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क्यों चुपचाप बंद कमरे में पति से मार खाती रही एक्ट्रेस? वजह जानकर रोंगटे खडे हो जाएंगे।

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भारतीय हिंदी सिनेमा के 70 की दशक की एक ऐसी अभिनेत्री की जिसकी खूबसूरती दिलकश अदाओं और उसके आकर्षण ने इनको बनाया हिंदी सिनेमा की बेहद खूबसूरत हसीन मल्लिका इस अभिनेत्री की खूबसूरती और मासूमियत का ब्लैक एंड वाइट की दुनिया में व जादू था कि यह उस दौर में हर युवा नौजवान और अभिनेताओं के दिल की धड़कन बनी रजनी गंधा फूल तुम्हारी महके क्यों यह अभिनेत्री बड़े-बड़े अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं के साथ शीर्ष पायदान की फिल्मों में अभिनय करने के बावजूद अपने पूरे जीवन काल में सिर्फ एक ही फिल्म की से बनी थी हिंदुस्तान की सबसे लोकप्रिय हीरोइन ना जाने क्यों होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेत्री की मां ने इनको नवजात अवस्था में ही छोड़कर वह हमेशा के लिए कहीं चली गई थी और जब यह अभिनेत्री बड़ी हुई तो इस अभिनेत्री के पति ने भी इनको हमेशा के लिए छोड़ दिया और ना जाने कहां चले गए मत जाओ मुझे छोड़ कर मत जा छोड़कर मत जाओ क्यों इस अभिनेत्री को अपनी जिंदगी में करनी पड़ी दो-दो शादियां क्यों इस अभिनेत्री के दूसरे पति ने बना दी इनकी जिंदगी मौत से बदतर कैसे इस अदाकारा के पति ने इनको दी वो शारीरिक और मानसिक जिसकी वजह से यह अभिनेत्री डूब गई हमेशा के लिए दुख और तकलीफ के गहरे सागर में मेरा जीवन कुछ काम ना आया और इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि यह अभिनेत्री दोदो शादी करने के बाद भी कभी नहीं बन पाई अपनी किसी भी संतान की मां आज का दिन पल पल पार कैसा होगा कल क्यों इस अभिनेत्री को अपना वंश चलाने के लिए देना पड़ा था एक अनाथ बच्ची को अपना नाम और सहारा पिता का।

नाम आप मेरा ही नाम लिख दीजिए क्यों इस अभिनेत्री को हिंदी सिनेमा में अंग प्रदर्शन ना करने की वजह से धोना पड़ा था बड़े बजट की फिल्मों और अभिनेताओं से हाथ मैं बहुत दुखी हूं स्वामी जी वो कौन सा फिल्म निर्माता था जो इस अभिनेत्री को फिल्मों में दिखाना चाहता था नगन अवस्था में क्यों इस अभिनेत्री के लिए बंद कर दिए गए हिंदी सिनेमा के दरवाजे इस अदाकारा की जिंदगी में वह शख्स कौन था जो इनको दिन रात पीट पीट कर देता था शरीर को तोड़ देने वाली यातनाएं जाने दो मुझे जाने दो बुआ इस हीरोइन को दुखी होकर हिंदुस्तान छोड़कर सात समुंदर पार बसना पड़ा और इस अदाकारा की वो आखिरी ख्वाहिश क्या थी जिसको यह अभिनेत्री अपने जीते जी कभी पूरा नहीं कर पाई बताएंगे और भी बहुत कुछ इस महान अभिनेत्री की दुख भरी जिंदगी के बारे में

