श्रद्धा कपूर की आने वाली फिल्म ईथा का टीजर देखकर लोग यही कह रहे हैं कि आलिया को तो गंगूबाई में ओवरहाइप किया गया था। असली फिल्म और असली कहानी तो अब श्रद्धा कपूर लेकर आ रही है ईथा से।
आखिर ईथा फिल्म का टीज़ लोगों ने कब देखा, कहां देखा? और क्यों इस टीज़ को देखकर पब्लिक दंग रह गई? चलिए कि ईथा फिल्म किसके बारे में है? और क्यों ये कहानी स्पेशल है? हाल ही में शाहिद कपूर की कॉकटेल 2 फिल्म रिलीज हुई। इस फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले कुछ फिल्मों के टीजर दिखाए गए और वहीं पर श्रद्धा कपूर की ईथा का टीजर दिखाया गया।
इस सीजन में एक सीन दिखाया गया है जो कि रोंगटे खड़े कर देता है कि श्रद्धा कपूर जो कि एक लेजेंड्री फोक डांसर का किरदार निभा रही है वो स्टेज पर परफॉर्म कर रही होती है प्रेगनेंसी की हालत में और उसी टाइम उसे लेबर पेन आता है और वो बैकस्टेज जाती है। बच्चा डिलीवर करती है। एंबिकल कॉर्ड पत्थर से तोड़ती है और बच्चा डिलीवर करने के बाद वो वापस स्टेज पर आकर परफॉर्म करने लगती है। यह तो फिल्म का एक सीन है जिसने पब्लिक को हिला कर रख दिया है।
सोचिए पूरी फिल्म में क्या-क्या होगा। आखिर यह कहानी किस फोक डांसर की है? इन्होंने दुनिया में कितना नाम कमाया और फोक कल्चर को कैसे जिंदा रखा? आज की इस वीडियो में यही सब चीजें जानेंगे। श्रद्धा कपूर की ईठा कहानी बेस्ड है तमाशा क्वीन लेजेंड्री लावनी डांसर वीठा बाई मांग नारायण गांवकर की जिंदगी पर। वीठाबाई की अगर बात करें तो वो शोलापुर में पैदा हुई। उनके दादा ने एक डांस ग्रुप शुरू किया था
और उसी ग्रुप को दादा के बाद उनके पिता और उनके चाचा मिलकर चलाते थे। लेकिन एक टाइम ऐसा आया जब उनके पिता को बिजनेस में उतना मुनाफा नहीं हो रहा था। कंपटीशन वो फाइट नहीं कर पा रहे थे और उन्हें शोज़ नहीं मिल रहे थे। जबकि उनके कंपटीशन वाले ग्रुप्स को सारे शोज़ मिल रहे थे। मीठाबाई अपने पिता को इस तरह से हताश नहीं देख पाई और फिर उन्होंने एक दिन डिसाइड किया कि वो अपने पिता के साथ उनके ग्रुप में परफॉर्म करेगी। मीठाबाई इसी माहौल में पली बड़ी थी। उन्हें डांस का बहुत शौक था।
पढ़ाई तो वह करती थी लेकिन जो शौक उन्हें डांस का था वो अनमैचेबल था। 11 साल की उम्र में ही उन्होंने स्टेज पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उन्होंने स्टेज को अपना बना दिया। जैसे ही वीठाबाई स्टेज पर आती पब्लिक जोर-शोर से तालियां बजाती और यह सिलसिला उनकी डांस परफॉर्मेंस पब्लिक का दिल जीत लेती और एक टाइम ऐसा आ गया जब वीठाबाई की परफॉर्मेंस उनके ग्रुप की सबसे बड़ी डिमांड बनती थी और वीठा बाई के नाम से ही उनके शोज़ बिकने लगे थे। पिता को बिजनेस में जो नुकसान हो रहा था वह अब फायदे में बदल गया था।
वीबाई के ग्रुप को महाराष्ट्र के अलावा महाराष्ट्र के बाहर से भी परफॉर्मेंस के न्योते आ रहे थे और सबसे बड़ा स्टेज उन्हें दिया प्रेसिडेंट ने जब उन्होंने प्रेसिडेंट के लिए परफॉर्म किया। इनफैक्ट वीबाई और उनके पिता के ग्रुप को 1957 और 1990 में प्रेसिडेंट की तरफ से मेडल भी दिया गया। जहां एक तरफ वीठा बाई ने फोक कल्चर को जिंदा रखा। फोक डांस को जिंदा रखा। वहीं जिंदगी ने उन्हें ऐसी मुसीबतें दी जो एक इंसान को अंदर से मार दे। जो मीठा बाई एक डांसर के रूप में अच्छा नाम, अच्छी पहचान बना चुकी थी।
