ऐसा भी देश है जो आकार में आपके गांव से भी छोटा है। लेकिन जहां की सड़कों पर ऑटो रिक्शा की तरह करोड़ों रुपए की Lamborghini और ferari दौड़ती है। एक ऐसा देश जहां इनकम टैक्स का नामोनिशान नहीं है और वहां हर दूसरा व्यक्ति करोड़पति है।
दुनिया के उन तीन जादुई देशों की ओर जहां गरीबी केवल एक शब्द मात्र है और अमीरी ऐसी कि सुनने वालों के होश ही उड़ जाएं। मैं बात करूंगा मोनाको की जहां लोगों के घरों में ही नहीं बल्कि पैदल चलने वाली गलियों में भी एयर कंडीशनर लगे हैं। फिर हम देखेंगे लग्जमबर्ग को जहां बस और ट्रेन का सफर हर किसी के लिए बिल्कुल मुफ्त है और अंत में हम सैर करेंगे लिफ्टनस्टाइन की जहां का राजा हर साल अपनी पूरी प्रजा को अपने महल में बुलाकर और की मुफ्त पार्टी देता है।
तो मोनाको। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि मोनाको इतना छोटा देश है कि शायद आपका गांव भी इस देश से कहीं अधिक बड़ा होगा। यदि आप मोनाको में सुबह सैर पर निकले तो मात्र 1 घंटे में इस पूरे देश में घूमकर वापस अपने ठिकाने पर लौट आएंगे क्योंकि क्षेत्रफल के मामले में मोनाको वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है। इसका कुल क्षेत्रफल मात्र 2.02 कि.मी. ही है। हमारे भारत के वो गांव जहां ठीक-ठाक इंसानी आबादी रहती है।
में से भी अधिकतर गांव मोनाको देश से कहीं अधिक बड़ा आकार रखते हैं। हालांकि क्षेत्रफल में छोटा होने का मतलब यह कतई नहीं है कि मोनाको कोई साधारण देश है। इस देश की हर खूबी और हर कदम अपने आप में असाधारण अनुभव प्रदान करता है।
फ्रांस और इटली के बीच भूमध्य सागर के किनारे बसा मोनाको दुनिया का वह कोना है जहां जमीन के एक-ए इंच की कीमत अरबों में है। इस देश में बसने के लिए बड़े हॉलीवुड स्टार और खरबपति बिजनेसमैनों का कड़ा संघर्ष रहता है। अगर भारतीय मानकों को ध्यान में रखकर बात करूं तो मोनाको में प्रति गज जमीन की कीमत 1 करोड़ भारतीय रुपयों से भी अधिक की मानी जाती है। इसका अर्थ है कि यदि आपको इस देश में एक 100 गज का सामान्य प्लॉट खरीदना है तो कम से कम ₹100 करोड़ अपनी जेब से आपको ढीले करने होंगे।
जाहिर है हम आम भारतीय तो मोनाको में रहने तो क्या घूमने तक का ख्वाब नहीं देख सकते। इसलिए चलो इस देश की खूबियां जानकर ही अपना मन बहला लेते हैं। वैसे मोनाको में कदम रखते ही आपको एहसास होगा कि आप किसी देश में नहीं बल्कि अमीरों के एक ऐसे जादुई किले में आ गए हैं जहां गरीबी का नामोनिशान तक नहीं है।
इस देश में पूर्णतः टैक्स फ्री सिस्टम है। मोनाको में रहने वाले नागरिकों को अपनी कमाई का एक भी रुपया सरकार को टैक्स के रूप में नहीं देना पड़ता। यही वजह है कि दुनिया भर के मशहूर खिलाड़ी, हॉलीवुड स्टार्स और बड़े बिजनेसमैन इस देश की नागरिकता लेने के लिए कतार में खड़े रहते हैं।
