ये दिन की दुनिया अब कैसे बतानी है वो जितनी चुलबुली थी उतनी ही खूबसूरत भी जैसे ही वो पर्दे पर आई थी एक चमक सी बिखेर देती थीजमाने की एक दिग्गज अभिनेत्री जिन्होंने अपनी अदाकारी से लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया l उसे जमाने में वो जितने स्टाइलिश लुक में नजर आई थी वह दूसरी अभिनेत्रियां सोच भी नहीं शक्ति थी।
फिल्मों में अपने किरदार से देश भर में मचा दिया था और बॉलीवुड के नाम से मशहूर हो गई थी की अमेरिकी सैनिक अपनी जब में उनकी फोटो लेकर लड़ने जय करते थे आने वाले आज रूठ के जान और क्या आप यकीन करेंगे की उसे दूर के सबसे दिग्गज अभिनेता रिश्ते में उनके देवरा लगता थे और उनसे बेहद नफरत करते थेi इसके पीछे की वजह और क्यों बेहद कम वक्त में ही वह अचानक फिल्मों से गायब हो गए जानेंगे और भी
हम बात करेंगे हिंदी सिनेमा के शुरुआती दूर की अभिनेत्री में सुमार एक खूबसूरत और बोल्ड अदाकारा जब तक इंडस्ट्री में रहे हमेशा नया ट्रेड दिया और इसीलिए उसे दूर में हर तरफ बेगम पर के ही चर्च थे क्या किसी का नाम बता 40 और 50 के दशक की एक ब्यूटीफुल अदाकारा जिन्होंने इतनी साड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी की घर-घर में मशहूर हो गई बात चाहे उनकी निजी जिंदगी की हो या फिर करियर की वह भूमिका में अव्वल रही उसे अभिनेत्री के दीवाने देसी नहीं विदेश में भी मिलते थे वो नौजवानों के दिल की धड़कन हुआ करती थी।
40 के दशक में जहां एक्ट्रेस फिल्मों में एक्टिंग करने से करती थी और साड़ी में लिपटी हुई नजर आई थी उसे जमाने में इस एक्ट्रेस में फोटो शूट करवा कर हिंदी सिनेमा में भूचाल ला दिया था हां तू रन लगा आज की अभिनेत्रियां शरीर के ज्यादातर कपड़े उतारने के बाद भी जो सनसनी नहीं मचा पाती इस नायिका ने अपनी आंखों की जंभेश से ही बर्प दिया था इन्होंने बहुत कम फिल्में की लेकिन जी वे फिल्म में कम किया वो सुपरहिट रही एक तुम्हारी कल है जो तुम्हारी याद दिलाती है और एक हमारी कल है जो अपनी जीवन के कुछ और ऐसे अनोखे पहलू हैं जिन्हें जान बिना उनके व्यक्तित्व और उनके जीवन को पुरी तरह से समझा नहीं जा सकता।
इन सभी बटन पर चर्चा करने से पहले एक नजर उनके शुरुआती जीवन पर सन 1926 में 25 दिसंबर की तारीख थी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम में एक कुलीन मुस्लिम परिवार में एक खूबसूरत बच्ची का जन्म हुआ बुलाती थी पर के 10 भाई बहन थे जिम वो तीसरी बेटी थी पर की परवरिश बीकानेर राजस्थान में हुई उनके पिता का नाम मियां एहसान अल हक था जो अंग्रेजन के जमाने के एक जाने-माने जस्ट थे पिता की सरकारी नौकरी होने की चलते उसे जमाने के अलग-अलग रियासतों में उनका तबादला हुआ करता था।
अपने रिटायरमेंट के वक्त वो राजस्थान के बीकानेर रियासत में के जस्टिस के पद पर तैनात थे बाद में वो प्रांतीय सरकार में मंत्री भी रहे माता-पिता दोनों पढ़े-लिखे थे इसलिए उन्होंने अपने हर बच्चे को ऊंची से ऊंची शिक्षा के लिए प्रेरित किया हर चार-पांच साल में होने वाले पिता के तबादलों की वजह से पर के पढ़ाई लिखी में कोई रुकावट ना आए इसलिए उन्हें जालंधर के एक हॉस्टल में दाखिला कर दिया गया।
उन्होंने अपने स्कूलिंग पुरी की और कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कॉलेज के दोनों में ही पर बेहद बोर्ड थे यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने घुड़सवारी शिकार निशानेबाजी तैराकी क्रिकेट और बैडमिंटन में महारत हासिल की सिर्फ शौक की खातिर नहीं बल्कि इन सभी खेलो में उन्होंने पुरी गंभीरता से हिस्सा लिया और कई अवार्ड भी अपने नाम किया क्रिकेट में उनकी विशेष रुचि थी वो अच्छी प्लेयर तो थी लेकिन क्रिकेट को अपना करियर नहीं बनाना चाहती थी।
