राजस्थान में मिला है भारत के भविष्य का खजाना। एक ऐसा यहां पर मटेरियल जो कि यहां पर अब तक उस पर चीन की बादशाहत थी। भारत देखा जाए इसको लेकर के लगातार दूसरे देशों के साथ नए-नए समझौते भी कर रहा है। लेकिन अब यहां पर अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए राजस्थान उसका सबसे बड़ा यहां पर स्टेट जो होगा वो फायदेमंद यहां पर रोल अदा करने जा रहा है। ऐसा क्यों? क्योंकि राजस्थान में जो खजाना मिला है वो भारत की कई सारी यहां पे इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री के लिए सबसे अहम रोल अदा करने जा रहा है।
इस चीन की बाशाहत को चुनौती देता हुआ राजस्थान में इस नई खोज के बारे में। सबसे पहले अगर देखा जाए तो आखिर ये चर्चा का विषय क्यों बना है? तो जो जिला यहां पर चर्चा का विषय जो क्षेत्र है वो है आपका राजस्थान का बालोतरा। बालोतरा जिले के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स इस समय सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है और इस चर्चा का विषय का कारण है रेयर अर्थ एलिमेंट की खोज का होना जो कि यहां पर देखा जाए इससे आपको हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट डेवलप किए जाते हैं और उसके साथ-साथ अन्य क्रिटिकल मिनरल्स भी इसमें आपको प्राप्त होते हैं जो कि यहां पर इसकी मौजूदगी यह राज्य सरकार और साथ ही साथ यहां पर भारत के लिए सबसे अहम होने जा रहा है कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भारत के लिए आपको काफी बड़ी यहां पर राहत मिल सकती है।
थोड़ा समझेंगे इस रेयर अर्थ में और उसकी खोज के बारे में जानेंगे सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स के बारे में आखिर ये कहां है? तो ये आप बाला का मैप देख रहे हैं और उस बाला के मैप में यहां पे सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स है और इस सिवान रिंग कॉम्प्लेक्स में जो अगर हम बालातोरा जिले की बात करें तो ये आपको पश्चिमी राजस्थान में पड़ता है। लगभग 750 कि.मी. के क्षेत्र में एक ज्वालामुखी भू वैज्ञानिक क्षेत्र यहां पर है और इसी भूवैज्ञानिक क्षेत्र में बात करें तो यहां मलानी इंजी इग्निशियस प्रोविंस का यहां पर इसे हिस्सा माना जाता है।
और वर्षों से वैज्ञानिक यहां पे रेयर अर्थ और रेयर मेटल की यहां पे संभावना बता रहे थे। और फाइनली जहां जा करके यहां पर ऐसा कुछ आपको मिला हुआ है। रेयर अर्थ मिनरल के यहां पर क्या होते हैं? इसके बारे में भी आपको बता दें कि आपको समझ में आए कि इसकीेंस कितनी है। सबसे पहले देखिए जो रेयर एथ एलिमेंट्स होते हैं ये कुल 17 तरीके के होते हैं। यानी 17 यहां पर प्रमुख तत्व इसमें शामिल होते हैं और इनका जो उपयोग किया जाता है वो इलेक्ट्रॉनिक वाहन में, फाइटर जेट में, मिसाइल में और साथ ही साथ आपके मोबाइल फोन में इनका प्रयोग किया जाता है।
यानी कि इलेक्ट्रॉनिक सामान से लेकर के जेट तक आपको आज रेयर अर्थ मिनर का सबसे बड़ा योगदान है। इसके माध्यम से देखा जाए तो आपको सेमीकंडक्टर्स, टर्बन टरबाइन, सोलर एनर्जी और और रक्षा उद्योग में भी इनका प्रयोग किया जाता है। ये सभी आपको 17 जो एलिमेंट है रेयर अर्थ के तौर पे आपको तकनीकी, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के लिए किसी भी देश के लिए यहां पर महत्वपूर्ण है।
अब बात आपको यह करते हैं कि रेयर अर्थ मिनरल में चीन की बातत क्या है? आज अगर वर्तमान समय में आप देखेंगे चीन जो है दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ प्रोसेसिंग करने वाला यहां पर देश है और इसके बाद वोमाकीज देशों को इसकी सप्लाई करता है। जिस देश को चाहे वो यहां पर इस सप्लाई को रोक दे तो उस देश की यहां पर अभी हमने जितने भी क्षेत्र बात करें उससे रिलेटेड इंडस्ट्री ठप पड़ जाएंगी।
अब ऐसी स्थिति में यहां पर आपको खनिज अगर नहीं देता है तो सबसे बड़ी समस्या है कि बाकी यहां पर देशों की व्यवस्था चरमरा सकती है। अब अगर हम देखें असली ताकत क्या है? इसकी यहां पर चाइना की ताकत ये है कि ये आपको ना सिर्फ यहां पे माइनिंग करता है रेयर अर्थ मिनरल की बल्कि उसको रिफाइन भी करता है। रिफाइन करने के बाद उसकी प्रोसेसिंग करता है और प्रोसेसिंग करने के बाद यहां पे मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग मैगनेट निर्माण और अन्य तरीके के यहां पे प्रोडक्ट बनाता है और उसकी यहां पर जो सप्लाई होती है जो अलग-अलग यहां पर क्षेत्रों में अलग-अलग यहां पर चीजों के निर्माण में प्रयोग होती है और इस तरीके से किसी एक चीज में नहीं है बल्कि आप कह सकते हैं पूरे के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर चीन का कब्जा है।
