5 जुलाई 2024 की सुबह थी। लंदन में की स्टार्मर मंच पर चढ़कर कहते हैं 4 साल से ज्यादा समय तक पार्टी को बदलने में लगा हूं। इसी दिन के लिए वो दिन आ गया है। उस रोज की स्टारमर की लीडरशिप में लेबर पार्टी ने 650 में से 411 सीटें जीती थी।
एक ऐतिहासिक जीत थी वह। कुछ महीने पहले तक तो यह जीत लगभग असंभव लग रही थी। क्योंकि 2001 के बाद से लेबर पार्टी लगातार सत्ता से बाहर थी। 2019 के चुनाव में उसके पास महज 202 सीटें थी। फिर की स्टारमर ने पार्टी की जिम्मेदारी संभाली।
4 साल तक पार्टी को दोबारा खड़ा किया। उम्मीदवार बदले, रणनीति बदली और अंत में पार्टी जीत गई। उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी जीतों में से एक दिलाने वाला यही नेता सिर्फ 2 साल बाद इस्तीफा देने पर मजबूर हो जाएगा। केर स्टारमर ने इस्तीफा क्यों दिया?
इसकी कई वजह बताई जा रही हैं। कुछ लोग कहते हैं कि उनकी सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। कुछ विश्लेषक इसका कारण ब्रिटेन की खराब अर्थव्यवस्था बढ़ती महंगाई इमीग्रेशन को बताते हैं। कुछ कहते हैं कि पार्टी के अंदर ही उनके इतने दुश्मन बढ़ गए थे कि वह उन्हें आगे जाते नहीं देख सकते थे। पर कुछ जानकारों का एक अलग मत भी है।
वो कहते हैं कि स्टारमर के इस्तीफे के पीछे लेबर पार्टी नहीं बल्कि एक दूसरा नेता था। एक ऐसा नेता जो कभी ब्रिटेन की मुख्यधारा राजनीति के किनारे खड़ा दिखाई देता था। लेकिन अब पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल रहा है। उसका नाम है नाइजल फराज। आज से कुछ साल पहले तक ब्रिटेन की राजनीति को समझना आसान था। एक तरफ कंजर्वेटिव पार्टी टोरी पार्टी और दूसरी तरफ फ्लेवर पार्टी।
सत्ता इन्हीं दोनों के बीच घूमती रहती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है और आज की रिफॉर्म यूके पार्टी लगातार आगे बढ़ रही है। कई सर्वे में उसने पारंपरिक पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है। तोरी को लेबर को जिन इलाकों को कभी लेबर पार्टी का गढ़ माना जाता था वहां भी चुनौती दिखाई देने लगी है। यही वजह है कि स्टारमर की जीत के सिर्फ 2 साल बाद लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व बदलने की लीडरशिप बदलने की जो चर्चा है वह शुरू हो गई थी।
कुछ सांसदों को लगने यह भी लगा था कि अगर अभी दिशा नहीं बदली गई पार्टी की तो अगला चुनाव हाथ से निकल सकता है। इसी वजह से कि स्टारमर ने अब इस्तीफा दिया है और आगे उनका भविष्य कुछ और होने वाला है। अब इन सब में दिलचस्प बात यह है कि स्टारमर के इस्तीफे से पहले ही ट्रंप ने इस बात की घोषणा कर दी थी कि स्टारमर जाने वाले हैं। अब इससे सवाल यह पैदा हुआ कि क्या ट्रंप को वाकई कोई खुफिया जानकारी थी? क्या लेबर पार्टी के भीतर चल रही हलचल ट्रंप तक पहुंच चुकी थी या फिर ब्रिटेन का राजनीतिक संकट इतना बड़ा हो चुका था कि ट्रंप ने भी एक तुक्का ही लगाया और वो सही हो गया क्योंकि ट्रंप को क्या ही फर्क पड़ जाएगा.