क्योंकि यहां कोई आपसे यह नहीं पूछने वाला कि आप इतना पैसा कहां से लेकर आए, कोई इनकम टैक्स की रेट आपके ऊपर नहीं पड़ने वाली। फिर चाहे आप अपने घर में नोटों के बोरे भर-भर कर ही क्यों ना रख दें। मोनाको के रहसी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां का हर दूसरा व्यक्ति करोड़पति और हर तीसरा व्यक्ति अरबपति है।
इस देश की सड़कों पर चलने में ऐसा लगता है मानो आप किसी फिल्म के सेट पर चल रहे हो। मोनाको में प्रति व्यक्ति पुलिसकर्मियों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। चप्पे-चप्पे पर लगे हाईटेक कैमरों की वजह से अपराध दर लगभग शून्य है। जिससे लोग आधी रात को भी बिना किसी डर के करोड़ों के जेवर पहनकर सड़कों पर घूम सकते हैं। मोनाको में महिलाएं भी रात एवं दिन पूरी आजादी के साथ घूम सकती हैं।
यहां पिछले एक दशक यानी 10 सालों से किसी महिला के साथ कोई भी यौन संबंधी दुराचार की घटना दर्ज नहीं की गई है। इस देश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर इतना ऊंचा है कि यहां की औसत आयु ही करीब 90 साल है जो बाकी दुनिया से बहुत अधिक है।
मोनाको का शहरी बुनियादी ढांचा ऐसा शानदार है कि पहाड़ी इलाका होने के बावजूद भी पूरे देश में सार्वजनिक लिफ्ट, एस्केलेटर और एयर कंडीशनर गलियारे बनाए गए हैं ताकि पैदल चलने वालों को कोई परेशानी ना हो। यानी आपको मोनाको की गलियों में भी एसी लगे हुए मिलेंगे। इस देश में ना तो कोई बेघर है और ना ही कोई बेरोजगार। क्योंकि सरकार की मजबूत सामाजिक सुरक्षा और आवास नीतियां यह सुनिश्चित करती हैं कि उनका हर नागरिक एक रॉयल और सम्मानजनक जीवन शैली जी सके। मोनाको एक बेहद शिष्टाचार वाला देश माना जाता है।
यहां किसी भी व्यक्ति से थोड़ी सी भी बदतमीजी माफ नहीं की जा सकती। यहां तक कि यदि आप इस देश की किसी गली में अपनी शर्ट उतार कर घूम रहे हैं तो आप पर भारी जुर्माना वसूला जाएगा। इस देश में सीसीटीवी नेटवर्क इतना मजबूत है कि यदि आप सड़क पर एक छोटा सा कागज का टुकड़ा भी फेंक दें या थूक दें तो चंद मिनटों में पुलिस आपकी पहचान करके आपके पास पहुंच जाएगी और आपके ऊपर कठोर कानूनी कारवाई होगी। मोनाको के नागरिक इस भांति ईमानदार हैं कि आप सड़क पर अपना रुपओं से भरा पर्स भी गिरा दें तो वह पर्स हर हाल में आपको सुरक्षित वापस मिल जाएगा।
अब यदि लग्जरी जीवन शैली की बात करें तो मोनाको में आपको शानदार घरों के साथ-साथ करोड़ों रुपयों की कारें सड़कों पर दिखना बड़ी ही आम बात है।
यहां की सड़कों पर Lamborghini, ferrari और Rolls जैसी गाड़ियां उतनी ही आम है जितनी हमारे यहां ऑटो रिक्शा। लेकिन इस देश का सबसे बड़ा आकर्षण है मोनाको ग्रैंड प्रिक्स। साल में एक बार यहां की साधारण सड़कें दुनिया के सबसे खतरनाक और रोमांचक रेसिंग ट्रैक में बदल जाती है। फार्मूला वन की कारें जब मोनाको की तंग गलियों और सुरंगों से होती हुई 300 किमी/ घंटे की अधिक रफ्तार से दौड़ती है तो पूरा देश ठर्रा उठता है। लोग अपने घरों की बालकनी में बैठकर इस रेस का लुत्फ उठाते हैं।
