आज महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर आ रही है। हमारे बहुत सारे दर्शक यह पूछते रहते हैं। दिशा शालियान के केस का क्या हुआ? उस केस में क्या डेवलपमेंट है? सुशांत के मामले में क्या डेवलपमेंट है? और कई बार हमारे दर्शक थोड़ा सशंकित हो जाते हैं कि कहीं क्यूबाइव नेटवर्क ने भी तो छोड़ नहीं दिया साथ इस लड़ाई में। तो आज मैं फिर एक बार कहता हूं अपने दर्शकों से कि कोई छोड़ सकता है क्यूआई नेटवर्क नहीं छोड़ सकता है और जैसे ही अपडेट आता है हम आपके साथ हाजिर हो जाते हैं।
तो अपडेट आ गई उद्धव ठाकरे आदित्य ठाकरे दोनों दिल्ली नहीं आए। आने वाले थे दिल्ली। सबके मन में यह आशा थी कि उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे तो दिल्ली जरूर आएंगे। इंडिया ब्लॉक की बैठक हो रही है और उनके बहुत सारे दोस्त उसमें शामिल हो रहे हैं।
उनकी खबर आई कि अरविंद केजरीवाल की भी पार्टी शामिल होगी। डीएमके भी शामिल होगी। ममता दीदी भी शामिल होगी। अरविंद केजरीवाल की पार्टी शामिल नहीं हुई। डीएमके शामिल नहीं हुए। ममता दीदी आई लेकिन उसके बारे में अंदरूनी खबर अब से थोड़ी देर के बाद में बताऊंगा। ममता दीदी का क्या हुआ? लेकिन उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे को आना था दिल्ली एनडीए की बैठक यूपीए की बैठक में इंडी ब्लॉक की बैठक में इंडिया ब्लॉक की बैठक में नहीं आए उद्धव जी नहीं आए आदित्य ठाकरे जी तो संजय राउत ने एक कहानी फ्लोट किया कि नहीं वो तो वर्चुअली जुड़ेंगे।
मतलब बेवकूफ बनाने की मशीन है उद्धव ठाकरे की शिवसेना और उसमें जो मैनेजर है उस मशीन के उस मशीन को चलाने वाले एक मैनेजर संजय राउत है। तो संजय राउत ने एक फ्लोट किया खबर कि नहीं नहीं वो वर्चुअली जुड़ेंगे। वर्चुअली वर्चुअली कुछ नहीं हुआ। डर के कारण वो एनडी ब्लॉक की बैठक से खुद को दूर कर लिया। कोई बात नहीं है।
दूर कर लिया तो अच्छी बात है। दूर कर लिया। लेकिन दूसरे दिन वह बिना किसी को कुछ बताए हुए लोकसभा में मिली हार, विधानसभा में मिली हार। उसके बाद मुंबई महानगर पालिका में मिली जबरदस्त हार। करारी हार के बाद पहली बार दोनों बाप बेटे पहुंचे अपने भाई के यहां। राज ठाकरे के यहां। यह बहाना बनाया कि राज ठाकरे की जो पत्नी है मतलब आदित्य ठाकरे की चाची तो चाची के बर्थडे में पिता पुत्र दोनों पहुंच गए राज ठाकरे के यहां बहाना बना करके कि आज चाची का बर्थडे है इसलिए पहुंच रहे हैं। लेकिन इसलिए नहीं पहुंच रहे हैं घर में एक बड़ा जबरदस्त भूचाल आ रखा है इसलिए पहुंच रखे हैं। 22 तारीख आ गई।
22 तारीख और 22 तारीख अब उन्हें बेचैन कर रहा है। और अब लग रहा है कि शायद अमित शाह का हथौड़ा चल गया है। अब शायद अमित शाह नहीं बचाएंगे। मोदी भी नहीं बचाएंगे। फर्नवीस अभी भी ताकत लगाए हुए हैं कि किसी भी प्रकार से बचा बचाते। अब बहाना बना रहे हैं कि नहीं हमारा हाईकमान बचाना चाहता है। बिल्कुल नहीं। अमित शाह बिल्कुल दूरदूर तक आदित्य ठाकरे को और उद्धव ठाकरे को नहीं बचाना चाहते। नरेंद्र मोदी में हो सकता है कि थोड़ी बहुत बात हो कि बाला साहब ठाकरे के पोते हैं, बेटे हैं तो थोड़ा देख लेते हैं।