अगर वह गलत भी साबित हो गए उनका तुक्का गलत भी साबित हो गया तो वैसे ट्रंप के लिए दूसरी बड़ी खुशखबरी थी ये आज ही कोलंबिया में उनके समर्थन वाला एक कैंडिडेट जीता है वहां पे दक्षिणपंथी कैंडिडेट है और ब्रिटेन में एक ऐसे नेता का इस्तीफा दिया है जो उन्हें पसंद नहीं था। G7 में स्टारमर और ट्रंप दोनों ही आए थे। लेकिन कोई बटरल मीटिंग नहीं हुई दोनों के बीच। ट्रंप और उनके सहयोगी लगातार स्टारमर सरकार की आलोचना करते रहे हैं। एलॉन मस्क तो उन्हें जेल भेजने तक की वकालत कर चुके हैं। इन सबका तर्क यह है कि स्टारमर इमीग्रेशन पर रोक नहीं लगा रहे हैं और ब्रिटेन की नेशनल सिक्योरिटी को कमजोर कर रहे हैं।
तो क्या स्टारमर का इस्तीफा संकेत है कि ब्रिटेन भी अपना ट्रंप खोज रहा है और नाइजल फराज और मजबूत हो रहे हैं। इसका जवाब तो आने वाले समय में पता चलेगा। फिलहाल बड़ा सवाल यह है कि स्टारमर की जगह प्रधानमंत्री कौन बनेगा? कौन उनकी जगह लेगा? स्टारमर ने अपनी स्पीच में कहा है कि वह सितंबर में पार्लियामेंट शुरू होने से पहले ही अपना पद छोड़ देंगे। तब तक पार्टी अपना नया जो लीडर है वह चुन लेगी।
इस नए लीडर की रेस में एनडी बर्नहम का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है जो अभी-अभी बाय इलेक्शन में नाइजल फराज की पार्टी के कैंडिडेट को हराकर आ रहे हैं। बर्नहम ने ऐसी सीट जीती है जिसे हर सर्वे में लगभग हर सर्वे में बताया जा रहा था कि वहां तो रिफॉर्म यूके ही जीतेगी। लेकिन बर्नहम चुनाव लड़े और जीते भी। वैसे स्टारमर नहीं चाह रहे थे कि बर्नहम यह वाला चुनाव लड़े क्योंकि चुनाव जीत जाते तो स्टारमर को चुनौती मिलती कि आपसे मजबूत आदमी आ गया है और अब ऐसा हो भी गया है। इसलिए जनवरी में लेबर पार्टी ने बर्नहम को टिकट देने से मना कर दिया था.
उस समय जब वो चुनाव लड़ने वाले थे। लेकिन अंत में टिकट भी मिला और चुनाव भी जीता गया और आज स्टारमर का इस्तीफा आ गया। इसीलिए आज के शो में हम जानेंगे कि स्टारमर के इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी क्या है? एंडडी बर्नहम कौन है? जिन्हें किंग ऑफ द नॉर्थ के नाम से जाना जा रहा है और क्या वो पार्टी को संभाल पाएंगे? नमस्कार स्वीकार कीजिए साजिद का आप खबरगांव का डेली इंटरनेशनल बुलेटिन राजदूत देख रहे हैं। कहानी स्टारमर की जीत से ही शुरू करते हैं। जुलाई 2024 में स्टारमर ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। पहली बार वह प्रधानमंत्री चुने गए और जुलाई महीने में ही उनकी पहली परीक्षा हो गई।
असल में 2017 में जब कंजर्वेटिव सरकार थी तब टू चाइल्ड बेनिफिट कैप नियम लेकर वो आई थी। उसका नियम यह था कि अगर किसी परिवार के दो से ज्यादा बच्चे हैं किसी परिवार में तो तीसरे या उसके बाद पैदा होने वाले बच्चों के लिए यूनिवर्सल क्रेडिट और चाइल्ड टैक्स क्रेडिट का जो अतिरिक्त पैसा एक्स्ट्रा पैसा है वो नहीं मिलेगा उन परिवारों को। बरसों से लेबर पार्टी के कई नेता इसे गरीब परिवारों के खिलाफ बता रहे थे। इसलिए जब जुलाई 2024 में इस नियम को खत्म करने का प्रस्ताव संसद में लाया गया तो लेबर पार्टी के कई सांसदों को उम्मीद थी कि उनकी अपनी जो सरकार है की स्टारमर की सरकार उसका समर्थन करेगी.
