नमस्कार आप सुन रहे हैं द बॉलीवुड रेडियो और मैं हूं आपके साथ आकाश। दोस्तों आज के इस पॉडकास्ट में किस्सा रेखा का है रेखा और मुकेश अग्रवाल की शादी के दिन का किस्सा। जब दोनों ने देर रात मुंबई में एक मंदिर में जो मुक्तेश्वर देवालय मंदिर कहा जाता था। जूहू में ये मंदिर स्थित है। वहां पर दोनों ने अचानक से रात में जाकर शादी कर ली। उसके बाद का किस्सा है। शादी की रस्मों के बाद फिल्मी दुनिया के ग्लैमर से आसक्त मुकेश अग्रवाल ने रेखा को राय दी कि फिल्म इंडस्ट्री में उनके दोस्तों से मिलने चलते हैं। लेकिन रेखा ने अकबर खान और संजय खान के घर जाने के मुकेश के आईडिया में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। हेमा जी के घर चलते हैं। रेखा ने अचानक कहा रेखा और हेमा मालिनी पिछले कई साल से एक दूसरे की दोस्त थी। दूल्हा दुल्हन और सुरिंदर जो रेखा के दोस्त थी सुरेंद्र कौर हेमा मालिनी के घर पहुंचे। हेमा के पति अभिनेता धर्मेंद्र भी वहां पर मौजूद थे। और हेमा मालिनी ने बहुत धीमी आवाज में तमिल में रेखा से कहा मुझसे यह मत कहना कि तुमने इस आदमी से शादी कर ली है। रेखा ने जवाब दिया हां बिल्कुल।
क्या यह बहुत अमीर है? हेमा का अगला सवाल था। इस पर रेखा ने कोई जवाब नहीं दिया। अगली सुबह दीप्ति नवल के फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ से रेखा की आवाज आई। तुम्हें पता है मैं तुम्हारी भाभी बन गई हूं। दीप्ति नवल की कुछ समझ में नहीं आया और बड़े जोश में रेखा आगे बोलती हैं। मैं अब रेखा अग्रवाल हूं। मैंने मुकेश से शादी कर ली है। वो तुम्हारे भाई जैसा है ना? मुझे कुछ समय तक तो यकीन ही नहीं हुआ। दीप्ति नवल ने बाद के दिनों में एक इंटरव्यू में कहा था 24 घंटे बाद रेखा और मुकेश हनीमून के लिए लंदन में थे। लंदन में बीते शुरुआत के दिन बहुत खूबसूरत थे। पहली बार रेखा और मुकेश को इतना वक्त साथ बिताने का मौका मिला था। लेकिन एक हफ्ते में ही रेखा की समझ में आने लगा कि वह और मुकेश दो बिल्कुल अलग शख्सियत हैं। वो यह देखकर भी सन्न्य थी कि मुकेश हर रोज कई गोलियां खाते हैं। फिर भी उन्होंने सोचा कि अब जिंदगी गुजारनी है तो एक दूसरे की कमियों को नजरअंदाज करना पड़ेगा।
वो कहती है कि मुझे यह रिश्ता कामयाब करके दिखाना है। रेखा ने खुद को समझाया। क्या रेखा किसी कोशिश में नाकाम हो सकती हैं? यह सवाल भी उनके मन में लगातार उठता रहा। लंदन में दोनों को एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त हो चुका था और रेखा को साफसाफ नजर आ रहा था कि मुकेश को कोई बात बेहद परेशान कर रही है। और फिर एक दिन बेहद उदास मुकेश ने रेखा की आंखों में गहराई से देखा और बोला मेरी जिंदगी में भी एक एबी है। ए बी क्या यह कहकर उसका यानी कि मुकेश अग्रवाल का इशारा अमिताभ बच्चन की ओर था और अपनी जिंदगी के किस एबी की बात वह कर रहे थे। रेखा की जिंदगी के एबी के बारे में तो सब जानते थे अमिताभ बच्चन लेकिन मुकेश अग्रवाल की जिंदगी में एक एबी थी। एबी यानी आकाश