17 अप्रैल 1971 यह चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्ताई तूने चढ़ती जवानी और चाल मस्तानी वाली इस बाला की कदर बस इतनी थी कि वो उस दौर के चमकते सितारे जितेंद्र संग नाच रही थी। वरना फिल्म की हीरोइन तो कोई और थी जिसके पीछे बड़े-बड़े सितारे नाचते थे। अरुणा ईरानी पिछली कई फिल्मों में आइटम डांस या बैं परफॉर्मेंस ही देती आ रही थी और उनकी छवि अभी आइटम गर्ल की ही थी। ऐसे में अचानक उन्हें बतौर लीड एक्ट्रेस लेकर महमूद ने एक फिल्म जितेंद्र को ऑफर की तो पहले तो उन्हें लगा कि यह कॉमेडियन मजाक कर रहा है। लेकिन जब महमूद ने बताया कि पहली बार फिल्म प्रोडक्शन में हाथ आजमा रहा हूं तो सीरियस हुए और बोले कि अरुणा ईरानी की जगह कोई और हीरोइन लाओ यार। फिर सोचते हैं। हालांकि वह जानते थे कि महमूद अरुणा को नहीं हटाने वाले। महमूद ने मान मनोवल की तो जितेंद्र ने व्यस्त होने और छह से ज्यादा फिल्में साइन नहीं कर पाने की मजबूरी बताई और उनसे पीछा छुड़ाया। महमूद को कई और अभिनेताओं ने मना कर दिया कि वह अरुणा ईरानी संग फिल्म नहीं कर सकते। कईयों को यह भी लगा कि महमूद यह फिल्म ही अरुणा ईरानी को बतौर लीड एक्ट्रेस ल्च करने के लिए बना रहा है। क्योंकि यह दोनों तब काफी करीब थे और इनके गुपचुप शादी की खबरें तक उड़ने लगी थी। और खुद अरुणा ईरानी की मानें तो ऐसी खबरों के चलते ही दूसरे प्रोड्यूसर उन्हें बतौर हीरोइन लेने से आनाकानी कर रहे थे।
ऐसे में अरुणा की खातिर कम से कम महमूद को तो यह काम करना ही था। कुछ एक्टर्स ने ऑफर ठुकराते हुए यहां तक कह दिया कि महमूद भाई तुम खुद ही अरुणा के हीरो क्यों नहीं बन जाते? जोड़ी हमारी जमेगा कैसे जानी [संगीत] जोड़ी हमारी फिल्मों में बतौर साइड एक्टर महमूद और अरुणा की जोड़ी कोई नई नहीं थी। लेकिन अब वह खुद अपनी फिल्म बना रहे थे। वह भी अकेले नहीं बल्कि एनसीसीपी के साथ मिलकर को प्रोडक्शन में रकम लगी थी तो प्रॉफिटेबिलिटी का भी ख्याल था। कहानी भी ऐसी जिसमें ज्यादा बदलाव नहीं हो सकता था। असल में 5 साल पहले आई तमिल फिल्म मद्रास टू पांडिचेरी की हिंदी रिमेक थी जिसे नया नाम दिया गया बॉम्बे टू गोवा। फिल्म के टाइटल, स्थान और किरदारों के नाम के अलावा बहुत कुछ वही था।
गाने, संवाद और कुछ सीन हिंदी ऑडियंस के हिसाब से मॉडलेट किए गए थे। [संगीत] पूरी फिल्म यात्रियों से भरी एक बस के इर्द-गिर्द घूमती है। जो ओरिजिनल फिल्म है। मद्रास से पांडचेरी के लिए निकली है और यहां बॉम्बे से गोवा के लिए। बस में एक खाते-पीते अच्छे घर से भागी युवती आ चढ़ती है। जहां पहले से भरा पूरा इंडिया तमाम कौतूहल के साथ यात्रा कर रहा है। कई कॉमिक पंच के साथ कंडक्टर बस ही नहीं बल्कि फिल्म का भी सूत्रधार है और यह रोल महमूद के ही लीडिंग हाथों में है। जबकि छोटे भाई को चमकाने के लिए उन्होंने उसे ड्राइवर के रोल में रखा था। उन दिनों राजेश खन्ना का कितना क्रेज था। इन दो किरदारों के नाम राजेश और खन्ना रखा गया था। कहते हैं कि महमूद ने राजेश खन्ना से भी आस लगाई थी। हालांकि उनके चढ़ते स्टारडम और बढ़ती पीस के चलते खुद ही पीछे हट गए। लेकिन उन्होंने इस फिल्म के लिए अपने तमाम संपर्कों को भुनाया। किशोर कुमार के गाने और इस गेस्ट अपीयरेंस ने भी फिल्म के कॉमिक कॉकटेल में अपना इफेक्ट डाला। मिड जर्नी में हीरो की एंट्री होती है जिसका सामना पहले हीरोइन और फिर उसके पीछे पड़े विलेन से होती है और इस तरह कहानी अब हीरो और
