इंदिरा गांधी के एक योग गुरु हुआ करते थे जो बंद कमरे में उन्हें योग का पाठ सिखाते थे। जिसे इंदिरा के निजी कमरे में कभी भी आने जाने की छूट थी। उसे लोग राजपूतिन कहते थे। यह वो शख्स था जिसके शरीर से इंदिरा गांधी आकर्षित हो गई थी।
यह उन्होंने खुद कहा है। आगे बताएंगे कि कहां कहा है। वो थे बिहार की मधुबनी में जन्मे धीरेंद्र ब्रह्मचारी। सत्ता के शिखर पर सबसे मजबूत व्यक्ति था उस दौर में। धीरेंद्र ब्रह्मचारी के पास कोई सरकारी पद नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हर काम धीरेंद्र ब्रह्मचारी की सलाह पर किया करती थी।
ब्रह्मचारी इतना पावरफुल था कि एक बार उनकी बात नहीं मानने पर आई के गुजराल का मंत्रालय तक छीन गया था। आप अंदाजा लगाइए कि एक मंत्री का मंत्रालय छीन जाए एक युग गुरु के कहने पर। धीरेंद्र ब्रह्मचारी निजी गनमैन लेकर चलते थे। उन पर अवैध गन फैक्ट्री से लेकर विमान तस्करी तक के आरोप लगे।
लेकिन उस दौर में जो पीएमओ हुआ करता था उसके आशीर्वाद से एक मुकदमा तक नहीं हुआ। योग गुरु के लाइफस्ट पर कई सवाल उठते रहे। संजय गांधी की मौत से लिंग जुड़ा। खुद ब्रह्मचारी की भी रहस्यमई तरीके से हुई। यह सब हम आगे डिस्कस करेंगे। धीरेंद्र ब्रह्मचारी की एंट्री लुटियंस दिल्ली में तब हुई जब योग को आज की तरह ग्लैमरस नहीं माना जाता था। आज के दौर में तो ग्लैमरस है। बहुत बढ़ावा भी मिला है।
शुरुआत हुई भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से। नेहरू को योग सिखाते-सखाते ब्रह्मचारी ने उस घर की नब्ज़ पकड़ ली। नेहरू से करीबी के चलते धीरेंद्र ब्रह्मचारी साल 1958 में उनकी बेटी इंदिरा गांधी के संपर्क में आए और 60का दशक आते-आते यानी कि बहुत कम समय में दोनों इतने करीब आ गए कि आए दिन अखबारों में उनसे जुड़ी खबरें छपने लगी। साल 1964 की बात है।
पंडित नेहरू का देहांत हुआ था। तब धीरेंद्र ब्रह्मचारी की इंदिरा के घर में आवाजाही बढ़ गई। ब्रह्मचारी इंदिरा गांधी को हर रोज अकेले में 1 घंटे योग सिखाने लगे।
इसी दौरान इंदिरा गांधी ने अपनी दोस्त और जानीमानी अमेरिकी फोटोग्राफर डोरोथी नॉर्मन को एक चिट्ठी लिखी थी और इस चिट्ठी ने एक गॉसिप को जन्म दिया। इंदिरा ने लिखा कि मैं अब हर सुबह जल्दी उठ जाती हूं और एक योगी मुझे योग सिखाते हैं।
उनका शरीर इतना सुंदर है कि कोई भी उनकी तरफ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता। 17 अप्रैल 1958 को जब चिट्ठी सार्वजनिक हुई तो तमाम गसिप मैगजीन में इंदिरा और धीरेंद्र ब्रह्मचारी के रिश्तों पर बातें होने लगी। हालांकि दोनों ने कभी सार्वजनिक तौर पर इस पर कुछ नहीं कहा। लेखिका भवदीप कांग ने अपनी किताब गुरुज स्टोरीज ऑफ इंडियास लीडिंग बाबाज़ में वरिष्ठ पत्रकार खुशवंत सिंह के हवाले से लिखा कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी लंबे-लतंबे थे। सुंदर दिखते थे।
वो हर सुबह बंद दरवाजे के पीछे इंदिरा गांधी के साथ एक घंटा बिताया करते थे। हो सकता है उनकी इस युग की शिक्षा का अंत कामसूत्र की शिक्षा के साथ हुआ हो।
कांग स्पष्ट करती हैं कि ऐसा खुशवंत सिंह ने अनुमान लगाया था। वो खुद इस बात की पुष्टि नहीं करती जो लेखिका है और ना ही हम कर रहे हैं। जब इंदिरा गांधी सत्ता में आई तो वे अकेलेपन और राजनीतिक असुरक्षा से घिरी थी।
ब्रह्मचारी ने इसका फायदा उठाया। उन्होंने योग और मानसिक शांति के नाम पर इंदिरा गांधी के दिलो दिमाग पर कब्जा कर लिया। देखते ही देखते वह योग शिक्षक से प्रधानमंत्री के सबसे बड़े सलाहकार बन गए। 70 का दशक आते-आते धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा गांधी के सबसे खास फ्रेंड, फिलॉसफर, गाइड बन गए।