एक तरफ फिल्म और दूसरी तरफ क्रिकेट दोनों का मेल नहीं था बताया जाता है की 12 की पहला पर ही फिल्मी सितारों की नुमाइश क्रिकेट मैच शुरू की गई पहले मैच में पर ने सबसे ज्यादा रन बनाकर पुरुष कलाकारों को शर्मिंदा कर दिया पर अभिनेत्री बन्ना चाहती थी वह कॉलेज के दोनों में हीरो मोतीलाल की बड़ी फैन थी वो उनकी हर एक फिल्म देखा करती थी दिल के ख्वाहिश थी की वह एक दिन उनके साथ फिल्म में कम करें एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था की वह अक्सर मेरे लेटेस्ट का जवाब देते थे और फिल्मों में कम करने के लिए अक्सर मुंबई बुलाया करते थे लेकिन कोई संयुक्त नहीं बन का रहा था उनके पिता खुला विचारों के तो थे फिर भी बेटी का फिल्मों में कम करना पसंद नहीं था।
लेकिन नेत्री ने पर के लिए पहले से ही कुछ अलग सोच रखा था पर के मुंबई जान और फिल्मों में कम करने का आधार एक अजीब संयुक्त बना दरअसलपारा के बड़े भाई मंसूर जो कोलकाता में बता कंपनी में कम करते थे उन्होंने एक बंगाली अभिनेत्री प्रतिमा दासगुप्ता से शादी कर ली जिसको लेकर उनसे उनके माता-पिता काफी नाराज थे।
हालांकि बाद में उन दोनों की शादी को स्वीकार कर लिया गया शादी के बाद उनके भाई और भाभी मुंबई शिफ्ट हो गए जहां साल 1943 में प्रतिमा दासगुप्ता को फिल्म नमस्ते मैं बतौर लीड हीरोइन कम करने का मौका मिला पर अक्सर छुट्टियां बिताने के लिए अपने भाई सभी के यहां मुंबई जय करती थी वहां पर अपनी भाभी प्रतिमा के साथ फिल्में परियों में भी जाति थी वहीं पर फिल्म से जुड़े लोगों के साथ मिलन जलना शुरू हो गया परियों की चमक दमक देख कर वो बेहद प्रभावित हुए फौरन ते कर लिया की चाहे जो भी हो वो अभिनय ही करेगी पर बेहद खूबसूरत थी।
उन्हें जो भी देखा वो उन्हें फिल्मों में कम करने का प्रस्ताव दे देता था शशिधर मुखर्जी और देविका रानी ने उन्हें सबसे पहले फिल्म में कम करने का मौका दिया हालांकि पर के पिता इसके लिए तैयार नहीं थे एक बार 12 अपनी भाभी के साथ कोर्ट डांसर फिल्म की शूटिंग पर गई उसे समय भाभी प्रतिमा दासगुप्ता को डांसर फिल्म में एक्टिंग कर रही थी इस दौरान पर की मुलाकात प्रभात फिल्म कंपनी में पार्टनर बाबू राव पैसे से हुई पेन पर को अपने फिल्म चंद में बतौर हीरोइन एक्टिंग करने का ऑफर दिया भाभी प्रतिमा ने भी उनको यह ऑफर स्वीकार करने के लिए कहा पर के पास यही मौका था।
जब वह अपने सपना को पूरा कर शक्ति थी उन्होंने अपने पिता को मनाने का फैसला किया भाभी प्रतिमा को लेकर अपने वालिद को मनाने बीकानेर पहुंची मां गए लेकिन पिता एहसान अल हक ने एक शर्ट राखी की लाहौर में वह कभी भी फिल्मों में कम नहीं करेगी साल 1944 की फिल्म चंद से पर ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत बता मुझको क्या काईट का नाम हजार वो महेश 17 साल की थी वह उसे फिल्म में उसे जमाने के स्टार प्रेम आदित्य मासिक वेतन दिया गया यह फिल्म सुपरहिट रही लेकिन 5 साल में ही उनका मेहनत आना एक लाख रुपए तक पहुंच गया इस सबके बीच पर को अपना नाम खाली खाली लगता था इसलिए उन्होंने खुद ही अपने नाम के आगे बेगम लगाने का फैसला किया जिसके बाद वह फिल्म इंडस्ट्री में बेगमपारा के नाम से मशहूर हो गए प्रेम कहानी ने धूम मचा दी उसे दूर के युवाओं के दिल में सोनी के रूप में सिर्फ बेगमपारा ही छी हुई थी साल 1947 में आई जंजीर और मेहंदी जैसी फिल्मों में वह नरगिस के साथ नील कमल में उन्होंने राज कपूर और मधुबाला के साथ स्क्रीनशॉट बेगम पर ने अपने अभिनय के दम पर सबको अपना दीवाना बना दिया था ।
