नमस्कार आप सुन रहे हैं द बॉलीवुड रेडियो और मैं हूं आपके साथ आकाश। दोस्तों आज के इस पॉडकास्ट में किस्सा है राजेश खन्ना और हेमा मालिनी का। उन दिनों हेमा मालिनी को जब राजेश खन्ना की चालाकी का आभास हुआ तो यकीन मानिए वह दंग रह गई। अब चालाकी थी या राजेश खन्ना का स्टाइल यह आपको आगे पडकास्ट में पता चलेगा। हेमा मालिनी राजेश खन्ना के बहुत रिक्वेस्ट करने पर उनके साथ एक प्रोग्राम में आ तो गई थी लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि राजेश खन्ना ने वास्तव में क्या गेम खेला है। उन्होंने चुपके से संजीव कुमार को देखा। वह जान चुकी थी कि संजीव कुमार का दिल टूट गया है। लेकिन वह फिर भी राजेश खन्ना से यह सवाल करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। यानी कि संजीव कुमार के साथ मुझे क्यों इनवाइट किया? दोस्तों, किस्सा है भारतीय सिनेमा के बहुत महान अदाकार संजीव कुमार का। साल 1938 में 9 जुलाई को संजीव कुमार का जन्म हुआ और हेमा मालिनी और संजीव कुमार की प्रेम कहानी तो हम सभी वाकिफ हैं कि हेमा मालिनी से संजीव कुमार बेइंतहा मोहब्बत करते थे। लेकिन इस मोहब्बत का फायदा राजेश खन्ना ने कैसे उठाया यह आज की इस पॉडकास्ट की जान है। इस कहानी का जिक्र हमें मिलता है एन एक्टर्स एक्टर एन अथोराइज्ड बायोग्राफी ऑफ संजीव कुमार इस किताब से और इस किताब में हनीफ जावेरी और सुमंत बत्रा ने मिलकर इसे लिखा है
और उनके हवाले से यह किस्सा है और संजीव कुमार के जीवन से जुड़ी बहुत सारी रोचक बातें इस किताब में हैं। और अंग्रेजी में यह किताब है। इसका हिंदी अनुवाद भी उपलब्ध है। और अगर आप चाहे तो इसे खरीद भी सकते हैं। संजीव कुमार की कहानी बहुत दिलचस्प है। किसी को लेकर कोई राय ना बने इसलिए सही-सही बात जान लेना बहुत जरूरी होता है। इंसान की शख्सियत के कई रूप होते हैं और कई दफा कुछ रूप हर किसी को पसंद नहीं आते। फिर भी यह बात तो हम सभी के साथ हैं। जब रमेश सिप्पी ने हेमा मालिनी को सीता और गीता फिल्म में काम करने को कहा तो हेमा मालिनी ने जरा सकुचाने सी लगी वो संकोच हुआ। उन्हें लग रहा था कि लेजेंड्री दिलीप कुमार के राम और श्याम जैसे किरदार के साथ भला वो न्याय कर पाएंगी या नहीं। लेकिन रमेश सिप्पी ने यह कहकर हेमा मालिनी को सीता और गीता फिल्म में काम करने के लिए राजी कर लिया कि ऑडियंस उनकी और दिलीप कुमार की तुलना कतई करने वाली नहीं है। सीता और गीता की जुड़वा बहनों के लिए हीरोइन की तलाश भी शुरू हुई। रमेश सिप्पी ने के लिए एक चुनौती तो थी लेकिन संजीव कुमार और धर्मेंद्र सीता और गीता फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए। वैसे तो इस समय तक यह दोनों ही एक तरह से बड़े स्टार थे।