उस तरह की राजनीति और अब 76 वर्ष के हो गए हैं ना तो समावेशी राजनीति करने लगे होंगे नरेंद्र मोदी जी कुछ नहीं कह सकते। लेकिन अमित शाह के तरफ से पुख्ता जानकारी है कि अमित शाह नहीं बचाना चाहते हैं। लेकिन मोदी के साथ हैं। मोदी अगर उनको कुछ कहते हैं तो वो थोड़ी मान लेते हैं। लेकिन बेचैनी बढ़ गई। पहला तो उन्होंने अमित शाह और मोदी को कंफर्म किया कि देखिए मैं अपने को उस कु्बे से अलग कर रहा हूं। उस कु्बे के साथ मुझे मत जोड़िए। मैं वहां नहीं हूं। आप कितना हमसे सबूत चाहते हैं? जो सबूत चाहते हैं, मैं दे रहा हूं। सबूत दे दिया। क्या कि हम एनडी गठबंधन में बैठ बैठक में शामिल नहीं होने जा रहे हैं। कोई बात नहीं है मत जाइए। राज ठाकरे के पास पहुंचे यह कहने के लिए कि यह 22 तारीख तो आ गई।
अब मित्रों 22 तारीख क्या है? हमने आपको कहा था कि जून में तारीख लगेगी। अपने शेड्यूल से आ गया। 22 तारीख को दिशा केस की सुनवाई है मुंबई हाई कोर्ट में। खाली यही खबर नहीं है। इसके आगे खबर सुन लीजिए। दिशा केस की जो अगली सुनवाई है वो जस्टिस नारंग कोतवाल के बेंच में लग चुका है। और जस्टिस नारंग कोतवाल कौन है? यह वही जस्टिस नारंग कोतवाल हैं जिनके अदालत में सबसे पहली सुनवाई हुई थी और जिस सुनवाई में जस्टिस नारंग कोतवाल ने कहा कि अभी तक एफआईआर हुआ क्यों नहीं?यह सवाल पहला सवाल था जस्टिस नारायण कोतवाल का कि भाई जब दिशा के पिता स्वयं प्रार्थना पत्र लेकर के आए हैं तो अभी तक इस क्यों नहीं हुआ एफआईआर इसका रिप्लाई दीजिए। हालांकि उसी दिन उनको आदेश दे देना चाहिए था कि इसमें कोई रिप्लाईप्लाई की कुछ बात नहीं है। आप रिप्लाई पहले एफआईआर फाइल कीजिए और क्यों नहीं किया उसका रिप्लाई फाइल कीजिए। आदेश देते कि पहले एफआईआर फाइल करिए और क्यों नहीं किया उसका रिप्लाई फाइल कीजिए।
तो खैर कोई बात नहीं है। एक व्यवस्था मूलक बात होती है, जस्टिस की बात होती है, न्याय की बात होती है। तो न्याय के आलोक में जस्टिस नारायण कोतवाल ने कहा कि ठीक है आपने एफआईआर नहीं किया। क्यों नहीं किया? इसका रिप्लाई फाइल कीजिए। और उस रिप्लाई में जस्टिस नारंग कोतवाल ने पांच से 10 लोगों की सूची बता दी। चीफ सेक्रेटरी महाराष्ट्र, होम सेक्रेटरी महाराष्ट्र, डिपुटी चीफ सेक्रेटरी महाराष्ट्र, को भी इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, मुंबई पुलिस कमिश्नर, डीसीपी, मालवानी पुलिस स्टेशन इन सबको पार्टी बनाते हुए सबको कहा कि आप रिप्लाई फाइल कीजिए।
बल्कि चीफ सेक्रेटरी को कहा। पार्टी बनाया इसको सबको। लेकिन चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी और पुलिस कमिश्नर मुंबई पुलिस कमिश्नर को कहा कि आप रिप्लाई फाइल कीजिए। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि जस्टिस नारंग कोतवाल ने सारंग कोतवाल ने माफ कीजिएगा सारंग कोतवाल नाम है उनका। जस्टिस सारंग कोतवाल के अदालत में उन्होंने साफसाफ कहा कि चीफ जस्टिस को रिप्लाई फाइल करना है। कोई एरू गैरू नत्थू खैरू कोई रिप्लाई फाइल नहीं करेगा कि आखिर आपने दिशा केस में एफआईआर क्यों नहीं की। और उसके बाद जो कहानी हुई उसके बारे में हमने आपको डिटेल से बताई कि ना पहले तो कई डेट्स लगाए कई डेट्स लगाए।
रिप्लाई फाइल करने में ही इन्होंने कई बेंच बदल गए। जस्टिस सारंग कोतवाल के बाद आ गए जस्टिस गडकरी जस्टिस भोसले फिर किसी और जस्टिस के बेंच में लगा वहां पर जो सीबीआई के ज जो जो वकील थे वो जस्टिस बन गए थे और उसी बेंच में था तो उन्होंने कहा कि इस केस से मुतल्लिक हम वकील रहे हैं तो हम इस केस को नहीं सुन सकते हैं। उसकी वजह से फिर दूसरा बेंच बना। उसके पहले उसके बाद फिर आलोक आराधे आए। उसके पहले आलोक आराधे चीफ जस्टिस आए मुंबई हाई कोर्ट में।