यह दुनिया की इकलौती ऐसी रेस है जिसके लिए कोई अलग से स्टेडियम नहीं बनाया जाता बल्कि पूरा शहर ही एक स्टेडियम बन जाता है। इस रेस के दौरान मोनाको की सड़कों को आम इंसानों के लिए बंद कर दिया जाता है। ना आप अपना वाहन लेकर निकल सकते हैं और ना ही आप पैदल ही घर से बाहर जा सकते हैं। बस अपनी छत पर खड़े हो जाइए और बिजली की गति से दौड़ती गाड़ियों को देखने का लुत्फ उठाइए।
मोनाको के बंदरगाह पर अरबों रुपयों की याच खड़ी रहती है। याच असल में एक तरह का आलीशान समुद्री जहाज होता है जिसका इस्तेमाल सिर्फ ऐशो आराम के लिए होता है।
यह जहाज पानी पर तैरते हुए सेवन स्टार महल हैं जिनके भीतर हेलीपैड, शानदार स्विमिंग पूल, पर्सनल सिनेमा हॉल और यहां तक कि अपने निजी मिनी पनडुब्बी जैसी अविश्वसनीय सुख सुविधाएं मौजूद होती है। दुनिया के बड़े-बड़े अरबपति और रहीस अपने इन आलीशान जहाजों को यहां के नीले समुंदर में खड़ा करना अपनी सबसे बड़ी शान समझते हैं। मॉनटेकार्लो कसीनो का जिक्र किए बिना मोनाको की बात अधूरी ही रह जाएगी। 19वीं सदी में बना यह कसीनो अपनी बेमिसाल वास्तुकला और शाही अंदाज के लिए मशहूर है। लेकिन यहां का एक बहुत ही दिलचस्प और अजीब नियम भी है।
यदि आपको मोनाको की नागरिकता मिल जाए तो आप इस कसीनो में जुआ नहीं खेल सकते। क्योंकि मोनाको की सरकार नहीं चाहती कि उनके नागरिक जुए की लत में पड़कर अपनी दौलत गवा दे। यानी मोंटेकार्लो कसीनो सिर्फ विदेशी पर्यटकों के लिए ही खुला हुआ है।
लग्जमबर्ग दोस्तों मोनाको की गलियों से निकलकर अब हम एक ऐसे देश में चलते हैं जिस देश को यूरोप का पावर हाउस कहा जाता है। यह है लग्जमबर्ग। क्षेत्रफल के हिसाब से लग्जमबर्ग लगभग 2586 कि.मी. में फैला है जो हमारे भारत के गोवा राज्य है जिसका क्षेत्रफल 3702 कि.मी. है से भी काफी छोटा है। लेकिन जब बात अमीर की आती है तो लगबर्ग को दुनिया का सबसे अमीर देश कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए। प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह देश इतना आगे है कि यहां के एक औसत कर्मचारी की मासिक तनख्वाह भी लाखों में होती है। दरअसल लग्जबर्ग में किसी भी कर्मचारी को यदि आप काम पर रखते हैं तो वहां के कानून के अनुसार आपको उस कर्मचारी को कम से कम 2700 यूरो यानी करीब ₹90 भारतीय रुपयों के बराबर तनख्वाह देनी होगी। हमारे देश में तो अधिकतर कर्मचारी इतना साल भर में भी नहीं कमा पाते।
असल में अपने चारों तरफ से फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम से घिरा यह छोटा सा देश लक्जमबर्ग पूरी दुनिया के लिए एक फाइनेंशियल हब है। जहां बड़े-बड़े बैंकों का अरबों रुपयों का लेनदेन रोजाना की बात है। लग्जमबर्ग की एक अनोखी खूबी यह है कि इस देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से मुफ्त है। जी हां, आप चाहे बस, ट्रेन या चमचमाती हुई ट्रम जो कि सड़क पर चलने वाली एक छोटी ट्रेन होती है में सफर करें, उसके लिए आपको कोई टिकट नहीं खरीदना पड़ता और ना ही आपको अपने साथ कोई पास आदि ही रखना पड़ता है और यह अनोखी सुविधा सिर्फ लग्जबर्ग के नागरिकों के लिए ही नहीं है बल्कि वहां घूमने गए पर्यटक भी हर प्रकार के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बिल्कुल फ्री में कर सकते हैं।
