दुनिया शाहरुख खान को उनकी मुस्कान के लिए जानती है। उस मुस्कान से जो कैमरास देखते ही चोरी हो जाती है। उस हंसी से उस जाम से जो 30 साल में जरा भी कम नहीं हुआ। लेकिन एक इंटू में शाहरुख खान ने एक बात कही जो सुनकर रुकना पड़ता है। उन्होंने कहा मैं जो भी करता हूं वो सब इसलिए करता हूं ताकि अपनी बहन जैसा ना हो जाऊं। अब ये बहन वाला किस्सा क्या है? आखिर दर्द कौन सा है? कौन सा जख्म है जिसे शाहरुख खान छुपाए [संगीत] बैठे हैं? और यह कन्फेशन क्या था? वो भी एक ऐसे इंसान का जिसे दुनिया किंग कहती है। अब वो खुद सामने आकर पब्लिकली कह रहा है कि उनकी पूरी जिंदगी, उनकी हर मुस्कान, उनका हर चोक, उनकी हर फिल्म एक डर से भागने का तरीका है और वो डर था एक जख्म जो 40 साल पहले लगा था और वो आज भी भरा नहीं है। यह कहानी उस जख्म की है।
बात है 1981 की। कि मीर ताज मोहम्मद शाहरुख खान के पिता थ्रो कैंसर की वजह से वो शाहरुख खान के साथ ना रह सके। शाहरुख खान उस वक्त सिर्फ 15 साल के लड़के थे और उनकी [संगीत] बड़ी बहन शहनाज़ खान 21 साल की थी। शहनाज़ उस दिन घर पर नहीं थी। बाप के जाने की खबर मिली दौड़ी आई। और जब घर पहुंची तो उन्होंने अपने पिता यानी कि अपने वालिद का चेहरा देखा। शाहरुख खान उस पल को याद करते हुए कहते हैं मेरी बहन वहां खड़ी थी। उसने मुझे देखा। मैंने उसे देखा। मैं रो रहा था पर वो ना रोई ना कुछ बोली बस गिर गई और फिर अपना सिर जमीन पर मारा और फिर 2 साल 2 साल तक शहनाज ने एक भी आंसू नहीं बहरहाना एक शब्द बोला बस शून्य में देखती रही जैसे दुनिया से उनका कनेक्शन टूट गया हो जैसे उनके एक पल की वजह से पूरी दुनिया खत्म हो गई। शाहरुख खान ने कहा उनकी पूरी दुनिया बदल गई। वो क्वालिफाइड थी एमबीए एलएलबी किया हुआ था। लेकिन वो सब एक वक्त में एक पल में चला गया। और शाहरुख खान वो बस 15 साल का लड़का जिसके सर से पिता का साया अभी-अभी हटा था। उसने क्या किया? उसने काम करना शुरू किया। शाहरुख खान ने कहा मैंने खुद को एक तरीके से डिटचमेंट में डाल दिया था। [संगीत] एक दिखावा एक झूठ जो मैंने पब्लिकली दिखाना शुरू कर दिया था। लोगों को लगता था यह मेरी पर्सनालिटी है। ग्लैमर है।
बॉलीवुड है। लेकिन यह सब उस दर्द के पीछे छुपे रहने का तरीका था। ताकि मैं अपनी बहन जैसा ना हो जाऊं। सोचो शाहरुख खान की वो मुस्कान जिस पर पूरी दुनिया फिदा है वो एक दर्द को ढकने के लिए है। वो चांद जो हर इंटरव्यू में दिखता है वो एक जख्म पर लगाई गई पट्टी है। यह कन्फेशन शाहरुख खान ने दुनिया के सामने किया। पब्लिकली किया। फिर भी बहुत कम लोग जानते हैं इसके बारे में। फिर आता है 1991 और एक और तकलीफ शाहरुख खान की मां लतीफ फातिमा डायबिटीज की वजह से चली गई। वही मां जो ऑक्सफोर्ड से पड़ी हुई थी। इंदिरा गांधी के साथ सोशल वर्क करती थी। जिन्होंने एक बार शाहरुख खान से कहा था हिंदी में 10 में से 10 लाओ तुम्हें [संगीत] फिल्म दिखाऊंगी और शाहरुख खान ने रात भर पढ़कर 10 में से 10 लेकर आए और उस वादे को पूरा करने के लिए मां 1991 में चली गई और शहनाज़ जो पहले से टूटी हुई थी वो टूट गई।