आलोक राधे ने पीआईएल की सुनवाई कर ली 2025 फरवरी में फरवरी 2025 में पीआईएल की सुनवाई की। आलोक राधे चले गए वहां से। आलोक राधे ने दो सुनवाई की। उसके बाद वहां से चले गए। वो सुप्रीम कोर्ट के जज बन गए। फिर दूसरे जज आए। उन्होंने सुनवाई शुरू की। जस्टिस चंद्रशेखर आए। जस्टिस चंद्रशेखर ने दूसरे बेंच में चल रहा था। उसके बाद जस्टिस चंद्रशेखर के पास आया मामला। जस्टिस भोसले, जस्टिस गडकरी, जस्टिस सारंग कोतवाल इन सब से होते हुए यह मामला आया जस्टिस चंद्रशेखर के पास जो चीफ जस्टिस के बेंच में था और आखिरी दो हरयिंग हुई और जस्टिस सारंग कोतवाल के ही सवाल को जस्टिस चंद्रशेखर ने पूछा कि भाई एफआईआर अभी तक इसमें हुआ है क्या? जवाब आया नहीं। नहीं आया तो बहुत गुस्से में थे जस्टिस चंद्रशेखर। भाई इस मामले में एफआईआर हुआ क्यों नहीं? उसके बाद मित्रों क्या खेल हुआ मैं बताता हूं आपको। खेल यह हुआ कि जस्टिस चंद्रशेखर जी को सुप्रीम कोर्ट में जज बनना था। अब ये माया है। और सच्चाई से क्यूबाइड नेटवर्क पीछे नहीं हटेगी। पूरे डंके की चोट पर बोलेगी और बोलती ही रहेगी।
आप लाख हमें दबाने की कोशिश करो। हम दबने वाले नहीं है। जस्टिस चंद्रशेखर के ऊपर बड़ी गंभीरता से मैं यह आरोप लगाता हूं। मैं यह आरोप लगाता हूं कि जस्टिस चंद्रशेखर ने जब पहली सुनवाई की उसी दिनकि यह डेढ़ साल से मामला चलता आ रहा था। सब कुछ उनके संज्ञान में था। जस्टिस चंद्रशेखर पहले ही दिन एफआईआर का आदेश दे सकते थे। उन्होंने आदेश नहीं दिया। उन्होंने फिर वही काम किया जो जस्टिस भोसले ने और जस्टिस गडकरी ने किया। जस्टिस भोसले और जस्टिस गडकरी टेबल टेनिस खेलते रहे। इस पूरे प्रकरण के साथ टेबल टेनिस खेलते रहे।
जब केस लॉ एडवोकेट नीलेश ओझा उनके सामने दे रहे थे कि मिलॉर्ड आपके सामने ये दो तीन ऑप्शन है। और ये सुप्रीम कोर्ट का लार्जर बेंच का जजमेंट है या सुप्रीम कोर्ट का केस लॉ है। वो केस लॉ ये कहता है कि अगर कोई डिजीज्ड का किसी पीड़ित का परिजन आकर के स्वयं प्रार्थना करता है और इतना गंभीर केस है यह। गैंगरेप और हत्या का मामला है। ऐसी परिस्थिति में आपको एफआईआर का आदेश देना ही पड़ता है। उसके पहले जितनी भी जांच प्रक्रिया है वो सेट असाइट हो जाता है। ये केस लॉ कहता है।
और ये पांच 50 वर्ष के बाद भी अगर आएगा तब भी आपको यह सुनना पड़ेगा। सिंपल केस लॉ है। इसमें कोई रॉकेट सॉन्ग साइंस नहीं है। जिसमें कि उनको कानून की किताब के पन्ने पलटने पड़ते। तो दोनों ने क्या किया? ये वीडियो रिकॉर्डिंग है। जस्टिस भोसले और जट गडकरी दोनों एक दूसरे से कुछ अपना बात करते रहे और उसके बाद उन्होंने इसको फिर अगली डेट दे दी। अगली डेट दे दी। अगली तारीख दे दी। जो भी वहां पर आया वो तारीख देने का काम किया। जो जज भी आए वो तारीख देते चले गए। और तारीख पर तारीख पड़ती रही। सिंपल केस में जिसमें फौरन से पेशतर एफआईआर होना चाहिए था। एफआईआर नहीं किया गया। कितने जज बदल गए? जस्टिस आलोक आराधे आए। कहां से आए? वो तेलंगाना से आए।