वस्तुतः ऐसी अनोखी एवं शानदार सुविधा देने वाला लग्जबर्ग दुनिया का इकलौता देश है। यहां के सरकार का मानना है कि सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ और प्रदूषण कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट ही सबसे बेहतरीन तरीका है। इस देश की ट्रेनें और बसें इतनी साफ-सुथरी और आधुनिक होती हैं कि आपको लगेगा ही नहीं कि आप सार्वजनिक वाहन में सफर कर रहे हैं बल्कि आपको इन वाहनों में किसी फाइव स्टार लाउन जैसा ही एहसास होगा। यदि आप लगबर्ग की खूबसूरती को निहारोगे तो आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएगी। इस देश की राजधानी जिसे लग्जमबर्ग सिटी के नाम से जाना जाता है। एक गहरी खाई और ऊंचे चट्टान के ऊपर बसी हुई है।
जिसकी सबसे रोमांचक जगह को कैशेट्स ड्यू बोक कहा जाता है। यह पहाड़ों के भीतर बनाई गई हजारों साल पुरानी सुरंगों और गुफाओं का एक विशाल जाल है। जहां से अतीत में कभी दुश्मन पर नजर रखी जाती थी। जब आप लग्जमबर्ग सिटी के शेमिन डेला कोर्निश नामक रास्ते पर चलते हैं जिसे यूरोप की सबसे खूबसूरत बालकनी कहा जाता है तो नीचे घाटी में बसे पुराने घरों और बहती नदी का नजारा ऐसा लगता है मानो किसी परियों की कहानी के किताब के पन्नों में ही घुस गए हो। यहां के ऊंचे-ऊंचे पत्थर के पुल और उनके नीचे बिछी मखमली हरियाली, कुदरत और इंजीनियरिंग का एक ऐसा मेल है जो दुनिया में और कहीं ढूंढे नहीं मिलता। यदि आप लग्जबर्ग सिटी के शहरी शोरशराबे से दूर निकले तो इस देश का ग्रामीण इलाका आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। यहां मुलरथल गांव का क्षेत्र इतना सुंदर है कि इसे छोटा स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। जहां के जंगलों में चलते हुए आपको अजीबोगरीब शक्ल वाली चट्टाने और दूधिया पानी के झरने मिलेंगे।
यह दृश्य आपको किसी रहस्यमई फिल्म की याद दिला सकते हैं। साथ ही लगंबर के विंडन कैसल किले को निहारना किसी रोमांच से कम नहीं माना जा सकता। पहाड़ी की चोटी पर बना यह विशाल किला जब रात की रोशनी में जगमगाता है तो इसकी परछाई नीचे बहती नदी में किसी चमकते हीरे जैसी लगती है। लग्जंबर की हवा इतनी शुद्ध और वातावरण इतना शांत है कि आपको इस देश में घूमते हुए ऐसा लगेगा मानो वक्त ही ठहर गया हो। इस देश की हरियाली इतनी घनी है कि इसे यूरोप का हरा दिल भी कहा जाता है। हद से ज्यादा दौलत और शोहरत के बावजूद लग्जंबर के लोगों में एक अजीब सी सादगी और शांति है।
