पिछले साल अहमदाबाद में 12 जून को एयर इंडिया के विमान हादसे को अब 1 साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन अभी भी जांच की पूरी रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
इस बीच जो पीड़ित परिवार हैं वो कह रहे हैं कि उन पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है कि वो एयर इंडिया के अनुसार बनाए हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करें। जिसका मुद्दा प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाया है। प्रियंका जी आम पीढ़ी छोड़िए पूर्व मुख्यमंत्री की विजय रूणी जी की बेटी कह रही हैं कि एयर इंडिया दबाव बना रहा है हस्ताक्षर करने के लिए उनके टर्म्स कंडीशन पर।
नहीं देखिए जब वो बोल रही हैं इस बारे में तो उसका जो महत्व है आप समझ सकते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री जिनकी खुद की इस तरीके से उस एयरक्राइब पे हो गई थी। वो बता रही हैं कि एयर इंडिया कह रहा है कि आप फुल एंड फाइनल पेमेंट इसको कहिए और इसको क्लोज करिए। और वो कह रही हैं कि यह बात पैसों की नहीं है। यह बात इंसानियत से ज्यादा यह बात जस्टिस और क्लोज़र की है कि फाइनल रिपोर्ट आई नहीं है।
आप उन पे ये दबाव डाल रहे हैं कि इसको खत्म करिए। ये मैं लगातार ये मुद्दा उठा रही हूं कि जब ये इन्वेस्टिगेशन शुरू हुआ था सबसे पहले तो सबसे पहले कोशिश की गई थी कि बोले कि ये जो कैप्टन है अह सबरवाल जी उनकी वजह से ये हुआ है।
उनके 91 ईयर ओल्ड फादर अब वो कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं कि उनका नाम बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उसका इन्वेस्टिगेशन होना चाहिए। दूसरी तरफ जो फाइनल जब इंटेरिम इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट आई थी वो रात के बीचोंबीच आई थी और कोई सवाल जवाब नहीं हुए थे।
पब्लिकली उसको बस रिलीज कर दिया था। तो उस पे भी बहुत सवाल उठे थे। तो बस यही है कि अब फाइनल रिपोर्ट एक साल होने आ गया है। 260 परिवार में 260 लोगों की जाने गई हैं और 260 परिवार इंतजार कर रहे हैं कि पता चले कि क्या कारण रहा होगा जिससे उनके फैमिली में इस तरीके की दर्दनाक डेथ हुई है। देशवासी जानना चाहते हैं एयरलाइन फौल्ट में है।
जो एयरक्राफ्ट फौल्ट में है कौन फौल्टी है? क्योंकि ये पैसेंजर सेफ्टी का मुद्दा है। तो ये जल्द से जल्द इसको प्रायोरिटी देकर क्लोज़र रिपोर्ट आनी चाहिए। और मैं उनकी बेटी की बात से पूरी सहमत हूं और जो आज उन्होंने कहा है आई एम वेरी सर्टेन क्योंकि आज उन वो एक ऐसे परिवार से साथी हैं जिनके फादर पूर्व मुख्यमंत्री रहे उनकी अनफॉर्चूनेट डेथ हो गई। ये सारे परिवार वाले भी जो 260 लोग मरे हैं उनके परिवार वाले भी यही सोच रहे होंगे। पर सबसे बड़ा सवाल टाटा पे उठता है।
टाटा एक भरोसेमंद ब्रांड माना जाता था। Tata इज इक्वल टू ट्रस्ट कहा जाता था। पर आज वही टाटा ब्रांड इस तरीके से डाइल्यूट हो गया। मैंने तो बल्कि एक बार पार्लियामेंट में कहा था कि एयर इंडिया नाम ही हटा देना चाहिए। इसको Tata एयर कर दीजिए या एयर टाटा कर दीजिए क्योंकि इससे हमारे देश का भी ब्रांड खत्म हो रहा है। डाइल्यूट हो रहा है। तो ये सारे मुद्दे हैं। चाहे वो नासिक का टीसीएस का केस हो जहां पौश का उल्लंघन किया गया।
पौश के जो नियम कानून होते थे उसका भी उल्लंघन किया गया। खुलेआम कन्वर्ज़न हो रहा था। आठ चार्जशीट हुई है। एफआईआर दर्ज हुई हैं। और इनको कोई उसका अता-पता ही नहीं था। सो क्वेश्चंस आर राइज़िंग आउट ऑफ़ दिस एंटायर इशू। इसलिए मैंने लेटर भी लिखा है सिविल एिएशन मिनिस्टर को कि आप जल्द से जल्द आपकी जिम्मेदारी बनती है कि जल्द से जल्द ये इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट सबके सामने आए। प्रियंका जी जो टर्म्स कंडीशन की बात हो रही है उसमें ये है कि भविष्य में जो भी आप जांच में रिपोर्ट आए आप जीई कंपनी जो इंजन बनाती है।
