Cli

मोदी के भाई पेट्रोल पंप पर, ठेले पर और कबाड़ के काम! ऐसा सच, जिसे कम लोग जानते हैं!

Uncategorized

अगर आप दिन के वक्त यह वीडियो देख रहे हैं तो ध्यान रखिए जब आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुल्क के इकबाल को बुलंद करने के लिए काम कर रहे हैं उनका एक भाई दिल्ली से हजार किलोमीटर दूर एक पेट्रोल पंप में लोगों की गाड़ियों में ईधन भर रहा है उनका एक भाई ठेला निकालकर पतंगे बेच रहा है उनका एक भाई कबाड़ी काम कर रहा है उनके दो बुजुर्ग भाई वृद्धाश्रम या अपने निम्न मध्यवर्गीय इलाकों वाले घरों में रहकर रोज मर्रा के काम कर रहे हैं उनका एक भाई पशुओं के बाड़े में हेल्पर का काम कर रहा है कितना अजीब लगता है

ना इतना बड़ा मुल्क उस मुल्क की सियासत उस सियासत का सिरमोर और उसके परिवार के लोग इतना सामान्य जीवन जी रहे हैं इसमें ताज्जुब की बात नहीं है और दोष हम भारतवासियों का भी नहीं है दरअसल मोदी के पहले जितने भी प्रधानमंत्री हुए उनके परिवार के लोगों ने सियासत के जरिए सुख सुविधाओं के तमाम इंतजाम जुटाए और हमें इसकी आदत पड़ गई और हम उनको राज परिवार की तरह ट्रीट करने लगे इस पूरी लिस्ट में एक मात्र अपवाद मोदी के ठीक पहले 10 बरस तक देश के प्रधानमंत्री रहे डॉक मनमोहन सिंह हैं जिनकी दोनों बेटियां सत्ता की चका चौन से दूर रही और बतौर शिक्षक अपने पेशे के प्रति पूरी पूरी ईमानदारी के साथ वफा निभाते हुए काम कर रही हैं

लेकिन बाकी प्रधानमंत्रियों के परिवारों का क्या और शुरुआत कहां से की जाए समाजवाद के लाडले देश के पहले प्रधानमंत्री गांधी की आंखों के नूर जवाहरलाल नेहरू क्या सोचना था नेहरू का परिवार के प्रति एक वाकया सुनाता हूं साल 1959 कांग्रेस के तमाम बुजुर्ग बैठे थे वजह कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग जल्द ही नेहरू का कार्यकाल बतौर कांग्रेस अध्यक्ष पूरा होने वाला था नए नाम सामने आ रहे थे अब वह कौन सा अनुभवी नेता होगा जो कांग्रेस की कमान को हाथों में लेकर आगे बढ़ेगा एक नाम इंदिरा गांधी का आया नेहरू के एक चापलूस ने इस नाम का जिक्र किया इस पर नेहरू के साथी और यूपी के वरिष्ठ मंत्री गोविंद वल्लभ पंत बिफर गए बोले नहीं नहीं हिंदू इस काम के लिए अभी तैयार नहीं है और अब नाराजगी की बारी नेहरू की थी जो पंथ पर नाराज होते हुए बोले इंदू हम सबसे कहीं ज्यादा ताकतवर है यह एक बाप का बयान नहीं था यह एक ताकतवर राजनेता की प्रस्तावना थी उसने जमीन पर कुदाल मारकर वंश का बीज बो दिया था जिससे हो गए दरख्त की शाखे अब तक कांग्रेस को अपने घेरे में लिए हुए हैं अब यह आप पर निर्भर करता है