आलम यह था की उनके चने वाले सुबह-सुबह उनके घर के सामने एक झलक अपने के लिए खड़े हो जाते थे इंडस्ट्री में बेगम की डिमांड बढ़ाने लगी थी सुहागरात झरना शहनाज बेगम पर के जीवन की बेस्ट फिल्में साबित हुई इसके बाद उन्होंने साल 1940 से 1960 अगले दो दशक तक बॉलीवुड पर राज किया दो दर्शकों में उन्होंने सिर्फ 28 फिल्मों में कम किया जिसमें साल 1953 लैला मजनू नया घर और पहले झलक की सफलता से पर इंडस्ट्री की सबसे महंगी हीरोइन बन गई ये एक फिल्म के लिए एक लाख रुपए तक चार्ज करने लगी जो उसे जमाने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी की इनके जीवन शैली में रोना धोना फिट नहीं बहता था वो रन वाली फिल्मों से दूर ही रहा करती थी
फिल्मों में पर ने बेहद बोर्ड इमोशनल और फैशनेबल कई तरह के किरदार निभाए जब फिल्मों में हीरोइन ने परंपरागत भारतीय नई के लिबास में कैद थी उसे दूर में बेगमपारा ने लाइफ मैगजीन के लिए बोल्ड फोटो शूट कराया इस फोटोशूट में उन्होंने व्हाइट साड़ी पहनकर सिगरेट के कष्ट लगाते हुए पोज दिए और इस फोटो शूट ने देखते ही देखते इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया वो बॉलीवुड की ग्लैमर हीरोइन के नाम से मशहूर हो गए बता दें की 1950 का ये फोटो शूट उसे दूर के फेमस फोटोग्राफर जेम्स बुर्के ने किया था।
इस फोटो शूट से देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी इनके चने वालों की तादाद बढ़ाने लगी साल 1950 से 1953 तक चलिए कोरिया के युद्ध में लाड रहे अमेरिकी सैनिक बेगमपारा के ऐसे दीवाने हुए की उनकी तस्वीर को दीवारों पर लगाकर रखते थे बताया जाता है की उसे युद्ध में मारे गए सैनिकों की जब से बेगमपारा की तस्वीर निकलते थी यही करण है की वो बॉलीवुड की फर्स्ट बोंबशेल और पी अप गर्ल के नाम से मशहूर हो गए ।
अपनी इमेज को लेकर बेगमपारा ने एक इंटरव्यू में बताया था की उसे दूर में बहुत बड़ी बात होती थी मैं पेंट्स जींस और अनकंवेंशनल ड्रेस पहनती थी इसलिए हर फिल्म मैगजीन पर मेरी फोटो हुआ करती थी मैं जानती थी की मेरा फिगर बहुत शानदार है ऐसे में अगर मैगजींस के लिए मुझे बोल्ड पोज देने को कहा जाता था तो मुझे कोई आपत्ती नहीं होती साल 1955 में निर्माता निर्देशक दलसुख पंचोली के फिल्म लूटेरा साल 1956 की कर भला और 1957 की फिल्म आदमी में बेगमपारा के हीरो दिलीप कुमार के छोटे भाई नासिर खान थे जो आगे पर के शहर बने मनाया जाता है की दिलीप कुमार के भाई ना सिर्फ खान से उनका परिचय संयुक्त से हुआ दोनों को प्यार हुआ और फिर शादी हुई लेकिन इन दोनों की शादी का किस्सा भी बड़ा रोचक है।
दरअसल बेगम पर अपनी आधुनिक जीवन शैली और बेबाक रवैया के लिए व्याख्या थे उन्हें शराब पीने का बहुत शौक था साथ ही महंगी से महंगी गाड़ियों में घूमने पार्टी करना बहुत अच्छा लगता था उनकी महिला मित्र मंडली में नरगिस गीतावली शमी और निम्मी थी वही पुरुष मंडली में केंद्र सिंह मोतीलाल डेविड जैसे दोस्त शामिल थे जो पीने के साथ ही ज्यादा थे उसे दूर की मशहूर अभिनेत्री शम्मी ने इन दोनों को करीब लाने में खासी मदद की हालांकि नासिर खान पहले से अपनी शादीशुदा थे यही करण था की बेगमपारा नासिर साहब से दूर ही रहना चाहती थी क्योंकि नासिर खान के अपनी पत्नी से अच्छे संबंध नहीं थे ।
