अहमदाबाद प्लेन दुर्घटना, आज भी इस दुर्घटना को याद करें तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाए। एक साथ 241 लोगों की । कई ऐसे सवाल खड़े हुए कि क्या पायलट द्वारा इन यात्रियों की जान बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया होगा?
लेकिन अब इसी दुर्घटना को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है और जो लैब असिस्टेंट हैं उन्हीं के द्वारा इस पूरे मामले में खुलासा किया गया है। क्या है पूरा मामला, उसकी बात इस वीडियो में। । एक साल पहले अहमदाबाद प्लेन क्रैश की दुर्घटना सामने आई और अब एक रिपोर्ट सामने आई है पायलट को लेकर।
इस विषय को लेकर बात करें तो अहमदाबाद प्लेन क्रैश के मामले में पायलट सुमित सभरवाल ने आखिरी घड़ी तक दुर्घटना रोकने के प्रयास किए थे। एक साल पहले अहमदाबाद में हुई भयानक विमान दुर्घटना के बारे में दूसरी एक रोचक जानकारी सामने आई है। इस दुर्घटना की प्राथमिक रिपोर्ट में एयरक्राफ्ट की टेक्निकल खराबी या पायलट की गलती को लेकर भी आशंका व्यक्त की गई थी। हालांकि अब दूसरा एक ऐसा रिपोर्ट सामने आया है जो इस दुर्घटना की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के शवगृह में पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के शव को सबसे पहले लैब असिस्टेंट ने देखा था और इस प्रत्यक्षदर्शी की गवाही कैप्टन सभरवाल की कर्तव्य निष्ठा की अनोखी कहानी बयां करती है। अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल की पैथोलॉजी लैब में असिस्टेंट के तौर पर काम करने वाले 32 वर्षीय रोमिन वोहरा ने इस पूरे मामले में जो दृश्य देखे थे उसका वर्णन किया है। इस दुर्घटना में उन्होंने अपने परिवार के तीन सदस्यों को भी खो दिया है।
वे परिवार की पहचान करने के लिए जब शवगृह में गए थे तब उन्हें लाशों के ढेर देखने को मिले थे और उनके अनुसार इस शवगृह में एक कोने में एयर इंडिया की फ्लाइट 171 के पायलट इन कमांड कैप्टन सुमित सभरवाल का शव भी अलग रखा गया था।
कैप्टन के शरीर का पिछला हिस्सा जल गया था परंतु आगे का हिस्सा सुरक्षित था। उनका शव कुर्सी पर बैठे हुए जैसी स्थिति में था। उनकी सफेद शर्ट पर चार गोल्डन पट्टियां जो उनकी सीनियरिटी दर्शाती हैं, काली टाई, ट्राउजर और शूज सब कुछ व्यवस्थित था। आश्चर्य की बात तो यह है कि मृत्यु के बाद भी कैप्टन सभरवाल के दोनों हाथ विमान के स्टीयरिंग पर मजबूती से जुड़े हुए थे। दुर्घटना की टक्कर से स्टीयरिंग को नुकसान हुआ था या फिर बचाव कर्ताओं ने उन्हें काटकर बाहर निकाला था। हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने भी रोमिन की इस बात का समर्थन किया था और जो विमानन विशेषज्ञ हैं.
उनका कहना है कि यह स्थिति साबित करती है कि कैप्टन सभरवाल ने विमान बचाने के लिए आखिरी घड़ी तक बहुत प्रयास किए थे और इस पूरे मामले में वे जूझे भी थे। दुर्घटना के एक महीने बाद एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो द्वारा जारी एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों का फ्यूल सप्लाई मात्र एक सेकंड के अंतर से बंद हो गया था। इस मुद्दे पर जांचकर्ताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिया था कि पायलट की गलती हो सकती है। इस दौरान जांचकर्ताओं ने कैप्टन सुमित सभरवाल के 91 साल के पिता को फोन करके उनके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सवाल भी पूछे थे और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे भी खटखटाए गए थे। हालांकि उसके बाद कई घटनाएं, कई खुलासे भी सामने आए थे।