कि आप यह तय करें कि वह दरख्त कितना खोखला हो चुका है सच्चाई अगर तथ्य में बयान करनी हो तो इतनी है कि नेहरू की चौथी पीढ़ी के नुमाइंदे राहुल गांधी कांग्रेस की सदारत की तैयारी कर रहे हैं हर तरफ से नारे लगते हैं राहुल गांधी लाओ देश बचाओ कांग्रेस बचाओ और ज्यादा वक्त नहीं है जब इसी देश की गलियों में आपको रेहान गांधी लाओ देश बचाओ के नारे मिलेंगे रेहान गांधी प्रियंका गांधी के बेटे प्रियंका गांधी जिनका लगातार जिक्र हो रहा है यूपी के चुनाव के लिए पर गांधी परिवार के किस्से तो इस मुल्क ने बहुत सुने हैं बाकी प्रधानमंत्रियों का भी हालचाल ले लेते हैं नेहरू के बाद प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री अपनी के लिए विख्यात उनके दो बेटे सियासत में आए अनिल और सुनील एक कांग्रेस के साथ रहे ज्यादातर चुनाव हारे दूसरे जनता पार्टी और जनता दल के खेमे में रहे चुनाव जीते भी और हारे भी मंत्री भी बने और अब शास्त्री परिवार की तीसरी पीढ़ी के नुमाइंदे आदर्श शास्त्री अरविंद केजरीवाल की टीम का हिस्सा है द्वारका से विधायक हैं तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जिनके बारे में आप सबको पता है इंदिरा गांधी का जब कांग्रेस के संगठन से झगड़ा हुआ तो इलेक्शन कमीशन ने उनको नया सिंबल दिया गाय और बछड़े का और इंदिरा जब अपने दम सत्ता पर काबिज हुई तो बहुत जल्द उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने पहले तो मम्मी का सहयोग करना शुरू किया और फिर पूरी पार्टी और सरकार को अपने हाथ में लेने की कवाय शुरू कर दी इंदिरा के विरोधी कहा करते थे यह जो आपको कांग्रेस का गैया बछड़ा नजर आ रहा है यह दरअसल इंदिरा और उनका छोटा बेटा है फिर इमरजेंसी का दौर आया और उसके बाद जनता पार्टी की

सरकार प्रधानमंत्री बने मुरार जी देसाई मुरार जी देसाई और उनका परिवार सत्ता के लिए कितना व्याकुल था इसका एक उदाहरण कुलदीप नैयर वरिष्ठ पत्रकार हैं जो उन्होंने अपनी किताब में दिया है यह वाकया नेहरू की मौत के बाद का है लुटियंस दिल्ली में कांग्रेस के अलग-अलग धड़े प्रधानमंत्री के पद पर अपनी दावेदारी जता रहे थे और ऐसे वक्त में मुरार जी देसाई के बेटे कांति अपने ही बाप के बंगले में लॉबिंग खुलेआम कर रहे थे पत्रकारों के सामने भी अपने दावे को बताने से हिचक नहीं रहे थे नंबर गिनवाला रोज जब अखबार में यह खबर छपी कि अभी तो नेहरू की चेता भी शांत नहीं हुई और मुरार जी देसाई अपने बेटे के जरिए सत्ता पर दावेदारी कर रहे हैं पासा पलट गया और बयार शास्त्री के पक्ष में बहने लगी मुरार जी देसाई के बाद प्रधानमंत्री बने चौधरी चरण सिंह चौधरी चरण सिंह कुछ ही महीने प्रधानमंत्री रहे लेकिन किसानों की राजनीति तो वह अरसे से कर रहे थे और इस राजनीति में उनको दिशा दिखाई थी लोहिया ने जो वंशवाद के मुखर विरोधी थे लेकिन देखिए राजनीति की विडंबना जब चौधरी साहब का सूरज अस्ताचल की तरफ बढ़ा तो उन्होंने पार्टी संभालने के लिए अपने बेटे चौधरी अजीत सिंह को बुला लिया यह बात और है कि अजीत सिंह परदेश से पढ़कर लौटे अजीत सिंह सियासत की बारीकियों को उतना नहीं समझते थे और मुलायम सिंह यादव जिनके परिवार के विखंडन वाद की नई नई थ्योरिया से आप रोजाना दो चार हो रहे हैं उन्होंने अजीत सिंह के पांव के नीचे से सत्ता का गलीचा

खिसका में देर नहीं लगाई अजीत सिंह के बाद अब उनके बेटे चौधरी जयंत जो इस वक्त राष्ट्रीय लोकदल यानी कि अजीत सिंह की पार्टी से यूपी में सीएम के कैंडिडेट भी हैं और उसके बाद देश को फिर से इंदिरा और राजीव मिले राजीव के बाद बारी आई राजा मांडा यानी विश्वनाथ प्रताप सिंह की विश्वनाथ प्रताप सिंह उस दौर में भ्रष्टाचार के विरोध के प्रतीक बन गए थे राजनीति में जो जड़ता छा गई थी उसके विरोध के प्रतीक बन गए थे लेकिन राजा मांडा के साहबजादे अजय प्रताप सिंह भी सियासत में आए 2009 तक जनमोर्चा के अध्यक्ष रहे और उसके बाद अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करके सत्ता के गलियारों में नए सिरे से आमद दर्ज करवाने लगे फिर बारी आई चंद्रशेखर की बलिया के बाबू साहब 2007 तक तो चंद्रशेखर खुद सांसद रहे और जब उनकी मौत हुई तो उनके बेटे नीरज शेखर को सपा ने उनकी बलिया सीट से चुनाव [ __ ] साल 2014 में जब नीरज शेखर बलिया से सांसद हार गए तो नेता जी ने उनको राज्यसभा भेज दिया चंद्रशेखर के परिवार के दूसरे कई सदस्य भी सियासत में है कोई एमएलसी है तो कोई किसी निगम का चेयरमैन है फिर आए पीवी नरसिंहा राव जिनके बेटे राजेश सांसद भी रहे और विधायक भी नरसिंहा राव के बाद बारी आई देवेगौड़ा की