आज हम बात कर रहे हैं सिनेमा के सुनहरे दौर की उस अदाकारा की जिसने हिंदी फिल्मों में अपनी शुरुआत की मॉडलिंग के रास्ते अपनी खूबसूरत कद काठी के चलते यह अभिनेत्री बन गई बड़े-बड़े अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद लेकिन अपने पूरे हिंदी सिनेमा के सफर में यह अभ अभिनेत्री हमेशा एक ही फिल्म की वजह से पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुई और पहचानी गई रजनी गंधा के नाम से यानी विद्या सिन्हा के नाम से रजनी गंधा फूल तुम्हारी कैसे इनका फिल्मों में आना हुआ और कैसे इनकी हस्ती खेलती जिंदगी बन गई दुख तकलीफ का सागर हम आपको इस अदाकारा की जिंदगी के बारे में सब कुछ बताएं उससे पहले एक नजर डाल लेते हैं इनके परिवार पढ़ाई लिखाई और शुरुआती जीवन पर तुम्हे देखती हो तो विद्या सिन्हा जन्म 15 नवंबर 1947 को मुंबई में एक फिल्मी परिवार में हुआ था जब विद्या की मां विद्या को जन्म दे रही थी उसी वक्त इनकी मां उस तकलीफ को सहन नहीं कर पाई और इनको जन्म देते ही विद्या की मां अपनी नवजात बेटी का मुह देखे बिना ही इस दुनिया से तकलीफ के साथ हमेशा हमेशा के लिए अलविदा हो गई थी और इस तरह से विद्या कभी अपनी मां को नहीं देख पाई थी इनके पिता का नाम राणा प्रताप सिंह था जो उस समय के जानेमाने फिल्म निर्माता और निर्देशक थे विद्या की मां के निधन के बाद इनके पिता राणा प्रताप सिंह ने दूसरी शादी कर ली थी और वहीं विद्या के नाना उनको अपने घर ले गए जहां इनकी परवरिश होने लगी थी विद्या का नाम उसके नाना मोहन सिन्हा ने ही इनका नाम विद्या सिन्हा रखा था मोहन सिन्हा भी भारतीय हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म निर्देशक थे मोहन सिन्हा वही निर्देशक हैं जिन्होंने भारतीय हिंदी सिनेमा की आज तक की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री बेगम मुमताज जहन देहलवी जिनको हम मधुबाला के नाम से जानते हैं।

मधुबाला को फिल्मी नाम मोहन सिन्हा ने ही दिया था साथ ही मोहन सिन्हा ने मशहूर और महान खलनायक और नायक जीवन और मदनपुरी को हिंदी सिनेमा में ने वाले मोहन सिन्हा ही थे विद्या अपने नाना के यहां अपनी मौसी की निगरानी में बड़ी हो रही थी विद्या की मां की मौत के बाद विद्या की मौसी इनकी मां बन गई थी विद्या बेहद चंचल थी पढ़ाई लिखाई में काफी होशियार भी थी विद्या को बचपन से ही अपने घर में फिल्मी माहौल मिला था लेकिन इन सब के बावजूद कभी भी विद्या ने फिल्मों में जाने का नहीं सोचा विद्या बेहद खूबसूरत दिखती थी उनके रंग रंग रूप में बड़ा ही गजब का आकर्षण था विद्या की मौसी विद्या की खूबसूरती से भली भांति परिचित थी लिहाजा इनकी मौसी ने विद्या को 18 साल की उम्र में बॉम्बे ब्यूटी कंटेस्ट का फॉर्म भरवा दिया परिणाम स्वरूप विद्या इस ब्यूटी कंटेस्ट को जीत गई और उस वक्त की मिस बम्बे के खिताब से वो नवाजी गई इस जीत के साथ विद्या की जिंदगी अब एक नए रंग रूप में रंगने जा रही थी कंटेस्ट जीतने के बाद विद्या को कई बड़े ब्रांड के मैगजीन और अखबारों के विज्ञापन मिल गए जिसके बाद विद्या उस वक्त की हर दूसरी पत्रिका के कवर पेज की शोभा बढ़ा रही थी और ऐसे में ही उस वक्त के मशहूर और काबिल फिल्म निर्देशक बासू चटर्जी की नजर एक पत्रिका के कवर पेज पर पड़ी जिस पर विद्या की खूबसूरत फोटो थी उसके बाद विद्या के बारे में पता किया गया और इनसे मुलाकात की गई क्योंकि बासू चैटर्जी अपनी एक फिल्म रजनी गंधा बनाने जा रहे थे ।