इस बिल का लेकिन प्रधानमंत्री की स्टारमर ने अपने सांसदों को ही इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट डालने का आदेश दे दिया। उनका तर्क ये था कि सरकार के पास फिलहाल इसके लिए पैसा नहीं है। यानी दो बच्चे से ज्यादा अगर बच्चे पैदा होते हैं तो उनका खर्चा भी सरकार को ही उठाना पड़ेगा। इसलिए स्टारमर ने इस नियम को खत्म करने का विरोध किया। इसके बावजूद पार्टी के सात सांसदों ने यह पार्टी लाइन तोड़ी और उस प्रस्ताव के समर्थन में वोट कर दिया।
अब स्टारमर ने क्या किया? इन सभी सात सांसदों को सस्पेंड कर दिया। इसे स्टारमर का इमच्योर फैसला कहा गया था उस वक्त। उसी समय लेबर पार्टी को करीब से जानने वाले कुछ पत्रकारों ने यह भी लिखा था कि अगर स्टार ऐसे ही फैसले लेंगे जैसे शुरुआत में ले रहे हैं तो वो टिक नहीं पाएंगे। लेकिन स्टार ने अनुशासन को जरूरी बताया। पहले ही महीने में एक बड़ा विवाद हो चुका था। लेकिन यह विवाद संभलता उससे पहले ही जुलाई महीने के आखिरी हफ्ते में साउथ पोल शहर में एक बहुत बड़ा दंगा भड़क गया।
असल में हुआ यह कि वहां तीन बच्चों की हत्या कर दी गई और सोशल मीडिया पर अफवाह फैला दी गई कि हत्या किसी बाहर के मुल्क से आए व्यक्ति ने की है। किसी इमीग्रेंट ने। लोगों ने स्टारमर से कहा कि आप इमीग्रेशन पर लगाम लगाइए नहीं तो ऐसी घटनाएं बढ़ती जाएंगी। हालांकि बाद में पुलिस ने बताया कि आरोपी खुद अंग्रेज था। ब्रिटेन में पैदा हुआ था। लेकिन तब तक फेक नैरेटिव जो था वो सोशल मीडिया में चल चुका था। कई शहरों में दंगे गए।
जो शरणार्थियों के लिए जो होटल बनाए जाते थे इमीग्रेंट्स के लिए उन पर वहां पर हमले होने लगे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों की बीच झड़पें हुई। सरकार ने सैकड़ों गिरफ्तारियां की और स्टारमर ने दंगाइयों के खिलाफ एक्शन का आदेश दिया। लेकिन यहीं से उनके आलोचक सक्रिय हो गए। दक्षिणपंथी समूहों और खासतौर पे रिफॉर्म यूके जो पार्टी है उसके नेताओं ने आरोप लगाया कि लेबर सरकार ब्रिटेन की इमीग्रेशन समस्या को स्वीकार ही नहीं करना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार हिंसा की तो निंदा कर रही है लेकिन लोगों की जो मूल चिंता है यानी बढ़ता इमीग्रेशन उस पर बात नहीं कर रही है।
इमीग्रेशन ही वह मुद्दा था जिसने स्टारमर की छवि को कमजोर किया है। विद इन लेबर पार्टी भी उनकी आलोचना हुई है कि वह इस पर हल्का हाथ रख रहे हैं। अभी हाल ही में जब भारतीय मूल के एक सिख व्यक्ति ने अपनी कतार से अंग्रेज लड़की की हत्या कर दी थी तब स्टारमर पर सवाल उठे थे। सितंबर 2024 में स्टारमर और उनके कुछ मंत्रियों पर महंगे गिफ्ट लेने के फिर आरोप लगे। यह दंगे भड़कने के बाद की बात हम बता रहे हैं। ये तीसरा बड़ा विवाद हो रहा है।
अब स्टारम की सरकार में हुआ यह था कि इसमें महंगे कपड़े, डिजाइनर, चश्मे, फुटबॉल मैचों के जो वीआईपी टिकट्स थे वो सब शामिल थे। कई गिफ्ट लेबर पार्टी के बड़े जो डोनर थे वहीद अली उन्होंने दिए थे बड़े-बड़े नेताओं को। स्टारमर की खुद स्टारमर की पत्नी को 5000 पाउंड के कपड़े भी गिफ्ट हुए थे। भारतीय रुपए में यह रकम होती है 6 लाख 6 लाख से कुछ ऊपर होती है। पर कानूनन ब्रिटेन के कानून के हिसाब से यह कोई अपराध नहीं पाया गया। लेकिन इससे कि स्टारमर की छवि को जरूर नुकसान पहुंचा। अगले ही महीने देश का बजट पेश किया गया। ये 2024 की हम बात कर रहे हैं। इसमें स्टारमर ने कहा कि हम 40 बिलियन पाउंड एक्स्ट्रा टैक्स वसूलेंगे लोगों से। अब जनता ने कहा कि वादा तो टैक्स कम करने का किया था पर उसका उल्टा कर रहे हो। लेकिन स्टारमन ने तर्क दिया कि देश की हालात जो है वह उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब हैं। इसलिए यह कदम उठाना पड़ रहा है।