माइनिंग से लेकर के, रिफाइनिंग से लेकर के, प्रोसेसिंग से लेकर के फाइनल यहां पे प्रोडक्ट बनाने हैं उसकी सप्लाई चेन तक में भी और इस कारण चीन यहां पर विश्व में किसी भी देश को रेयर अर्थ मिनरल को लेकर के यहां पे कंट्रोल कर सकता है। जो कई सारे देशों के लिए चुनौती खड़ी कर चुके कर चुका है।
अभी हाल ही में देखा जाए तो उसने भारत और अमेरिका जैसे देशों को भी रेयर अर्थ की सप्लाई करने से रोक दिया था। अब यहां पर ऐसी स्थिति में भारत के लिए महत्वपूर्ण कैसे हो जाता है? देखिए सबसे जरूरी चीज है कि भारत अभी भी क्रिटिकन मिनरल के आयात पर निर्भर है और ऐसी स्थिति में विदेशी निर्भरता हमारी बढ़ जाती है और यदि घरेलू उत्पादन अगर हमारा बढ़ने नहीं पाता है तो विदेशी निर्भरता हम यहां पर अभी कभी नहीं घटा पाएंगे। लेकिन जैसे कि राजस्थान में इस तरीके की खोज हो जाने से इसको अगर हम माइनिंग प्रोसेसिंग और पूरी यहां पर आपको एक इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट कर पाएं तो आगे चलकर के हम यहां पर इसका प्रयोग चीन जैसे देशों पर अपनी निर्भरता को घटाने के लिए कर सकते हैं। यानी कि भारत जो एक लगातार ईवी रिवॉल्यूशन को लेकर के भी अपना प्लान बना रखा है उसको पूरा करने में भी अहम रोल हो सकता है।
अगर हम बात करें कि भारत 2030 तक बड़े पैमाने पर ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को बढ़ाने की जो योजना अपनी बनाई है और ईवी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर जो है भारत के भविष्य का यहां पर आपको सबसे बड़ा रोड मैप है। तो उस दृष्टिकोण से अगर हम देखें तो रेयर अर्थ मैग्नेट जो होंगे इन उद्योगों की ऋण होगी। यानी कि भारत आपको इन इंडस्ट्री को क्रिएट करने के लिए जो सबसे जरूरी पहलू है वो आपको इन मैग्नेट्स की आपूर्ति खुद यहां पर कर सकता है। वहीं भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने के प्रयास कर रहा है। और इन खनिजों की मजबूत उपस्थिति से भारत अपने रडार सिस्टम को डेवलप कर सकता है। अपनी मिसाइल डेवलपमेंट तेज कर सकता है। अपने लड़ाकू विमान को जो अमका जैसे प्रोजेक्ट हैं उनको में तेजी ला सकता है और रक्षा टेक्नोलॉजी को भी यहां पर आपको मजबूत और सिक्यर्ड कर सकता है और यह सब संभव है ।
इस रेयर अर्थ मिनरल की खोज के कारण। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती क्या है? चुनौती देखिए यहां पर भारत के लिए पांच प्रमुख रूप से हैं। वो चुनौती यही है जो चीन ने ऑलरेडी कर रखा है। वो है आपको इंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी यानी कि आप माइनिंग कैसे करेंगे? इन रेयर अर्थ मिनरल को प्राप्त कैसे करेंगे? उसकी तकनीकी फिलहाल अभी अभी देखा जाए तो चाइना जैसे देशों के पास ही है। फिर यहां पे प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है कि उसको माइनिंग तो आपने कर लिया कच्चा माल आपने प्राप्त कर लिया लेकिन उसको प्रोसेस भी करना होता है। प्रोसेसिंग को लेकर के पूरी जो इंडस्ट्री यहां पर है उसे निकालने के लिए शुद्ध करना उपयोगी बनाना वो सबसे बड़ी चुनौती है।
उसकी भी पूरी टेक्नोलॉजी अभी चाइना जैसे देश के पास है। फिर एनवायरमेंट क्लीयरेंस यानी कि ऐसे क्षेत्रों में खनन करने को लेकर के एनवायरमेंट मिनिस्ट्री का यहां पर आपको एनओसी चाहिए होगा। उसके बाद प्राइवेट इन्वेस्टमेंट यानी कि सरकार यहां पर अकेले अगर काम करती है ना तो तो उसके लिए आपको बहुत ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। तो क्या प्राइवेट सेक्टर इसके लिए आगे आएंगे? वो बड़े स्तर पर इसमें निवेश करेंगे। टेक्नोलॉजी लेकर के आएंगे और ग्लोबल कंपटीशन इससे बढ़ सकता है कि चीन जहां पर ऑलरेडी इस पर प्रभुत्व जमाए हुए बैठा है। ऑस्ट्रेलिया अमेरिका लगातार इसको लेकर के काम कर रहे हैं। तो क्या भारत को इसमें आगे बढ़ने दिया जाएगा? क्या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी? ये यहां पर बड़ी चुनौतियां हैं। अगर भारत इसे यहां पर पूरी कर लेता है, इन्हें दूर कर लेता है तो आगे चलकर के भारत यहां पर अपने आप को कई सारे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बना सकता है। राजस्थान को इसको इससे क्या फायदा होगा वो भी समझिएगा। देखिए राजस्थान को इस परियोजना अगर पूरी तरीके से सफल हो जाती है तो ना सिर्फ यहां पे खनन उद्योग का विस्तार होगा बल्कि इसके साथ-साथ आपको हजारों रोजगार इस क्षेत्र में डेवलप होंगे। सड़क और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर जो होगा इस क्षेत्रों में यहां पर तेजी से उसका विकास होगा।
नए उद्योगों की यहां पर स्थापना होगी और पश्चिमी राजस्थान जो होगा वो आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र बन करके उभरेगा और इस तरीके से राजस्थान के क्षेत्रीय विकास में इसका प्रमुख रोल हो सकता है। तो ये यहां पर एक इंपॉर्टेंट फैक्ट था।