जिसके लिए उनको एक नए चेहरे की तलाश थी लिहाजा बासू चटर्जी ने विद्या को अपनी फिल्म रजनी गंधा का प्रस्ताव दे दिया हालांकि विद्या ने कभी नहीं सोचा था कि उनके पास इस तरह से कोई फिल्म आ जाएगी परिवार की रजामंदी के साथ विद्या ने इस फिल्म के लिए हां कर दी इस फिल्म में इनके साथ फिल्म की नई शुरुआत कर रहे अभिनेता अमोल पालेकर थे जो आगे चलकर काफी मशहूर भी हुए तो वहीं इस फिल्म के दूसरे बड़े कलाकार दिनेश ठाकुर भी थे जो कि एक मंझे हुए अभिनेता थे कई बार यूं भी देखा है ये जो मन की सीम रेखा दिनेश ठाकुर ने इस फिल्म में विद्या को अभिनय करने में उनकी बहुत मदद की साल 1974 में रजनी गंधा फिल्म बनकर जब दर्शकों के सामने पहुंची तो फिल्म ने उम्मीद से बढ़कर लोगों का मनोरंजन किया अमोल पालेकर विद्या सिन्हा दिनेश ठाकुर की तिगड़ी ने कमाल कर दिया और यह फिल्म सुपर डुपर हिट हो गई।

और आगे चलकर सिल्वर जुबली फिल्म बनी रजनी गंधा फूल तुम्हारी इस फिल्म के लिए विद्या को ₹1000000 मिले थे यह फिल्म साल 1974 में सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म बनी और इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म फेयर के अवार्ड से सम्मानित किया गया इस एक फिल्म की कामयाबी ने विद्या को रातों-रात वो लोकप्रियता दिलाई कि इनकी तुलना जया भादुरी राखी मौसमी चैटर्जी जैसी अभिनेत्रियों से की जाने लगी लेकिन हम आपको यहां पर एक बात से रूबरू जरूर करा दें कि रजनी गंधा फिल्म विद्या की पहली फिल्म नहीं थी विद्या इस फिल्म से पहले उसी साल पहले रिलीज हुई फिल्म राजा काका से अपने हिंदी सिनेमा के सफर की शुरुआत कर चुकी थी लेकिन यह फिल्म चर्चा में नहीं रही रजनी गंधा फिल्म की अपार सफलता के बाद बासू चटर्जी ने एक बार फिर से विद्या और अमोल पालेकर को लेकर साल 1976 में एक फिल्म और बनाई छोटी सी बात और यह फिल्म भी पहली फिल्म रजनी गंधा की तरह धमाकेदार मनोरंजन से भरपूर रही और विद्या की यह फिल्म भी सिल्वर जुबली फिल्म बनी ना जाने क्यों फिल्म को मिला दर्शकों का प्यार और अपार सफलता ने विद्या को हिंदुस्तान में घर-घर में मशहूर कर दिया था और अब विद्या के पास हिंदी सिनेमा में काम करने की कमी नहीं थी ।

विद्या के पास फिल्म की एक लंबी लाइन थी और विद्या ने भी इस बीच फिल्म मुक्ति कर्म इंकार किताब पति-पत्नी और वो मीरा स्वयंवर मगरूर लव स्टोरी कैदी जीवा जैसी मशहूर और सुपर हिट फिल्म में दमदार काम किया जिसके लिए विद्या को आज तक याद किया जाता है [प्रशंसा] पानी से नहाना चाहिए ना आए या ना विद्या भारतीय हिंदी सिनेमा की वो अभिनेत्री थी जिन्होंने सभी को बताया था कि कैसे हिंदी सिनेमा में शरीर का अंग प्रदर्शन किए बिना भी फिल्मों में काम किया जाता है और सफल हुआ जाता है जबकि इनके बराबर की एक्ट्रेस उस समय खुलकर फिल्मों में अंग प्रदर्शन का स्वाद लोगों के बीच परोस रही थी।

