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पूरा इजरायल जल!कर राख हो जाता? ईरान की तारीफ में क्या बोले ट्रंप?

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कुछ दिन पहले तक ईरान को लेकर सख्त तेवर दिखाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सुर अब बदले बदले नजर आ रहे हैं। एक तरफ उन्होंने ईरानियों को बहुत स्मार्ट बताते हुए उनकी खुलकर तारीफ की है तो दूसरी तरफ इजराइल को लेकर ऐसा दावा कर दिया है जिसने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर वह नहीं होते तो इजराइल का अस्तित्व ही खत्म हो जाता। मध्य पूर्व की राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर आए इन दो बयानों ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान ने बातचीत को चुना और यह एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने ईरानी जनता और नेतृत्व को स्मार्ट बताते हुए कहा कि वे जानते हैं कि उनके देश के लिए क्या बेहतर है। ट्रंप ने एक्सओस को दिए गए इंटरव्यू में कहा ईरानी बहुत ज्यादा होशियार है। वे एक सहज बुद्धि वाले होशियार लोग हैं। मुझे उन्हें रोकना पड़ा क्योंकि अगर उनके पास परमाणु बम होते तो वे उन हथियारों का इस्तेमाल कर देते। वे कुछ शहर उड़ा देते। हो सकता था कि वह इजराइल को उड़ा देते। क्या आप तबाही देखना चाहते हैं?

उनके इस बयान को कई विश्लेषक इसलिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि अतीत में ट्रंप ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में ईरानी जनसा की खुलकर प्रशंसा करना उनके बदले हुए राजनीतिक संदेश का संकेत माना जा रहा है। ईरान पर अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाने के बाद ट्रंप ने उसी इंटरव्यू में इजराइल को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के समर्थन के बिना इजराइल का अस्तित्व संभव नहीं होता और अगर वह राष्ट्रपति नहीं होते तो इजराइल आज जिस स्थिति में है वहां नहीं पहुंच पाता। ट्रंप ने कहा कि उनके जैसे किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइल के लिए उतना नहीं किया जितना उन्होंने किया है।

ट्रंप ने कहा अगर वह नहीं होता तो इजराइल का अस्तित्व ही नहीं होता क्योंकि मैंने ओबामा की जेसीपीओए डील को खत्म कर दिया था जो परमाणु हथियार बनाने का रास्ता थी। वो उन्हें 5 साल पहले ही मिल जाता और मेरे हिसाब से वे बनाने के बाद सबसे पहले ही हफ्ते में उस बम का इस्तेमाल कर लेते और इजराइल अब अमेरिका के साथ नहीं होता क्योंकि इजराइल का अस्तित्व ही 5 साल पहले खत्म हो जाता। ट्रंप का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में उनके और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेहो के संबंधों में तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। ईरान के साथ समझौतों और मध्यपूर्व की रणनीति को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद की भी चर्चाएं होती रही हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने अपने बयान में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि इजराइल की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए उनकी नीतियां निर्णायक रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है

कि ट्रंप अपने पहले और दूसरे कार्यकाल के दौरान उठाए गए कदमों का जिक्र कर रहे हैं। जिन्हें इजराइल के पक्ष में ऐतिहासिक माना जाता रहा है। इसमें यरूशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देना, अमेरिकी दूतावास को तेजाबीर से यरूशलम स्थानांतरित करना और इजराइल को मजबूत कूटनेतिक एवं सैन्य समर्थन देना शामिल है। ट्रंप लंबे समय से इन फैसलों को अपनी बड़ी उपलब्धियों के रूप में पेश करते रहे हैं। अब ट्रंप के इन दोनों बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी है। जहां उनके समर्थक इसे उनकी कूटनीतिक सफलता और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण बता रहे हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि ट्रंप अक्सर अपनी भूमिका को बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं। अब उनके इन दोनों बयानों पर आपका क्या है कहना? हमें कमेंट सेक्शन में जाकर जरूर बताएं।

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