उन्हें प्यार में शादी में धोखा मिला। उनकी शादी हुई थी Maruti सावंत नाम के आदमी से। कुछ समय तो सब कुछ ठीक चला लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद ही Maruti सावंत ने अपने असली रंग दिखाने शुरू कर दिए। वो वीठाबाई की ना सिर्फ कमाई लेकर उस पर अय्याशी करता बल्कि वीठाबाई को पीटता भी था। स्टेज पर परफॉर्म करके वीठा बाई जो कुछ भी कमाती पति वो कमाई छीन लेता। वीठाबाई को देश भर में इज्जत मिल रही थी लेकिन घर में पति ने इस तरह की हालत कर दी और पैसा इस तरह से उड़ाया कि वीबाई के बुढ़ापे में उनके पास पैसे तक नहीं रहे। कहते हैं कि घर में वीठा बाई के साथ यह हो रहा था।
लेकिन उन्होंने कभी भी फोक डांस को छोटा नहीं दिखाया। हमेशा फोक को सबसे आगे रखा। उन्होंने तमाशा ग्रुप्स को अपनी पूरी जिंदगी डेडिकेट की। फिर चाहे फिल्मों के ऑफर्स ही क्यों ना रिजेक्ट करने पड़े हो। बताया जाता है कि राज कपूर साहब ने वीठा बाई को अपनी एक फिल्म के लिए रोल ऑफर किया था। और भी कई फिल्मों के ऑफर्स उन्हें आए थे। लेकिन यह सभी ऑफर्स उन्होंने रिजेक्ट कर दिए थे। यह कहते हुए कि अगर मैं फिल्मों में चली जाऊंगी तो मेरे यह फोक डांस कौन संभालेगा? तमाशा का क्या होगा? वीठा बाई ने तमाशा वर्कर्स के लिए बहुत आवाज उठाई और फाइनली गवर्नमेंट से तमाशा वर्कर्स के लिए पेंशन की व्यवस्था भी करवाई।
अब ताज्जुब की बात यह है कि जिस मीठाबाई ने सारे तमाशा आर्टिस्ट के लिए इतना कुछ किया। उनके जिंदगी के अंतिम दिन में उनकी हालत यह थी कि पैसा उधार लेकर जिंदगी चलानी पड़ी। और जब उनकी डेथ हुई तो परिवार के पास हॉस्पिटल से डेड बॉडी छुड़वाने के ₹5,900 भी नहीं थे। जी हां, यह सच्ची कहानी है। श्रद्धा कपूर की ईठा फिल्म जब आएगी तो यह फिल्म करोड़ों में कमाएगी और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़ेगी। श्रद्धा कपूर टॉप एक्ट्रेस है और भी आगे बढ़ेगी। लेकिन जिस इंसान पर यह फिल्म आधारित है, उसकी जिंदगी की सच्चाई यह है कि जिंदगी भर वो स्टेज की क्वीन रही। जिंदगी भर वो तमाशा करती रही। लेकिन जब उनकी डेथ हुई तो वह बहुत ही ट्रैजिक थी।
2002 में जिस वक्त वीबाई 74 की एज में थी तब उन्हें पैरालिटिक अटैक आया और उसी के चलते उन्हें बंबई के कैंप हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया। मीठाबाई बहुत बड़ी आर्टिस्ट थी। हॉस्पिटल ने एनश्योर किया था कि जो भी चार्जेस उनके ट्रीटमेंट के लगेंगे उसे हम सिर्फ मिनिमम रखेंगे। इसके कुछ ही दिनों में वीठा बाई की डेथ हो जाती है और उनकी डेथ के बाद उनकी बॉडी को कुछ समय तक हॉस्पिटल में ही रखना पड़ा था क्योंकि उनकी फैमिली के पास ₹5,900 जो हॉस्पिटल का बिल था वह भी चुकाने के पैसे नहीं थे। परिवार वालों ने इधर-उधर से पैसा मांगकर इकट्ठा किया तो ₹4000 ही इकट्ठे हुए। उसके बाद भी कुछ पैसे बच गए। फाइनली कुछ और डोनेशन जुटाया गया। कुछ बड़े लोगों से मदद ली गई और उसके बाद उनकी बॉडी को हॉस्पिटल से छुड़वाया गया। इससे भी बड़ी ट्रेजडी यह है कि वीबाई की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार उनके गांव में ही किया जाए जहां पर वह पली बड़ी है।
लेकिन परिवार वालों के पास बॉडी को गांव तक ले जाने के भी पैसे नहीं थे। यही वजह है कि उनका अंतिम संस्कार भी उनके मनमर्जी के मुताबिक नहीं हुआ। और कहते हैं ना कि जब आप कुछ खोते हो तभी आपको उसकी वैल्यू पता चलती है। सरकार को भी मीठाबाई की वैल्यू उनके जाने के बाद ही पता चली। महाराष्ट्र सरकार ने 2006 में वीठा बाई को सम्मानित किया।
उन्हें ₹5 लाख का इनाम दिया और आज वीठा बाई को तमाशा क्वीन के नाम से जाना जाता है। उनकी जिंदगी पर कई प्लेज़ होते आए हैं और अब श्रद्धा कपूर जैसी एक्ट्रेस उनकी लाइफ पर बनी फिल्म में मेन किरदार निभा रही है जो कि बहुत अच्छी बात है। एक लेजेंड को हमेशा कायम रखना चाहिए। लेकिन दुख की बात यह है कि जब वो जिंदा थी तब उन्होंने सिर्फ स्ट्रगल किया। अब जब उनकी स्ट्रगल की कहानी इतनी महान है तो फिर इस पर पैसा छापा जा रहा