इस दौर में उन्होंने इंदिरा के बेटे संजय गांधी को भी लगभग अपनी मुट्ठी में कर लिया और एक तरीके से उनके परिवार के सदस्य बन गए। कैथरीन फ्रैंक की एक किताब है और उस किताब में वो लिखती हैं कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी उस दौर में इकलौते ऐसे पुरुष थे जो इंदिरा गांधी के कमरे में अकेले जा सकते थे। उन्हें कोई रोक-टोक नहीं थी।
इतिहासकार ने अपनी किताब में साफ लिखा कि ब्रह्मचारी का दबदबा ऐसा था कि लोग उन्हें राष्ट्रपुतिन कहने लगे थे। 6 फीट 1 इंच लंबे धीरेंद्र ब्रह्मचारी को कभी भी गर्म कपड़ों में नहीं देखा गया। किसी जैकेट, स्वेटर, कोट में नहीं देखा गया। वो हमेशा अपने जिस्म पर एक पतला सा कपड़ा लपेटे रहते थे।
यहां तक कि रूस की कड़ाके की सर्दी में उसी कपड़े में दिखाई देते थे। उनके हाथ में हमेशा सफेद चमड़े का एक बैग रहता था जो किसी लेडीज पर्स की तरह दिखाई देता था। वरिष्ठ पत्रकार दिलीप बॉब 30 नवंबर 1980 को इंडिया टुडे के अंक में लिखते हैं कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी के कई चेहरे हैं। उनके पास भले ही कोई सरकारी पद नहीं लेकिन असीम शक्ति है।
वो ऐसे गुरु हैं जिनकी सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंच है। उनके पास अपने गनमैन थे जो सरकारी सुरक्षा के समानांतर चलते थे। अब बात करते हैं इंद्र कुमार गुजराल वाले किस्से की।
पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने अपनी आत्मकथा मैटर्स ऑफ डिस्कशन में धीरेंद्र ब्रह्मचारी को एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में डिस्क्राइब किया है जो तत्कालीन सरकार को उंगलियों पर नचाता था।
पूर्व पीएम ने अपनी किताब में बताया कि किस तरीके से उस दौर में एक साधारण योग गुरु सरकार को अपनी उंगलियों पर नचाया करता था। गुजराल लिखते हैं कि जब मैं निर्माण और आवास राज्य मंत्री था तब धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने मुझ पर नई दिल्ली के पौश गोल्ड डाकखाना के करीब अपने आश्रम के लिए एक सरकारी जमीन देने की मांग की। लेकिन मैं वो जमीन देने के लिए कतई तैयार नहीं था। मैं नहीं देना चाहता था।
लिहाजा मैंने फाइल रोक दी। एक शाम धीरेंद्र ब्रह्मचारी का मेरे पास फोन आया और उन्होंने मुझे धमकाते हुए कहा कि अगर मेरी बात नहीं मानी तो तुम्हें मैं डिमोट करवा दूंगा। गुजराल लिखते हैं कि एक हफ्ते बाद मंत्रिमंडल में फिर बदल हुआ और मेरा डिमोशन कर दिया गया।
मेरे ऊपर उमाशंकर दीक्षित को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। अगले दिन जब मैंने इंदिरा गांधी से इसकी शिकायत की तो वो बिल्कुल चुप रही। एक शब्द नहीं बोली
यह जलवा था धीरेंद्र ब्रह्मचारी का। यह कैसा योग था जिसमें शांति की बजाय सत्ता की भूख थी। ब्रह्मचारी के पास अपना आश्रम नहीं अपना साम्राज्य था। वो धर्म की आड़ में धंधा चलाने वाला पहला बड़ा कॉर्पोरेट गुरु था। योग गुरु का काम होता है कि मोह माया त्याग दे।
लेकिन ब्रह्मचारी मोह माया के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। धीरेंद्र पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगाए गए आपातकाल के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में एक विमान खरीदने और सीमा शुल्क का भुगतान किए बिना देश में इसकी तस्करी करने का आरोप लगा।
हालांकि उन पर कभी मुकदमा नहीं चलाया गया। उनके खिलाफ दर्जनों अन्य आपराधिक मामले दर्ज थे। जम्मू में उनके शिवागंजन फैक्ट्री को लेकर भारी विवाद हुआ। उन पर अपने कारखाने के लिए स्पेन से रूप से के पुरजों का आयात करने का आरोप लगाया गया।