बजाज। आकाश मुकेश की मनोचिकित्सक थी और पिछले तकरीबन 10 साल से उनका इलाज कर रही थी और इसी दौरान दोनों निजी जिंदगी में भी एक दूसरे के करीब आ गए। नीरज कुमार जो दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर रहे जो मुकेश अग्रवाल के दोस्त भी थे वह बताते हैं कि मुकेश भयंकर डिप्रेशन का शिकार था और अगर मैं गलत नहीं हूं तो यह रोग उसके परिवार के कुछ अन्य सदस्यों को भी था। मुकेश की बहन और परिवार के कुछ और लोग भी इसी परेशानी से जूझ चुके थे। यानी अनुवांशिक रूप से भी हालात मुकेश के साथ नहीं थे। कुछ साल पहले मुकेश का अवसाद बेहद गंभीर हो चला था और उसे बेहतर बनाने में आकाश बजाज का बड़ा योगदान था। वो उसे निराशा के अंतिम कगार से वापस लेकर आई थी।
नीरज एक इंटरव्यू में याद करते हुए बताते हैं। जिस घनघोर निराशा का जिक्र नीरज कुमार कर रहे हैं। उसके पीछे दरअसल मुकेश का एक पिछला नाकाम प्रेम संबंध था। 1980 के शुरुआती सालों में मुकेश किटी मालकन नाम की एक लड़की के इश्क में गिरफ्तार थे। किटी के सपने थे। वो हिंदी फिल्मों में हीरोइन बनना चाहती थी। दोनों ने शादी का फैसला कर लिया था कि एक रोज अचानक किटी मुकेश को छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री में अपने सपनों को पूरा करने की चाहत में आगे बढ़ गई। अब यह अपमान मुकेश के लिए असहनीय था। उसकी नजरों में एक हार थी जिसने उसे तोड़ कर रख दिया था। निराशा में उसने खुद को खत्म करने की कोशिश कर डाली लेकिन वो बच गया। जीवन के इस अंधेरे मोड़ से गुजरते हुए उसकी मुलाकात आकाश बजाज से हुई। आकाश बजाज का अपने पति से तलाक हो चुका था और वह अपनी दो बेटियों के साथ रहती थी। अपनी पहली मुलाकात याद करते हुए आकाश ने बताया कि जब मैं उससे मिली थी तो उस समय मैं कोठारी नर्सिंग होम में इंटर्नशिप कर रही थी। मुकेश उस समय बेहद डिप्रेशन में था क्योंकि तभी उसका किटी से ब्रेकअप हुआ था। जिसके साथ उसका लंबे समय से करीबी रिश्ता था। धीरे-धीरे हम अच्छे दोस्त बन गए और वह अक्सर मेरे घर आने लगा। मेरी बेटियों के साथ बैडमिंटन खेलता था। हम अच्छे दोस्त थे और दोनों दोस्त जल्दी ही प्रेमी बन गए और यह संबंध बेहद जज्बाती रिश्ता बन गया। दोनों साथ में रहते थे और एक ही जोड़े के रूप में जाने जाते थे। और यह भी माना जाता था कि वह आकाश की काफी हद तक आर्थिक रूप से मदद भी करते थे। यह बात बहुत सारे दोस्तों को पता थी। नीरज कुमार एक इंटरव्यू में इन तमाम बातों का जिक्र करते हुए बताते हैं। मुकेश, आकाश और उनकी दोनों बेटियों मोनीषा और अंजलि की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गए थे। किसी हैप्पी फैमिली की तरह पूरा परिवार साथ में छुट्टियां मनाने भी जाता था। लेकिन ऐसे जज्बात, रिश्ते की तीव्रता और साथ में 9 साल बिताने के बावजूद मुकेश ने बिना हिचके अचानक से रेखा से शादी करने का फैसला किया था। और इस बारे में उन्होंने आकाश से बात तक नहीं की थी। ना ही रेखा को प्रपोज करने से पहले ज्यादा सोचा था। लेकिन आकाश बजाज को जब पता चला तो वो हैरान रह गई। मुकेश ने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रखा था। लेकिन मैंने यह कहकर टाल दिया था कि मैं उस पर अपनी रेडीमेड फैमिली का बोझ नहीं डालना चाहती। सच तो यह है कि मैंने ही उससे कहा था कि वो किसी से शादी कर ले और अपना घर परिवार बसाए। लेकिन रेखा से उसकी शादी की बात सुनकर ना सिर्फ मैं