आप बोइंग कंपनी जो विमान बनाती है अहमदाबाद एयरपोर्ट है। एयर इंडिया है। आप इस पे किसी भी प्रकार से लीगल एक्शन नहीं ले सकते। ये कहां तक तर्कसंगत नहीं वही वही तो प्रॉब्लम है। फाइनल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट नहीं आई है। हमें नहीं पता कौन-कौन इसके पीछे जिम्मेदार हैं। ये कह रहे हैं कि आप पैसा लीजिए और चुप होइए। बात पैसे की नहीं है। बात इनसेंसिटिव बिहेवियर की है और अकाउंटेबिलिटी की है। और वही वो बोल रही हैं कि अकाउंटेबिलिटी तब होती है जब लोगों को जस्टिस मिलता है। अगर जस्टिस अकाउंटेबिलिटी होगी तब लोगों को जस्टिस मिलेगा।
तो अगर आप इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट फाइनल नहीं आ रही है। बहुत सारे क्वेश्चंस एयरक्राफ्ट पे भी उठाए जा रहे हैं कि जो बोइंग एयरक्राफ्ट है उस पे सवाल उठा रहे उठाए जा रहे हैं। तो टिल यू डोंट हैव दैट और उसका स्कोप इतना ओपन है तो आप कैसे उनसे कह सकते हैं कि आप पैसे लो और चुप हो जाओ। क्या एक इंसान की कीमत सिर्फ पैसा है? एक इंसान के परिवार की कीमत सिर्फ पैसा है और पैसों से आप उनको खरीद लेंगे।
तो ये तो बिल्कुल ही अनफॉर्चूनेट है, इनसेंसिटिव है। एंड टाटा शुड आंसर दिस एंड द सिविल एशन मिनिस्टर शुड टेक इट अप स्ट्रोंगली वि टाटा ग्रुप। प्रियंका जी विजय रूपाणी जी की बेटी ने जो सवाल उठाया आपने जब ये सोशल मीडिया पर मुद्दा उठाया तब एयर इंडिया ने रिप्लाई भी किया है। रिप्लाई में वो ये कह रहे हैं कि हम किसी पर दबाव नहीं बना रहे हैं। लेकिन जो इंटरनेशनल प्रैक्टिस है इस इस प्रकार के मामलों में हम वो इंटरनेशनल प्रैक्टिस जो भारत में भी होती है वो हम लागू कर रहे हैं कि ताकि लोग भविष्य में इस तरह से कोर्ट में जाके कोर्ट में ना जाए। तो इंटरनेशनल प्रैक्टिस का हवाला दे रहे हैं। इंटरनेशनल प्रैक्टिस उन पर लागू होगी जिनके फैमिली मेंबर्स विक्टिम नहीं थे। कि मैं प्रियंका चतुर्वेदी जाकर क्योंकि मुझे इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में कोई खोट मिली है मैं जाकर चैलेंज कर दूं। पर जो परिवार जिनके परिवार के सदस्य गए हैं ।
अगर आप उसका हवाला देते हुए आप कह दें कि इंटरनेशनल रूल्स एंड रेगुलेशंस हैं। कौन सा परिवार आप मुझे बताइए कौन सा परिवार इस तरीके से बिहेव करेगा या ओपोरर्चुनिस्टिक बिहेव करेगा? कुछ तो आप सेंसिटिविटी रखिए। उनके परिवारजन खोए परिवार पूरे के पूरे परिवार खत्म हो गए हैं। और आप बात कर रहे हैं के कोई मिस यूज ना करिए। व्हाट आर यू टॉकिंग अबाउट? सो, आई थिंक दिस इज़ एक्सट्रीमली अनफॉर्चूनेट। एक्सट्रीमली इरिस्पांसिबल ऑफ़ टाटा टू से दिस एंड देयर इज़ नथिंग लाइक अ फुल एंड फाइनल पेमेंट एंड फुल एंड फाइनल क्लोज़र।
बल्कि टाटा को प्रेशर डालना चाहिए था सिविल एवीएशन मिनिस्ट्री पे कि जल्द से जल्द फाइनल रिपोर्ट बाहर आनी चाहिए जैसे हम फुल एंड फाइनल क्लोज़र कर सकें। देयर इज़ नो स्कोप ऑफ़ डाउट इन द माइंड्स ऑफ़ एनी इंडिविजुअल इन दिस कंट्री। चलिए स्कोप ऑफ़ डाउट इन द इंडिविजुअल्स ऑफ़ द कंट्री। एक तरफ रखिए। पर जो फैमिली मेंबर्स हैं आई थिंक दिस इज डूइंग ह्यूज इनजस्टिस टू दो असेंबली। इस मामले में एक मेरा आखिरी सवाल उम्मीद की जा रही है कि 365 दिन बाद यानी 12 जून को संभवत एक अंतरिम रिपोर्ट भी पूरी आ सकती है। क्या उम्मीद कर रही हैं?