उनके पास केवल स्थानीय सामग्री से बंदूक बनाने का लाइसेंस था। स्पेन से बंदूकों के पुरजे मंगाकर यहां असेंबल किए जाते थे। कश्मीर में उन्होंने ऐसी-ऐसी जमीनों पर कब्जा किया जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। और यह सब हो रहा था उस दौर में पीएमओ के आशीर्वाद से। 1980 के दशक के दौरान ब्रह्मचारी ने हरियाणा में सिलोखेड़ा गांव के पास गुरुग्राम में अपर्णा आश्रम सोसाइटी का निर्माण किया।
वातानुकूलित आश्रम में एक हवाई पट्टी हैंगर एक टीवी स्टूडियो शामिल था। इंदिरा गांधी सप्ताह में एक बार यहां आती थी। 1983 में धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने अरावली रेंज के पास 5000 एकड़ भूमि का अधिग्रह करने के अनुरोध के साथ हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल को पत्र लिखा जिसमें योग अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र, मनोरंजन केंद्र, हेलीपैड जैसी अन्य सुविधाओं सहित dजनी लैंड को प्रतिद्वंदी बनाने के लिए सुविधाओं का निर्माण करने के लिए कुल 7000 एकड़ तक का अनुरोध किया गया।
विमान हैंगर में अभी भी ब्रह्मचारी से संबंधित दो खराब बर्बाद विमान वहां पर मौजूद हैं। धीरेंद्र ब्रह्मचारी को लेकर कहा जाता है कि वो योग के अलावा तंत्र भी करते थे। वो इंदिरा गांधी को सलाह देते थे और उनके कहने पर इंदिरा कोई कदम उठाती थी।
अगर वह मना कर देते थे तो नहीं उठाती थी। वो इंदिरा गांधी के घर से लेकर दफ्तर तक कभी भी और किसी भी समय आ जा सकते थे।
कुछ लोग उस समय कहते थे कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने इंदिरा गांधी को अपने वश में कर रखा है। पीठ पीछे इंदिरा गांधी और धीरेंद्र ब्रह्मचारी को लेकर तमाम अफवाहएं भी उड़ती थी। जैसे-जैसे इंदिरा गांधी सत्ता के शिखर पर पहुंचती गई।
ब्रह्मचारी [संगीत] से उनकी करीबी बढ़ती गई। 25 जून 1975 को जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की तब धीरेंद्र ब्रह्मचारी लगभग 24 घंटे इंदिरा गांधी के इर्द-गिर्द नजर आने लगे। विपुल जयकर इंदिरा गांधी की जीवनी में लिखते हैं कि उस दौर में धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा गांधी से कहते थे कि किस तरीके से उनके विरोधी उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए तंत्र मंत्र का सहारा ले रहे हैं। फिर खुद धीरेंद्र ब्रह्मचारी ही इसके कार्ड भी बताते थे और बदले में यज्ञ, हवन और तांत्रिक क्रियाएं करते थे। बकल पुपुल जैकर इमरजेंसी के दौर में इंदिरा गांधी हर छोटे बड़े मुद्दे पर धीरेंद्र ब्रह्मचारी की सलाह लेती थी और उस पर पूरी तरह अमल भी करती थी। यह नहीं सोचती थी कि इसका अंजाम क्या होगा।
इंदिरा से गरीबी के चलते धीरेंद्र ब्रह्मचारी का राजनीतिक रसूख इतना बढ़ गया था कि वह बिना रोक-टोक धड़ल्ले से पीएमओ में आने जाने लगे। पहले वह उनके कमरे में जा सकते थे, लेकिन अब वह पीएमओ में बिना रोक-टोक जाते थे। ब्रह्मचारी अक्सर नीली Toyota कार से चला करते थे। लेकिन उनके पास कई प्राइवेट जेट थे जिसमें चार सीटर सेसना 19 सीटर डॉर्नियर विमान शामिल थे। धीरेंद्र ब्रह्मचारी ट्रेन पायलट थे और कई बार खुद अपना विमान उड़ाया करते थे।
धीरेंद्र ब्रह्मचारी का सबसे गहरा संबंध था इंदिरा के छोटे बेटे संजय गांधी से। उन्हें भी मुट्ठी में कर रखा था। संजय गांधी को हवा में कलाबाजियां दिखाने का शौक था और इस शौक को पूरा करने के लिए विमान कौन देता था?