बल्कि हमारे सभी दोस्त हैरान रह गए थे। मैं सिर्फ हैरान ही नहीं थी बल्कि मुकेश के लिए बहुत चिंतित भी थी। सालों बाद एक इंटरव्यू में आकाश बजाज बताती हैं। मुंबई वापस पहुंचकर हनीमून से रेखा और मुकेश ने शादी का जश्न मनाने के लिए अपने करीबी दोस्तों के लिए पार्टी रखी। मुकेश इस समय डिप्रेशन के एपिसोड से गुजर रहे थे। नीरज कुमार बताते हैं कि मुझे अच्छी तरह से याद है कि वह पार्टी सांता क्रूज होटल में थी। मुकेश मेरे साथ फोन लाइन पर था और वह मुझसे कह रहा था कि नीरज मैं यहां से नीचे कूद जाऊंगा। डिप्रेशन में मुकेश की खुदकुशी की प्रवृत्ति और मुखर होकर उभर रही थी। नीरज कुमार ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की। उन्होंने कहा कि तुम्हारी हाल ही में शादी हुई है लेकिन मुकेश अजीब सी बातें कर रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि मानो उसकी जिंदगी का कोई मतलब नहीं है और वह उसे खत्म करना चाहता था। मुकेश के साथ अब ऐसी घटनाएं नियमित रूप से होने लगी थी। वह बार-बार ऐसा करने लगा था और उसके करीबी लोगों को यह बातें अब थकाने लगी थी। नीरज कुमार इस इंटरव्यू में बताते हैं। दूसरी तरफ रेखा अब फिल्म पत्रिकाओं में अपनी शादी के बारे में खुलकर बात करते हुए इंटरव्यू देने लगी थी। और इन इंटरव्यूज में वह मुकेश को अपनी जिंदगी का प्यार बता रही थी। द लव ऑफ हर लाइफ। मुकेश अग्रवाल इस नाम पर मेरा पहला रिएक्शन यह था कि इस नाम में जरा भी रोमांस नहीं है। जो सपना देखा था वो उससे बिल्कुल अलग था। लेकिन आज मुकेश अग्रवाल सबसे अहम है। यह बातें रेखा ने कही। और इसी दौरान रेखा की बतौर हीरोइन एक एक्शन फिल्म भी रिलीज हुई थी। आजाद देश के गुलाम। और इस फिल्म और अपनी शादी को लेकर रेखा सुर्खियों में थी। 15 अप्रैल साल 1990 मां पुष्पावली की मौजूदगी में रेखा और मुकेश ने वैदिक संस्कारों से भी शादी की रस्म अदा की। यह शादी प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर में हुई। लेकिन इस रस्म की सबसे खास बात यह थी
कि रेखा के पिता जैमिनी गणेशन बेटी को आशीर्वाद देने के लिए अपने फिल्म निर्माता दोस्त राघवेंद्र राव के साथ आई थी। लंबे अरसे के बाद रेखा की जिंदगी में यूं लगा कि जैसे खुशियां लौट आई हैं। यह सारी घटनाएं एक शुभ शुरुआत की तरफ इशारा कर रही थी। अपने शहर बंबई और दोस्तों को पीछे छोड़ रेखा नई जिंदगी में अब दिल्ली में बिताने के ख्वाब भी देखने लगी। उनके वीकेंड्स अब दिल्ली में ही बीतते थे। हालांकि मिसेज अग्रवाल नाम में वह ग्लैमर नहीं था। मगर उनके नए नाम और नई पहचान ने शायद किसी