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92 यात्री के साथ अचानक गायब हुआ विमान सालो बाद वापस आया और फिर….

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एक विमान लगातार 35 साल तक हवा में चक्कर लगाए, क्या ऐसा संभव है? जहां आखिर में अटलांटिक महासागर में वह फ्लाइट स्पॉट हुई थी, लेकिन कोई भी अवशेष नहीं मिला। से गायब होना, इसका मतलब फ्लाइट के साथ कोई अनहोनी घटना हुई है। कुछ सालों बाद अचानक एक फ्लाइट दिखती है — अचानक जो दिखी, उस फ्लाइट का किसी लिस्ट में नामोनिशान नहीं था। दरअसल सेंटियागो एयरलाइंस की 513 फ्लाइट 35 साल बाद ब्राज़ील के एक एयरपोर्ट पर उतरी, और अंदर जो दृश्य देखा, उसे देखकर पूरी टीम चौंक गई।

आपने कई बार हवाई यात्रा की होगी या फिर हवाई यात्रा के बारे में सुना होगा। विमान में सफर करना, उसका अनुभव कुछ गिनती के मिनटों या गिनती के घंटों में बहुत लंबा अंतर काट देना और गंतव्य स्थान पर पहुंच जाना। विमान की यह यात्रा सालों से लोग आनंद ले रहे हैं, मजा ले रहे हैं। लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में जो विमान उद्योग है, यानी एविएशन इंडस्ट्री, उसका जो विकास है, वह बता रहा है कि आने वाले समय में सबसे ज्यादा तेजी से कोई इंडस्ट्री विकसित होगी, यानी परिवहन के अंदर अगर लोग सबसे पहले उपयोग करेंगे तो वह विमान का करेंगे, यानी वाया एयर, बाय एयर सफर करना पसंद करेंगे।

यह तो डेटा है, शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है। लेकिन हम आज विमान की यात्रा की बात क्यों कर रहे हैं? दुनिया में अब तक ऐसी कई फ्लाइट्स, यानी विमान की यात्रा के बाद ऐसे किस्से बने जिन्होंने पूरी दुनिया को अचंभे में डाल दिया। ऐसे जिस किस्से की बात करनी है, उसके साथ-साथ वैज्ञानिक एक नया शोध कर रहे हैं, उसकी भी बात करनी है, जिससे अचानक हवा से गायब हो जाने वाली फ्लाइट के बारे में बड़ी जानकारी मिल सके। दुनिया में जब भी आप विमान यात्रा का या विमान उद्योग का इतिहास देखोगे तो पता चलता है कि ऐसे कई किस्से हैं जहां अचानक यात्रियों से भरा विमान हवा में ही गायब हो गया हो या फिर संपर्क विहीन हो जाए और फिर उसका कोई पता न चले।

आप जानते होंगे कि जब एक विमान एक एयरपोर्ट से टेकऑफ करता है और फिर जिस एयरपोर्ट पर उसकी लैंडिंग होती है, उन दोनों के बीच वह लगातार रडार में रहता है और अलग-अलग जो एजेंसी हैं, वे रडार पर उस पर वॉच रखती हैं। हर फ्लाइट का एक पहले से दिया गया नंबर होता है और पूरी दुनिया में जितने विमान निकलते हैं, वे सभी इसी तरह निकलते हैं।

लेकिन एक फ्लाइट ऐसी भी थी जो अपने एयरपोर्ट से उड़ी, उसके बाद अचानक हवा में गायब हो गई, और गायब होने के बाद वह फ्लाइट अचानक एक एयरपोर्ट पर लैंड भी करती है। लेकिन विमान जब उड़ा और जब एयरपोर्ट पर उतरा, उन दोनों के बीच 35 साल का अंतर था। जी हाँ, एक विमान लगातार 35-35 साल तक हवा में चक्कर लगाए, क्या ऐसा संभव है? कौन सी थी वह फ्लाइट? किस देश में वह घटना हुई?