विद्या उस समय के टॉप सुपरस्टार अभिनेता राजेश खन्ना विनोद खन्ना धर्मेंद्र संजीव कुमार अशोक कुमार अमजद खान शक्ति कपूर राजेंद्र कुमार शत्रुघन सिन्हा विनोद मेहरा राकेश रोशन संजय दत्त जैसे लोकप्रिय महान इन अभिनेताओं के साथ बढ़ चढ़कर काम कर रही थी ये दिन क्या आए लगे फूल हस विद्या के अभिनय की चर्चा हर तरफ थी और उनकी इसी कामयाबी का शोर मशहूर अभिनेता और फिल्म निर्माता राज कपूर के कानों में पहुंचा उन दिनों राज कपूर अपनी एक लोकप्रिय फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम बनाने जा रहे थे सत्यम शिवम सुंदरम विद्या की लोकप्रियता को देखते हुए राज कपूर ने अपनी यह फिल्म विद्या को को ऑफर कर दी लेकिन जब विद्या ने इस फिल्म की कहानी और किरदार के बारे में जाना तो उन्होंने इतने बड़े फिल्म निर्माता को इस फिल्म के लिए साफ मना कर दिया क्योंकि विद्या फिल्मों में किसी भी तरह का अंग प्रदर्शन नहीं करना चाहती थी और राज कपूर विद्या को इस फिल्म में अर्ध नग्न अवस्था में दिखाना चाहते थे।

वो विद्या के बेहद बोल्ड और न्यूट सीन फिल्मा आना चाहते थे जैसा कि चलकर इस फिल्म की अभिनेत्री जीनत अमान ने इस किरदार को निभाया भोर भए पनघट पे मोहिन लेकिन अब भारतीय हिंदी सिनेमा बड़ी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा था विद्या के अलावा जीनत अमान परवीन बॉबी हेमा मालिनी शर्मिला टैगोर मुमताज श्रीदेवी जैसी अभिनेत्रियां हिंदी में खूबसूरती के साथ बोल्ड सीन भी दे रही थी और अच्छा काम भी कर रही थी तो ऐसे में विद्या ने मन बनाया कि अब अपनी संजीदा छवि से बाहर निकलकर बोल्ड सींस का सहारा लिया जाए लेकिन इसे किस्मत कहिए या फिर दुर्भाग्य कि विद्या और दूसरी हीरोइन की रेस में पिछड़ गए और यह अंग प्रदर्शन नहीं कर पाई एक परदे को तुम आज उठाओ एक इसके बाद विद्या अपनी उम्र में आगे ब बढ़ रही थी तो अब इनको फिल्मों में लीड रोल मिलने बंद हो गए अब इनको सहायक अभिनेत्री के किरदार के लिए फिल्म में ऑफर हो रही थी और अब विद्या किसी फिल्म में भाभी तो किसी फिल्म में मां के रोल में नजर आने लगी समय बदला जमाना बदला और अब हिंदी सिनेमा भी बदल गया था पुराने चेहरों की जगह नए चेहरे आ गए थे और विद्या सिन्हा इस भीड़ में कहीं खोसी गई थी उनको आख री बार साल 2011 में सलमान खान की फिल्म बॉडीगार्ड में करीना कपूर की मां के रोल को निभाते हुए देखा गया था विद्या सिन्हा ने हिंदी सिनेमा को कई लोकप्रिय फिल्में दी।

शानदार अभिनय के साथ लेकिन इस सब के बावजूद विद्या कभी भी टॉप की एक्ट्रेस नहीं बन पाई जिसका विद्या सिन्हा को हमेशा अफसोस होता था विद्या सिन्हा के हिंदी सिनेमा में सभी के साथ अच्छे रिश्ते रहे और यह अपने दौर के अभिनेताओं की और फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद भी बनी थी और विद्या हिंदी सिनेमा की पहली ऐसी अभिनेत्री थी उस दौर की जिन्होंने फिल्मों में कभी अश्लीलता नहीं परोसी हमेशा वो फिल्मी पर्दे पर अपने बदन को भारतीय संस्कृति के साथ संजोए हुए दिखें ।