पुराने जख्म पर मरहम तो लगा ही दिया था। मुकेश और रेखा उस समय दिल्ली के सबसे चर्चित जोड़ों में से एक थे। यह आनंद किष्ण थे और रेखा कह रही थी कि उनकी शादी ने उनके जीवन को एक नया आयाम दिया है। उनकी जिंदगी में एक हमसफर आ गया था जिससे वह बेहद प्यार करने लगी थी। एक खामोश नजर, एक स्पर्श, एक मामूली सी तारीफ जैसे। तुम आज बहुत फ्रेश लग रही हो या फिर तुम कुछ अलग, कुछ नई सी लग रही हो। यह सब बातें जिंदगी को कितनी हसीन बना देती हैं। रेखा ने उन दिनों एक इंटरव्यू में ये तमाम बातें कही थी। हालांकि फिल्म आजाद देश के गुलाम बुरी तरह पिट गई लेकिन रेखा की निजी जिंदगी ने उन्हें मुस्कुराने की वजह दे दी थी। और अपने नए घर बसेरा बसेरा में रेखा की नई जिंदगी का आगाज हो गया था। मेरा सपना रहा है कि मैं शहर की भीड़भाड़ से दूर एक ऐसी दुनिया बसाऊं जो हरीभरी हो जहां पेड़ पौधे हो। मुकेश के साथ मैं उस सपने के करीब महसूस करती हूं। उस दौर में रेखा ने उस इंटरव्यू में कहा था शादी के बाद एक शाम रेखा और मुकेश दिल्ली के चाणक्यपुरी में नीरज कुमार के घर पहुंचे। नीरज कुमार को बाद के दिनों तक यह किस्सा हमेशा याद रहा कि रेखा किसी आम लड़की की तरह एक सादा सा सलवार कमीज पहने हुए थी। उस शाम घर पर एक छोटी सी डांस पार्टी थी। हम बस चारप लोग ही थे और रेखा ने हम सबके साथ डांस किया। हमारे पास उस खूबसूरत शाम की तस्वीरें भी हैं जो वो हमारे वो दोनों हमारे बेडरूम में जाकर बैठ गए।
जिस सरलता और अपनेपन से वह हमसे मिली। ऐसा लग रहा था जैसे वह हमारे परिवार को सालों से जानती हैं और हमें भी यही लगा कि जैसे हमारी पहचान बहुत पुरानी है। रेखा और मुकेश के बीच रिश्ते की ये कशिश कुछ और महीने तक जारी रही। लेकिन फिर रोमांस के जीने पर्दे के पीछे से जिंदगी की असलियत भी झांकने लगी थी। रेकार वीकेंड दिल्ली आती रही। लेकिन जब वो दिल्ली आती तो पाती कि मुकेश ने बड़ी पार्टियां प्लान कर रखी हैं। वो अपने पति मुकेश के साथ कुछ वक्त अकेले गुजारना चाहती थी। इसलिए वह हर हफ्ते अपना काम छोड़कर उनके पास खींची चली जाती थी। लेकिन यहां आकर वो खुद को मेहमानों की भीड़ में घिरा पाती और ऐसा बार-बार हो रहा था। रेखा को महसूस होने लगा था कि मुकेश के लिए वह एक ट्रॉफी वाइफ से ज्यादा कुछ नहीं है जिसे वह पूरी दुनिया को दिखाकर तारीफ पाना चाहता है। दिल्ली शहर के रईसों में रेखा और मुकेश का ही जिक्र था और मुकेश उन्हें दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। शुरुआत में उन्होंने कुछ खुशियों भरा वक्त बिताया लेकिन फिर दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए। लेकिन यह वैसे ही थे जैसे आमतौर पर पतिप के बीच होते हैं। एक इंटरव्यू में बाद के दिनों में मुकेश के भाई अनिल गुप्ता ने इस बारे में बताया। लेकिन इसके बाद इसके बाद जो हुआ उसने रेखा और मुकेश अग्रवाल की इस कहानी को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिया। सुनते रहिए। द बॉलीवुड रेडियो सुनता है सारा इंडिया।