धर्मेंद्र भी और संजीव कुमार भी। मगर संजीव कुमार और धर्मेंद्र सीता और गीता फिल्म में जब काम करने को तैयार हुए तो एक बड़ी राहत की सांस फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने ली। वैसे तो इस समय तक यह दोनों बड़े स्टार लेकिन सीता और गीताकि एक हीरोइन ओरिएंटेड फिल्म थी तो पहले रमेश सिप्पी को लग रहा था कि शायद यह दोनों इस फिल्म में काम करने को तैयार ना हो। फिल्म में दोनों हीरोज़ के सीन भी कम थे लेकिन जो सींस थे वह पावरफुल थे और इसी वजह से धर्मेंद्र और संजीव कुमार दोनों सीता और गीता फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए। जब महाबलेश्वर में सीता और गीता के गाने हवा के साथ-साथ इसकी शूटिंग चल रही थी तो उस वक्त हेमा मालिनी और संजीव कुमार की जान पहचान हुई थी और उस गाने में यह दोनों स्केटिंग करते हुए दिखाई देते हैं। अगर आपने ये फिल्म देखी हो यह गाना देखा हो जो संजीव कुमार और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया है। और इस गाने की शूटिंग जब हो रही थी उस दौर में उस गाने में यह दोनों स्केटिंग करते हुए दिखाई देते हैं। पर क्योंकि यह दोनों ही स्केटिंग के मामले में अनाड़ी थे। यानी कि दोनों ही स्केटिंग करनी नहीं आती थी। तो गाना शूट करते वक्त कई दफा दोनों गिरे और इन्हें गिरता देख सबका हंस हंस कर बुरा हाल हो जाता। आखिरकार रमेश सिप्पी ने बड़ी चतुराई से हेमा मालिनी और संजीव कुमार पर स्केटिंग वाला सीन वो गाना शूट किया। हालांकि वह गाना फिल्े हुए एक दुर्घटना भी हुई थी जिससे ट्रॉली पर संजीव कुमार और हेमा मालिनी को बैठाया गया था। वह पलट गई थी। वो दुर्घटना बड़ी हो सकती थी क्योंकि जिस जगह वो ट्रॉली पलटी थी वहां पास ही गहरी खाई भी थी। लेकिन किस्मत से हेमा मालिनी और संजीव कुमार खाई में ना गिरकर साइड में मौजूद झाड़ियों पर गिर पड़े। और छोटे कट्स और घावों के अलावा कोई बड़ी चोट इन्हें नहीं लगी। वास्तव में यही वह घटना थी जो संजीव कुमार और हेमा मालिनी को नजदीक ले आई। जब हेमा मालिनी और संजीव कुमार ने उस हादसे के बाद किसी तरह खुद को संभाला तो वह बहुत अपनी कम और एक दूसरे की फिक्र ज्यादा करने लगे थे। इस तरह से इसे आप देखिए। बहुतों का मानना है कि यही वो पल था जब इन दोनों के मन में एक दूजे के लिए फीलिंग्स डेवलप होनी शुरू हुई। यानी संजीव कुमार एक बार फिर से इश्क में पड़ गए और वह हेमा मालिनी से शादी करने को लेकर बहुत गंभीर थे। लेकिन एक बार फिर से संजीव कुमार की मां शांताबेन ने उनके इस रिश्ते पर बहुत आपत्ति जताई। दरअसल शांताबेन नहीं चाहती थी कि कोई हीरोइन उनके घर की बहू बने। यह बात जब हेमा मालिनी को पता चली तो उन्हें बहुत दुख हुआ क्योंकि वह बिना दोनों परिवारों की पूरी रजामंदी के संजीव कुमार से शादी करने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी। उस वक्त संजीव कुमार ने हेमा मालिनी को भरोसा दिया कि फिक्र करने की कोई बात नहीं है। उनकी मां आखिरकार मान ही जाएंगी। ऐसा हुआ भी। हेमा मालिनी ने अपने व्यवहार से संजीव कुमार की मां शांताबेन का दिल जीता और शांताबेन ने उन्हें बहू के रूप में स्वीकार करने के लिए हामी भी भर दी। हेमा मालिनी भी इस समय तक एक सफल एक्ट्रेस बन चुकी थी। लेकिन वह जब भी शांताबेन से मिलती तो उनके सिर को अपने सिर को वो पल्लू से ढक लेती थी और बहुत