यहां के लोग दिखावे में यकीन नहीं रखते बल्कि एक सुकून भरी जिंदगी जीना पसंद करते हैं। लग्जंबर का सामाजिक ढांचा बेहद मजबूत है। यह लोग एक दूसरे पर अटूट भरोसा करते हैं। इस देश की एक और दिलचस्प बात यह है कि यहां के लगभग सभी लोग तीन भाषाएं जिनमें लग्जमबर्गिस, फ्रेंच और जर्मन शामिल है। फर्राटेदार तरीके से बोलते हैं। साथ ही अंग्रेजी भाषा को भी लग्जमबर्ग में हर कोई समझ लेता है। इतनी भाषाओं का मेल देखकर आपको लगेगा ही नहीं कि आप किसी एक देश में घूम रहे हैं। बल्कि आपको लगेगा मानो आप सारी दुनिया की सैर कर आए। लग्जबर्ग के मेहमान नवाजे और सुरक्षा का स्तर बेमिसाल है। वस्तुतः यह देश इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अगर खूब सारी दौलत किसी के पास हो तो कैसे एक छोटी सी जगह को भी पृथ्वी का सबसे खूबसूरत स्वर्ग बनाया जा सकता है। लिफ्टनस्टाइन। दोस्तों लिफ्टनंस्टाइन एक ऐसा देश है जिसका नाम भी शायद आप में से बहुत लोगों ने नहीं सुना होगा।
यह देश ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड की सीमाओं के बीच आल्प्स के ऊंचे पहाड़ों में किसी गहने की तरह जड़ा हुआ है। क्षेत्रफल की बात की जाए तो लिस्टनस्टाइन महज 160 कि.मी. में ही सिमटा है। यानी यह हमारे देश की राजधानी दिल्ली से भी करीब 10 गुना छोटा आकार रखता है। लेकिन लिस्टनस्टाइन की भी असली ताकत इस देश के धन में छुपी हुई है। यहां प्रति व्यक्ति आय इतनी ज्यादा है कि लिस्टनस्टाइन में कोई गरीब तो छोड़ ही दीजिए। मध्यम वर्ग का व्यक्ति मिलना भी असंभव साही कार्य है। भारत में जहां प्रति व्यक्ति मासिक आय 16 से ₹17,000 के आसपास बैठती है, वहीं लिफ्टनस्टाइन में यह आय करीब 10,000 अमेरिकी डॉलर यानी 9 लाख भारतीय रुपों के बराबर है।
यानी इस देश में काम करने वाला हर व्यक्ति एक साल में बड़ी ही आसानी से करोड़पति बन सकता है। यही कारण है कि आसपास के कई देशों जैसे ऑस्ट्रिया एवं हंगरी आदि से अनेकों इंसान लिस्टाइन में काम करने आते हैं। इन पड़ोसी देशों के लोगों को लिस्टाइन आने के लिए किसी पासपोर्ट या वीजा आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती। यानी यह आसानी से सुबह काम पर आते हैं और शाम को अपने देश वापस लौट जाते हैं। लिफ्टनस्टाइन की अमीरी का राज इसकी विविध अर्थव्यवस्था में छुपा है। यहां अनेकों उच्च तकनीक औद्योगिक केंद्र है। जहां विश्वस्तरीय मशीनरी, दंत चिकित्सा उपकरण विशेष करके नकली दांत और फार्मासटिकल उत्पादों का निर्माण होता है। ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़, गहरी हरी घाटियां और बादलों को छूती चोटियां, लिस्टनस्टाइन को किसी जादुई पेंटिंग जैसा बना देती है।
यहां का रेटिकोन पर्वत ना केवल साहसिक ट्रैकिंग और स्किंग के लिए विश्व प्रसिद्ध है बल्कि सर्दियों में जब यह पहाड़ बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेता है तो पूरा देश किसी काल्पनिक लोक जैसा दिखाई देने लगता है। पहाड़ियों के ऊपर स्थित प्राचीन वादुज किला और ऐतिहासिक चर्च यहां के परिदृश्य को एक शाही गरिमा प्रदान करते हैं। जबकि बादलों से ढके पहाड़ों के बीचों-बीच बसे छोटे-छोटे घर और मखमली घास के मैदान शांति और सुकून का एहसास कराते हैं। लिस्टनस्टाइन एक प्रिंसली स्टेट है। यानी यहां आज भी राजाओं का शासन चलता है। इस देश के राजा अपने पूर्वजों के द्वारा बनाए गए किले यानी वादुज में ही निवास करते हैं। जहां से उन्हें पूरा देश आसानी से नजर आता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि लिस्टनस्टाइन दुनिया में नकली दांत बनाने का सबसे बड़ा केंद्र है।