जिस प्रकार से घटना हुई थी। पीएम खुद वहां मुआयना करने गए थे। गृह मंत्री गए थे। तमाम मंत्री वहां पर गण पहुंचे हुए थे। तब ऐसा लगा कि भाई इसमें कुछ लगता है एक्शन होने वाला है। पर यह तो एक छोटा सा जो क्लिप वायरल किया गया। कहीं ना कहीं टारगेट किया गया पायलट को। कोपायलट को कि उनकी गलती से हुई है और एक दिशा बताकर फिर उसके बाद ठंडे बक्से में डाल दिया गया। नहीं देश में अब माहौल ऐसे ही बनता जा रहा है। कुछ दिन की हेडलाइंस बनती है। फिर नया न्यूज़ न्यूज़ आ जाता है और हम लोग सब उसको ठंडे बक्से में रख देते हैं। ये गलती कहीं ना कहीं हम न्यूज़ मीडिया की भी है। हमारी भी है कि हम इन चीजों को भूल जाते हैं। पर मैं आपसे पूछना चाहती हूं ये तो एक बहुत बड़ा एयर इंसिडेंट था जिसमें बहुत सारे यूके सिटीजंस मरे गए थे। पर जो इतने रेल हादसे हुए 2014 से लेकर अब तक क्या हुआ उनका? किस पर कारवाई हुई? हु इज अकाउंटेबल यहां पर सब यू नो मीडिया लेकर जाते हैं, माइक लेकर जाते हैं, वहां पे सुपरवाइज करा जाते हैं और फिर वहीं के वहीं बात खत्म हो जाती है। सवाल यह नहीं है कि वहीं के वहीं बात खत्म हो। सवाल होता है कि लॉजिकल कंक्लूजन तक पहुंचे और टाइम बाउंड मैनर में पहुंचे।
इतना जो पूरे ही देश में जिसमें पूरा मैं मानती हूं कि देश को झकझोड़ दिया जिस इंसिडेंट ने तो उसमें जिम्मेदारी सरकार की और बन जाती है। कि हम अकाउंटेबिलिटी तय करें। दैट इज मिसिंग। टाटा टाटा आर नॉट कीन ऑन पुशिंग फॉरवर्ड कि जस्टिस मिलना चाहिए। आज एक परिवार कह रहा है कि हमें जस्टिस दो।
फिर आप फुल एंड फाइनल डोंट मेक इट सो इनसेंसिव। ये कोई डील नहीं हो रही है। बहुत-बहुत धन्यवाद हमसे बात करने के लिए। प्रियंका चतुर्वेदी जिनका कहना है कि यहां बात पैसों की नहीं है। यहां बात अकाउंटेबिलिटी की है और न्याय की है। जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस हादसे में खो दिया। लगभग 1 साल तक वह इंतजार ही कर रहे हैं। अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। उम्मीद है कि सरकार इसमें दखल देगी और रिपोर्ट जल्द ही बाहर आएगी। कैमरामैन आसिफ खान के साथ मृत्युंजय सिंह एबीपी न्यूज़ मुंबई।