इसी बजट में सरकार ने जो यह बजट आया था 204 में ही उसी बजट में सरकार ने एग्रीकल्चर लैंड से जुड़े एक इन्हहेरिटेंस टैक्स में भी बदलाव किया था। अब इस बदलाव से यह होता कि वहां की किसान जो थे उनका तर्क ये था कि जो जमीन है उनकी एग्रीकल्चर लैंड है वो नाम अगर किसी दूसरे के नाम में ट्रांसफर करना है तो उसमें दिक्कत आएगी। अब इसके विरोध में वहां के किसान उतर गए। गांव के किसान अपने ट्रैक्टर लेके लंदन चले आए। खूब प्रदर्शन हुए और फिर जाकर आगे सुलह हुई। जब ब्रिटेन में किसानों वाला जो प्रदर्शन था वह खत्म हो गया तो ब्रिटेन में फिर स्टारमर सरकार पर आलोचना लगने लगी कि वो अब यू टर्न ले रहे हैं। 2024 में जिस टू चाइल्ड बेनिफिट कैप को बचाने के लिए स्टारमर ने अपनी ही पार्टी के सात सांसदों को सस्पेंड कर दिया था।
2025 में सरकार ने उसी नीति को खुद भी खत्म कर दिया। एक बड़ा यूटर्न तो था ही यह। इससे यह धारणा और मजबूत हो गई कि डाउनिंग स्टेट ना तो अपनी पार्टी को पूरी तरह साथ रख पा रही है और ना ही अपनी नीतियों पर लंबे समय तक टिक पा रही है। 2025 में भी इसी तरह के कई यूटर्स स्टारमर ने लिए। इससे सीधे फायदा हुआ उनके विरोधियों को यानी रिफॉर्म यूके को। पर 2026 की शुरुआत में ब्रिटेन की राजनीति में वो हुआ जिसने स्टारमर की छवि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। उनकी सरकार का नाम एस्टीन मामले में आया। एस्टीन फाइल्स में आया।
पीटर मेंसन का नाम चर्चा में आया। मेंडलसन जो हैं वो चुनाव जीतने के बाद स्टारमा ने उन्हें अमेरिका का राजदूत बनाया था। और जो मेंडलसन है वो खुद टोनी ब्लेयर के जमाने के लेबर पार्टी के नेता है। बहुत बड़े नेता माने जाते हैं। 2026 में जब उनका नाम एपस्टीन फाइल में आया तो बहुत विवाद हुआ। बाद में यह जानकारी सामने आई कि स्टार्मर को इस बारे में पता था कि उनके एपस्टीन के साथ जेफरी एपस्टीन के साथ संबंध है। मामला यहीं नहीं रुका। कुछ समय बाद यह भी सामने आया कि राजदूत बनने से पहले उन पर एक जांच हुई थी। इस जांच में पीटर मेंडेडल्सन को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थी और वह इस जांच में जो मानक थे उस पर खरे भी नहीं उतरे थे। यानी गड़बड़ी उसी समय पकड़ आ गई थी। इसके बावजूद स्टारमर ने उन्हें राजदूत बनाया। इस खुलासे के बाद स्टारमर के करीबी मॉ्गन मैक्सवीनी ने भी पद छोड़ दिया।
मॉ्गन वही व्यक्ति थे जिन्होंने 2024 की ऐतिहासिक चुनावी जीत में अ स्टारमर का बहुत साथ दिया था। प्रमुख रणनीतिकार माने जाते थे वो लेबर पार्टी के। अब उनके इस्तीफे के बाद सब समझ चुके थे कि पार्टी के अंदर कुछ सही नहीं चल रहा है। इसलिए पार्टी के अंदर ही स्टारमर को हटाने की तैयारी शुरू होने लगी। लेकिन स्टारमर की जगह किसको लाया जाए? ये सबसे बड़ा सवाल था। एंडडी बर्नहम का नाम सबके ज़हन में तो था लेकिन वह उस समय ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर थे। अगर उन्हें स्टारमर की जगह लाना था तो पहले उन्हें बनाना था सांसद। इसके लिए कोई बायपास इलेक्शन में सीट खोजनी पड़ती थी। अब हुआ यह कि गॉटन एंड डेंटन सीट पर यह मौका मिला। उपचुनाव की तैयारी शुरू हुई। बर्नहम के समर्थकों को उम्मीद थी कि वे लेबर उम्मीदवार बनेंगे। पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाएगी।