जिसके लिए विद्या सिन्हा को हमेशा याद किया जाता है और हमेशा आगे भी याद किया जाएगा तेरे हाथों में लगे तो रंग ला मेहंदी से तो दोस्तों यह तो था विद्या सिन्हा का फिल्मी सफर अब बात करते हैं विद्या सिन्हा की निजी जीवन की बात जिसकी वजह से यह अभिनेत्री हमेशा दुख तकलीफ झेलती रही विद्या जब बालिक अवस्था में कदम रख रही थी तो इनको उस समय अपने ही पड़ोसी वेंकटेश्वरण अयर जो कि साउथ इंडियन थे उनसे मोहब्बत हो गई मेरे हाथों में मेहंदी लगा दे कोई इनकी मोहब्बत परवान चढ़ी और परिवार की रजामंदी के साथ दोनों ने साल 1968 में शादी कर ली इस समय तक विद्या सिर्फ मॉडलिंग किया करती थी शादी के बाद ही इन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया था विद्या के पति इनसे एक बच्चा चाहते थे लेकिन विद्या ऐसा नहीं कर पा रही थी विद्या काफी परेशान थी संतान ना होने से विद्या काफी ज्यादा मानसिक रूप से परेशान हो गई थी तो ऐसे में विद्या ने एक बेटी को गोद लेने की बात कही और हुआ भी ऐसा ही उन्होंने साल 1979 में एक अनाथ आश्रम से एक बेटी को गोद ले लिया जिसका नाम रखा जानवी बेटी की परवरिश की खातिर उन दिनों विद्या कई फिल्मों को भी नकार रही थी।

इनकी जिंदगी में अभी तक सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था इनकी जिंदगी में वो हुआ जिसकी वजह से इनकी पूरी जिंदगी ही पलट गई दरअसल साल 1996 में गंभीर बीमारी के चलते इनके पति का अचानक निधन हो गया पति के निधन ने विद्या को सदमे में डाल दिया उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था क्योंकि पति के बिना जिंदगी को गुजारना और बेटी की परवरिश करना बेहद मुश्किल था सारी सारी खुशियां जीवन में किसको मिलती है लेकिन भगवान की मर्जी के आगे भला किसकी चली है विद्या कुछ समय तक गुमसुम रही गुमनाम रही लेकिन कुछ समय बाद हिम्मत करके अपनी बेटी की खातिर अपने आप को संभालते हुए आगे बढ़ने लगी और यह बेटी को लेकर भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में चली गई समय तू जल्दी जल्दी चल मैं तू जल्दी जल्दी अब पति के निधन को 4 साल गुजर गए थे तो ऐसे में इनकी मुलाकात एक डॉक्टर और व्यापारी भीमराव सालुंखे से हुई दोनों में मुलाकात हुई और विद्या एक बार फिर से प्यार में पड़ गई और 54 साल की उम्र में साल 2001 में दोनों ने शादी कर ली।

लेकिन विद्या की यह शादी उनकी जिंदगी में दुख तकलीफ का सागर लेकर आने वाली थी विद्या के दूसरे पति की नजर विद्या की जायदाद पर थी उनकी नजर विद्या के पैसों पर थी शादी तो सिर्फ एक बहाना था वो सिर्फ इनकी दौलत के पीछे था इनका पति विद्या से पैसों की मांग करता और मांग पूरी ना होने पर विद्या को बंद कमरे में मारता पीटता था और यह सिलसिला सालों तक यूं ही चलता रहा विद्या अपनी बेटी की खातिर इसी तरह दिन रात अपने पति के हाथों