उसके अंदर जो यात्री थे, उनके साथ क्या हुआ? 35 साल तक उन्होंने क्या किया? और आखिर जब वह फ्लाइट लैंड हुई तो उसके अंदर कैसे दृश्य देखने को मिले? इन सभी पर आज बात करनी है। नमस्कार, मैं हूँ मुफद्दल कपासी। आप देख रहे हैं ‘एडिटर्स पॉइंट विथ एम के’। बात जर्मनी की है। जर्मनी में उस समय सेंटियागो एयरलाइंस अस्तित्व में थी। साल था 1954।

जी हाँ, 1954 का वह साल, सितंबर का महीना, चौथी तारीख। इस समय सेंटियागो एयरलाइंस की एक फ्लाइट उड़ान भरने वाली थी। रोजमर्रा के मुताबिक जो-जो प्रोसेस होती है, फ्लाइट में जाते समय यात्रियों की चेकिंग होती है और फ्लाइट में बिठाया जाता है। जो क्रू मेंबर्स होते हैं, एयर होस्टेस होती हैं, वे उन्हें बिठाते हैं। फिर थोड़ी देर बाद वह फ्लाइट उड़ान भरती है। यह जो फ्लाइट थी, सेंटियागो एयरलाइंस की, उस फ्लाइट का नंबर था 513। यह जो फ्लाइट है, वह ब्राज़ील के एक एयरपोर्ट पर उतरने वाली थी।

जर्मनी से उड़े और ब्राज़ील पहुंचे। जब जर्मनी से वह उड़ान भर रही थी, 92 यात्री उस पर सवार थे। क्रू मेंबर सहित कुल आंकड़ा 92 लोगों का था। जर्मनी से यह फ्लाइट उड़ती है, एटीसी यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल उसे दिशानिर्देश देता है और वह फ्लाइट वहां से रवाना होती है। कुछ घंटों बाद उसका उतरना था ब्राज़ील के एक एयरपोर्ट पर और उस एयरपोर्ट पर वह फ्लाइट उतरे, इसके साथ ही उसकी सफर पूरी होती थी।

1954 के सितंबर महीने की चौथी तारीख को यह फ्लाइट उड़ी तो, लेकिन अचानक जब वह बीच में, नीचे समुद्र और ऊपर आकाश — आकाश से वह गुजर रही थी — और अचानक रडार से उसका सिग्नल कमजोर पड़ने लगा। थोड़ी देर में सिग्नल दिखना बंद हो गया।

रडार के जो अधिकारी थे, उन्होंने इस फ्लाइट को ट्रैक कर रहे थे, क्योंकि कोई भी फ्लाइट, कोई भी विमान एक स्थान से दूसरे स्थान जाए तो उसकी पूरी सफर रडार पर ट्रैक होती है। रडार से गायब होना, इसका मतलब फ्लाइट के साथ कोई अनहोनी घटना हुई है।

दुनिया में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं, हवाई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। बहुत करीब में हम सबको याद है कि कैसे अहमदाबाद में लंदन जाने वाली फ्लाइट अचानक, कुछ ही सेकंड में उड़ने के बाद ध्वस्त हो गई थी।

उसी तरह जर्मनी से सितंबर 1954 में निकली यह फ्लाइट अचानक मझधार में, यानी अटलांटिक समुद्र के ऊपर होती है, तभी वह फ्लाइट अचानक रडार से गायब हो जाती है। हड़कंप मच जाता है। कोशिश की जाती है कि उसका पता लगाया जाए। आखिर में जहां उसका बिंदु दिखा था, उसके आसपास के इलाकों में एक विस्तृत सर्च ऑपरेशन की घोषणा की जाती है, क्योंकि फिर काफी समय बीतता है लेकिन पर वह फ्लाइट का बिंदु फिर से नहीं दिखता, यानी रडार से वह फ्लाइट बिल्कुल गायब है।

