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अमिताभ का वो सबसे बड़ा दुश्मन, जिससे 10 साल बाद एक्टर ने लिया बदला।

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दोस्तों, यह किस्सा है 1972 का जब किसी फिल्मी पार्टी के दौरान अमिताभ बच्चन का किसी सरफीरे डायरेक्टर के साथ सामना हुआ था। जो अजीब वाक्या बन के रह गया। अमिताभ की संघर्ष गाथा बुक में युगांक धार ने अमिताभ बच्चन के स्ट्रगल के दिनों का जो किस्सा बयां किया है, उसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दोस्तों 1972 में अमिताभ बच्चन न्यू कमर थे।

सात हिंदुस्तानी फ्लॉप हुई थी और उसके बाद उनकी और चार-प मूवीज भी बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक फेल हो गई थी। उन्हें अब कोई नई मूवी ऑफर नहीं कर रहा था। ऐसे में वो कई प्रोड्यूसर्स के ऑफिस के चक्कर काटते थे। लेकिन उन्हें कोई भी अपनी मूवी में लेना नहीं चाहता था। वो बिल्कुल निराश हो चुके थे। ऐसे में एक दिन वह पहुंचे सिनेयुग प्राइवेट लिमिटेड की ऑफिस में जिसमें ऑनर थे प्रोड्यूसर जे ओम प्रकाश।

फिल्म इंडस्ट्री में उन दिनों सिने युग बैनर एक बड़ा नाम था। जे ओम प्रकाश अब तक आस का पंछी आई मिलन की बेला आए दिन बहार के आया सावन झूम के आंखों आंखों में जैसी सफल फिल्मों का निर्माण कर चुके थे। और अब अपनी नई प्रपोज्ड मूवी द्वारा डायरेक्टरियल डेब्यू करने जा रहे थे। अमिताभ बच्चन की भले ही चारप मूवीज रिलीज हो चुकी थी, लेकिन उस वक्त तक वो अपनी खुद की अलग पहचान नहीं बना पाए थे। अमिताभ बच्चन को भी उन दिनों बड़े बैन रतले बन रहे किसी मूवी में अच्छा रोल चाहिए था। इसलिए काम की तलाश में वह पहुंचे सिनेयुग प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस में। अमिताभ बच्चन ने बड़ी आदब के साथ अपना परिचय जे ओम प्रकाश साहब को दिया और उनसे कहा कि मैं हरिवंश राय बच्चन का बेटा हूं।

दो चार मूवीज कर चुका हूं। आपके सिनेयुग बैनरथले आपने बहुत ही अच्छी पिक्चरें बनाई है। आपके पास कोई अच्छा रोल हो प्लीज अगर आप मुझे चांस देते हो तो उस रोल को निभाने में मैं अपनी जी जान लगा दूंगा। जे ओम प्रकाश ने अमिताभ की बात पर हंसकर जवाब देते हुए कहा कि मैंने आपके पिता हरिवंश राय बच्चन की कविताएं पढ़ी हैं। बहुत ही अच्छा लिखते हैं आपके पिताजी। तुम्हारे लायक कोई रोल होगा तो मैं तुम्हें अवश्य संपर्क करूंगा। इस संवाद के बाद अमिताभ बच्चन जे ओम प्रकाश के ऑफिस से चले गए। कुछ ही दिनों बाद नवंबर 1972 में मुंबई के किसी होटल में राज खोसला ने उनकी मूवी मेरा गांव मेरा देश को 100 दिन पूरे होने की खुशी में पार्टी रखी थी। बॉलीवुड की सारी जानी मानी हस्तियां उस पार्टी में शामिल हुई थी।

पार्टी बॉलीवुड की थी तो जाहिर बात है कि पार्टी में खान-पान का सब इंतजाम था। इस पार्टी में जे ओम प्रकाश भी शामिल थे। अमिताभ की संघर्ष गाथा बुक के लेखक युगांक धीर लिखते हैं कि जे ओम प्रकाश ने दो पैग चढ़ा लिए थे और अचानक से उनके सामने अमिताभ बच्चन आए। दोनों में हाय हेलो भी हुई। लेकिन दो पैग चढ़ने के बाद जे ओम प्रकाश का मजाकिया मिजाज सामने आ ही गया। उन्होंने अमिताभ बच्चन को कहा कि भाई हम तो सिर्फ रोमांटिक मूवीस ही बनाते हैं। हीरो बनना तेरे बस की बात नहीं और तेरा लंबा कद और नाक नक्शा विलेन के रोल के लिए चल जाएगा।

तेरे साथ कौन सी हीरोइन काम करने को राजी होगी। मेरे मूवी में विलेन का रोल होगा तो मैं तुझे जरूर कास्ट करूंगा। भरी महफिल में जय ओम प्रकाश ने अमिताभ बच्चन को ऐसा कहकर जलील किया था। आजू-बाजू खड़े मेहमानों को भी यह बात अच्छी नहीं लगी थी। लेकिन जे ओम प्रकाश उस वक्त एक बड़ा नाम था। इसलिए ऐसे बुरी तरह से अपमानित होने के बाद भी अमिताभ बच्चन ने शांत रहना ही उचित समझा। हालांकि अमिताभ बच्चन को भी यह बात बहुत बुरी लगी थी। वह सोचते रहे कि अगर उन्हें काम नहीं देना था तो नहीं देते। लेकिन इस तरह से जलील करने का क्या मतलब था? जे ओम प्रकाश की बाद में एस अ प्रोड्यूसर डायरेक्टोरियल डेब्यू मूवी आई थी।