जिनके बेटे कुमारा स्वामी ने कर्नाटक में सरकार भी चलाई और दल को भी संभाल रहे हैं उनके बाद प्रधानमंत्री बने इंद्र कुमार गुजराल जिनके बेटे नरेश गुजराल अकाली दल से राज्यसभा के सांसद हैं फिर बारी आई अटल बिहारी वाजपेई की जिनके एक भांजे मध्य प्रदेश में काबीना मंत्री रहे अनूप मिश्र और भतीजी करणा शुक्ला छत्तीसगढ़ से बीजेपी की सांसद रही यह बात और है कि साल 2014 के चुनाव के ठीक पहले उन्होंने नाराजगी जताते हुए पार्टी छोड़ दी अटल बिहारी वाजपेई का जिक्र आया तो यह भी बताते चले कि वाजपेई का दत्तक परिवार जो उनके साथ रहता था उनकी बेटी नमिता और उसके पति रंजन भट्टाचार्य उनका सत्ता के गलियारों में काफी दखल माना जाता था उस वक्त के राजनीतिक पत्रकार रंजन भट्टाचार्य की ताकत के तमाम किस्से बयां करते हैं वाजपेई के बाद बारी आई मनमोहन सिंह की जिनके बारे में मैंने पहले ही बताया कि उनकी दो बेटियां हैं और दोनों ही पेशे से शिक्षक हैं और राजनीति के प्रति कोई रुझान नहीं दिखाती हैं मगर आज तो बात नरेंद्र मोदी के परिवार की होगी वह परिवार जो आम आदमी का जीवन जी रहा है और इस परिवार के लोग क्या कर रहे हैं क्या सोचना है उनका नरेंद्र मोदी के बारे में क्या उनका मन नहीं करता है कि वह देश के सबसे ताकतवर शख्स के घर में आकर रहे और सत्ता की तमाम सहूलियत का मजा लूटे आपको बताते हैं नरेंद्र मोदी का परिवार क्या करता है और क्या कहता है नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े भाई सोमा भाई मोदी उम्र 75 साल वर नगर के वृद्धाश्रम में रहते हैं

और मोदी के बारे में क्या सोचते हैं इसकी बानगी एक वाकय से पता चलती है पुणे में वृद्धाश्रम से जुड़ा एक कार्यक्रम था वहां पर सोमा भाई भी मौजूद थे मंच पर उपस्थित संचालक ने जनता के सामने ऐलान कर दिया सोमा भाई हमारे प्रधानमंत्री के बड़े भाई हैं सोमा भाई अचकचा गए सोमा भाई मंच पर जाकर बोले मेरे और नरेंद्र मोदी के बीच एक पर्दा है जिसे आप नहीं देख सकते लेकिन मैं देख सकता हूं नरेंद्र मेरा छोटा भाई है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरा कोई वास्ता नहीं है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मैं देश के 123 करोड़ नागरिकों में से एक हूं और कुछ भी नहीं नरेंद्र मोदी के दूसरे भा पंकज जिनके साथ उनकी मां हीरा बेन रहती हैं उनकी मोदी से मुलाकात होती रहती है क्योंकि प्रधानमंत्री अक्सर अपनी मां से मिलने जाया करते हैं पंकज की आर्थिक स्थिति भी बाकी भाइयों के मुकाबले बेहतर है क्योंकि वह इंफॉर्मेशन डिपार्टमेंट में अफसर के तौर पर काम करते हैं मिलिए प्रधानमंत्री के दूसरे बड़े भाई से नाम अमृत भाई मोदी एक निजी कंपनी में फिटर का काम करते थे 00 पगार मिलती थी 72 की उम्र है रिटायर हो चुके हैं एक बेटा है जो छोटा मोटा काम करता है परिवार ने बड़े जतन के साथ पिछले बरस एक मारुती खरीदी है जो घर के बाहर अक्सर त्रिपाल से ढकी रहती है खास मौकों पर निकाली जाती है संजय के पास एक ऐसी चीज है जो उन्हें लगता है कि जब वह अपने नरेंद्र काका को दिखाएंगे तो उनकी आंखों में चमक आ जाएगी दरअसल 70 के दशक में जब नरेंद्र अपने भाई अमृत भाई के साथ रहते थे तो लोहे की एक भारी सी आयरन का इस्तेमाल करते थे अपने कपड़ों में स्त्री करने के लिए संजय ने वो स्त्री संभाल कर रखी हुई है वो कहते हैं काका के लिए तो यह किसी टाइटनिक के डूबे टुकड़े के मिलने जैसा होगा मैं उनको यह जरूर दिखाऊंगा घर में काका के पुराने वक्त की याद दिलाता सिन्नी का एक पंखा भी मौजूद है और यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चौथे भाई अशोक भाई मोदी प्रधानमंत्री के चार-चार नरसिंह दास के बेटे अशोक भाई वडनगर के घी काटा इलाके में एक ठेला लगाते थे कुछ बरस पहले तक जिस पर रखकर पतंगे पटाखे और कुछ खाने पीने का सामान बेचते थे एक दो साल पहले उन्होंने 8/4 फूट की एक दुकान किराए पर ली है और उसी के सहारे अपनी रोजी रोटी गुजार रहे हैं अशोक भाई और उनकी पत्नी वीणा एक जैन कारोबारी के सप्ताह के अंत में गरीबों के लिए चलाए जाने वाले भोजन लंगर कार्यक्रम का भी हिस्सा है यहां पर अशोक भाई कढ़ी और खिचड़ी बनाते हैं और वीणा बर्तन मांच हैं इससे भी उनको कुछ अतिरिक्त आमदनी हो जाती है यह पति-पत्नी तीन छोटे-छोटे कमरों के एक मकान में रहते हैं नरेंद्र मोदी के एक और भाई भ भाई मोदी जो वडनगर से 80 किलोमीटर दूर लालवाड़ी तनख्वाह है तनख्वाह कम है इसलिए 10 दिन में एक बार घर जा पाते हैं और घर में उनकी पत्नी रमीला बेन है जो घर से ही किराने का सामान बेचती हैं और दो चज महीने के जुटा लेती हैं और इन दोनों का भाई चंद्रकांत जो अहमदाबाद के