अब रोमिन बोहरा जैसे प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही से स्पष्ट होता है कि कैप्टन ने विमान को शहर में गिरने से बचाकर हाइवे पर लैंड करने का पूरा प्रयास किया था। यदि उन्हें 10 सेकंड और मिल जाते तो शायद वे सैकड़ों लोगों की जान बचा सकते थे, ऐसी जानकारी अभी फिलहाल लोगों द्वारा और जो लैब असिस्टेंट हैं उनके द्वारा दी जा रही है। यानी जिस तरह पूरी प्लेन क्रैश की दुर्घटना सामने आई थी, सवाल पायलट पर उठे थे लेकिन अगर कदाचित उन्हें 10 सेकंड जितना समय और मिल गया होता तो शायद कई लोगों की जान बच सकती थी, ऐसी बात इससे स्पष्ट होती है। आगे इस विषय को लेकर जो लैब असिस्टेंट हैं उनके द्वारा क्या कहा गया, वह सुनिए। “जो 11 महीने पहले 12 जून को फ्लाइट क्रैश जो अहमदाबाद का हुआ था, उसके दूसरे दिन यानी 13 जून 2025 को मैंने मोर्चरी में सभी बॉडी देखी थीं। उसके बारे में आज से 15-20 दिन पहले कुलदीप इसरानीभाई यानी कविराजभाई जो हमारे फैमिली मेंबर जैसे हैं, उन्होंने मेरी थोड़ी एक स्टोरी Moj में अपलोड की थी। उसमें से जो इंटरव्यू सिलेक्ट हुआ कि भाई मैंने पायलट की बॉडी जो देखी थी उसके बारे में रखा गया है।
क्या पायलट की बॉडी देखी थी, किस तरह की स्थिति में थी, किस तरह का आपने दृश्य देखा? अब मैं 13 जून का टाइम के साथ कहता हूं कि 13 जून को 12 बजे से लेकर 2:00 बजे तक मैं अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में मोर्चरी वार्ड के अंदर अपने सोर्सेज के बारे में, मैं एक पैरामेडिक से बिलॉन्ग करता हूं, मेरे सोर्सेज के बारे में मैंने अंदर हॉस्पिटल में एंट्री ली थी। एंट्री लेने के बाद असल में मेरे परिवार के तीन मेंबर हैं, इस हादसे में उन तीन मेंबर को खोजने के लिए मैं अंदर गया था। अंदर जब मैं सभी बॉडी देख रहा था तब मैंने कैप्टन सर सुमित सुभरवाल सर की एक बॉडी अलग साइड में एक टेबल पर रखी हुई थी। जिनके हाथ मुड़े हुए थे, पैर सीटिंग पोजीशन में थे। बॉडी लेटी हुई थी .
लेकिन पैर और हाथ दोनों सीटिंग पोजीशन में थे और उनके हाथ में स्टीयरिंग यानी फ्लाइट चलाने वाला जो स्टीयरिंग होता है वो भी उनके हाथ में था जो मेरी आंखों ने देखा है।” “पिछले एक साल से अनेक प्रकार की बातें आ रही हैं कि अभी तक न्याय नहीं मिला। जो हुआ उसके बाद कितने लोगों ने संपर्क किया, अभी तक कौन सा डेटा है वह नहीं मिला और उसके लिए हमने कितना… अब आज से 11 महीने पहले जो हादसा हुआ, उस हादसे के बाद हम एयर इंडिया से लगातार संपर्क करने की कोशिश में हैं। हमारे पास कोई एयर इंडिया में या टाटा में से कोई इंसान मिलने के लिए भी नहीं आया या पूछने के लिए भी नहीं आया। अब उसके बाद भी हमें जब कॉन्टैक्ट नंबर प्रोवाइड किए गए तब हम अभी भी उन फोन पर फोन करते हैं तो कोई रिसीव नहीं करता और हमें सीधा ही मेल किया जाता है कि आप मेल से बात करें। बाकी हमारी साइड अभी एयर इंडिया और टाटा की तरफ से कोई सपोर्ट नहीं है, जीरो % ही सपोर्ट कहें तो भी सही है।”
“किस प्रकार का डेटा है जो अभी जरूरी लग रहा है कि इसमें आपको न्याय में मदद… अब मुख्य चीज है कि ब्लैकबॉक्स का डेटा जो हमारा मुख्य मुद्दा है। जो आगे भी हम तीन-चार बार प्रेस में कह चुके हैं कि हमारा मुद्दा हमारा मुख्य यही है कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भी हमने कहा है कि हमें ब्लैक बॉक्स का डेटा दिया जाए। जो हमने मेल के जरिए गवर्नमेंट में भी मेल किए हैं, कागज पत्र भी लिखे हैं और प्रेस की तरफ से पत्रकार मित्रों की तरफ से भी हमने जताया है लेकिन अब तक हमें उस तरफ से भी कोई जवाब नहीं दिया गया है।”