तेलंगाना से आते ही सबसे पहले उन्होंने सात दिन के अंदर में मैटर ऑन हाई बोर्ड मैटर ऑन हाई बोर्ड लिया। 7 फरवरी अगर मैं डेट नहीं भूल रहा हूं। 7 फरवरी 2025 की बात है। 7 फरवरी 2025 और फरवरी 2025 में एग्जैक्ट अगर तारीख मुझे याद नहीं आ रही है। फरवरी 2025 में जस्टिस आलोकरादे ने आते ही मैटर ऑन हाई कोर्ट ले लिया। सुनवाई शुरू कर दी और इसी लाइन पर सुनवाई शुरू हुई। भाई एफआईआर क्यों नहीं हुआ? तो जस्टिस आलोकरादे एक दो हियरिंग किए गायब। खत्म खेल। फिर वो प्रमोशन में चले गए। सुप्रीम कोर्ट के जज बन गए। फिर नए जज आ गए और उसके पहले तीन बार यह बेंच बदला गया। सारंग कोतवाल के ट्रांसफर हो गया। गोवा का हाई कोर्ट चले गए।
पता नहीं कहां गए वो। फिर वहां से वो तब्दील हो उनकी फिर उनका ट्रांसफर हुआ। फिर वो मुंबई हाई कोर्ट में आए। फिर उनके पास बेंच में गया। फिर वो उस बेंच से निकल कर के फिर आ गया जस्टिस गडकरी और जस्टिस भोसले के पास। क्यों? क्यों? क्योंकि जस्टिस सारंग कोतवाल के साथ एक और जो डबल बेंच की जज डबल बेंच डबल जजों की बेंच इस केस की सुनवाई कर रहे हैं। हम मिनिस्टर सिंगल बेंच हुआ नहीं।
एक बार सिंगल बेंच लगी थी एक बार और वो कहां गई थी? पहला ही खेल हुआ था जिसको हमारे एडवोकेट नीलेश ओझा ने पकड़ लिया उस खेल को। और वो खेल क्या था? जस्टिस रेप्ती मोहते डेरे के बेंच में इस केस को ट्रांसफर कर दिया गया। और जस्टिस ब्रती मोहते डेरे के खिलाफ गंभीर आरोप एडवोकेट नीलेश ओझा ने लगाए और कहा कि यहां पर हमें न्याय नहीं मिल सकता है और वही हुआ फिर केस बदला गया बाद में एडवोकेट नीलेश ओजा को कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के प्रोसीडिंग से गुजरना पड़ रहा है पांच जजों की बेंच लगा दिया इनके खिलाफ पांच जजों की बेंच बैठ गई कि आपने कंटेंप्ट किया है आपने माननीय अदालत का अपमान किया है जस्टिस रेव्ती मोहते डेरे के बारे में पब्लिकली आपने उनको डिफेम किया है और जब इनकी हियरिंग शुरू हुई।
पांच जजों की बेंच ने शुरू किया। यह कहते हुए कि आपने पब्लिक आप पब्लिक में क्यों गए? आपको जो कुछ भी कहना था अदालत के अंदर कहते। श्रीमान नीलेश ओझानी जी ने कहा कि साहब मैंने अदालत के अंदर दो साल पहले लिखित रूप में 300 पेज का कंप्लेंट दिया हुआ है। अदालत उस पर बैठी हुई है। सुनवाई नहीं कर रहे। मेरा क्या दोष है? तो मैं अब पब्लिक में नहीं जाऊंगा तो कहां जाऊंगा? फिर पांच जज चुप हो गए। अब उनकी फिर हियरिंग हो ही नहीं रही है। चुप हो गए हैं पांचो जज। चुप चुप्पी लग गई है। ये है जुडिशियल सिस्टम मिलो। अभी चर्चा हो रही है कि 75 जज घूम रहे हैं लंदन। मुझे नहीं मालूम किस लिए घूम रहे हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा चल रही है।
अगर वो गलत है तो उनके ऊपर कारवाई कीजिए। सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है कि रंग रैलियां मना रहे हैं। ये मैं नहीं कह रहा हूं। दूसरे लोग थंबनेल दे रहे हैं सोशल मीडिया पर और अगर यह रंग रेलियां नहीं है तो कारवाई कीजिए मिल प्लीज कीजिए कारवाई आप क्यों नहीं कर रहे हैं मिल कारवाई कौन रोक रहा है आपको कारवाई करने से इस तरह का थंबनेल होगा आप अगर लंदन गए हैं किसी काम से गए होंगे किसी सेमिनार में गए होंगे और इस तरह का थंबनेल बनाया जाए तो 75 जज लॉ मिनिस्टर के साथ रंग रैलियां मना रहे हैं अगर इस तरह की बात है तो आप उस पर कारवाई कीजिए