एक पशु ग्रह में हेल्पर का काम करता है नरेंद्र मोदी के एक और चचेरे भाई हैं अरविंद भाई मोदी जो वर नगर और उसके आसपास के इलाकों में कबाड़ी का काम करते हैं तीन पत्थर खरीदते हैं घर-घर जाकर और फिर बस में लादकर बड़े कारोबारियों को बेचते हैं उनकी पत्नी रजनी भी हैं जो इसी तरह के छोटे-मोटे काम करकर पति को गृहस्ती चलाने में मदद करती हैं इन दोनों के कोई बच्चा भी नहीं है और अब बात नरेंद्र मोदी के उस भाई की जो अपने भाई के बाद सबसे ज्यादा खबरों में रहता है नरेंद्र मोदी के सबसे छोटे भाई प्रहलाद मोदी जो गल्ले की एक दुकान चलाते हैं और इससे जुड़ी एक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हैं और इस पद के नाते कई बार गुजरात की मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी कर चुके हैं दरअसल प्रहलाद भाई का यह मानना है कि राज्य सरकार की नीतियां गल्ले के छोटे कारोबारियों के लिए मुफीद नहीं है और इसलिए कई बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने विरोध का ऐलान किया खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बारे में क्या सोचते हैं इंडिया टुडे के पत्रकार उदय माहुरकर को दिए इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने कहा इस बात का श्रेय मेरे भाइयों और भतीज को जाता है जिन्होंने मुझ पर कभी भी दबाव नहीं बनाया किसी भी तरह का शायद यह हमारे और उनके अंदर आरएसएस ने जो घुट्टी पिलाई है उसका असर है जहां पर पद देश की सेवा के लिए है परिवार की समृद्धि के लिए नहीं नरेंद्र मोदी के आलोचक यह बात कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री का परिवार वृहत्तर परिवार भले ही गरीबी में जी रहा हो लेकिन वह खुद लाखों का सूट बूट पहनते हैं वो राहुल गांधी की तरह नरेंद्र मोदी की सरकार को सूट बूट की सरकार भी कह सकते हैं लेकिन सूट के तंज के अलावा विरोधियों के पास नरेंद्र मोदी के परिवार के खिलाफ कहने के लिए कुछ भी नहीं है सियासत यूं भी होती है जब एक व्यक्ति लुटियंस दिल्ली में आकर देश का हुक्मरान बन जाए और बाकी लोग अपने दैनंदिन काम करते रहे ना कि जमीनों पर कब्जा करें पद प्रतिष्ठा का लाभ उठाएं कॉरपोरेट घरानों के साथ बड़े-बड़े सौद करवाने में हिस्सेदारी निभाएं दलन टप . कॉ पर सियासत के एक और नए किस्से के साथ हम फिर हाजिर होंगे शुक्रिया [संगीत]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *