सभी हैरान होंगे कि नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले देशवासियों से दो अपील की। एक तो पेट्रोल डीजल की खपत कम करिए और सोना खरीदना अगले एक साल तक के लिए बंद कर दीजिए। बहुत सारे मीम सोशल मीडिया पर बनने लगे।
महिलाएं मीम बनाने लगी कि सोना नहीं खरीदेंगे तो क्या-क्या करेंगे? वह तो मजाक की विषय है। लेकिन आज मैं आपसे कुछ गहरी बात करने जा रहा हूं। असल में नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी चाल चल दी है जो सोने के मार्केट में भूचाल मचा दिया है।
और यह किसी ना किसी को तो करना ही था। आज नरेंद्र मोदी ने कर दिया। तो अब लोग कहने लगे कि सोने व्यापारी क्या करेंगे? भूखों मरेंगे। यह बड़े व्यापारियों को मदद करने के लिए किया जा रहा है। टाटा ग्रुप को मदद करने के लिए किया जा रहा है। Reliance ग्रुप को मदद करने के लिए किया जा रहा है। छोटे सुनार तो मर जाएंगे। ये सारी कहानी शुरू हुई।
लेकिन आज मैं आपको सोने के काले राज और काले साउथ मुंबई का वह इलाका जो इस पूरे काले धंधे को आगे चला रहा है। हम में से आप में से लगभग लोगों को यह जानकारी नहीं होगी कि सोने की खरीद फरोख्त कैसे होती है? उसका मूल्यांकन कैसे होता है?
उसकी कीमत कैसे तय की जाती है? जब भारत में सोने की खदान लिमिटेड अभी बिहार में एक मोनाजा लगने वाला है। बिहार के जमुई में सबसे अधिक सोने के भंडार पाए जाने की खबर हुई है।
अभी उसमें माफ़ कीजिएगा। अभी उस खदान में काम होना बाकी है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि सबसे अधिक सोने की भंडार बिहार के जमुई में मिल सकता है। अभी कर्नाटक में एक खदान चल रहा है जिसको कर्नाटक सरकार चलाती है। आंध्र प्रदेश में एक खदान है जिसे कोई निजी कंपनी चलाती है। और इस तरीके से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में कहीं-कहीं सोने की खदानें हैं। लेकिन अपने डिमांड का 99% सोना भारत क्या कर रहा है? विदेशों से आयात कर रहा है।
आयात कौन करता है? यह जो आपके अगल-बगल में सोने के जो दुकान वाले होते हैं सोनार वो कर रहे हैं। नहीं वह नहीं कर रहे हैं सोने की खरीद फरोख। फिर सोने का बाजार है क्या? कैसे चलता है? भारत में 15 बैंकों के पास आरबीआई ने ये अनुमति दी है बैंकों को। कि वो विदेश से सोना खरीदेगा। 15 बैंक। कौन-कौन है।
15 बैंक? मैं आपको लिस्ट ही पढ़कर सिखा देता हूं। 15 बैंक कौन है जो सिर्फ सोना खरीदेगा। सिर्फ सोना और चांदी दोनों खरीदेगा। और दो बैंक ऐसे हैं जो सिर्फ सोना खरीदेगा। मतलब वो चांदी नहीं खरीदेगा। सिर्फ सोना खरीदेगा। कौन-कौन बैंक है।
सोना खरीदने में? Axis बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, डचे बैंक, Federal बैंक, HDFC बैंक, ICICI बैंक, Indusind बैंक, IND ओवरसीज बैंक, Kotak Mahindra बैंक, करूर वैश्य बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आरबीएल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, Yes बैंक, इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना, सीबीसी यह भी यहां यहां खरीद सकती है और जो दो बैंक जो सिर्फ सोना ये सोना और चांदी दोनों खरीद सकती है।
लेकिन जो दो बैंक सिर्फ सोना खरीद सकती है उसमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और sबर बैंक है एसबीआरबर बैंक यह विदेशी बैंक है लेकिन भारत में ऑपरेट करती है ये दोनों बैंक ही इसको आरबीआई ने अनुमति दिया हुआ है कि आप सोना विदेश से खरीदिए और उसमें भी दो जगह से सबसे अधिक खरीदी जाती है।
एक स्विट्जरलैंड, दूसरा दुबई और कुछ हिस्सा साउथ अफ्रीका से भी आता है और फिर अमेरिका वगैरह से भी खरीदते हैं। लेकिन सोने की खरीदारी मोस्टली दुबई और स्विट्जरलैंड से होती है। स्विट्जरलैंड के बारे में आपको मालूम है कि स्विट्जरलैंड में सोने के माइंस है। मनी वहां रिफाइनिंग है। बड़ी-बड़ी रिफाइनरीज हैं जो अलग-अलग दुनिया के अलग-अलग देशों से, लैटिन अमेरिकी देशों से, साउथ अफ्रीका से, अमेरिका से जो सोने खदानों से बाहर निकलते हैं उसको रिफाइन किया जाता है ।
स्विट्जरलैंड में और वहां बड़े-बड़े रिफाइनरीज है। उसी रिफाइनरीज में से एक भारत की भी कंपनी चलाती है। राजेश एक्सपोर्ट्स वाले जो कंपनी है जो अभी फंसा है पूरा मामला जिसको कहा जा रहा है कि ₹15 लाख करोड़ का घोटाला है।
अब तक के भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है स्टॉक एक्सचेंज में जिसको कि सेबी ने अभी पकड़ा है और वो मामला चल रहा है। अभी 15 लाख करोड़ के ऊपर बाद में आएंगे। अभी इस पर आप रहिए कि मोदी ने क्यों कहा कि सोना नहीं खरीदना है अगले एक साल तक। अब पहली बात तो यह आपने जान ली कि 15 बैंक को अनुमति है सोना और चांदी विदेश से आयात करने की। आरबीआई के रूल के हिसाब से दो बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और स्वर बैंक जो विदेशी बैंक है उन दोनों को सिर्फ सोना आयात करने की अनुमति है। ये वहां से खरीद। अब अब यहां से खेल शुरू होता है।
ये जो काला कारनामा है ना और मैं हैरान हूं कि भारत सरकार को यह बात मालूम नहीं है क्या? मालूम है और भारत सरकार में अभी प्रधानमंत्री ने इतने दिनों के बाद यह कहा यह तो बहुत पहले कह देना चाहिए था कि यह जो खेल चल रहा था यह इतने दिनों के बाद क्यों कहा गया है इसके पीछे का राज क्या है अभी सब बताऊंगा आपको तो ये जो 15 बैंक हैं और यह जो दो बैंक हैं ये 17 बैंक इससे आप चले जाइए सोना खरीदने के लिए तो आपको बैंक नहीं देगी।
आपके पड़ोसी का जो ज्वेलर है, आपका पड़ोसी जो ज्वेलर है, वह अगर चले जाए इन बैंकों के पास कि मुझे सोना दे दीजिए, इन्हें भी सोना नहीं देंग। तो यह 17 बैंक सोना देती किसे है? यहीं से खेल शुरू होता है। 50 से 60 डीलर इस देश में हैं।
बड़े डीलर जो सोने का धंधा करते हैं। वो 50 60 डीलर ही इन 17 बैंकों से सोने की खरीद करते हैं। और वह 50 60 के 50 60 साउथ मुंबई में निवास करते हैं। के इधरउधर है। साउथ मुंबई में निवास करते हैं। और इसीलिए आज मैं और राज पर से पर्दा खोलूंगा। मुंबई में हमारे सूत्रों ने बताया कि वहां जो पॉलिटिकल घराना है, बड़ा पॉलिटिकल घराना मैं बस में इशारा कर रहा हूं। बड़ा पॉलिटिकल घराना जिसका बड़ा रुसूख रहा है जो इधर तोड़ना, इधर जोड़ना, उधर को जोड़ के इधर ले आना ये सब उनका कटना रहा है।
से लेकर के पूरी दुनिया से उनके संपर्क रहे हैं। उनकी बड़ी दखल की भी बात है इसमें। अब क्योंकि मैं डायरेक्ट हमारे पास कुछ सबूत नहीं है जो मैं उनका नाम ले लूं कि भाई यही तय करते हैं। लेकिन पावर गैलरी में यह मालूम है कि ये जो 50 60 बड़े डीलर्स हैं वही सोने की कीमत ऑलमोस्ट तय कर देते हैं। लंदन के सोने के बाजार में जो इंटरनेशनल बुलियन मार्केट है लंदन का वहां जो तय होता है वह तो होता ही है। इसीलिए भारत में भी एक गोल्ड बुलियन एक एक्सचेंज बनाने की बात हो रही है जो कि रेगुलेशन का काम करे। जैसे आप स्टॉक मार्केट से स्टॉक खरीदते हैं वैसे आप सोना भी खरीद सकते हैं।
स्टॉक मार्केट जब आप स्टॉक खरीदते हैं तो होता क्या है? ट्रांसपेरेंसी आ जाती है, पारदर्शिता आ जाती है। आपको मालूम होता है कि आपने फलाने कंपनी का इतना का स्टॉक खरीदा है। इसका रेट अभी ये ऊपर चल रहा है या नीचे चल रहा है। साफ-साफ आपको ये सारी सूचनाएं कोई सूचना छिपाई नहीं जाती है स्टॉक मार्केट में आपसे। लेकिन सोने को इतने वर्षों में आजादी के इतने वर्षों बाद भी सोना जो सबसे वैल्यूएबल खेल चल रहा है जिस पर आपकी पूरी इकॉनमी टिकी हुई है जिस पर डॉलर को आप आंकते हैं। डॉलर को ऊपर चढ़ाते हैं। डॉलर को नीचे घटाते हैं। दुनिया भर की जो मुद्राएं हैं वो सोने को मानक मानती है।
उस सोने का काला बाजार चल रहा है भारत में और धड़ल्ले से चलता आ रहा और इस पर किसी की निगाह नहीं गई। नहीं यह पूरा कंसोडियम काम कर रहा है। इसमें ब्यूरोक्रेसी शामिल है। इसमें बड़े बिजनेस घराने शामिल है और इसमें पॉलिटिकल क्लास शामिल है। इस राज को कभी बाहर आने ही नहीं देगा कि सोने की कीमत असल तय करता कौन है? 35,000 से 75,000 कब पहुंच गया? 75,000 से डेढ़ लाख कब पहुंच गया? फिर वह 2 लाख भी टच करने लगा।
आप देखिए यह यात्रा सोने की और वही खेल यह सारा खेल चल रहा है कहां से? साउथ मुंबई से। अब हैरानी की बात यह है कि ये जो 17 बैंक हैं वो बैंक क्यों इस तरह के धंधे में शामिल है? ये 60 ही डीलर को थोक में सोना क्यों उपलब्ध कराते हैं? इनके पीछे अंडर हैंड डील क्या है? बैंक यह कह सकता है कि हम हिफाजात तरीके से सबसे डील नहीं कर सकते हैं। तो हम डीलिंग पार्टनर्स जो है उसको सीमित रखना चाहते हैं। उनके साथ हम डील कर सकते हैं। फिर वो बाजार को नियंत्रित करें। मतलब अगर वो 60 लोग आज चाह ले कि सोने की कीमत हमें कल ₹00 तक ले जाना है। बढ़ा देना है। ₹1.5 लाख है तो उसको 2 लाख पहुंचा देना। यह 60 लोग चाहे तो यह 60 लोग पहुंचा देंगे। 60 लोग वह तय कर देंगे जो सोने की कीमत को घटाना है या बढ़ाना है।
अब बैंक को तो फायदा हो रहा है। भाई बैंक में सोने सोना लाया ही है बैंक किसी के लिए। बैंक कोई मोरल इंस्टीट्यूशन तो है नहीं। वह तो शुद्ध और शुद्ध प्रॉफिट पर टिका हुआ है। तो बैंक वहां से अपना सोना खरीद के ला रहा है। तो जाहिर है कि वह अपने सोने को बेचना चाहेगा अधिक से अधिक कीमत पर और अधिक से अधिक कीमत ये छोटे-मोटे खुदरा व्यापारी तो दे नहीं सकते। तो वो एक लिमिटेड लोगों के साथ डील करता है। तो यह 50 से 60 ही लिमिटेड डीलर्स हैं जिसके साथ ये 17 के 17 बैंक डील करते हैं। अब कल्पना कीजिए जो राजेश एक्सपोर्ट है वो गारमेंट में था।
यकायक वो सोने की माइनिंग और सोने की रिफाइनिंग वाली कंपनी खरीद ली स्विट्जरलैंड में और वहां रिफाइनिंग करने का काम शुरू किया गया और रिफाइनिंग करके जो सोने का वैल्यू्यूएशन है उस वैल्यू्यूएशन को रुपीस में ट्रांसफर कर दिया और अपना मार्केट कैप ले चला गया 15 लाख करोड़ और इस पर वो खेल शुरू कर दिया सोने के वैल्यू्यूएशन जो वैल्यू्यूएशन इनटेंजिबल है टेंजिबल नहीं है जिसे आप देख नहीं सकते हैं मतलब आप मान लीजिए लीजिए कि सोने की कीमत जो है वह आप मन में मान लें कि भैया इतना वैल्यू्यूएशन का हो सकता है हमारे पास गोल्ड इतना वैल्यू्यूएशन का गोल्ड है और उस वैल्यूएशन को वो स्टॉक एक्सचेंज में घेर रहा था।
जैसे कि शेयर मार्केट में या आपके पास कोई स्टॉक है और आप बैंक के पास जाए और बैंक को बोले कि मेरे पास 15,000 करोड़ का स्टॉक है। अब बैंक कहेगा कि हां ठीक बात है। 15,000 करोड़ का स्टॉक है। 15,000 करोड़ बैंक ले लेती है और आपको 20,000 करोड़ लोन दे देती है। अब वहां तो स्टॉक है। वहां तो उनके पास कैश नहीं था। तो क्या था? स्टॉक था। शेयर था। तो शेयर वो जमा करता है बैंक में और ₹00 करोड़ ले लेता है।
इसीलिए कॉरपोरेट क्या करता है? अपने बुक्स एंड अकाउंट्स में लोन एक्सपेंडिचर खर्चा देनदारी ज्यादा दिखाता है और टैक्स रिलैक्सेशन लेता है कि हमारा खर्च ज्यादा हो रहा है। हमें टैक्स में रिलीफ दीजिए। हमारे पास तो इतने बैंक का लोन है। और वह लोन कैसे लिया? वह कोई चल अचल संपत्ति नहीं रख दिया। अचल संपत्ति नहीं रखा है वहां पर वह एक वैल्यूएशन को बैंक में मोरगेज कर दिया यही खेल चलता है टैक्स तो हम और आप दे रहे हैं मिडिल क्लास दे रहा है जिनको सीधासीधी टजिबल टैक्स आपको देना पड़ता है ये इनकम है ये आपका टैक्स आपको पे करना पड़ेगा बैंक में आपके यहां इतना पैसा क्रेडिट हुआ उसका 12 महीने का निकाल लेगा भैया ये क्रेडिट हुआ है आपके अकाउंट में तो ये क्रेडिट हुआ है तो ये पूरे आपके टैक्सेबल लायबिलिटी है अगर वो वो टैक्सेबल जो स्लैब है उसमें फॉल कर रहा है तो आपको टैक्स पे करना पड़ेगा। इंडिविजुअल के अकाउंट में अगर अगर कंपनी में भी जा रहा है तो आपको बुक्स एंड अकाउंट दिखाना पड़ेगा।
