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राजेंद्र कुमार की किस एक ज़िद ने बर्बाद कर दिया कुमार गौरव का पूरा फिल्मी साम्राज्य!

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बॉलीवुड में यदि आपका संबंध किसी सफल फिल्मी परिवार से होता था तो आपको दो-तीन अवसर तो छप्पर फाड़ के मिलते थे और फिर आप में [संगीत] वह बात होती तो आप सफल भी होते थे। बड़े स्टार भी बन सकते थे। मगर बाहर से आने वालों के लिए अवसर मिलना नाकों चने चबाने वाली बात होती थी। जिसमें इत्तेफाक की बड़ी भूमिका होती थी। आपका टैलेंट तो बाद की बात थी। आज से लगभग 65 वर्ष पहले एक बड़ा ही प्रतिभाशाली परिवार कोलकाता से मुंबई आया था। कुछ कर पाने के अवसरों की तलाश में आज हम बात करेंगे इसी परिवार की एक सदस्य की। हम बात करेंगे सुलक्षणा पंडित की छोटी बहन विजेता पंडित की। [संगीत] [संगीत] यादें नई पुरानी में आपका स्वागत है। हम हाजिर हैं किस्से पुराने यादें पुरानी लेकर मैं हूं देवेश वर्मा। अपने युग के [संगीत] एक बड़े ही जानेमाने अभिनेता राजेंद्र कुमार के बंगले में उनका एक छोटा सा प्राइवेट थिएटर होता था। डिंपल जिसका नाम उनकी बेटी के नाम पर रखा गया था। इसी थिएटर में सुलक्षणा पंडित की फिल्म गर्म खून का ट्रायल शो हुआ था। गर्म खून के इस ट्रायल में सुलक्षणा पंडित के साथ उनकी छोटी बहन विजेता पंडित भी आई थी जो उस समय 13 वर्ष की थी। [संगीत] [संगीत] राजेंद्र कुमार का घर उनके इस थिएटर के ऊपर था और घर से थिएटर और थिएटर से घर उनके चक्कर लगते रहते थे। गर्म खून के ट्रायल शो की गहमागहमी के दौरान जब उन्होंने विजेता पंडित को देखा तो सुलक्षणा पंडित से कहा सुलक्षणा यह तेरी छोटी बहन है। उत्तर सुनकर राजेंद्र कुमार ने कहा अरे यह तो एकदम डॉल है। बहुत क्यूट है। इस बात को कुछ समय बीत गया लगभग 4 महीने का। फिर एक दिन राजेंद्र कुमार सुबह 7:00 बजे सुलक्षणा पंडित के घर आ धमके। वह रोज सुबह टहलने निकलते थे। तो उस दिन टहलने के बाद वो सीधे वहां पहुंच गए। सुलक्षणा पंडित ने कहा, व्हाट अ सरप्राइज? सुबह-सुबह।