यहां की तकनीक इतनी उन्नत है कि दुनिया भर के डेंटिस्ट केवल लिस्टाइन में बने दांतों पर ही भरोसा करते हैं। इसके अतिरिक्त यह देश अन्य कई प्रकार की हाईटेक मशीनें और औजार पूरी दुनिया में निर्यात करता है। वस्तुतः लेफ्टस्टाइन की सड़कों पर चलते हुए आपको ऐसा एहसास होगा कि यहां तकनीक और प्रकृति ने हाथ मिला लिया है। यहां एक तरफ अत्याधुनिक फैक्ट्रियां हैं तो दूसरी तरफ हजारों साल पुराने अंगूर के सुहाने बगीचे भी हैं। दरअसल लेस्टाइन की भौगोलिक स्थिति उसे अंगूर की खेती के लिए आदर्श बना देती है। यही वजह है कि इस देश में आपको चारों ओर अंगूर के गुच्छे लटकते हुए मिलेंगे। जिनका इस्तेमाल यह देश बेहतरीन वाइन बनाने के लिए करता है। वस्तुतः लिक्स्टाइन की वाइन पूरी दुनिया में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। वैसे इस देश के लोग पीने पिलाने के बड़े शौकीन है।
भारत के स्वतंत्रता दिवस वाले दिन ही यानी हर साल 15 अगस्त को लिस्टनस्टाइन में भी बड़ा आयोजन किया जाता है। क्योंकि इस दिन इस देश के पूर्व शासक प्रिंस फ्रांस जोसेफ का जन्म हुआ था और इसी उपलक्ष में लस्टाइन के राजा अपनी पूरी प्रजा को ही पार्टी देते हैं। इस रोज लिस्टनस्टाइन के वर्तमान राजा प्रिंस हंस आदम द्वितीय अपने महल के शाही बगीचे को पूरे देश की जनता के लिए खोल देते हैं। देश का हर नागरिक चाहे वह बच्चा हो या बूढ़ा राजा के महल में आमंत्रित होता है। इस पार्टी में हर प्रकार की शराब एवं भोजन लिस्टाइन की प्रजा को राजा की ओर से मुफ्त में परोसा जाता है। यह सोचना भी काफी अजीब है कि हमारी पृथ्वी पर कोई ऐसा भी देश हो सकता है जहां का राजा अपनी प्रजा के साथ बैठकर पार्टी करता हो। यह सादगी और प्रेम ही लिस्टाइन को दुनिया के बाकी अमीर देशों से अलग और विशेष बनाता है। मजे की बात यह है कि लस्टाइन के पास अपनी कोई सेना या आर्मी ही नहीं है।
साल 1868 में ही यहां की सेना को समाप्त कर दिया गया था क्योंकि इस अनोखे देश के लोगों का मानना है कि शांति से बड़ा कोई हथियार नहीं हो सकता। यहां तक कि इतना अमीर होने के बावजूद इस पूरे देश में एक भी हवाई अड्डा नहीं है। यदि आपको जहाज के जरिए सफर करना है तो पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया जाना होगा जिसकी लिफ्टनस्टाइन से दूरी सड़क मार्ग से मात्र कुछ ही मिनटों की है। हालांकि बिना फौज के भी लिफ्टनस्टाइन बेहद सुरक्षित है। वस्तुतः इस देश में सुरक्षा का आलम यह है कि लोग रात में भी सोते समय अक्सर अपने घरों के दरवाजे खुले ही रखते हैं। यानी केवल अमीरी नहीं बल्कि शांति और सुकून ही इस खूबसूरत देश अर्थात लिस्टनस्टाइन की सबसे बड़ी दौलत है।