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धर्मेन्द्र ने वो भूल ना की होती तो अमिताभ सुपरस्टार न बनते !

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दोस्तो अगर धर्मेंद्र वो एक गलती न करते टू अमिताभ आज सदी के महानायक ना बनते। इतने बड़े स्टार ना बनते। बॉलीवुड के इतिहास में सफलता की कई कहानियां हैं। लेकिन एक ऐसे एक्टर की कहानी जो हार के कगार से उभर कर शहंशाह बन गया।

अमिताभ बच्चन जिस एक्टर को हम सदी का महानायक कहते हैं। वो 1970 के दशक की शुरुआत में फ्लॉप की गारंटी बन गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लगातार 12 फ्लॉप फिल्मों का बोझ उठाए अमिताभ बच्चन मुंबई छोड़कर इलाहाबाद लौटने की तैयारी कर रहे थे। उनका बैग लगभग पैक हो चुका था।

लेकिन फिर किस्मत ने ऐसा कार्ड खेला जिसने ना सिर्फ अमिताभ की किस्मत बदली बल्कि बॉलीवुड की दिशा और दशा भी हमेशा के लिए बदल दी। और दिलचस्प बात यह है कि अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड में यह पुनर्जन्म उस दौर के सबसे बड़े सुपरस्टार और हेमैन धर्मेंद्र की एक बड़ी गलती की वजह से मिला था। धर्मेंद्र के मना करने से अमिताभ बच्चन के फ्लॉप करियर को ऐसा पुनर्जन्म मिला जिसकी कल्पना खुद अमिताभ ने भी नहीं की थी। साल 1969 में सात हिंदुस्तानी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अमिताभ बच्चन में टैलेंट की कोई कमी नहीं थी।

लेकिन बॉक्स ऑफिस उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था। बंसी बिरजू एक नजर संजोग और रास्ते का पत्थर जैसी फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप होती गई। उनके भारी आवाज और लंबे कद को अब उनकी कमजोरी कहा जाने लगा। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने उनके नाम पर इन्वेस्ट करने से ही मना कर दिया। अमिताभ पूरी तरीके से हार मान चुके थे और इंडस्ट्री छोड़ने का मन बना चुके थे। उसी समय राइटर जोड़ी सलीम जावेद ने एक ऐसी स्क्रिप्ट तैयार की जो उस समय के चॉकलेटी हीरो के जमाने के बिल्कुल खिलाफ थी। तो आंखों में गुस्से वाला हीरो जो उस दौर में बिल्कुल नया था। फिल्म का नाम था जंजीर।

डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने सबसे पहले इस फिल्म के लिए उस समय के हीन कहे जाने वाले धर्मेंद्र को अप्रोच किया। धर्मेंद्र को कहानी पसंद आई और उन्होंने साइन भी कर लिया। लेकिन इसमें एक ट्विस्ट था कि धर्मेंद्र उस समय लोफर और यादों की बारात जैसी बड़ी फिल्मों में बिजी थे। प्रकाश मेरा चाहते थे कि फिल्म तुरंत शुरू कर दी जाए। लेकिन धर्मेंद्र के पास डेट्स नहीं थी। और आखिरकार अंदरूनी झगड़ों और बिजी शेड्यूल की वजह से धर्मेंद्र ने प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला कर लिया। अब यह धर्मेंद्र की गलती है या जो भी कहें लेकिन इसी भूल ने इसी गलती ने भविष्य के एंग्री मैन का रास्ता तैयार किया। धर्मेंद्र के मना करने के बाद फिल्म के लिए देवानंद और राजकुमार जैसे बड़े सितारों से संपर्क किया गया। लेकिन धर्मेंद्र के बाद राजकुमार और देवानंद ने भी इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया और रिजेक्ट करने की वजह थी कि हीरो रोमांटिक नहीं है।

कोई गाना नहीं है, मारधाड़ है। हीरो हीरो नहीं लगता उस दौर के हिसाब से क्योंकि उस दौर में फिल्में ऐसी ही बनती थी और यह एक नए तरीके का एक्सपेरिमेंट था और अब चकि दिक्कत यह थी कि हीरो नहीं मिल रहा था और आखिर में जब सलीम जावेद के कहने पर प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन को मौका दिया तो अमिताभ के लिए अब करो या मरो वाली सिचुएशन थी और फिर उन्होंने इस फिल्म में अपना दिल और जान लगा दी और जब 1973 में जंजीर रिलीज हुई तो इसने बॉक्स ऑफिस के सारे हिसाब किताब बिगाड़ कर रख दिए। अमिताभ बच्चन जिन्हें अब तक फ्लॉप मास्टर के नाम से जाना जाने लगा था वो रातोंरात नेशनल क्रश और एंग्री यंग मैन बन गए।

और इस फिल्म ने ना सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ कमाई की बल्कि अमिताभ के करियर का वह काला दौर भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया जिससे वह मुंबई छोड़कर इलाहाबाद लौटने की तैयारी करने लगे थे। धर्मेंद्र की वो एक फिल्म छोड़ने की गलती भूल अमिताभ के लिए किसी जीवन दान से कम नहीं थी। ट्रेड एनालिस्ट का मानना है कि अगर धर्मेंद्र ने जंजीर की होती तो यह सिर्फ एक और मसाला हिट बनकर रह जाती। क्योंकि धर्मेंद्र की इमेज पहले से ही एक एक्शन हीरो की थी। लेकिन अमिताभ के लिए वो फिल्म एक क्रांति थी और उस एक फैसले ने बॉलीवुड को उसका सबसे बड़ा स्टार दिया और यह सब हुआ धर्मेंद्र की बदौलत। कहानी धर्मेंद्र की थी। धर्मेंद्र ने ही इस कहानी के राइट्स भी खरीदे थे।

जिसे बाद में उन्होंने प्रकाश मेहरा को बेची। सलीम जावेद ने उसे और दुरुस्त किया। जिंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी का छोड़ा हुआ किसी के लिए वरदान बन जाता है।

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