राजनीति के मैदान में आपने राहुल गांधी को अलग-अलग रूप में जरूर देखा होगा। लेकिन इस बार राहुल गांधी का जो अवतार सामने आया है, उसने सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक हलचल मचा दी है।
यह नजारा है ग्रेट निकोबार के गहरे समंदर का जहां हाथ में झंडा नहीं बल्कि स्कूबा गियर पहने राहुल गांधी नीले समंदर की गहराइयों को नाप रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ एक एडवेंचर ट्रिप नहीं है। यह है सियासी गोता भी और पर्यावरण को बचाने की एक चेतावनी भी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का अंडमान और निकोबार दौरा विशेष चर्चा में है।

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर उन्होंने अपनी स्कूबा ड्राइविंग की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। रंग बिरंगे केरोल रीफ और समुद्री जीवों के बीच तैरते राहुल गांधी किसी मंझे हुए प्रोफेशनल की तरह नजर आ रहे हैं और इसके पीछे एक खास वजह है। बहुत कम लोग जानते हैं कि राहुल गांधी सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि फ्लोरिडा से सर्टिफाइड स्कूबा ड्राइविंगइंस्ट्रक्टर भी रह चुके हैं।


राहुल गांधी ने राजनीति में कदम रखने से बहुत पहले ही समुंदर की गहराइयों से दोस्ती कर ली थी। इतना ही नहीं राहुल एकीडो में ब्लैक बेल्ट हैं और लाइसेंस प्राप्त पायलट भी हैं। लेकिन इन खूबसूरत लहरों के नीचे एक बड़ा विवाद आकार ले रहा है। केंद्र सरकार यहां एक भारीभरकम बुनियादी ढांचा तैयार करने की योजना बना रही है। लेकिन राहुल गांधी ने केंद्र के प्रोजेक्टर पर ही सवाल उठा दिए हैं।

अब आपको समझाते हैं कि यह प्रोजेक्ट है क्या? दरअसल सरकार की तरफ से यहां इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांस शिपमेंट टर्मिनल बनाया गया है। जिसका [संगीत] मकसद व्यापार को वैश्विक गति देना है। दूसरा यहां बेहतर कनेक्टिविटी के लिए ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी निर्माण होना है। इसके अलावा सामरिक सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए पावर प्लांट और डिफेंस बेस भी तैयार किया जाना है।

सरकार का तर्क है कि भारत की सुरक्षा और हिंद महासागर में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए यह प्रोजेक्ट देश की जरूरत है। लेकिन राहुल गांधी ने समुंदर से बाहर आते ही इस पर कड़े सवाल दाग दिए हैं। राहुल गांधी का आरोप है कि विकास के इस बड़े नाम के पीछे प्रकृति का विनाश छिपा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रोजेक्ट ग्रेट टिकोबार को संवेदनशील इकोसिस्टम को हमेशा के लिए तबाह कर देगा। राहुल ने कहा कि करोड़ों साल पुरानी केरल रीफ और दुर्लभ समुद्री जीप इस कंस्ट्रक्शन की भेंट चढ़ जाएंगे।

सिर्फ पर्यावरण ही नहीं राहुल ने यहां रहने वाले आदिवासियों के हक की भी बात [संगीत] कही। लाखों पेड़ों की कटाई और बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से यहां के मूल निवासियों की संस्कृति और उनके आशियाने पर खतरा मंडरा रहा है। राहुल का स्पष्ट संदेशहै हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए जो हमारे जंगलों और समुंदरों की कीमत पर हो। जैसे ही राहुल का यह वीडियो वायरल हुआ, सियासी पारा चढ़ गया।
ग्रेट निकोबार का यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक है और अब यह विकास बनाम पर्यावरण की लड़ाई का नया केंद्र बन गया है।