रही और उनके ऊपर सभी तरह के जुल्म किए जा रहे थे बताया जाता है कि इनके पति गुस्से में कई बार विद्या को सिगरेट से भी जला दिया करते थे विद्या बेहद ही बुरे दौर से गुजर रही थी लेकिन एक दिन जब विद्या अपने पति के जुल्मो सितम से थक कर हार गई तो हिम्मत करके इन्होंने अपनी बेटी के साथ मिलकर 9 जनवरी 2009 को अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी जिसके बाद इनके पति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया इसके बाद विद्या ने भारत लौटने का फैसला किया और यह बेटी के साथ भारत वापस लौट आए भारत लौटकर इनको पति के जुल्म से तो राहत मिल गई थी लेकिन आगे की जिंदगी और बेटी के भविष्य को लेकर यह चिंता में रहती जिसकी वजह से यह बीमार रहने लगी वह अपने खाने पीने पर भी ध्यान नहीं दे पा रही थी बस अपने आप को अकेले कमरे में कैद कर लिया था आधे मुर्धा आती है थोड़ी सी लिया फती है

लेकिन इस बार उनकी बेटी जानवी ने अपनी मां का साथ दिया और अपनी मां को एक बार फिर से फिल्मों में काम करने के लिए कहा विद्या ने अपनी बेटी की बात मानी और अब छोटे पर्दे की तरफ उन्होंने रुख किया और काम करने लगी हालांकि विद्या पहले भी कुछ छोटे पर्दे के सीरियल्स में काम कर चुकी थी विद्या को इन टीवी शोज में काम तो मिल रहा था लेकिन शायद भगवान को विद्या की खुशी अभी मंजूर नहीं थी विद्या स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर काफी तकलीफ में ।

थी वह बीमार रहने लगी और एक दिन तबीयत ज्यादा खराब होने की वजह से विद्या को आनंद फानन में साल 2019 में मुंबई के जुहू के एक हॉस्पिटल में इनको भर्ती कराया गया जहां इनका इलाज किया गया डॉक्टर्स ने बताया कि विद्या को फेफड़ों और दिल की पुरानी बीमारी है जिससे यह पिछले काफी समय से जूझती आ रही थी लेकिन ठीक इलाज ना कराने की वजह से आज विद्या इस हालात में पहुंची है विद्या की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती ही चली गई हालत यह हो गई कि इनको 6 दिन लगातार वेंटिलेटर पर रखा गया।

लेकिन विद्या की हालत में कुछ भी सुधार नहीं हुआ और आखिरकार 15 सितंबर 2019 को 71 साल की विद्या जिंदगी की जंग को हार गई और हम हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया से रुखसत हो गई और विद्या सिन्हा जैसी महान अभिनेत्री अपनी निजी दुख तकलीफ के सागर में अपनी बेटी को अकेला छोड़कर हमेशा के लिए इस दुनिया से अलविदा कह गई खुद ही अपनी मौत हूं मैं तो दोस्तों यह थी विद्या सिन्हा जिनको फिल्मी परिवार में जन्म मिला विद्या को सब कुछ मिला सिवा मां के प्यार के विद्या की निजी जिंदगी बचपन से लेकर अंतिम पलों तक हमेशा दुख तकलीफों से घिरी रही लेकिन विद्या ने कभी हार नहीं मानी विद्या अपनी बेटी जानवी को बेहद प्यार करती थी वो हमेशा यही सोचती थी कि उनके मरने के बाद उनकी बेटी का क्या होगा।

लेकिन दुनिया में होता तो वही है जो भगवान को मंजूर होता है आज विद्या भले ही हमारे बीच ना हो लेकिन जब भी मिडिल क्लास फैमिली की फिल्मों का जिक्र होगा तो उसमें विद्या सिन्हा का नाम टॉप पायदान पर चमकता रहेगा समय बदलेगा दौर बदलेगा और लोगों के चेहरे भी बदलेंगे लेकिन जब तक भारतीय हिंदी सिनेमा का वजूद है तब तक हम सबके बीच विद्या सिन्हा जैसी महान अभिनेत्री जिंदा थी जिंदा है और जिंदा रहेगी विद्या सिन्हा को शानदार यादगार अभिनय के लिए हमेशा याद किया जाएगा इस

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