लेकिन पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। उसकी इजाजत नहीं दी। तर्क यह दिया कि अगर बर्नहम सांसद बनने के लिए मेयर पर छोड़ते हैं तो एक नया मेयर का इलेक्शन करवाना पड़ेगा। जिससे पार्टी को बहुत पैसा खर्चना पड़ेगा। लेकिन पार्टी के भीतर बहुत से लोगों ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया। बर्नहम के जो समर्थक हैं उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी जानबूझकर उनकी संसद में वापसी को रोक रही है। उनका मानना था कि एनडी बर्नहम की बढ़ती लोकप्रियता से स्टारमर खेमे के कुछ लोग असहज थे। पर फिर स्टारमर पर दबाव बढ़ा बढ़ाया गया। उन पर दबाव डाला गया और फिर बनहम चुनाव लड़े। उन्हें टिकट फाइनली दिया गया।
दो दिन पहले आज से दो दिन पहले ही यानी 19 जून को इस सीट के रिजल्ट आए हैं। इस सीट के चुनाव के रिजल्ट आए हैं। वनहम चुनाव जीत चुके हैं और अब तैयारी की जा रही है कि उन्हें पार्टी का लीडर बनाया जाए। इसके ठीक 1 महीने पहले ही स्टारमर की कयादत में लेबर पार्टी ने बहुत बुरा प्रदर्शन किया था लोकल इलेक्शंस में। मई महीने में ही यह लोकल इलेक्शंस हुए थे। उसमें लेबर पार्टी की लगभग 15 हजार सीट चली गई थी। 38 काउंसिल सीट भी हाथ से निकल गई थी। वेल्स में भी पार्टी ने बहुत खराब प्रदर्शन किया था। इन सभी जगह पर रिफॉर्म यूके ने बेहतर परफॉर्म किया। इसलिए लेबर के अंदर स्टारमर को लेकर जो संदेह था वह और गहरा गया। पिछले महीने स्टारमर के विरोध में लेबर पार्टी से तीन बड़े इस्तीफे हुए हैं।
14 मई 2026 को स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग ने इस्तीफा दिया था। फिर जून 2026 में रक्षा मंत्री जॉन हिली ने भी इस्तीफा दे दिया था और उनके ठीक बात रक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी। ठीक बाद मिस्टर फॉर आर्म्ड फोर्स जो थे अल कांस उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया था। रक्षा मंत्रालय के दो बड़े इस्तीफे थे। नेशनल सिक्योरिटी का सवाल था देश की। इसीलिए ये पूरा डिबेट और बढ़ा। यह पूरा विवाद और बढ़ा। ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट ने उस वक्त लिखा था कि पार्टी के अंदर भी देश की नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े सवाल उठ रहे थे। क्योंकि स्टारमर ने डिफेंस बजट कम कर दिया था।
जबकि नेटो चेतावनी दे चुका है कि अगले 5 साल में उसकी रूस के साथ जंग हो सकती है। इन तीन बड़े इस्तीफों ने स्टारमर की छुट्टी की बात को लगभग कंफर्म तो कर दिया था पर 19 जून को बर्नहम ने चुनाव जीतकर इसकी पूरी तरह से पुष्टि कर दी। मोहर लगा दी एक तरह से। 20 जून को ब्रिटिश अखबारों ने भी यह लिखने लगे। ब्रिटिश अखबार में भी छपने लगा प्रमुखता से कि स्टारमर की छुट्टी होने वाली है और 21 जून को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि स्टारमर जाने वाले हैं। जब इसकी आधिकारिक घोषणा हुई तो सब चौंक गए कि ट्रंप को इस बात का पता कैसे चला। इस पर अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने खबर की है।