लेकिन अगर कारवाई नहीं कर रहे हैं तो शंका को बल दे रहे हैं। फिर जनता आपके तरफ उसी निगाह से देखेगी। अगर आप कारवाई नहीं करते हैं मी लॉर्ड मैं मैं चीफ जस्टिस सूर्यकांत को मुखातिब हूं स्ट्रेट फॉर्मेट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत जी से बात कर रहा हूं अभी कि मी लॉर्ड आप आप गए थे लंदन आप आपके साथ और भी गए थे 75 जज 70 जज जो भी जज है जिसकी संख्या मुझे नहीं मालूम लेकिन यह सोशल मीडिया पर थंबनेल पड़ा हुआ है थंबनेल कि 75 जज लॉ मिनिस्टर के साथ लंदन में रंग रैलियां मना रहे बताइए अगर इस तरह का थंबनेल है और आप कोई कारवाई नहीं कर रहे हैं तो यह फ्रीडम ऑफ स्पीच के अधीन नहीं आता है।
बिल्कुल नहीं आता है। आप बोलिए कि रंगरेलिया को आप साबित कीजिए कि मैं कौन सा रंगरेिया मना रहा था। आप इस तरह से डिफेम करेंगे जज को। नहीं कर रहे हैं। नहीं कारवाई कर रहे हैं। चलिए कोई बात नहीं है। आप इग्नोर कर रहे हैं। ये और भी अच्छी बात है कि अपनी आलोचना सुनने के लिए भी आप तैयार हैं। और जो सत्य नहीं है उसके ऊपर ध्यान नहीं देना चाहिए। आपने ध्यान नहीं दिया। कोई बात नहीं। आपके बारे में टेक्स्ट बुक में कुछ लिखा जो सर्वथा उचित था। सर्वथा उचित जिसके कारण से आपकी इतनी भग पिट रही है। यह यही कबाइ कवाइ नेटवर्क है जिसने आपकी भूरीभरी प्रशंसा की। आपके तारीफ में आपके फैसलों की तारीफ में लगातार सीरीज ऑफ प्रोग्राम्स किए। सीरीज ऑफ रिकॉर्डिंग्स की और आपने देखे होंगे हमारे कार्यक्रम को। यही कवाइ नेटवर्क था। यही आशुतोष पाठक था। इसी दमदार तरीके से आपके समर्थन में बोल रहा था। लेकिन उसके बाद आप फंस गए दलालों के चक्कर में। उन्होंने आपके कान में भर दिया। और फिर आपने क्रेडिबल एकेडमिशन के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी की। विभत्स टिप्पणी की कि घरघर, गली, मोहल्ले, चौक, चौराहे पर आपकी आलोचना भरपूर होने लगी। वर्तना ऐसी हुई कि आप खेल नहीं पाए।
और फिर उसके बाद आपके मुंह से निकल गया कोखराज। उसके बाद तो भदी ही पिट गया। तो जो रही सही साख थी वह भी आपने गवा दी। और अब आप खुलेआम लोग कह रहे हैं कि 50 75 जज रंग रैलियां मना रहे हैं। आपकी जुबान नहीं खुल रही है। आपकी कोई कारवाई नहीं हो रही है। होगी कैसे? कैसे होगी? लोग पूछेंगे कि यशवंत वर्मा के यहां से पैसा पकड़े क्यों नहीं? उनके खिलाफ एफआईआर हुआ क्यों नहीं? वो जेल गया क्यों नहीं? कुछ नहीं। कुछ नहीं। तो आप पॉलिटिकल क्लास को एक प्रकार से मौका दे रहे हैं। पिटिकल क्लास को मौका दे रहे हैं। अब यह मुंबई हाई कोर्ट में क्या खेल हुआ? आलोक राधे का ट्रांसफर दूसरे जज आए पहले जो जज बदलता रहा बेंच बदलता रहा। यह फोन इन हो रही है। फोन कॉल चल रहे हैं।
और मैं बड़ी जिम्मेदारी के साथ बड़ी विनम्रता पूर्वक यह कहना चाहूंगा कि महाराष्ट्र की सरकार इसमें सांगोपांग लिप्त दिखाई पड़ रही है। बड़ी विनम्रता से कहना चाहूंगा कि महाराष्ट्र की सरकार इसमें सांगोपांग लिप्त दिखाई पड़ रही है। और ये उनके आंख उनके होम मिनिस्टर है मुख्यमंत्री। होम मिनिस्टर का एक एसआई लेवल का सब इंस्पेक्टर सीनियर इंस्पेक्टर लेवल का अधिकारी रिप्लाई फाइल कर रहा है। कोर्ट के आदेश की अवहेलना अवमानना ब्रॉड डे लाइट में हो रही है। कोर्ट ने आदेश दिया था चीफ सेक्रेटरी को रिटर्न फाइल रिप्लाई फाइल करने के लिए। लेकिन रिप्लाई कौन फाइल कर रहा है? एसआई फाइल कर रहा है। और वो इसलिए कह रहा है कह रहा है कि हम एसआईटी के मेंबर थे।