“उसके अलावा जो अन्य मुद्दामाल था जो रिकवरी नहीं हो सका, नहीं मिल सका, उसको लेकर आपने कोई मेल किए हों? हां, अब उसके लिए पहली बात यह है कि वो जो चीजें इन लोगों ने जब फ्लाइट क्रैश होने के बाद जो मुद्दामाल था, जैसे सबका लगेज था वो ऑलरेडी पैकिंग पोजीशन में था, जो Instagram पर मैंने उसका वीडियो भी देखा है कि जो बैगेज पैक थे वो भी इन लोगों ने खोलकर पोर्टल पर ओपन करके रख दिए। अब वो ओपन करने के लिए हाई स्पीड इंटरनेट चाहिए था जो कई लोग ओपन नहीं कर सकते।”
“अब आठ महीने नौ महीने बाद इन लोगों ने पोर्टल पर रखा तो आठ महीने पुरानी चीज याद किसे हो, कपड़े को वो सब ओपन करके रखा, किसे याद हो? अब दूसरी बात कि मेरे भाई का फोन भी मुझे दिया गया वो भी टूटी हुई हालत में दिया गया है। और मिस्टर निलय रंजन साहब जो इसके हेड हैं, उनको भी उस दिन मैंने 31 मार्च 2026 को मेरे भाई का फोन मुझे दिया गया, उस फोन में मैंने उनसे क्वेरी की कि भाई आपने आईएमईआई नंबर, आईफोन का ट्रैक क्यों नहीं किया? अगर फोन बंद हालत में है तो भी। उन्होंने मुझे फोन का ऑफर किया कि आपको अभी अभी फोन चाहिए तो मैं फोन दे सकता हूं, पैसे चाहिए तो ऑन टेबल पैसे देता हूं। तो मैंने उनसे ऐसा कहा कि नहीं मुझे मेरे भाई का फोन ही चाहिए क्योंकि मेरा भाई एक ऐसा काम करता था कि जब भी फ्लाइट में बैठता तो टेकऑफ और लैंडिंग समय पर वीडियो उतारता था। I don’t know कि फोन ब्रोकन करके वीडियो डिलीट करने की कोशिश की गई हो। डेटा के साथ अब आगे क्या मांग है, अन्य फैमिली के साथ भी जो हुआ है उसको लेकर क्या परिस्थिति है?” “मांग हमारी सभी फैमिली की, जो हम 200 परिवार अभी एक साथ हैं, 200 परिवारों की सबकी मांग एक ही है कि हमें ब्लैक बॉक्स का डेटा दिया जाए और हमें कॉन्टैक्ट प्रोवाइड किया जाए जिससे हमें कभी भी जरूरत पड़े तो हम टाटा या तो एयर इंडिया से संपर्क करने की कोशिश करें। जिसमें मेल और कागज के जरिए भी उनको जताया है.
लेकिन उन लोगों का सीधा जवाब एक ही आता है कि आपको कोई भी कॉन्टैक्ट करना हो तो आप मेल के जरिए ही करें, कोई कॉन्टैक्ट नंबर प्रोवाइड नहीं किया जाता।” “एयर इंडिया की स्थिति अभी फिलहाल कोई संपर्क हो सकता है? एयर इंडिया की स्थिति में फिलहाल हमारे साथ कोई भी संपर्क नहीं है। जो भी संपर्क करो onmail care पर। एक वेबसाइट उन लोगों ने लॉगिन मेल बनाया है उसके जरिए ही करो और उसमें भी हम आज मेल करें तो 15-20 दिन बाद मेल का रिप्लाई देते हैं तो देते हैं बाकी नहीं देते।”
“कमिलभाई, पीड़ितों के परिवार को टाटा ने सहायता घोषित की थी या केंद्र सरकार ने की थी, राज्य सरकार ने की होगी, किसी को कितना मुआवजा मिला है, कोई जानकारी है कि किसे कोई अमाउंट मिला हो? सबकी जानकारी… अब हमारे रिगार्डिंग में तो सबकी जानकारी मेरे पास नहीं है लेकिन मेरी फैमिली में जो मुआवजा देना था वो टाटा की तरफ से, एयर इंडिया की तरफ से और गवर्नमेंट की तरफ से दिया गया है। लेकिन मुख्य चीज मुआवजा नहीं है, मुख्य चीज न्याय है कि हमें न्याय दिया जाए। जो हम पहले से लेकर अब तक यही मांग कर रहे हैं और जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा.
तब तक हम उसके लिए लड़ाई भी लड़ेंगे।” “केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने ऐसा कहा था कि एक महीने में इसका जो रिपोर्ट है वह आ जाएगी और लोगों को न्याय मिला है। आपको क्या लग रहा है, आप क्या कहेंगे? सोशल मीडिया की तरफ से तो हमें देखने को मिलता है कि भाई एक महीने के अंदर, 12 जून से पहले, 12 जून 2026 से पहले वो लोग डेटा रिलीज करेंगे। लेकिन वो तो हमें श्योरिटी नहीं है कि देंगे, वो तो आने के बाद ही पता चलेगा कि आया कि नहीं।”