उन्हें एक ब्रिटिश सांसद ने या लीवर पार्टी के सांसद ने ही बताया है कि ट्रंप के ऐलान तक भी स्टारमर ने इस्तीफा देने का जो फैसला है वह नहीं लिया था। यानी ट्रंप का जो बताया जा रहा है कि कोई खुफिया जानकारी थी उन्हें ऐसा कुछ नहीं है इस खबर से तो यही पता चलता है। पर अखबार यह भी लिखता है कि लेबर पार्टी के बहुत से सांसदों को आभास तो हो ही गया था कि स्टारमर अपना पद छोड़ने वाले हैं। वाशिंगटन पोस्ट ने ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर के ऑफिस से भी संपर्क किया कि वीकेंड में क्या ट्रंप और स्टारमर की कोई बातचीत हुई है? तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। इससे समझ तो यही आता है कि ट्रंप ने भी एक तुक्का लगाया होगा जैसा तुक्का सभी ने लगाया था क्योंकि यह बहुत ऑब्वियस हो गया था कि स्टारमर इस्तीफा दे सकते हैं।
इस्तीफा आ चुका है। बनहम का नंबर है अब देश को लीड करने का। बर्नहम एक जिद्दी नेता बताए जाते हैं। उनका एक किस्सा बड़ा मशहूर है कि कोरोना के दौरान जब तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन मैनचेस्टर पर प्रतिबंध लगाना चाहते थे। लॉकडाउन बेसिकली वह बढ़ाना चाहते थे। तब बर्नहम ने खुलकर उनका विरोध कर दिया क्योंकि वह वहां के मेयर थे। उनका कहना यह था कि अगर सरकार वहां के लोगों का कारोबार बंद करवाती है तो मजदूरों को आर्थिक मदद भी देनी होगी। कई महीनों तक उनकी सरकार से ये टकराव चलता रहा बोरिस जॉनसन के साथ और एक नेशनल मुद्दा बना था ब्रिटेन में उस समय। इसी के बाद इन्हें किंग ऑफ द नॉर्थ कहा जाता है। कब तक वो प्राइम मिनिस्टर बनेंगे यह देखना होगा। राजदूत में हम आपको इसकी जानकारी दे देंगे। जाते-जाते आपको की स्टारमर के इस्तीफे के समय दी गई स्पीच की कुछ-कुछ आपको अंश सुना देते हैं। उन्होंने अपनी स्पीच में कहा 6 साल पहले मुझे लेबर पार्टी की कमान मिली थी।
उस समय पार्टी नैतिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर बैंककरप्ट थी। मुझे कई बार बताया गया कि लेबर पार्टी खत्म हो गई है। लेकिन हमने लैंडस्लाइड विक्ट्री दिलाई। सबको गलत साबित किया। एंटीसेमिटिज्म का जहर पार्टी से मैंने निकाला है। नेशनल सिक्योरिटी में इजाफा किया। 2 साल में अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। इमीग्रेशन रोका गया है। बच्चों को सोशल मीडिया से मैंने बचाया है। लाखों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर मैं लेकर आया हूं। पर इन सबके बावजूद पार्टी से पूछा जा रहा है कि क्या अगला जनरल इलेक्शन मेरी लीडरशिप में लड़ा जाना ही उचित होगा? क्या मैं ही इसके लिए बेस्ट ऑप्शन हूं या नहीं? मुझे इसका जवाब भी अपनी पार्टी से मिला है और इस जवाब को मैंने गुड क्रेस में लिया है। पॉजिटिवली लिया है। मैंने इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है। राजद से भी मैंने बात कर ली है और नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी को बोल दिया है कि अगले लीडर के चुनाव के लिए नॉमिनेशन शुरू करें।
मैं स्मूथ पावर ट्रांजैक्शन का भी वादा करता हूं। तो यह थी कहानी कि स्टारमर के इस्तीफे की कोई एक वजह बड़ी वजह नहीं थी जिसकी वजह से इस्तीफा हुआ। कई वजह थी जो धीरे-धीरे सामने आई।