सम्मान से शांताबेन के पैर छूती। धीरे-धीरे हेमा मालिनी संजीव कुमार के परिवार का हिस्सा सा बनने लगी थी। हेमा मालिनी और संजीव कुमार के करीबी दोस्तों का मानना था कि यह दोनों एक दूजे के लिए ही बने हैं। एक दिन हेमा मालिनी का जन्मदिन आया। वो तब मद्रास में थी। जिसे आज हम चेन्नई कहते हैं। उन्होंने मद्रास से ही संजीव कुमार के घर फोन किया और उनकी मां से बात की। हेमा मालिनी ने शांताबेन से कहा कि माता जी आज मेरा जन्मदिन है। आप मुझे आशीर्वाद दीजिए। और उस दिन बहुत देर तक हेमा मालिनी ने फोन पर संजीव कुमार की मां से बात की थी। संजीव कुमार की बहन गायत्री पटेल इस किताब में बताती हैं कि हेमा मालिनी उनकी मां का बहुत सम्मान करती थी। जब भी वह विदेश में कहीं जाती थी तो मां के लिए कुछ ना कुछ तो जरूर लेकर आती थी। और जब भी संजीव कुमार और शांताबेन मद्रास जाते थे तो हेमा मालिनी उनका बहुत ख्याल रखती थी। हेमा मालिनी से पहले भी संजीव कुमार का कुछ एक्ट्रेसेस संग अफेयर चला था
लेकिन उन सभी को शांताबेन ने रिजेक्ट कर दिया था। हेमा मालिनी इकलौती एक्ट्रेस थी जिन्हें वह अपनी बहू के रूप में स्वीकार करने के लिए शांताबेन राजी हुई थी। तो जब हेमा मालिनी और संजीव कुमार के रिश्ते में सब कुछ इतना अच्छा चल रहा था। फिर उनका अलगाव क्यों हो गया? यह सवाल उठना लाजमी है और इसके बारे में हनीफ जावेरी और सुमंत बत्रा इस किताब में संजीव कुमार की बायोग्राफी में बताते हैं कि भले ही संजीव कुमार कैमरे के सामने बहुत कम बोलते हो लेकिन असल जिंदगी में वह एकदम उलट इंसान थे। वो बड़े ऑकवर्ड और शर्मीले इंसान थे रियल लाइफ में और उनके शख्सियत का यही पहलू हेमा मालिनी और उनके अलगाव की वजह बन गया। संजीव कुमार की बहन गायत्री पटेल बताती हैं कि एक बार हेमा मालिनी और संजीव कुमार के बीच कुछ झगड़ा चल रहा था। गायत्री जी ने संजीव कुमार से उस बारे में बात करनी चाही मगर संजीव कुमार ने बात करने से इंकार कर दिया। हालांकि गायत्री को यह एहसास जरूर हो गया कि कुछ बड़ी बात है। क्योंकि संजीव हेमा मालिनी से बात नहीं कर रहे थे। इसी दौरान हेमा मालिनी का एक डांस शो आया। हेमा मालिनी ने संजीव कुमार की फैमिली को भी उस शो में इनवाइट किया। गायत्री पटेल और उनके पति उस डांस शो पर भी गए। मगर कहने के बाद भी संजीव कुमार नहीं गए। उन्होंने इंकार कर दिया मैं नहीं जाऊंगा। जब शो खत्म हुआ तो हेमा मालिनी गायत्री जी से मिलने आई। वह बहुत परेशान लग रही थी। हेमा मालिनी ने गायत्री से कहा कि उन्हें नहीं पता कि क्या हुआ है। क्यों संजीव कुमार उनसे बात नहीं कर रहे। हेमा मालिनी ने गायत्री से कहा कि वह संजीव से बात करके उन्हें बताएं कि मामला क्या है। मगर गायत्री वैसा नहीं कर सकी क्योंकि संजीव कुमार अपने रिलेशनशिप की बातें उनसे नहीं करते थे। आखिरकार संजीव कुमार के घर वालों ने तय किया कि वो हेमा मालिनी का हाथ मांगने मद्रास उनके घर जाएंगे। संजीव कुमार की मां शांताबेन जब हेमा मालिनी के घर पहुंची तो रिवाज के मुताबिक वह अपने साथ तोहफे