लिखी गई थी और उससे भी डरा डरावना सच यह है कि वो आदमी उसका सिर सहलाते हुए भीतर ही भीतर सुकून महसूस करता था। एक और काम के पूरा होना का सुकून।

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव में मौत किसी बीमारी बनकर नहीं बल्कि एक इंसान का रूप धरकर घूम रही थी। एक ऐसा इंसान जो सामने से आता मुस्कुराता नमस्ते करता किराने की दुकान चलाता शादियों में दिल खोलकर नाचता और दुख सुख में सबसे आगे खड़ा रहता लेकिन पीठ पीछे किसी के गिलास में चुपके से घोल देता। जरा सोच कर देखिए। आपके पड़ोस का वो सीधा-साधा दुकानदार जिससे आप रोज नमक तेल खरीदते हैं। जो आपकी बेटी की शादी में बढ़-चढ़कर काम करता है। आपके बीमार पिता को कंधे पर लादकर अस्पताल ले जाता है।

वही आदमी अगर आपकी का सौदागर निकल जाए तो इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा यही है। कातिल किसी अंधेरे में नहीं छिपा था। वो आपके बगल में बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहा था। आपका हाथ थामे मन ही मन बर्फ जैसे ठंडे दिमाग से तय कर रहा था कि अगली अर्थी किसकी उठेगी। 4 महीने आठ लाशें और एक ऐसा चेहरा जिसे पूरा गांव भगवान जैसा भला आदमी समझता था। यह खौफनाक कहानी है राम सहाय जयसवाल की। तारीखों की यह लिस्ट किसी अस्पताल का रजिस्टर नहीं बल्कि एक छोटे से गांव के श्मशान का हिसाब था।

जहां एक चिता की राख ठंडी भी नहीं होती थी। अगली लकड़ी सज जाती थी। लोग हैरान थे, परेशान थे। गांव में अफवाहें उड़ने लगी। कोई कहता कोई रहस्यमई बीमारी है तो कोई कहता पानी जहरीला हो गया है तो किसी को लगता कि गांव को किसी अदृश्य बुरी नजर ने खेल लिया है। अभी पोस्टमार्टम चारियों का पुलिस को प्राप्त हो गया है। इसमें आवश्यक जांच थी किया गया डीएनए टेस्ट के लिए भी आवश्यक कारवाई की।

पुलिस के विचना के साथ साथ आरोपी की गिरफ्तारी के साथ साथ पुलिस का जो मेन उदेश कानून व्यवस्था बनाए रखना है तो उस दृष्टि से देखते हुए अभी तत्कालिक तत्कालिक रूप से कारवाई की गई है इसमें कुछ वाली बात नहीं है सामने वाले के खिलाफ आठ को हत्या का प्रयास आठ हत्या का एक हत्या का प्रयास का शराब में पदार्थ मिला के दिया इसकी पुष्टि के लिए सर्वप्रथम कितने प्रयोग किया गया था उस सफलता उसको प्राप्त हुई फिर बाकी ये जनरली लोकल गांव के निवासी था जितने भी लोग खत्म सब आपस में परिचित किए थे तो लोगों को बुलाता था शराब के बहाने शराब पिला इसके पास एक शराब का बोतल था कुछ आधा खुद पी लेता था आधे बचे मात्र में संबंधित हां आरोपी क्योंकि प्लान था योजना के तहत इसने किया है।

सर्वप्रथम ये लोग गांव के व्यक्ति से अपने दुकान में चूहों से परेशान होने की बात करके सुहागा प्राप्त किया। इसका ये था कि मैं मेरा दुकान है दुकान में परेशान हूं। चूहों से तीन चार महीने चूहों से सर्वप्रथम एक गांव के व्यक्ति से इसने सुहागा फिर उसको इसको जानकारी थी।

इसके बारे में में लाके सभी को लेकिन कोई नहीं जानता था कि वो अदृश्य परछाई कोई भूत नहीं बल्कि हर पर सबसे ज्यादा रोने वाला राम सहाय ही था। लेकिन इस शैतान ने इंसानों पर हाथ साफ करने से पहले जहर का ट्रायल एक बेजुबान कुत्ते पर किया था। उसने कुत्ते को जहर दिया और बिना पलक झपकाए एक साइंटिस्ट की तरह देखता रहा कि कुत्ते को तड़प कर मरने में कितना वक्त लगता है। जब उसे यकीन हो गया कि उसका फार्मूला परफेक्ट है तब उसने रुख किया इंसानों की तरफ। हथियार बना चूहे मारने वाला पाउडर। तरीका बेहद मामूली था। दोस्तों को शराब की महफिल में बुलाना, पुरानी यारी की कसमें देना और मौका पाकर गिलास में मिला देना। लेकिन कहते हैं ना अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो एक गलती जरूर करता है। राम सहाय की गलती थी कि हर मौत की लोकेशन पर उसका मौजूद होना। गांव वालों ने जब कड़ियां जोड़ी तो हर लाश के पीछे आखिरी चेहरा राम सहाय का ही होता था। और फिर एक आदमी मरते-मरते बचा।

जो इस कहानी का सबसे बड़ा गवाह बना था। कार्तिक कुमार। 14 अप्रैल की रात कार्तिक ने जैसे ही राम सहाय के जरिए आई शराब का पहला घूंट पिया, उसकी जुबान कड़वाहट से भर गई। कुछ ही देरी में वो खौफ शुरू हुआ जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था। पेट में मानो किसी ने तेजाब डाल दिया हो। आते मरोड़ उठी। ऐसी उल्टियां हुई जैसे शरीर का सारा खून बाहर आ जाएगा। कार्तिक को छूकर वापस आ गया और उसकी इसी बयान ने गांव वालों की आंखों से अंधविश्वास का पर्दा हटा दिया।

अब साफ है प्राकृतिक नहीं कोई दे रहा था। पुलिस ने जब राम सहाय को दबोचा और सख्ती बरती तो जो सच सामने आया उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। इन आठ के पीछे कोई करोड़ों की जायदाद या नहीं था। वजह इतनी मामूली थी कि सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। यानी जिसे भी वो नापसंद करता उसका नाम की लिस्ट में आ जाता। वो खुद ही जज था और खुद ही जल्लाद। गिरफ्तारी के बाद गांव में यह भी अफवाह है कि किसी वो गड़े धन के लिए 21 बलियां देना चाहता था जिससे वे आठों दे चुका था।

दोस्तों इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा यह आठ नहीं। सबसे डरावना हिस्सा यह कि राम सहाय के सिर पर कोई सींग नहीं था। ना कोई उसकी आंखों में कोई वैसीपन था। वो आपके और हमारे बीच रहने वाला एक सामान्य सा इंसान था। राम सहाय की यह कहानी सिर्फ एक साइको की दास्तान नहीं बल्कि उस डर की कहानी है जो यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि किसी के हंसते हुए चेहरे के पीछे क्या छिपा है। इसलिए अगली बार जब कोई आपसे जरूरत से ज्यादा हमदर्दी दिखाए मुफ्त में खिलाए पिलाए या का गिलास आगे बढ़ाए तो एक पल के लिए ठहरिएगा जरूर। कहीं ऐसा ना हो कि वह आपके पीठ थपथपाए और आपकी अर्थी की तैयारी कर रहा हो।

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