अधिकारी सर्च ऑपरेशन शुरू करते हैं। 92 यात्री और क्रू मेंबर सहित वह विमान आखिर कहां गायब हो गया? उस वक्त, यानी 1954 में विज्ञान अभी इतना विकसित नहीं हुआ था, इतने संसाधन नहीं थे, इसलिए काफी समस्या हो रही थी। लेकिन एक बड़ी टुकड़ी इस फ्लाइट का जो आखिरी बिंदु जहां दिखा था, अटलांटिक महासागर के ऊपर, वहां खोजने के लिए जुट गई। इस अभियान में दुनियाभर के सर्वश्रेष्ठ सर्च टीम के मेंबर्स को बुलाया गया। उसमें जो समुद्र के अंदर गोताखोर, जिन्हें मरजीवा कहते हैं, डुबकी लगाकर भी खोज कर सकते हैं, ऐसे सदस्य भी शामिल थे।

कोशिश यह थी कि उस विमान के अवशेष मिलें तो इतना पता चले कि भाई, अटलांटिक महासागर के ऊपर उस विमान के साथ कोई दुर्घटना हुई है। लेकिन जो रेस्क्यू टीम थी, सर्च ऑपरेशन चला रही थी, उन्होंने घंटों तक, दिनों तक वहां सर्च ऑपरेशन चलाया, जहां आखिर में अटलांटिक महासागर में वह फ्लाइट स्पॉट हुई थी, लेकिन कोई भी अवशेष नहीं मिला। अंत में उस फ्लाइट, सेंटियागो एयरलाइंस की फ्लाइट 513 को रहस्यमय तरीके से गायब घोषित कर दिया गया। कई सालों तक उसकी चर्चाएं चलीं। कई सालों तक उस समय का विज्ञान जितना विकसित था, उससे जितने संसाधन थे, उन संसाधनों से कोशिश की गई कि उसे खोज लिया जाए, लेकिन वह फ्लाइट मिल नहीं सकी।

दुनियाभर में उसकी खूब चर्चा हुई। साल बीत गए। लोग, यानी फ्लाइट में जितने भी यात्री सवार थे, क्रू मेंबर सहित, उन सभी को उनके परिवारजनों ने मृत मान लिया और उनकी जो अंतिम विधि करनी होती है, वह भी कर ली। उसके बाद ब्राज़ील के एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल के टावर पर कुछ सालों बाद अचानक एक फ्लाइट दिखती है। अब यह जो फ्लाइट दिखती है, सभी एयर ट्रैफिक कंट्रोल के टावर होते हैं, वहां जो टेक्नीशियन होते हैं, वहां जो उसके ऑफिसर होते हैं, उनके पास एक लिस्ट होती है कि आज एयरपोर्ट पर कौन-कौन सी फ्लाइट कहां से कहां से आ रही है।

लेकिन यह जो फ्लाइट दिखाई दे रही थी, अचानक जो दिखी, उस फ्लाइट का किसी लिस्ट में नामोनिशान नहीं था। आखिर यह फ्लाइट कहां से आई? कोशिश की एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने उस विमान से, जो अचानक दिखा, संपर्क करने की, लेकिन उनके साथ कोई संपर्क हो नहीं सका। ट्रैफिक कंट्रोल के जो अधिकारी थे, वे अचानक स्तब्ध हो गए कि यह फ्लाइट कहां से आई है? कौन सी फ्लाइट है? क्यों कोई जवाब नहीं दे रहा?

लगातार कोशिश हुई। फ्लाइट बराबर उड़ान भर रही थी, ऐसा नहीं था कि हिल-डुल रही हो या कोई समस्या में हो, ऐसा नहीं लग रहा था। वह बराबर उतर रही थी, उस एयरपोर्ट के रनवे की तरफ आ रही थी, इसलिए ये लोग स्तब्ध हो गए कि जवाब क्यों कोई नहीं दे रहा। अंत में इमरजेंसी कॉल जारी करके उस फ्लाइट के लिए रनवे खाली करवाया गया कि भाई, जो भी हो, यह फ्लाइट उतर रही है तो रनवे पर तो हादसा न हो, इसलिए रनवे खाली करवाया गया ताकि वह फ्लाइट उतर सके। और वह जो फ्लाइट उतरी, जब रनवे पर उतरती है और अधिकारी उस फ्लाइट को देखते हैं तो सभी चौंक जाते हैं। क्यों? क्योंकि वह फ्लाइट थी सेंटियागो एयरलाइंस की 513 फ्लाइट। और वह साल था 1989 का।