में बहुत सी मिठाइयां भी ले गई। हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती भी संजीव कुमार की फैमिली से मिलकर खुश हुई। संजीव कुमार गुजराती थे जबकि हेमा मालिनी मद्रासी दोनों परिवारों का कल्चर एकदम अलग था। लेकिन इससे किसी को कोई परेशानी नहीं थी। परेशानी हुई हेमा मालिनी के करियर को लेकर। सालों बाद पत्रकार भावना सुमाया को दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी बताती हैं मेरी मां मुझे जिंदगी की हर वह चीज देना चाहती थी जो उन्हें कभी नहीं मिली थी और हेमा मालिनी कहती है कि उन्हें कलाकार बनना उनकी मां के लिए किसी भक्ति या तपस्या की तरह था इसलिए वह किसी भी सूरत में नहीं चाहती थी कि शादी करने के बाद हेमा मालिनी काम करना छोड़ दें। इसलिए जब संजीव कुमार की मां हेमा मालिनी का हाथ मांगने उनके घर गई। तब उनकी मां जया चक्रवर्ती ने उनसे साफ कहा कि मुझे बहुत अच्छा लगा कि आप मेरी बेटी को अपने घर की बहू बनाना चाहती हैं। लेकिन मेरी एक ही शर्त है। शादी के बाद भी हेमा मालिनी फिल्मों में काम करती रहेगी। अब जरीवाला परिवार के लिए यह शर्त स्वीकार करना नामुमकिन था। शांताबेन ही नहीं खुद संजीव कुमार भी शुरू से यही चाहते थे कि शादी के बाद हेमा फिल्मों में काम नहीं करेंगी। संजीव कुमार की बहन गायत्री पटेल ने तो यहां तक कहा कि खुद हेमा मालिनी ने संजीव कुमार से वादा किया था कि वह बस अपने मौजूदा प्रोजेक्ट्स कंप्लीट करेंगी और फिर फिल्मी दुनिया को छोड़ देंगी। लेकिन जब हेमा मालिनी की मां ने अपना फैसला सुना दिया तो हेमा मालिनी उसके खिलाफ नहीं जा सकी। हेमा मालिनी तब हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस थी इसलिए वह समझ रही थी कि क्यों उनकी मां नहीं चाहती कि वह फिल्मों में काम करना छोड़ दें। हेमा मालिनी को उम्मीद थी कि आखिरकार संजीव कुमार एक दिन उनके पास आएंगे और कहेंगे कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। वह चाहे तो शादी के बाद भी फिल्मों में काम करते रहना जारी रख सकती हैं।
दूसरी तरफ संजीव कुमार सोच रहे थे कि हेमा अपनी मां को मना लेंगी और शादी के बाद फिल्मों में काम नहीं करेंगी। दोनों के बीच बातचीत आगे भी होती रही। लेकिन संजीव कुमार के लिए हेमा मालिनी को समझना मुश्किल होता जा रहा था। दूसरी तरफ हेमा मालिनी की स्थिति भी बहुत परेशान करने वाली हो रही थी। वह अपनी मां और संजीव कुमार दोनों की जििदों के बीच में पिस रही थी। आखिरकार हेमा मालिनी ने संजीव कुमार से कहा कि फिलहाल संजीव उन्हें फिल्मों में काम करने दें। जब रिश्ता होगा तो यह खबर फिल्म इंडस्ट्री में भी फैलेगी और फिर प्रोड्यूसर्स उन्हें साइन करना खुद ही बंद कर देंगे। तब वह आराम से संजीव कुमार का घर और परिवार संभाल लेंगी। लेकिन संजीव कुमार इसके लिए भी तैयार नहीं हुए। इसी बीच किसी तरह राजेश खन्ना को संजीव कुमार और हेमा मालिनी के डामाडोल होते रिश्ते की खबर मिल गई और राजेश खन्ना और संजीव कुमार के बीच उन दिनों बहुत ज्यादा प्रतिद्वंदिता भी