अरे भाई कौन सा एसआईटी? एसआईटी ने किया क्या? एसआईटी के डॉक्यूमेंट्स किधर हैं? क्या है जांच रिपोर्ट? बैक डेट में जांच रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है। बैक डेट में तो सारा खेल 12 महीने तक आपने एसआईटी घोषणा करने के बाद एसआईटी बनाई नहीं। एसआईटी के ऑफिसरों की घोषणा नहीं की। दुनिया बेवकूफ है क्या? महाराष्ट्र सरकार जी दुनिया बेवकूफ नहीं है। दुनिया समझ रही है। श्रीमान मुख्यमंत्री जी दुनिया समझ रही है। श्रीमान गृह मंत्री जी महाराष्ट्र के दुनिया समझ रही है आपको। दुनिया को बेवकूफ नहीं बना सकते हैं। जस्टिस चंद्रशेखर के ऊपर भी मैं गंभीरता के साथ, विनम्रता के साथ और पूरी पारदर्शिता के साथ और निर्भीकता के साथ, ईमानदारी के साथ यह आरोप लगा रहा हूं कि जस्टिस चंद्रशेखर ने दिशा के मामले में न्याय नहीं किया। नहीं किया। आज अगर वह चाहते तो जाते सुप्रीम कोर्ट जाते वो आदेश दे दिए होते। ब्लैक एंड वाइट है यह केस। इसमें कोई इतना वक्त लगाने की आवश्यकता नहीं थी। जस्टिस चंद्रशेखर ने भी न्याय नहीं दिया। नहीं दिया न्याय। तो कितने जज आए? कितने जज बदल गए? जो वकील सवाल उठा रहे हैं उनके खिलाफ कंटेंप्ट की कार्रवाई शुरू करवा दी। और अभी तो देखिए मैंने एक यूबर के खिलाफ जो कंटेंप्ट किया था मैंने उनके खिलाफ किया है पूरा वो बना नहीं सकते हैं और अगर ठीक से कारवाई होगी तो वो जज महोदय जाएंगे जेल ये सुन लीजिए दिल्ली हाई कोर्ट के जज की बात मैं कह रहा हूं जाएंगे जेल आदेश कानून सम्मत नहीं है आप कानून की पालना के लिए कानून की रक्षा के लिए कान कानून की परिधि में कानून की रक्षा करते हैं। कानून की परिधि जाकर के कानून की रक्षा नहीं करते हैं। ठीक है? एक नेचुरल जस्टिस है जो कानून की परिधि के बाहर जाता है। वो नेचुरल जस्टिस भी उस केस में नहीं था। यूबर के केस में नेचुरल जस्टिस भी नहीं था। फिर क्या था? फिर तो उस यूटबर की यह बात कि अहंकार है। यह क्या है? आप किसी को भी जेल भेज देंगे। जिनको जेल भेजना चाहिए उस पर सुनवाई नहीं। वाह! आप अपने इंस्टिट्यूशन को दागदार कर रहे हैं। अपने इंस्टिट्यूशन की साख को बट्टा लगा रहे हैं। अपने इंस्टिट्यूशन को तबाह कर रहे हैं। जनता के मन मस्तिष्क में आप शंका पैदा कर रहे हैं। जनता के मन मस्तिष्क में जो मंदिर है न्याय का मंदिर उसमें ऐसा लग रहा है कि पाप की पोटली भरी जा रही है। गठरी वहां पर बनती जा रही है। यह पाप का मंदिर होता जा रहा है।
यह आप सवाल खड़े कर रहे हैं। इसलिए जस्टिस सारंग कोतवाल जी से अनुरोध है कि 22 तारीख को सुनवाई करें और 22 तारीख को एफआईआर का आदेश दें। आपके पास कोई ऑप्शन नहीं है और नहीं है इसीलिए आपने यह पौने दो साल खींच लिया। तारीख दे दे के तो एक ऑप्शन है तारीख दे के खींचते जाएं। तो तारीख देकर के खींचते जा रहे हैं। बाप बेटे को बचाने के लिए आप जितने तड़म हो सकते हैं वह सारे तड़म कर रहे हैं। आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए और वो दो कौड़ी का इंसान बाहर में आकर के बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है। पिटिकल थ्योरी समझा रहा है। राजनीतिक सिद्धांत का प्रतिपादन कर रहा है। बड़े इकोनॉमिस्ट हो रहे हैं। सड़क टूट रहे हो उसके बारे में प्रवचन दे रहा है कि देखिए सड़क टूट गया। अरे तुमने ऐसी आस्था का, ऐसी भरोसा का, ऐसी विश्वास का गला घोटा है जो कालांतर तक ठीक नहीं हो सकता। तुमको यह नैतिक अधिकार है ये बोलने का कि सड़क कहां पर खराब बना है और कहां अच्छा बना है? शर्म करो। आओ अदालत में। कहां गए?