उन्होंने छूटते ही कहा, तुम्हारी छोटी बहन कहां है? सो रही है। उसे उठाओ। जब विजेता वहां लाई गई तो राजेंद्र कुमार ने उन्हें अपने सामने बिठाया और सुलक्षणा पंडित से कहा मैं एक पिक्चर बना रहा हूं लव स्टोरी अपने बेटे के साथ और उसके लिए मुझे हीरोइन चाहिए और मेरी इस फिल्म की हीरोइन यह है। सुलक्षा ने कहा राजेंद्र जी यह तो अभी पढ़ाई कर रही है। अभी से एक्टिंग राजेंद्र कुमार ने कहा पढ़ाई तो सब करते हैं। हीरोइन सब नहीं बनते। मैं इसको साइन कर रहा हूं अपनी पिक्चर के लिए। सबको बता दो अपने परिवार में। कुछ दिनों बाद राजेंद्र कुमार ने सुलक्षणा पंडित को फोन किया और कहा अपनी बहन को मेरे घर भेजो। मुझे उससे कुछ बातें करनी है। सुलक्षणा ने अपने सेक्रेटरी के साथ विजेता को राजेंद्र कुमार के बांद्रा वेस्ट में पाली हिल स्थित बंगले में भेज दिया। राजेंद्र कुमार ने इन लोगों को बिठाया और घर में कहा सब लोगों को बुलाओ। बंटी की हीरोइन आई है। सबसे मिलवाने के बाद राजेंद्र कुमार ने विजेता को बताया कि वो उनका स्क्रीन टेस्ट करेंगे। विजेता घबरा गई और स्क्रीन टेस्ट के लिए साफ मना कर दिया। [संगीत] राजेंद्र [संगीत] कुमार ने उन्हें समझाया कि स्क्रीन टेस्ट कुछ नहीं है। बस एक बार देखेंगे कि विजेता स्क्रीन पर कैसी [संगीत] दिखती हैं। लेकिन विजेता अड़ी रही कि वो स्क्रीन टेस्ट नहीं देंगी। राजेंद्र कुमार इस बाल हठ के आगे लाचार। उन्होंने अपने मित्र राज कपूर को फोन किया और मामला बताया। राज कपूर ने कहा अगर नहीं तैयार हो रही है तो छोड़ दो कोई अंतर नहीं पड़ता। बस इतना करो कि शूटिंग शुरू होने से पहले बंटी और विजेता दोनों को कोई छोटा सा एक्टिंग कोर्स करवा दो। इसके बाद राजेंद्र कुमार ने दोनों को एक्टिंग का क्रैश कोर्स करने के लिए रोशन तनेजा के हवाले कर दिया जो एक्टिंग का एक स्कूल चलाते थे। [संगीत] बात को अधिक विस्तार ना देते हुए आ जाते हैं प्यार की इस कहानी पर। बात करते हैं लव स्टोरी की जिसकी शूटिंग शुरू हुई कश्मीर [संगीत] में और 2 महीने तक पूरी यूनिट वहीं रही। एक तो फिल्म का विषय ऐसा और दूसरे उसमें प्रेमियों की भूमिका में एक बिल्कुल नौजवान जोड़ा। प्यार तो होना ही था। कहने को तो आप एक्टिंग कर रहे होते हैं। [संगीत] मगर ऐसी स्थिति में कभी-कभी एक्टिंग वास्तविकता के बहुत समीप पहुंच जाती है। देखो मैंने देखा है यह एक सपना। फूलों के शहर में है घर और ठीक ऐसा ही हुआ। रोमांस की एक्टिंग में ही रोमांस हो गया। तो एक पागल प्रेमी जैसी हो गई। रोज शूटिंग के बाद भी कुमार गौरव विजेता के पीछेपीछे घूमते रहते। ये लड़की [संगीत] जरा सी दीवानी लगती है। मुझे तो यह गुड़िया जापानी लगती। और अपनी इसी फिल्म का यह गाना भी गुनगुनाते। क्या गजब करते हो जी? प्यार से डरते हो जी। क्या गजब करते हो जी? प्यार से डरते हो जी कभी-कभी विजेता का हाथ पकड़ कर वो डांस भी करने लग जाते। विजेता के साथ उनकी बड़ी बहन माया आ गई हुई थी

जो विजेता से कहती बंटी से इतनी बात ना किया कर। इतना घुमा फिरा मत कर। आकर मेरे पास बैठा कर। किंतु शूटिंग तो साथ होती ही थी। बंटी विजेता को हंसाता रहता था। आश्चर्य नहीं कि 14 बरस की विजेता उसकी ओर खींचने लगी। [संगीत] इन दोनों के बीच जो शुरू हो गया था वो राजेंद्र कुमार की खुर्राट नजर से भला कहां छिपा रहता। वो अपने बेटे को इस तरह प्रेम पाश में बंधते देखकर गरजने बरसने लगे। बिल्कुल खिलाफ थे वह इस बात के। [संगीत] इन दोनों के इतनी बातचीत करने और घुल मिलकर रहने से उन्हें बहुत परेशानी थी। यह पहली बार था जब विजेता ने किसी लड़के को अपने इतने निकट पाया था। जरा सोचिए 14 साल की इस लड़की पर क्या बीती होगी जब उसने शूटिंग के बाद शाम को राजेंद्र कुमार को बंटी को डांटते हुए सुना। राजेंद्र कुमार के हाथ में जाम था और वो बंटी से कह रहे थे तुम मेरे लिए प्रिंस हो। मैं तुम्हारे लिए प्रिंसेस लाऊंगा। पैसे वाली खानदानी लड़की लाऊंगा। विजयता यह सब सुनकर डर जाती थी। उन्हें लगता था कि कैसे कोई ऐसा बोल सकता है। [संगीत] विजेता का परिवार यानी पंडित परिवार एक बहुत ही शालीन और स्नेहिल और प्यार से भरा हुआ परिवार था। दिखावे से [संगीत] दूर फिल्मी दुनिया की बनावट से दूर। एक आत्मीयता और अपनेपन की भावना में डूबा हुआ परिवार था। बंटी यानी कुमार गौरव अपने पिता के सामने चुप नहीं रहते थे। वह अपने प्यार के लिए अपने पिता से भिड़ जाते थे।