इसलिए बाद में इन दोनों का रिश्ता आगे बड़ा दोनों का मजहब एक था लेकिन बेगम पर ने यह साफ का दिया था की वो दूसरी पत्नी नहीं बन्ना चाहती लिहाजा नासिर साहब अपनी बीबी से तलाक लेने फिर शादी करें फिर नासिर खान ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया जिसके बाद 1958 में दोनों ने शादी कर ली इस शादी से बेगम पर को तीन बच्चे हुए दो बेटे और एक बेटी बताते हैं की दिलीप कुमार इस शादी के पक्ष में नहीं थे।
दिलीप कुमार जानते थे की बेगम पर जी जीवन शैली की आदि हैं उसे जुटापना नासिर खान के बस की बात नहीं है हालात ऐसे हुए की दिलीप कुमार और बेगमपारा एक दूसरे के आमने सामने भी नहीं आते थे लेकिन उन्हें अपने भाई की फिक्र थी क्योंकि वो एक अभिनेता के तोर पर ज्यादा सफल नहीं हो का रहे थे इसलिए उन्होंने अपने भाई के नाम से फिल्म गंगा जमुना बनाइएi जिसमें उन्होंने दमदार अभिनय किया फिल्म की कमाई से नासिर खान और बेगम पर ने समुद्र के किनारे एक आलीशान बांग्ला खरीदा नासिर खान के सर और बाहों के बाद तेजी से झड़ना लगे थे और उन्हें विग लगाकर कम करना पड़ता था लिहाजा उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन की तरफ ध्यान देना शुरू किया।
इस बीच बेगम पर ने कई कारोबार में हाथ डाला लेकिन हर बार गलत सलाहकार मिली और हर बार उन्हें घाट उठाना पड़ा 1974 में नासिर खान ने साड़ी जमा पूंजी लगाकर संजय खान और सायरा बानो को लेकर फिल्म ज़िद शुरू की इस फिल्म के में लीड में संजय खान सायरा बानो और डैनी थे फिल्म थे रियल बन चुकी थी अगले शेड्यूल की लोकेशन देखने बेगम पर और नासिर खान डलहौजी गए हुए थे वापसी में अमृतसर के होटल में अचानक दिल का दौरा पढ़ने से नासिर खान का निधन हो गया बेगम पर की तो दुनिया ही उजाड़ गई।
सर पैसा फिल्म में ग चुका था मदद करने वाला कोई नहीं था उन पर तीन बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी थी हताशा में उन्होंने शराब पीनी शुरू कर दी उनकी बहन ने उनका दमन थम बेगम पर को उनके बच्चों के साथ पाकिस्तान ले गए जहां उनके माता पिता रहते थे वहां वो अपने परिवार के साथ रहने लगे लेकिन वहां बैंड और रूढ़िवादी माहौल के चलते अधिक समय तक र नहीं पाएंगे करीब 3 साल बाद जीवन से जूझने का संकल्प और हिम्मत लेकर बेगमपारा फिर मुंबई लौटे उन्होंने समझ लिया था की उन्हें अपना सहारा खुद ही बन्ना होगा इनकी बड़ी बहन जरीना भारत में थी जिन्होंने उनकी काफी मदद की बेगमपारा का संघर्ष चर्म पर था उन्हें फिल्म में मिलने बैंड हो गई थी लिहाजा उन्होंने अपने बेंगल का एक हिस्सा ब्यूटी पार्लर के लिए कारा पर देकर आई का साधन तलाश जिससे उनके परिवार की देखे होती रहे जीवन से बेगम पर को कोई शिकायत नहीं थी।
उन्होंने वही जीवन जिया जो उनके मां ने चाहा बेगमपारा की बेटी अब एक सफल बिजनेस वूमेन है इनके बड़े बेटे नादिर खान का बहुत कम समय में ही निधन हो गया था उनके छोटे बेटे अयूब खान आज के जाने-माने टीवी एक्टर हैं जिन्होंने फिल्म और टेलीविजन दोनों में अच्छा नाम कमाया है 50 साल कैमरे से दूर रही बेगम पर एक बार फिर संजय लीला भंसाली के फिल्म सांवरिया में नजर आई थी जो 2007 में रिलीज हुई थी इस फिल्म में उन्होंने सनम कपूर की दादी का रोल प्ले किया था जिसमें सिर्फ एक बार हम कहते थे का दे 10 दिसंबर 2008 को 82 साल की उम्र में बेगम पर का निधन हो गया
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