थी। दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते थे और उस प्रतिद्वंदिता की कहानी पर पहले भी कई हम पडकास्ट बनाकर आपको सुना चुके हैं। तो राजेश खन्ना के दिल में खुराफात सूझी। उन दिनों इंडियन नेशनल थिएटर यानी आईएटी के जनरल सेक्रेटरी हुआ करते थे दामू जवेरी। दामू जवेरी ने उसी दौरान मुंबई के स्ट्रगलिंग सिनेमा में एक हॉलीवुड फिल्म का प्रीमियर रखा। जिस दौरान हेमा मालिनी और संजीव कुमार का रिश्ता बहुत बुरे दौर से गुजर रहा था। दामू जवेरी ने वह प्रीमियर फंड रेजर के तौर पर रखा था। और दामू जवेरी ने राजेश खन्ना और संजीव कुमार दोनों को प्रीमियर में इनवाइट किया। उन दिनों राजेश खन्ना शर्मिना टैगोर के साथ किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। तो ऑर्गेनाइज़र्स ने जो इसके ऑर्गेनाइज करने वाले थे ऑर्गेनाइज़र्स ने राजेश खन्ना से शर्मिला टैगोर को साथ लाने को कहा और संजीव कुमार से हेमा मालिनी को साथ लाने की गुजारिश की। राजेश खन्ना जानते थे कि संजीव कुमार को भी न्योता मिला है। लेकिन संजीव कुमार नहीं जानते थे कि राजेश खन्ना को भी उस प्रीमियर में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। प्रीमियर वाले दिन संजीव कुमार जल्दी पहुंच गए और सभी खास लोगों के लिए स्टेज पर कुर्सियां लगवाई थी। कार्यक्रम के संचालनकर्ता ने संजीव कुमार से उनकी सीट पर आकर बैठने को कहा। संजीव कुमार बैठ गए। दर्शक भी आने लगे थे।
लेकिन तभी लोगों ने दबिज आवाज में कुछ बोलना शुरू कर दिया। सब लोग ऑडिटोरियम की तरफ देखने लगे। संजीव कुमार ने भी यह जानने के लिए कि लोग आखिर क्यों बुदबुदा रहे हैं? किसे देख रहे हैं? ऑडिटोरियम की तरफ देखा तो उन्हें तगड़ा झटका लगा। राजेश खन्ना हेमा मालिनी का हाथ अपने हाथों में लिए चले आ रहे थे। दोनों चलते हुए आए और सिनेमाघर की पहली रॉ में ऑडियंस की तरह आकर बैठ गए। हेमा मालिनी को राजेश खन्ना के साथ देखकर संजीव कुमार ने खुद को बहुत अपमानित महसूस किया और इस बात का जिक्र उनकी बायोग्राफी में हनीफ जावेरी ने भी किया है। हेमा मालिनी को राजेश खन्ना और संजीव कुमार के बीच की प्रतिद्वंदिता के बारे में तब तक कुछ पता नहीं था। वो बस राजेश खन्ना की रिक्वेस्ट करने पर उस प्रीमियर में शामिल होने के लिए उनके साथ आई थी। लेकिन उस दिन हेमा मालिनी राजेश खन्ना का गेम समझ गई। हेमा मालिनी को एहसास था कि संजीव कुमार को बहुत बुरा लगा है। लेकिन वह फिर भी राजेश खन्ना से यह सवाल करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। संजीव कुमार स्टेज से उतरे और एक दूसरी लाइन में हेमा मालिनी और राजेश खन्ना से काफी दूर जाकर बैठ गए। उस पूरे शो के दौरान इन तीनों में से किसी ने भी आपस में बात नहीं की। वह प्रोग्राम खत्म होने के बाद दिल टूटे संजीव कुमार ने अपने कुछ खास दोस्तों को उस वाक्य की जानकारी दी जिसे बाद में किताब में जगह भी दी गई। संजीव कुमार के दोस्तों ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि राजेश खन्ना ने जानबूझकर उन्हें