इस तरह से चल रहा है कॉमन मैन के लिए साधारण लोगों के लिए। लेकिन जो बड़े कॉरपोरेट्स हैं उनका खेल अलग चल रहा है। वो कोई उनको टैक्स रिलैक्सेशन आप देखते हैं ना उनको टैक्स रिलैक्सेशन कैसे मिलता है? 2% 3% 4% या पूरा का पूरा लोन वेव ऑफ हो जाता है। क्यों? क्योंकि वो स्टॉक मार्केट में खेल रहे होते हैं सारा। स्टॉक मार्केट में स्टॉक मार्केट का शेयर वो बैंक में देते हैं। बैंक से लोन लेते हैं और फिर उसी लोन से फिर स्टॉक मार्केट में फिर शेयर खरीद परचेज शुरू कर देते हैं। फिर उसका वैल्यू्यूएशन आगे बढ़ा तो फिर वो शेयर कर देते हैं। मतलब लोन को रीप करने के लिए फिर वो दूसरा लोन ले लेते हैं।
इस तरह का एक साइकिल स्टॉक मार्केट में कॉर्पोरेट्स जो बड़े-बड़े बिजनेस घराने आप देख रहे हैं वो चलाते रहते हैं और बुक एंड अकाउंट उनका बिल्कुल परफेक्ट रहता है। इस तरह का खेल उनका चलते रहता है। अभी वही खेल वह जो राजेश जिन्होंने 12 लाख 15 लाख करोड़ का घोटाला किया वही खेल सोना के वैल्यूएशन से वो स्टॉक मार्केट में खेल रहा था। लेकिन अब ये जो 50 60 डीलर्स हैं ये अगर एक साथ मन बना लें कि साहब हमें सोने के प्राइस को ऊपर ले जाना है तो उन्हें कौन रोक लेगा? उस 50 60 को आप ढूंढते रह जाएंगे मिलेगा नहीं। आप ताकत लगा लीजिए कि कौन है 5060 डीलर कुछ का आएगा नाम कुछ का नाम नहीं आएगा वो सब नेपथ्य में है पर्दे के पीछे है लेकिन सरकार को इस बात की जानकारी है कि यह पर्दे के पीछे से 50 60 लोग हैं।
जो पूरे सोने के बाजार को नियंत्रित कर रहे हैं। अब अगर प्रधानमंत्री ने कह दिया सोना मत खरीदो। वह जो 50 60 लाख जो अभी तक उनकी हजमनी चल रही थी उनका ही आदेश चल रहा था उनके ऊपर अंकुश लग गया और उनको लगा कि साहब ये जो बैंक सोना खरीद रही है यह हमारा डॉलर लेके जा रही है सोना खरीदते जा रही है हमको पे करना पड़ता है डॉलर हमको डॉलर में पे करना पड़ता है हमारा जो रिजर्व डॉलर है वो कहीं ना कहीं तो जा ही रहा है ना तो यह डॉलर कब तक हम अपना खपाते रहेंगे और यह खेल कौन कौन कर रहा है वो 506 लोग कर रहे हैं। यह हमारे सोने के मार्केट को आगे बढ़ाते जा रहे हैं। डिमांड भी कम होने नहीं दे रहे हैं। बल्कि महंगा होते जा रहा है तब भी यह सोना बेचे जा रहे हैं। तो इस खेल को पकड़ा जाए।