तुम जो रिप्लाई लेकर के आए थे। तुमने तो फाइल किया था। पीआईएल पर फाइल किया था कि पीआईएल पर आप एकांगी निर्णय मत दीजिएगा। मुझे सुन लीजिए। उसके बाद सुनाने के लिए कभी आए नहीं। नोटिस गया आदित्य ठाकरे को नोटिस। झूठा एफिडेविफिट को लेकर के। झूठे एफिडेविफिट पर कोई रिप्लाई फाइल नहीं किया आदित्य ठाकरे ने। क्यों? क्योंकि सबने समझा दिया होगा कि इस बचड़े में मत पड़ो। जवाब ही मत दो। जितना टाल सकते हो टालते रहो। अदालत जाओगे तो अदालत में तो समझ लो वहां आग लगी हुई है। उसमें झुलस जाओगे। तो उसको इग्नोर करो। कोई गाली दे तुमको इग्नोर कर दो। क्यों? क्योंकि तुमको उकसाया जाएगा।
तुमको अदालत बुलाया जाएगा। रणनीतिकारों ने सलाह दी कि रिप्लाई फाइल मत करो। रिप्लाई फाइल करोगे तो तुम पकड़ा जाओगे। एफिडेविफिट में रिप्लाई में एफिडेविफिट में लिख दिया कि हमारा एज कभी 33 कभी 28 कभी कुछ। दो एफिडेविफिट में दो एज गलती से हो गया। नहीं गलती से नहीं हुआ। काला जादू करवाया था फार्म हाउस पर उसने कहा कि उसी तारीख को लिखो जिस तारीख को उनकी मौत हुई थी उसमें से कुछ निकाल निकाल करके ये मैं नहीं कह रहा हूं सरकार का मंत्री कह रहा है कि उनके खिलाफ तो कारवाई होनी चाहिए नितेश राणे कह रहे थे नीलेश राणे कह रहे थे सरकार भारतीय जनता पार्टी के विधायक कह रहे थे मंत्री कह रहे थे अभी सब चुप हो गए हैं सबकी चुप्पी है लेकिन ध्यान रखिए क्यूबाई नेटवर्क चुप नहीं रहेगा और इस मामले मैं मोदी जी का, मैं शाह जी का और मैं देवेंद्र फडनवीस का नहीं सुनने वाला हूं और नहीं सुनूंगा।
आखरी वक्त तक नहीं सुनूंगा। उनके ऊपर सवाल करता ही रहूंगा कि आप तीनों अगर चाह लेंगे तो उनको सजा मिल जाएगी। आप तीनों नहीं चाह रहे हैं। बड़ी विनम्रता से यह बात मैं आप तीनों को कह रहा हूं। अदालत का आसरा मत देखिए। अपने पुलिस को कहिए एफआईआर फाइल करें। इन्वेस्टिगेशन शुरू करें। जैसे आज ट्विशा शर्मा के लिए एक्टिव हो गई और तुरंत फौरन से पेस्टर रिकक्रिएशन हो गया। अभी क्या हुआ नहीं हुआ। फिर वो ठंडे बस्ते में चला गया। मुझे नहीं मालूम क्या होगा।
यहां तो जब तक खबर रहती है रहती है। फिर उसके बाद सेटिंग गेटिंग शुरू हो जाता है। पता नहीं सेटिंग गेटिंग होगा कि आगे क्या हो जाएगा। गॉड नोट। अब उसकी सच्चाई मैं जानता नहीं हूं। लेकिन मैं तो यही कह रहा हूं कि एक बार सीन रिकक्रिएशन हो जाए जरा सा 14 फ्लोर से दिशा ने जंप लगाया स्टेटेड है कैमरे पे आप सब लोगों ने देखा है ना श्रीमान रोहन रॉय ने उनके दोस्तों ने सबने देखा ना तो एक बार वहां से उसको गिराया जाए फिर देखा जाए कि दिशा का चमकता हुआ चेहरा बिल्कुल चमक रहा है क्या एक दांत भी नहीं टूटा क्या जो तस्वीर है हमारे पास जो सबूत है हमारे पास आने तो दीजिए सबूत को एक बार रिकक्रिएशन करवा लीजिए