हीरोइन के सुपुर्द हो जाती है। इसी ही किरदार के लिए महमूद को एक्टर चाहिए था और अब उनकी नजर एक ऐसे लड़के पर गई जिसके साथ कोई हीरोइन काम करने को तैयार नहीं थी। वह लड़का कोई और नहीं बल्कि उनके छोटे भाई अनवर अली के फ्लैट में रहने वाला वह पर्दे का अनवर अली था जिसे ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी फिल्म साथ हिंदुस्तानी में ब्रेक दिया था। और यह भी कम दिलचस्प नहीं कि जिस कारवा फिल्म के लीड हीरो जितेंद्र ने आइटम डांसर अरुणा के अगेंस्ट हीरो बनने से इंकार कर दिया था। उसी फिल्म की लीड हीरोइन आशा पारिक ने एक फिल्म इसलिए ठुकरा दी। इसमें उनके मुकाबिल बड़े हीरो की जगह इस दुबले पतले फ्लॉपी लंबू को कास्ट किया गया था। जिसका नाम भी उन्होंने नहीं सुना था। यानी अब हालात ऐसे कि एक हीरोइन को हीरो नहीं मिल रहा था और दूसरे हीरो को हीरोइन या कह लें कि वो बड़ी हीरोइनों की हिकारत से मारा फिर रहा था। महमूद ने प्रोड्यूसर एनसीप्पी और डायरेक्टर एस रामनाथन के साथ अमिताभ की मीटिंग कराते हुए उनसे सिर्फ इतना पूछा था कि नाचना जानते हो? अमिताभ ने कहा थोड़ा बहुत जानता हूं बाकी सब सीख लूंगा। इस किताब में महमूद के भाई अनवर अली के हवाले से लिखा है कि एक दिन भाईजान हमें ताज होटल स्थित ब्लोअप रेसरा ले गए। वहां डांसिंग फ्लोर पर अमित ने कुछ हाथ पैर हिलाए और उसी दिन उसे कास्ट कर लिया गया। और डायरेक्टर एस रामनाथन की मानें तो बॉम्बे टू गोवा के लिए अमिताभ बच्चन का पहला सीन भी उसी डांसिंग फ्लोर वाले माहौल में शूट किया गया था। जहां उषा उथूप ने स्पेशल अपीयरेंस के साथ गाना गाया था। रामनाथन के मुताबिक अमिताभ का सीन बिना किसी रिटेक के एक ही शॉट में ओके हो गया था और उसी दिन मुझे लगा कि इस लड़के में एक्टिंग मटेरियल है। खुद एस रामनाथन पहली बार हिंदी फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे। लेकिन तमिल की हिंदी रिमेक होने के चलते उनका काम आसान था। देखा ना हाय रे सोचा ना हाय रे रख दी
निशाने पे जान। [संगीत] 3 मार्च 1972 को ये फिल्म आते-आते अमिताभ बच्चन की कई और फिल्में फ्लॉप हो गई थी। और अब तो डायरेक्टर उनसे यहां तक कहने लगे थे कि जाओ पहले अपने लिए हीरोइन लेकर आओ। लेकिन दोस्तों ठुकराने और पीटने पर तो लोहा, तांबा और पीतल भी चमक उठते हैं। यहां तो एक सोना धूमिल भर हुआ था जो वक्त की आग में तप कर कुंदन बनने जा रहा था। जग तोड़ा है तेरे प्यार में सनम। यही वो फिल्म है जिसके इस सीन में प्रकाश मेहरा को अपनी फिल्म जंजीर के लिए इंस्पेक्टर विजय वर्मा मिल गया था। और इत्तेफाक यह भी कि उस रोल को जितेंद्र, धर्मेंद्र जैसे नए सितारों से लेकर देवानंद और राजकुमार जैसे दिग्गजों ने भी ठुकरा दिया था। प्रकाश मेहरा ने प्राण के बेटे सिकंदर की सिफारिश और जावेद अख्तर की सलाह के बाद बॉम्बे टू गोवा देखी थी और इस सीन से प्रभावित होकर अमिताभ बच्चन को जंजीर ऑफर की थी। उसके बाद क्या हुआ? एक लंबा इतिहास है जिसके कई किस्से और कहानियां आप सुन चुके हैं और मैं भी अक्सर सुनाता रहता हूं। बॉम्बे टू गोवा को फिल्मी इतिहासकारों ने वैसे तो अमिताभ की उन दर्जन भर असफल फिल्मों की फहरिस्त में ही रखा है जो जंजीर से पहले आई थी। लेकिन सच्चाई यही है कि बॉम्बे टू गोवा फर्स्ट रिलीज बेसिस पर भी एक हिट या कम से कम सेमीट फिल्म तो थी ही और अब तो यह कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। ऐसे में बतौर लीड एक्टर या अमिताभ बच्चन की पहली सफल फिल्म थी।
चलती बस में फिल्माए गए इस गाने को लेकर आज बड़े-बड़े डायरेक्टर और कोरियोग्राफर अमिताभ बच्चन की एक्टिंग की तारीफ करते हैं। और खुद अरुणा ईरानी जिनका करियर बतौर लीड एक्ट्रेस यहां से लंबी उड़ान तो नहीं भर पाया लेकिन ये अकेली फिल्म भी उनके लिए ऐतिहासिक धरोहर से कम नहीं। मैं भी तेरी हूं सनम। देखा ना हाय रे सो जाना। हाय रे रख दी निशाने पे जान। [संगीत] तो स्कल्ट कॉमेडी फिल्म की यादों के साथ आज बस इतना ही। चलते-चलते वीडियो लाइक और शेयर तो करें ही। अगर चैनल सब्सक्राइब नहीं किया है तो वह भी करते चलें। कमेंट बॉक्स में आपकी हर राय का स्वागत है। शुक्रिया नमस्ते आभार। बॉम्बे गोवा बम बॉम्बे गोवा बॉम्बे गोवा बम बम कदमों में तेरे निकले मेरा दम है बस यही अरमान