उस वक्त शाहरुख मुंबई में थे। बॉलीवुड में एंट्री हो चुकी थी दीवाना रिलीज हो चुकी थी। लेकिन दिल्ली में उनकी बहन थी अकेली। दोनों [संगीत] पेरेंट्स के बिना डिप्रेशन की उस अंधेरी खाई में। शाहरुख ने एक फैसला किया। शहनाज को मन्नत लेकर आ गए अपने साथ और आज 2026 में शहनाज वहीं है मन्नत में शाहरुख के साथ और फिर 1984 से 1985 के बीच में [संगीत] डीडीएलजे की शूटिंग के दौरान एक ऐसी रात आई जो शाहरुख कभी नहीं भूले। शहनाज की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ जाती है। डॉक्टर्स ने ये सिचुएशन सीरियस कहा। [संगीत] सर्वाइव करना मुश्किल है। शाहरुख उन्हें स्विट्जरलैंड लेकर चले गए ट्रीटमेंट के लिए। और वहीं से शहनाज को हॉस्पिटल ले गए। शाहरुख वापस सेट पर आए। उस दिन जो सॉन्ग शूट हुआ वो था तुझे देखा तो यह जाना सलाम। बॉलीवुड का सबसे रोमांटिक सॉन्ग। तुझे देखा तो ये सनम। एक ऐसे मोमेंट में शूट हुआ जब भाई अपनी बहन के लिए दुआ मांग रहा था। सोच के रुक जाते हैं लोग ऐसी सिचुएशन में। जो सॉन्ग करोड़ों लोगों को प्यार भरा लगता है। वो सॉन्ग आज भी वेडिंग्स [संगीत] में बजता है।
उस दिन रिकॉर्ड हुआ जब शाहरुख का दिल कहीं और ही था। शाहरुख ने अपनी बहन के बारे में एक और बात कही जो सबसे ज्यादा दिल को छू जाती है। उन्होंने कहा, “मैं शहनाज से प्यार करता हूं।” वो जैसी है वैसे ही भगवान की बच्ची है। बहुत इनोसेंट है और मुझ में इतनी हिम्मत नहीं कि मैं उसे हर्ट कर सकूं और उस तरह डिस्टर्ब हो सकूं जितनी वो है। मेरे बच्चे उसे मुझसे और गौरी से कहीं ज्यादा प्यार करते हैं। यह बात एक भाई ने कही है जो अपनी बहन के दर्द को नहीं देख सकता। और इसीलिए उन्होंने अपने चारों तरफ शील्ड बना ली जोक्स की, हंसी की ताकि वो टूटे नहीं। मरत के बाहर हर रोज हजारों फैंस आते हैं।
वो उस घर को देखते हैं अरेबियन सी के किनारे खड़े होकर उसकी रोशनी दूर तक दिखती है जिसके नाम का मतलब ही दुआ है। लेकिन उस घर के अंदर एक ऐसी औरत रहती है शहनाज जो [संगीत] 1960 में पैदा हुई एमबीए एलएलबी है जिसकी पूरी जिंदगी एक पल ने छीन ली। दुनिया का किंग बिलेनियर कहा जाता है शाहरुख खान को। उसकी मुस्कान पर करोड़ों लोग दीवाने हैं। फेम है, सब कुछ है, पैसा है। लेकिन शायद वो अपनी बहन को आज तक वैसे नहीं देख पाए जैसे [संगीत] देखना चाहते हैं। यह है शाहरुख खान के 40 साल का जख्म और मन्नत की वो चमक के पीछे छुपा हुआ है। तो मुझे कमेंट करके बताओ क्या तुम्हें पता थी यह कहानी? और क्या शाहरुख खान की वो मुस्कान तुम्हें वैसी ही लगती है या उसमें कुछ और दिखता है? मैं तुम्हें नेक्स्ट वीडियो में मिलूंगी। तब तक तुम चैनल को सब्सक्राइब कर लो। वीडियो को लाइक और शेयर कर लो और प्लीज बेल आइकॉन दबाना मत भूलना।