जी हाँ, आपने सही सुना, वह साल था 1989 का। यानी जो घटना हुई थी, सेंटियागो एयरलाइंस की 513 फ्लाइट की उड़ान की, उसके 35 साल बाद कोई भी मान न सके ऐसी इस घटना में दरअसल सेंटियागो एयरलाइंस की 513 फ्लाइट 35 साल बाद ब्राज़ील के एक एयरपोर्ट पर उतरी। क्या था सत्य? अधिकारी वहां पहुंचे, उस फ्लाइट के पास कि आखिर यह फ्लाइट 35 साल तक कहां थी? क्या वह हवा में ही चक्कर मारती थी? और अगर हवा में चक्कर मारती थी तो ईंधन कहां से आया? और कोई फ्लाइट 35 साल तक लगातार उड़ सकती है क्या?

वैज्ञानिक रूप से तो यह संभव नहीं है। इसलिए जो भी हो, गोचर-अगोचर विश्व, लेकिन इन अधिकारियों के सामने यह फ्लाइट आकर रनवे पर खड़ी थी, इसलिए उन्होंने कोशिश की कि फ्लाइट के जो पायलट हैं, उनसे कहें कि भाई, आप बाहर आओ। लेकिन एटीसी के उस मैसेज का भी फ्लाइट से कोई जवाब नहीं आया, उस विमान से कोई जवाब नहीं आया। अंत में एक विशेष टीम बुलाई गई, जिससे उस फ्लाइट का दरवाजा बाहर से खोला गया और अंदर वह जो सर्च टीम पहुंची, और अंदर जो दृश्य देखा, उसे देखकर पूरी टीम चौंक गई। क्योंकि फ्लाइट के अंदर सभी सीटों पर यात्री बैठे हुए थे और उनके जो बेल्ट होते हैं, सीट बेल्ट, वह भी ऐसे ही बंधे हुए थे। अंदर की स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन जितने भी यात्री सीट पर बैठे थे, वे सभी हड्डी-पिंजर बन गए थे। जितने भी अधिकारी वहां मौजूद थे, वे यह दृश्य देखकर लगभग अर्ध-बेहोश जैसी अवस्था में हो गए कि 35 साल बाद गायब हुई एक फ्लाइट अचानक ब्राज़ील के एयरपोर्ट पर उतरती है, किसी भी सिग्नल, किसी भी संकेत, किसी भी मैसेज दिए बिना। और जब वह फ्लाइट उतरती है तो अंदर सभी लोग हड्डी-पिंजर की हालत में हैं।

इससे अब जो अधिकारी हैं, वे कॉकपिट की तरफ गए। कॉकपिट यानी जहां से विमान का संचालन होता है, उड़ान जहां से भरी जाती है, पायलट जहां से उस विमान को चलाता है। उस कॉकपिट की तरफ गए, और अब जो देखा, वह वास्तव में उन्हें बेहोश कर दे, ऐसे चौंकाने वाला था। पायलट की सीट पर भी दोनों पायलट मौजूद तो थे, लेकिन हड्डी-पिंजर की स्थिति में। यह एक ऐसी घटना बन गई कि वहां मौजूद कोई मानने को तैयार नहीं था। क्या 35 साल तक हवा में उड़ी फ्लाइट इस तरह ब्राज़ील के एयरपोर्ट पर उतरती है? क्योंकि सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जो फ्लाइट 1954 में उड़ान भरी, वह सेंटियागो एयरलाइंस 1956 में, यानी उड़ान के दो साल बाद तो एयरलाइंस ही बंद हो गई।

वह कंपनी ही बंद हो गई जो विमान का संचालन करती थी। इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह हुआ कि 35 साल तक सेंटियागो एयरलाइंस 513 कहां गायब थी? और उसके अंदर जो यात्री थे, क्रू मेंबर्स थे, उनके साथ आखिर ऐसा क्या हुआ कि हड्डी-पिंजर हो गए? और उसके बाद इस फ्लाइट ने कैसे एयरपोर्ट पर सलामत उतरना किया? इस घटना के बाद ऐसा कहा जाता है कि ब्राज़ील सरकार को जब यह बात पहुंचाई गई, तुरंत उन्होंने पूरे एयरपोर्ट को घेराबंदी करवा दिया और उस फ्लाइट को रहस्यमय तरीके से वहां से ले जाया गया और उसका अनुसंधान शुरू किया।