आपकी कसम जिसमें जे ओम प्रकाश ने राजेश खन्ना को लेड हीरो कास्ट किया था। अमिताभ ने इस बेइज्जती और अपमान को अपने सीने में ही दबाकर रखा था। उन्हें भी यह बात मालूम नहीं थी कि भविष्य में इस अपमान का करारा जवाब देने का मौका उन्हें मिलने वाला है। इस घटना के 2 महीने बाद ही अमिताभ बच्चन को प्रकाश मेहरा की जंजीर मिलती है और 11 मई 1973 को जब यह मूवी रिलीज़ होती है तो आगे का इतिहास तो आप सभी जानते ही हैं। जंजीर से बॉलीवुड को एक एंग्री यंग मैन एक्टर मिल गया था। पेड़ के इर्द-गिर्द गाने गाकर हीरोइन के साथ चक्कर काटने वाले हीरोस को पब्लिक अब उब चुकी थी। यह पुलिस स्टेशन है। तुम्हारे बाप का घर नहीं। ऐसे शेर खान को सुनाने वाला इंस्पेक्टर विजय के रोल में पब्लिक ने अमिताभ बच्चन को काफी पसंद किया था। जब तक बैठने को ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो। इसके बाद शोले दीवार, हेराफेरी, मुकदर का सिकंदर, अमर अकबर, एंथनी, डॉन एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर मूवीज की लाइन लग गई। और अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के सुपरस्टार कहलाने लगे।

कुली मर्द के जबरदस्त सक्सेस के बाद जब अमिताभ बच्चन का करियर पीक पर था तब अमिताभ बच्चन ने फिल्में छोड़कर राजनीति में छलांग लगाई थी और 1984 में वो सांसद भी बने थे। लेकिन थोड़े ही दिनों में जब वो राजनीति से इस्तीफा देकर वापस बॉलीवुड लौटे तो उनके ऑफिस में पहले पहुंचने वाले प्रोड्यूसर में पहला नाम था जे ओम प्रकाश का। कहते हैं ना इतिहास अपने आप को दोहराता है। जे ओम प्रकाश ने कई वर्षों में कोई अच्छी मूवी नहीं बनाई थी। वह अपना सुपरहिट मूवीज का फार्मूला खो चुके थे। अब उनके पास एक अच्छी स्क्रिप्ट थी। कहानी के अनुसार एक खूंखार अपराधी एंग्री यंग मैन जो एक छोटी बच्ची की वजह से सुधर जाता है और अपने पुराने साथियों और उनके गुंडों से उस बच्ची और निर्दोष गांव वालों की रक्षा करता है। यह रोल बहुत ही पावरफुल था और इस रोल में वह अमिताभ बच्चन को लेना चाहते थे और उन्हें साइन करने के लिए ही वह अमिताभ बच्चन के ऑफिस में आए थे। मूवी का नाम था भगवान दादा।

जे ओम प्रकाश ने अमिताभ बच्चन को स्टोरी का नरेशन दिया और अमिताभ को भगवान दादा मूवी में मेन हीरो का रोल ऑफर किया था। अब तक अमिताभ बच्चन बिल्कुल शांत थे लेकिन बरसों पहले उनके संघर्ष के दिनों में जे ओम प्रकाश ने उनका अपमान किया था। वह आग उन्होंने अपने सीने में ही दबाकर रखी थी। अब बदला लेने की बारी अमिताभ बच्चन की थी। ओम प्रकाश को कहा डायरेक्टर जी मेरा तो कद ऐसा बंबू जैसा लंबा है और नाक नक्शा बिल्कुल विलन जैसा है। मैं तो छोटा सा कलाकार हूं। आप जैसे बड़े आदमी के साथ काम करने की मेरी हैसियत नहीं है।

आप उस वक्त मुझे ना कहते तो मुझे बुरा नहीं लगता। लेकिन आपने सरेआम मुझे जलील किया था। अब आपको मेरे स्टारडम की जरूरत पड़ी तो भागे आए मेरे पास। आपके हिसाब से मैं विलेन जैसा दिखता हूं। आप किसी बड़े रोमांटिक दिखने वाले हीरो को साइन करें। मैं विनम्रता के साथ कहता हूं मैं आपके मूवी में काम नहीं कर सकता। आप किसी दूसरे हीरो को लेकर फिल्म बनाओ। अब आप जाओ। जे ओम प्रकाश का चेहरा उतर गया। वह मन ही मन सब कुछ समझ चुके थे। बरसों पहले उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ जो गलत बर्ताव किया था। उसका सूझ समेत रिटर्न अमिताभ की तरफ से उन्हें मिल चुका था।

वह भगवान दादा की स्क्रिप्ट उठाकर चलते बने। बेेजज्जती का बदला आज के समय जो चुकाना था। यह और बात है कि बाद में जे ओम प्रकाश ने भगवान दादा मूवी को रजनीकांत, राकेश रोशन, श्रीदेवी और डेनी डेंजोपो को लेकर बनाया था। मगर बॉक्स ऑफिस पर यह मूवी बुरी तरह पलहक हुई। ओम प्रकाश को पिक्चर बनाने के लिए कहां-कहां धक्के खाने पड़े थे। इसके बाद भी जय ओम प्रकाश ने दो चार मूवीज बनाई थी। लेकिन बॉक्स ऑफिसर पर उनमें से एक भी नहीं चली। लेकिन अमिताभ बच्चन की गाड़ी इसके बाद भी नहीं रुकी। और शहंशाह हम खुदा गवाह मोहब्बतें जैसी कई हिट मूवीज उन्होंने इसके बाद भी। दोस्तों, इससे यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हम जो दूसरों को दे रहे हैं, ब्याज समेत हमको वो रिटर्न मिलने वाला है।

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