मोदी ने भांप लिया। मोदी के सलाहकारों ने मोदी को समझाया कि साहब यह खेल चल रहा है। तो यह दोनों काम हो सकता है। एक तो सोने के कंजमशन पर भी रोक लगे जिसकी वजह से हमको डॉलर ज्यादा एक्सपेंड करना पड़ रहा है। डॉलर हमारा विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो रहा है। क्योंकि सोने खरीदने के लिए हमें डॉलर में पे करना पड़ता है। रुपैया थोड़ी पे करते हैं हम। सोना खरीदते हैं तो डॉलर देते हैं। तो डॉलर वहां ज्यादा खपत हो रहा है। 99% हम इंपोर्ट ही कर रहे हैं। हमारे यहां कोई सोना है नहीं। तो इसका इंपोर्ट सबसे ज्यादा है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंजमशन का मार्केट भारत है। ये तो सबसे बड़ी आबादी है। ऊपर से यहां लोगों को दिखाने का शौक है साहब। सोना नहीं खरीदे तो जीवन इनका खत्म हो जाएगा। मर जाएंगे ये।
महिलाएं यहां पर सोना के लिए जान गवा सकती है। उनके दिमाग में भर दिया है। महिला क्या पुरुष भी सारे लोग सोना सिकड़ी चैन पहन करके देखते नहीं है। ठेकेदार कैसे चलते हैं रियल स्टेट वाले बड़े-बड़े अंगूठी वाले बड़े-बड़े सीकड़ी पहनने वाले तो सोने का बड़ा बिस्किट सोने का स्मगल सोने का हर तरह का धंधा यहां पर सोने में चल रहा था। और खजाना खाली हो रहा था सरकार का और वो 50 60 आदमी मिलकर के इन कनाइबेंस विद बैंक वो सारा खेल चला रहे थे।
मोदी ने कह दिया कि भैया साल भर सोने कम खरीदो। इशारा उसी 60 लोगों को है कि धंधा बंद करो। ये काला खेल जो चल रहा है इस खेल को तुम बंद करो। और नहीं तो अब सरकार कोई रेगुलेशन लाएगी। अब मैं हैरान हूं कि सरकार ये कह तो दी कि सोने मत खरीदिए। लेकिन इतना बड़ा जो काला धंधा चल रहा है पर्दे के पीछे से साउथ मुंबई के 50 60 लोग मिलकर के पूरे सोने के बाजार को क्रश करता जा रहा है और सरकार मौन है तो सरकार की अगर आंख खुली है तो खाली घोषणा करने से नहीं होगी सोने के प्राइसिंग के लिए ट्रांसपेरेंट भारत के अंदर रेगुलेशन को आपको करना पड़ेगा।
आप कहेंगे कि भाई ये रेगुलेशन तो भारत में हो जाएगा लेकिन ये तो इंटरनेशनल डिमांड के हिसाब से होता है। बिल्कुल होता है। सही बात है। लेकिन इंटरनेशनल प्राइस तो पेट्रोल का भी है, डीजल का भी है। लेकिन आप प्राइसिंग फिक्स करते हैं ना कुछ। तो इस तरीके से आपको कोई ना कोई रेगुलेशन लाना पड़ेगा। आप कहिएगा कि नहीं नहीं उसको सोना से नहीं तुलना हो सकती हो सकती है। कोई ना कोई तो तरीका निकाला जा सकता है। ऐसे तो नहीं हो सकता है कि 50 60 लोग मिल जो पर्दे के पीछे हैं जिसका कुछ अता पता नहीं है। वो 50 60 डीलर मिलकर के ये खेल कर रहे हैं। कौन है वो डीलर वो पता ही नहीं है। ये ज्वेल थीफ चल रहा है। भरी ब्रॉड डे लाइट में ये ज्वेल थीफ का सिनेमा पूरी दुनिया देख रही है। खेल चल चलते जा रहा है। सोने का कालो काला बाजार चल रहा है।
तो भारत सरकार अब इस दिशा में प्लानिंग शुरू कर दी है। यह सूचना है। मुझे नहीं मालूम कि भारत सरकार सोने की प्राइसिंग को लेकर के कोई ट्रांसपेरेंट रेगुलेशन कब बहाल करती है, कैसे बहाल करती है। यह देखने वाली बात होगी। लेकिन काला राज यह है जिसके लिए मोदी ने कहा सोना मत खरीदो।