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सोने पर फैलाया जा रहा है बड़ा झूठ !विपक्ष की चाल हुई बेनकाब !

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और सोने की कीमत बढ़ती ही जा रही है। लोग दौड़ते ही जा रहे हैं सोना खरीदने के लिए। दौड़े जा रहे हैं। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि सोना मत खरीदो। लेकिन सोना खरीदने के लिए एक पूरी लॉबी प्रेरित कर रही है कि सोने की कीमत अभी 2027 तक में 2100 क्रॉस कर जाएगा। दुनिया में हर चीज खत्म हो रहा है। सोने की कीमत बढ़ती जा रही है। अब इस जेपी मॉ्गन का थोड़ा इतिहास समझ लीजिए।

यह जो जेपी मॉ्गन है इसके प्रमोटर को रॉबर्स बैरन कहा जाता है। लुटेरा उद्योगपति कहा जाता है। लुटेरा 1831 में ये जेपी मॉ्गन अपराधी था 13,000 दास को खरीदने का। अमेरिका में दास प्रथा थी। आप सबको मालूम है। अमेरिका क्या इंग्लैंड में पूरी बहुत सारे दुनिया भर में दास प्रथा थी। मतलब लोगों को खरीद करके उससे बेगारी करवाई जाती थी।

स्लेवरी जिसको आप कहते हैं। तो 13,000 स्लेब्स को इस जेपी मॉ्गन ने ये इसका जो मालिक है इसका नाम है जेपी मॉ्गन। तो जेपी मॉ्गन ने खरीदा 13,000 स्लेब्स को। ये 1831 की बात मैं कह रहा हूं। ये तब से ये कंपनी चल रहा है पुरानी। अब इसकी कहानी सुनिए। इसके आगे इनके ऊपर कितने आरोप हैं।

टाइटेनिक फिल्म देखी होगी आपने। वो जो टाइटेनिक शिप है उसमें ही वास वन ऑफ द ट्रेवलर। इनको भी यात्रा करनी थी टाइटेनिक पे। लेकिन आखिरी वक्त में इसने अपनी यात्रा कैंसिल कर दी। अब इसे आप जाएंगे तो आपको लगेगा कि ये कॉनस्परेसी थ्योरी है। लेकिन इनके ऊपर गंभीर आरोप है कि इन्होंने अपने जो बिजनेस राइवल्स थे उसको टाइटन पर चढ़ा दिया। टाइटेनिक पर चढ़ा दिया और फिर टाइटेनिक खत्म हो गया। डूब गया समुंदर में और यह बच गया।

इसके अलावा दुनिया भर में फ्रॉड करने का बैंकिंग फ्रॉड का हर तरह के धंधे में ये शामिल है। जेपी मॉ्गन या उसकी फैमिली शामिल थी। हर तरह के इंडस्ट्रियल फ्रॉड हो, नॉर्मल इकोनमिक फ्रॉड हो, ये सब काम करती थी। तो ये केवल ये बैंक और एसेट मैनेजमेंट का इनका कारो कारोबार नहीं है। भारत में अगर यह स्टॉक मार्केट में वन ऑफ द बिगेस्ट वन ऑफ द बिगेस्ट वन ऑफ द बिग एफआईआई के रूप में इनकी पहचान है। दूसरे भी हैं फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और नहीं बहुत है। मैंने जैसा बताया मार्केट कैप 800 बिलियन डॉलर का है। 50 लाख करोड़ से भी ऊपर का तो उसमें ये भी हैं।

लेकिन इनका बिलियंस में 2 बिलियन डॉलर के आसपास केवल इनका निवेश ही निवेश चल रहा है। अब आप सोचिए Reliance Industries में भी हैं, Mahindra एंड Mahindra में भी है, ICICI में है, HDFC में है, TCS में है। तो बचा क्या? ये बड़ी-बड़ी कंपनियां इनके इनमें निवेश है इनका। और कहलाते हैं सामने से बैंकर। हम तो बैंकर हैं साहब। खेल समझिए आप। अर्थव्यवस्था को जो नियंत्रित करेगा वही राजनीति को नियंत्रित करेगा। अर्थव्यवस्था ही रीड है। जिस देश में आर्थिक शक्ति किसी और के पास, राजनीतिक शक्ति किसी और के पास, वैसी परिस्थिति में राजनीतिक शक्ति, आर्थिक शक्ति का गुलाम हो जाता है। वही किया जा रहा है। हमारी राजनीतिक शक्तियों को बार-बार आर्थिक शक्तियां गुलाम बनाने की कोशिश कर रही हैं।