कहते थे मैं विजेता से प्यार करता हूं। उधर राजेंद्र कुमार प्रतीक्षा कर रहे थे लव स्टोरी की शूटिंग पूरा होने की जिसके बाद उन्हें विश्वास था कि वह अपने बेटे को विजेता से अलग करवा देंगे। [संगीत] [संगीत] लव स्टोरी इतनी बड़ी ब्लॉकबस्टर होगी इसका अनुमान किसी को नहीं था। लोगों ने कुमार गौरव और विजेता पंडित की जोड़ी को सर आंखों पर बिठाया। पहली ही फिल्म में इन दोनों को ऐसी गगनचुंबी सफलता मिली कि कहीं कोई संदेह नहीं था कि आने वाले समय में यह जोड़ी फिल्मी दुनिया की कुछ अत्यधिक सफल जोड़ियों में से एक बनेगी। याद आ रही है। किंतु जब आदमी को अपनी ऐठ और घमंड के आगे कुछ नहीं दिखाई देता तो बड़ी-बड़ी संभावनाएं भी घुटने टेक देती हैं। उनका पटाक्षेप हो जाता है। [संगीत] राजेंद्र कुमार की ऐंठ और घमंड ने भी ऐसा ही कर दिखाया। बनते दुल्हन प्रीत हमारी उलझन बन गई। बंटी अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध विजेता से मिलने उनके घर आते रहे और कहते रहे कि वो विवाह करेंगे तो उन्हीं से करेंगे। याद आ रही है। [संगीत] तेरी याद आ रही है। विजेता के माता-पिता और बड़ी बहन सुलक्षणा को भी ऐसा लग रहा था कि अंतत गतत्वा बंटी अपने पिता को मना लेंगे किंतु नहीं। राजेंद्र कुमार अपने परिवार की हैसियत के सामने विजेता पंडित के परिवार को दो टके का समझते थे। बंटी की एक ना चली। फिर एक दिन समाचार आया कि बंटी की सगाई राज कपूर की बेटी रीमा कपूर के साथ होने जा रही है। सुलक्षणा पंडित का परिवार भी इस आयोजन में आमंत्रित था। सुलक्षणा को लगा कि अब बंटी और विजेता का कोई चक्कर रहा नहीं और स्थिति सामान्य हो गई है। सो वो अपनी बहन को भी साथ ले गई। रीमा कपूर ने बंटी को जो अंगूठी पहनाई उसमें बड़ा सा हीरा जड़ा था। बंटी के चेहरे से स्पष्ट था कि वह प्रसन्न नहीं है। विजेता ने जब उन्हें बधाई दी और कहा अरे यह अंगूठी कितनी सुंदर है तो बंटी ने एक ओर मुड़कर कहा अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो मैं उतार देता हूं और उतारने की कोशिश भी की। विजेता ने उन्हें रोका और वहां से भाग गई। उन्हें लगा कि यह पगला गया है।