लेकिन उस पूरे समाचार को ब्राज़ील सरकार ने टॉप सीक्रेट घोषित करके किसी तक न पहुंचे, ऐसी व्यवस्था की और घोषणा की गई कि इस घटना को अब से टॉप सीक्रेट माना जाएगा। क्योंकि अगर लोगों को ऐसी अजीब घटना की जानकारी मिले तो जितने भी यात्री हैं, दूसरे यानी जो हवाई यात्रा करने वाले हैं, उनके अंदर एक भय का माहौल पैदा हो, और वह भय का माहौल न पैदा हो, इसलिए ब्राज़ील की सरकार ने यह निर्णय लिया और वहां वह चैप्टर बंद हो गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में इस तरह एक फ्लाइट गायब हुई?

अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ान भरते हुए और फिर 35 साल तक गायब रही और 35 साल बाद 1989 के अक्टूबर महीने की 12 तारीख को ब्राज़ील के एयरपोर्ट पर वह फ्लाइट उतरी? यह जो रिपोर्ट है, अंत में लीक तो हो ही गई। एक समाचार माध्यम ने उसे छापा कि भाई, इस तरह की घटना हुई, ऐसा हुआ, ऐसा हुआ — जितनी भी बातें मैंने बताई, वे सभी उस समाचार पत्र ने छापीं और उससे फिर एक के बाद एक समाचार पत्रों में वह फैलने लगी। ‘वर्ल्ड वीकली टैब्लॉइड’, जो बहुत ही उस वक्त का जाना-माना अखबार था, उसने भी यही समाचार छापा और इसलिए पूरी दुनिया में चर्चा फैल गई कि कोई फ्लाइट के साथ, कोई विमान के साथ हवा में ऐसा तो क्या हो सकता है?

क्या यह कोई रहस्यमय शक्ति का काम है? या फिर किसी एलियन का काम है? या फिर कोई ऐसी घटना घटी है जो अगोचर विश्व की हो सकती है? क्या कोई टाइम ट्रैवल जैसी घटनाएं हुईं? ऐसे कई सवाल हुए। उस समय इस पर डिस्कशन, डिबेट हुई, काफी कुछ हुआ, कई कार्यक्रम हुए, लेकिन कोई उस रहस्य का पता नहीं लगा सका। लेकिन जब हम इस घटना को ध्यान से देखते हैं तो ऐसा समझ में आता है कि जिस अखबार ने वह घटना सबसे पहले छापी और उसने ऐसा कहा कि भाई, सरकार ने टॉप सीक्रेट घोषित करके जो घटना हुई है, उसे बाहर नहीं आने दिया, उस अखबार के उस पत्रकार का ही वह काम था कि उसने किसी गलत कहानी को इस तरह काल्पनिक रूप से प्रस्तुत करके दूसरे समाचार माध्यमों को भी भरमा दिया।

दूसरे समाचार माध्यम भी शायद वह समझ नहीं सके और वह बात वायुवेग से फैल गई। आम तौर पर इस प्रकार की घटनाएं हों तो वे वायुवेग से फैलती हैं। यानी वास्तव में ब्राज़ील के… सवाल यह उठा कि ब्राज़ील के एयरपोर्ट पर 35 साल बाद 1989 की 12 अक्टूबर को कोई प्लेन लैंड ही नहीं हुआ था। क्या मात्र एक अखबार की शरारत के कारण इस प्रकार की घटना होने की बात लोगों तक पहुंची? आज भी यह बात एक रहस्य निश्चित रूप से है, लेकिन उंगली उठाई जा रही है सबसे पहला रिपोर्ट जिसने छापा, उस अखबार पर कि उसने शायद इसमें कोई गिमिक या शरारत की, जिसके कारण यह जो घटना है, इस तरह बहती हो गई।