अपमानित करने के लिए सब किया है। हेमा मालिनी का इसमें कोई दोष नहीं है। लेकिन वो अपमान संजीव कुमार के दिल को ठेस पहुंचा चुका था। बहुत गहरी ठेस। वो रात भर बेचैन रहे जरा भी नहीं सो पाए और अगले दिन वो अनामिका फिल्म के गीत बाहों में चले आओ की शूटिंग करने एसडी बर्मन के बंगले पर पहुंच गए। शूटिंग वहीं होनी थी और हीरोइन थी जया भादुड़ी। संजीव कुमार ने हर शॉट परफेक्टली शूट किया। लेकिन हर शॉट के बाद उनके चेहरे पर एक डार्कनेस सी छा जाती।
वो अपना दुख अपने आंसू छिपाने की कोशिश कर रहे थे। जय भादुड़ी ने यह बात नोटिस कर ली कि संजीव कुमार अपसेट हैं। और उस दिन को याद करते हुए बाद के दिनों में जया भादुड़ी ने जया बच्चन ने एक दफा इंटरव्यू में कहा भी था कि उन्होंने उस दिन संजीव कुमार को हंसाने की बहुत कोशिश की। मगर वह असफल रही और आखिरकार लंच ब्रेक के दौरान संजीव कुमार ने जय भादुड़ी को पूरी कहानी बताई। जय भादुड़ुड़ी भी बहुत हैरत में पड़ गई। उनकी हैरत की वजह यह थी कि इमोशनली इतना टूटा हुआ इंसान आखिर काम कैसे कर पा रहा है? लंच खत्म होने के बाद जब फिर से शूटिंग शुरू हुई तो संजीव कुमार की बातें सुनकर वह शॉक्ड हुई। जय भादुड़ी भी एक्टिंग नहीं कर पा रही लेकिन संजीव कुमार जी ने जया भादुड़ी को समझाया कि अपने काम पर ध्यान लगाना चाहिए क्योंकि कलाकार होने के नाते हमारी पहली ड्यूटी यह है कि हमें जो किरदार दिया गया है हम उसे अच्छी तरह से निभाएं। हमारी पर्सनल लाइफ से ऑडियंस का कुछ लेना देना नहीं है। जय भादुड़ी ने कहा कि अपने काम को लेकर संजीव कुमार इतने डेडिकेटेड रहते थे और उस दिन उनकी इस डेडिकेशन की पहली झलक उन्हें देखने को मिली थी। उस प्रीमियर वाली घटना के बाद से ही हेमा मालिनी संजीव कुमार के घर बार-बार फोन कर रही थी।
लेकिन संजीव कुमार उन्हें इग्नोर कर रहे थे। उनसे बात नहीं कर रहे थे। और आखिरकार हेमा मालिनी संजीव कुमार से बात करने सीधे उनके घर पेरिनविला पहुंच गई। और उस दिन संजीव कुमार और हेमा मालिनी के बीच राजेश खन्ना करियर और शादी को लेकर बहुत बातें हुई। काफी देर तक बात करने के बाद आखिरकार संजीव कुमार ने हेमा मालिनी से सीधे-सीधे पूछा क्या वह शादी के बाद फिल्मों में काम करना बंद करेंगी? हेमा मालिनी ने कहा कि वह अपना करियर नहीं छोड़ सकती। और तब संजीव कुमार ने हेमा मालिनी से कहा कि ठीक है फिर तुम मुझे हमेशा के लिए छोड़ दो। यह बोलकर संजीव कुमार उस कमरे को छोड़कर चले गए। वहां बैठकर वह हेमा मालिनी की बातें कर रहे थे। जिस कमरे में हेमा मालिनी को यकीन नहीं हो रहा था कि संजीव कुमार के साथ उनका रिश्ता खत्म हो गया और सबसे बड़ी बात इस तरह से खत्म हुआ। वो कुछ देर और वहीं पर स्तब्ध तरीके से बैठी रही। फिर जब उन्हें एहसास हुआ कि अब इससे ज्यादा कुछ और नहीं हो सकता तब वह भी संजीव कुमार के घर से चली गई। और इस तरह संजीव कुमार और हेमा मालिनी की यह मोहब्बत हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो गई। सुनते रहिए। द बॉलीवुड रेडियो सुनता है सारा इंडिया।