कोई तमाशा कर देगा। पास ही में सुलक्षणा पंडित अपनी दोस्त रीना रॉय से बात कर रही थी। रीना रॉय ने कहा इनका बहुत प्यार है। तुमने देखा बंटी कैसे अंगूठी उतार कर फेंक रहा था। सुलक्षणा ने कहा कि अब सगाई हो गई है। सब ठीक हो जाएगा। मगर सब ठीक नहीं था। सगाई के बाद भी बंटी ने विजेता के घर आना बंद नहीं किया। विजेता के माता-पिता को अच्छा नहीं लगता था। कहते थे राज कपूर की बेटी के साथ इसकी सगाई हो गई है। फिर क्यों यहां आता है यह? यह ठीक नहीं है। विजेता के पिता ने कहा कि वह राजेंद्र कुमार के घर जाएंगे और उनसे कहेंगे कि बंटी को उनके घर आने से रोके। विजेता ने कहा डैडी आप ऐसा बिल्कुल ना कीजिएगा। आपको पता नहीं वो कितने गुस्से वाले हैं। आपको धक्के मार कर निकाल देंगे। एक बार विजेता की मम्मी ने बंटी से कहा बेटा आपकी तो सगाई हो गई है। तो आप मेरी बेटी से मिलने मत आया करो। बंटी ने कहा कि आंटी मेरी सगाई हो गई है पर मैं शादी विजेता से ही करूंगा। विजेता की मम्मी ने कहा अगर इससे शादी करो तब तो आओ वरना मत आओ। बंटी ने कसम खाई कि वो शादी करेगा तो विजेता से करेगा वरना शादी नहीं करेगा। दो एक साल बाद पता चला कि बंटी का अफेयर सुनील दत्त की बेटी नम्रता दत्त से चल रहा है। उधर फिल्म निर्माता और निर्देशक बंटी के साथ अपनी फिल्मों में विजेता को लेना चाहते थे। पर राजेंद्र कुमार विजेता को निकलवा देते थे। निर्माता जोर देकर कहते कि यह जोड़ी बहुत हिट है। लोग इनके दोबारा साथ आने का इंतजार कर रहे हैं। राजेंद्र कुमार कहते कि पिक्चर हीरो से हिट होती है। हीरोइन से नहीं। मगर हुआ यह कि लव स्टोरी के बाद कुमार गौरव की सभी फिल्में फ्लॉप होती चली गई। पूनम ढिल्लो, रति अग्निहोत्री, पद्मिनी कोल्हापुरी इन सबके साथ फिल्में की पर सब बेकार। राजेंद्र कुमार की स्थिति गड़बड़ा रही थी। उन्होंने कहा कि

मैं अपने बेटे के साथ सबसे बड़ी हीरोइन को लूंगा। उन्होंने माधुरी दीक्षित को साइन किया और फिल्म बनाई फूल जो 1993 में रिलीज हुई थी। राजेंद्र कुमार ने लव स्टोरी से जो पैसा कमाया था वो सब इस फिल्म में झोंक दिया। मगर यह फिल्म भी चल नहीं पाई। इस फिल्म के साथ ही राजेंद्र कुमार के अरमानों और फिल्म बनाने के सामर्थ्य दोनों की धज्जियां उड़ गई। लव स्टोरी की जो गगनचुंबी सफलता थी वो धरी की धरी रह गई। उधर विजेता पंडित ने भी जो कुछ फिल्में की वो भी नहीं चली। हां अनिल कपूर के साथ उनकी फिल्म मोहब्बत थोड़ा चली पर दूसरी फिल्में जैसे संजय दत्त के साथ जीते हैं शान से और रजनीकांत के साथ भी एक फिल्म की वफादार मगर सब गड़बड़ झाला ही रहा। सांसों से नहीं [संगीत] कदमों से नहीं मोहब्बत से चलती है दुनिया। लव स्टोरी के बाद लोग बिल्कुल यंग विजेता पंडित और कुमार गौरव को साथ देखना चाहते थे। लेकिन राजेंद्र कुमार के दुराग्रह और हठ के कारण ना केवल यह कि उनकी अपनी वित्तीय हालत चौपट हो गई बल्कि उनके बेटे कुमार गौरव और मासूम विजेता पंडित का करियर भी ध्वस्तभूत हो गया। कुछ कह कह के मुझे रह के तड़पा रही है। यादें नई पुरानी में अभी इतना ही। हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए। वीडियो को लाइक कीजिए और शेयर भी कीजिए। हम लेकर आते रहेंगे विस्मृति के गर्त से निकालकर और भी रोचक किस्से। रोचक यादें। नमस्कार। याद आ रही है [संगीत] तेरी याद आ रही

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