आपको सामने से लग रहा होगा कि अडानी सब कुछ नियंत्रित कर रहा है। अंबानी सब कुछ नियंत्रित कर रहा है। नहीं, इसे कोई और नियंत्रित कर रहा है। जो डिक्टेट करता है, जो समय-समय पर इस तरह की कहानी गढ़ता है, जो युद्ध करवाता है, पूरी दुनिया में अमेरिका के ऊपर इनके ऊपर अभी अमेरिका में जबरदस्त मंदी रिसेशन का दौर आने वाला है। वहां भी ये पैसे कमा रहे हैं। इनको देश की भौगोलिक सीमा से कोई लेना देना नहीं है।

इनको पापुलेशन से लेना देना है और वह पॉपुलेशन इनके लिए बाजार है। फिर सात समुंदर पार इनको जाना पड़े। जहां इनका ओरिजिन है जहां के ये नेशनल है वहां करना पड़े कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन इसे अमेरिका से लेना देना नहीं। इसे भारत से लेना देना नहीं। इनकी कोई प्रतिबद्धता अमेरिकनंस के प्रति नहीं है।

हां अगर डीप स्टेट वहां डंडा दिखा देगा। वहां की डिफेंस अगर इनको डंडा दिखाएगी तो यह उनके लिए काम करने लगेंगे। उनके लिए काम भी कर रहे हैं। अमेरिका को ऑयल संकट में फायदा ही फायदा है। उनका जीडीपी गिरा नहीं है। सस्टेन है। उनको इनकम बढ़ रहा है। उनका इनकम बढ़ रहा है। और इसीलिए डोन्ड ट्रंप पूरी दुनिया को युद्ध में झोंके हुए हैं। क्योंकि दुनिया में अगर युद्ध चलता रहेगा तो उनका बाजार चलेगा। उनका डिफेंस सेक्टर मजबूत होता रहेगा।

उनका डॉलर मजबूत होता रहेगा। उनका तेल बिकेगा। वेनेजुएला को कब्जा कर लिया तेल बिकेगा। यह सब बेच के वो अपनी इकॉनमी को मजबूत करेगा और वही का जेपी मॉ्गन दुनिया में आकर के अलग-अलग तरीके का रिसर्च फ्लोट करता रहेगा। अलग-अलग तरीके से वहां की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित भी करेगा, लाभ भी कमाएगा, उसे कमजोर भी करेगा।

उसके पॉलिटिकल एस्टैब्लिशमेंट को कमजोर भी करने की कोशिश करेगा। सामने से तो आपको लगेगा कि नहीं नहीं ये शुद्ध बैंकिंग बात है। बात सही कह रहा है जेपी मॉ्गन। कोई इसमें अंदर पढ़ने की बात नहीं है। वी आर रीडिंग टू मच बिटवीन द लाइंस। बहुत सारे एक्सपर्ट्स कहेंगे कि वी आर रीडिंग टू मच बिटवीन द लाइंस। बट दिस इज द हार्ड रियलिटी यू मस्ट रीड बिटवीन द लाइंस। कि एक ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि सोना मत खरीदो। अब दूसरे तरफ मार्केट में आ रहा है कि सोने का प्राइस तो दो लाख चला जाएगा। साहब मतलब सोने में निवेश सुरक्षित है।