अब इन सबके बीच वैज्ञानिक अभी शोध कर रहे हैं कि जो फ्लाइट गायब हो जाती है, क्योंकि यह एकमात्र फ्लाइट नहीं है। ऐसी ही एक दूसरी फ्लाइट है, टेलीग्राम पर या YouTube पर आप टाइप करोगे ‘मिसिंग फ्लाइट 513’ या ‘मिसिंग फ्लाइट 914’, तो इस पर भी आपको कई कहानियां मिलेंगी। आज मिसिंग फ्लाइट 914 है, वह 1955 में उड़ान भरी थी और उसके लिए भी ऐसा कहा जाता है कि वह जो फ्लाइट है, वह 37 साल बाद 1992 में एक एयरपोर्ट पर लैंड हुई और वहां भी कहानी जर्मनी की पहली फ्लाइट जैसी ही थी कि अचानक वह सालों बाद दिखे और फिर लैंड हुई और उसके अंदर सब कुछ रहस्यमय था।

वैज्ञानिक अभी कोशिश यह कर रहे हैं कि दुनिया में ऐसी कई फ्लाइट हैं जो महासागर के ऊपर से गुजर रही होती हैं, खासकर हम सभी ने सुना होगा, बरमूडा ट्रायंगल के ऊपर कई फ्लाइट्स मिस होने की बातें होती हैं। इसी प्रकार की जो मिस फ्लाइट्स हैं, यानी गायब हुई फ्लाइट्स हैं, उनके लिए एक विशेष शोध कर रहे हैं कि विमान गायब हो जाए, फिर भी वह कहां गया, आखिर में उसका पता लगाया जा सके, उसकी कोशिश कर रहे हैं। और दावा ऐसा किया जा रहा है कि वैज्ञानिक बहुत करीब हैं ऐसे शोध करने के, जिससे यह पता चल जाए कि जब भी कोई फ्लाइट हवा से अचानक गायब हो जाती है तो अंत में उसके साथ क्या हुआ, उसका पता लगाया जा सके।

आप भी क्या मानते हो सेंटियागो फ्लाइट 513 के गायब होने की इस कहानी पर? निश्चित रूप से हमें बताना। और इसी प्रकार के दूसरे कई इंटरेस्टिंग किस्से हैं जिन पर कई शोध हुए हैं, लेकिन अभी उनका रहस्य वैसे का वैसा है, वह भी बाहर लाने की कोशिशें हो रही हैं। इन सबके बीच कई बार ऐसे दावे किए जाते हैं कि कुछ तो ऐसा गूढ़ है, अगोचर है जिसके तक मानवजाति अभी तक पहुंच नहीं सकी है। और अचानक जो फ्लाइट्स गायब हो जाती हैं, जिनका एक भी अवशेष नहीं मिलता, महीनों तक दुनिया की श्रेष्ठ रेस्क्यू और सर्च टीम उसकी जांच करती है, खोज करती है, लेकिन कुछ नहीं मिलता, तो फिर आखिर वे फ्लाइट्स कहां गायब हो जाती हैं?

यह सवाल पहले सवाल को और बलवत्तर बनाता है कि क्या हमारे बीच कुछ ऐसा गूढ़ है, अगोचर है जिस तक मानवजाति की पहुंच ही नहीं है? उसके लिए हमें अभी कुछ और शोध करने पड़ेंगे, क्योंकि विज्ञान ही आखिरकार हमें वहां तक पहुंचा सकेगा। — *नोट*: सेंटियागो फ्लाइट 513 की यह कहानी असल में एक शहरी किंवदंती है।

इसे सबसे पहले 1985 में ‘वीकली वर्ल्ड न्यूज़’ नामक टैब्लॉइड ने छापा था, जो काल्पनिक खबरें छापने के लिए जाना जाता था। 1954 में ‘सेंटियागो एयरलाइंस’ नाम की कोई एयरलाइन मौजूद नहीं थी। इसलिए यह घटना हकीकत नहीं, सिर्फ अफवाह है।

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