धीरेंद्र ब्रह्मचारी वो मनहूस दिन था 23 जून 1980 संजय गांधी जिस लाल रंग के पिट्स S2 विमान को उड़ाते हुए क्रैश हुए वो असल में ब्रह्मचारी के अपर्णा आश्रम के नाम पर ही इंपोर्ट किया गया था। कहा जाता है कि उस विमान के कागजात और उसके फिटनेस को लेकर कई सवाल थे जिन्हें ब्रह्मचारी के रसूख के चलते दबा दिया गया। संजय की ने इंदिरा को तोड़ दिया। लेकिन ब्रह्मचारी का रसूख बना रहा।
विमान हादसे में संजय गांधी की के बाद उन्होंने कहा था कि संजय गांधी को इतनी ज्यादा कलाबाजियां नहीं दिखानी चाहिए थी। रामचंद्र गुवाहा ने अपनी किताब इंडिया आफ्टर गांधी में लिखा कि संजय गांधी के सहारे वो गांधी परिवार के योग गुरु के रूप में लंबे समय तक बने रहे। संजय गांधी की तरह ही धीरेंद्र भी विमान उड़ाने के शौकीन थे।
बताया जाता है कि संजय गांधी की मौत के बाद धीरेंद्र ब्रह्मचारी का रसूख भी कम होने लगा था। 1984 में जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई उसके बाद राजीव गांधी ने ब्रह्मचारी को सत्ता से दूर कर दिया। जिस रोज इंदिरा की मृत्यु हुई ब्रह्मचारी को उस चबूतरे से भी उतार दिया था जिस पर इंदिरा का रखा हुआ था। राजपूतिन का जादू अब खत्म हो रहा था। उन पर मुकदमों की झड़ी लग गई और अंत अंत भी वैसा ही नाटक था जैसा उनका जीवन। 1994 में धीरेंद्र ब्रह्मचारी का अपना निजी विमान जम्मू के पास हो गया।
जिस आसमान में वह बेताज बादशाह बनकर उड़ते थे, उसी ने उनकी जान ले ली। उनके साथ ही दफन हो गए वह अनगिनत राज जो अगर बाहर आते, तो कांग्रेस के कई बड़े चेहरों को बेनकाब कर देते। धीरेंद्र ब्रह्मचारी महज एक व्यक्ति नहीं थे। वो प्रतीक थे उस सिस्टम का जहां सत्ता भक्ति में अंधी हो जाती है।
आज जब हम कांग्रेस के पतन की बात करते हैं तो हमें याद रखना चाहिए कि इस पार्टी की जड़ों में ऐसे ही अदृश्य गुरुओं का प्रभाव रहा है। ऐसे ही अदृश्य लोगों का प्रभाव रहा है जिन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया। एक योग गुरु जिसके हाथ में बंदूकों की फैक्ट्री हो, जुबान पर सत्ता का अहंकार तो देश का भला कैसे कर सकता था? यह कहानी है उस दौर की जिसे इतिहास के पन्नों में दबाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन सच कभी नहीं छुपता।
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