कोई असर नहीं पड़ रहा है। अगर प्रधानमंत्री कह रहे हैं तो प्रधानमंत्री यूं ही तो नहीं कह रहे हैं। बहाना तो नहीं बना रहे हैं। प्रधानमंत्री कह रहे हैं तो उसके पीछे वो रेगुलेशन पर भी कुछ काम कर रहे होंगे। वो देख रहे होंगे कि भाई सोने की खरीद पर इस तरह से बात नहीं जाना चाहिए। हमारा खजाना खाली होते जा रहा है। हम सोने का रिजर्व बढ़ाते जा रहे हैं और लोग जो है सो अब भारत में 25,000 से 5000 लोग कह रहे हैं कि सोने का जो रिजर्व है वो आम लोगों के पास है। अब वो किलो वो किलो की मैं बात कर रहा हूं। टन वन नहीं 25,000 से 500 किलो सोने आम लोगों के पास है रिजर्व और वो आते जाते रहते हैं। बैंक में जो लॉकर में है उसके बियों्ड जिसको वो यूज़ कर रहे हैं।

अब ये इसका प्रॉपर कैलकुलेशन आपको कभी सामने से मिलेगा नहीं। कोई बैठा हुआ नहीं है क्योंकि ये पूरा का पूरा जो है एक गुप्त ऑपरेशंस के रूप में चलते रहता है। सोना, चांदी, हीरा इसका ऑपरेशंस ही जो है बहुत ही ट्रांसपेरेंट नहीं है उस तरह से। तो आप उसको एग्जैक्ट आंकड़ा आपको मिल नहीं सकता है। तो मित्रों कहानी का लबो लुआब यह है कि सोना की कीमत अभी भी बढ़ते जा रही है। इसमें खेल चल रहा है।

चाइना अभी सोना खरीद रहा है। भारत सरकार भी सोना पर लगाए हुए है ताकत और आपको भी कहा जा रहा है कि सोना खरीदो। सोना में निवेश करो। यह यह इसकी कीमत और बढ़ने वाली है। अब अगर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म का खेल सोच रहे हैं तो बहुत सारे जो लोग होंगे वो 2027 का अंदाजा लगा के अभी मान लीजिए कि 153 में मतलब 153000 में आपने खरीदा 10 तोला। अब ये अगर एक डेढ़ महीने के बाद एक 70 हो जाए तो कितना फायदा हो गया? फटाक से फायदा हो गया ना? अब इसी को अगर आप कई दोती केजी खरीद लें जो निवेशक हैं बड़े निवेशक तो उनको कितना लाभ हो जा रहा है दो-ती महीने के अंदर तो ये सब तरह का खेल चलाने के लिए जेपी मॉ्गन जैसे रिसर्च संस्थान कहां से उनका क्या बेस लाइन है कि बढ़ेगा वो डेरिवेटिव्स कहां से निकाल रहा है और निकाल करके आपको वो कर रहा है दिस ऑल इकोनॉमिक डेरिवेटिव्स जो है ये ऑल इसमें बहुत बड़ा फ़िक्शन होता है बहुत बड़ा फौल्ट लाइन होता है और इस फौ्ट लाइन को पकड़ने के लिए आपको बहुतस्ट चाहिए तो जो इतने मास्टर तो है नहीं निवेशक हैं ।

बाजार में उनको लग रहा है कि अच्छा सोने की कीमत बढ़ने वाली है चलो खरीद लो ये तो कह रहे हैं 2027 तक अरे अभी छ महीने का ही तो खेल है छ महीना खरीद करके रख लो तो प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि सोना मत खरीदिए ये फैला रहे हैं कि सोना खरीदो गेम समझ में आ रहा है तो गेम से अलर्ट रहिए क्या होगा नहीं होगा अभी थोड़ा सा धैर्य से शांति से चलते रहिए। प्रधानमंत्री के ऊपर भी थोड़ा भरोसा करिए।

इन कंपनियों के ऊपर भरोसा मत करिए। इनका इतिहास मैंने आपको बता दिया है। इनका इतिहास यही है। 13,000 स्लेव को अपने साथ रखा। टाइटेनिक को डुबोया। कई फ्रॉड्स कर चुके हैं। इसलिए इनके इतिहास में जाने की जरूरत नहीं है।

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