कैमरे के साथ चलिए रिकक्रिएशन के लिए और फिर वहीं से गर्दन पकड़िए रोहन रॉय की और दिखाइए कि तुमको यहां से दिखा कैसे ये बता बताइए तू गर्दन दबोच के रोहन राय को बोलिए इसी जगह से कि तू बता कि तुम्हें यह कैसे दिख गया रात के अंधेरे में कहां तुमको दिख गया कि दिशा वहां गिरी हुई है और फिर तुम दौड़ करके नीचे आ गए लिफ्ट का भी इंतजार नहीं किए। सीढ़ियों से दौड़ के आ गए। गर्दन तो दबोचिए रोहन राय की। वो रोहन राय मेरे फोन को एक बार कहा हेलो उसके बाद गायब हो गया। मेरा मेरी आवाज सुनकर के रोहन राय गायब है। कहां है रोहन राय? पता नहीं है। तो मोदी जी सब चीज को तो पकड़ लाते हैं आप। फनवीस जी आप भी पकड़ लाते हैं। अमित जी आप भी पकड़ लाते हैं। यह रोहन राय को क्यों नहीं पकड़ रहे हैं? इतना साफ केस है। क्या मजबूरी है? मैं हैरान हूं। मजबूरी क्या है? अरे मोदी जी मैं फिर कह रहा हूं आपको। आप आदित्य ठाकरे को बचाइएगा। आपके ऊपर काली साया पड़ जाएगी। मैं फिर कह रहा हूं।
बड़ी विनम्रता से कह रहा हूं। आप इसमें आप कह दीजिए कि भाई मैं आउट ऑफ बॉक्स जा रहा हूं। मैं जा रहा हूं। मैं आउट ऑफ बॉक्स जा रहा हूं। मुझे जाना ही पड़ेगा। मुझे जाना ही पड़ेगा। आप जांच करवा लीजिए। मैं अपने बॉक्स में आ जाऊंगा। मैं बॉक्स के बाहर नहीं जाऊंगा। तो काली साया पड़ रही है। इसीलिए यह विश्व युद्ध भी हो चल रहा है। इसीलिए प्राइस राइज हो रहा है। हालांकि अभी मैं एक और खबर जिसमें आप बढ़िया काम किए हैं मोदी जी आपकी तारीफ करने वाला हूं 7:30 बजे बताऊंगा देश को कि आप एक बहुत बढ़िया काम किए। तो जो आप अच्छा काम करते हैं उसकी मैं तारीफ करता हूं।
अमित जी जो बढ़िया काम करते हैं जमकर तारीफ करता हूं। इवन देवेंद्र जी जो बढ़िया काम करते हैं जमकर तारीफ करता हूं। लेकिन इस बाप बेटे के मामले में आप तीनों का व्यवहार उचित नहीं है। तो इस बाप बेटे के मामले में आप मुझे माफ करें। मैं आपसे माफी चाहता हूं। इस मुद्दे पर मैं आपके साथ नहीं। मैं इस मुद्दे पर इस बाप बेटे के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा। 22 तारीख को मैं फिर अनुरोध कर रहा हूं जस्टिस सारंग कोतवाल जी से कृपा करके उस अबला पिता की लाज रख लीजिए। उसकी आवाज सुन लीजिए और इस पूरे देश की आवाज है। पूरा देश इंतजार कर रहा है। मीडिया वाले भी छोड़ के भाग गए। सारे भाग गए। सारे बड़े-बड़े कुछ कुछ कह रहे हैं।
लेकिन बेचारे लाचार हैं। क्या कर सकते हैं? कुछ मीडिया वाले बिल्कुल बढ़िया काम कर रहे हैं। कुछ मीडिया वाले अभी भी लगे हुए हैं। अभी भी जब भी उनको मौका मिलता है वो उठाते हैं। लेकिन क्यूआई नेटवर्क तो लगातार लगा हुआ है।