क्या एक चुटकी सिंदूर किसी के पूरे वजूद और सिनेमाई इतिहास को हिला सकता है? क्या एक औरत को सिर्फ इसलिए डायन या ब्लैक विडो कहा जा सकता है क्योंकि वह अपने जीवन में आजादी और प्यार चाहती थी? और सबसे बड़ा सवाल रेखा और अमिताभ बच्चन का वह रिश्ता जिसे दुनिया सिलसिला कहती है, उसका असली सच क्या है? 22 जनवरी 1980 की वह सर्द शाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा के लिए एक किन्वदंती बन गई। मौका था आर के स्टूडियो के विशाल और जगमगाते गार्डन में आयोजित राज कपूर के बेटे रशि कपूर और नीतू सिंह की भव्य शादी का पूरी मुंबई फिल्म इंडस्ट्री सितारों से सजी इस महफिल में शिरकत कर रही थी। इस शाही समारोह में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन भी अपनी पूरी गरिमा के साथ मौजूद थे। माहौल में जश्न, संगीत और हंसी की आवाजें गूंज रही थी। लेकिन अचानक जैसे वक्त ठहर गया। कैमरों के फ्लैश नीतू और रशि कपूर से हटकर प्रवेश द्वार की ओर मुड़ गए। वहां एक ऐसी महिला खड़ी थी जिसने बिना एक शब्द कहे ही पूरे बॉलीवुड की नींव और सामाजिक मान्यताओं को हिला कर रख दिया था। वह भानु रेखा गणेशन थी जिन्हें दुनिया रेखा के नाम से जानती थी।
रेखा ने उस रात एक बेहद खूबसूरत और शानदार सफेद साड़ी पहनी हुई थी। उनके माथे पर एक चमकती हुई लाल बिंदी थी। लेकिन जिस चीज ने सभी की सांसे रोक दी, वह थी उनकी मांग में भरा हुआ गहरा लाल सिंदूर और गले में चमकता मंगलसूत्र। वहां एक अविवाहित और बेहद ग्लैमरस अभिनेत्री का इस रूप में आना। किसी महाविफोट से कम नहीं था। पूरे गार्डन में सन्नाटा छा गया और उसके बाद शुरू हुई फुसफुसाहटों की गूंज। लोग एक दूसरे के कानों में पूछने लगे कि क्या रेखा ने गुपचुप तरीके से शादी कर ली है और क्या यह सिंदूर किसी और का नहीं बल्कि उसी शख्स के नाम का है जो उस वक्त वहां मौजूद था। सिने ब्लिजर्स जैसी पत्रिकाओं ने इस घटना का विस्तृत वर्णन किया कि कैसे रेखा भीड़ को चीरते हुए सीधे गार्डन के बीचों-बीच आ गई। रेखा की नजरें भीड़ को चीरती हुई सीधे अमिताभ बच्चन पर जाकर टिक गई जो उस समय मशहूर निर्देशक मनमोहन देसाई के साथ बातचीत में व्यस्त थे। बिना किसी हिचकिचाहट के रेखा सीधे उनके पास गई और कुछ मिनटों तक उनसे बात की। यह कोई साधारण बातचीत नहीं थी। यह उन हजारों अफवाहों, गसिप मैगजींस की सुर्खियों और बंद दरवाजों के पीछे दबे रहस्यों का सरेआम प्रदर्शन था। इस दृश्य को कुछ ही दूरी पर बैठी जया बच्चन देख रही थी। एक पत्नी जो अपने पति के सम्मान और अपने परिवार की रक्षा के लिए हमेशा ढाल बनकर खड़ी रही थी। वह इस सार्वजनिक तमाशे और रेखा की बेबाकी को बर्दाश्त नहीं कर सकी। प्रत्यक्षदर्शियों और कई रिपोर्ट्स के अनुसार उस रात जया बच्चन अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
यह केवल एक शादी की रात का वाकया नहीं था। यह एक त्रिकोणीय प्रेम कहानी का वह चरम बिंदु था जिसने रेखा और अमिताभ के रिश्ते को हमेशा के लिए एक ऐसा रहस्य बना दिया जिसे आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। लेकिन रेखा रातोंरात इस विद्रोही और बेबाक महिला में कैसे तब्दील हुई? इस सवाल का जवाब उनके उस बचपन में छिपा है जिसने उन्हें ताउम्र प्यार का प्यासा बना दिया। उनकी किस्मत की रेखाएं उनके जन्म से पहले ही एक बहुत बड़े दर्द और पहचान के संकट के साथ लिख दी गई थी। उनके पिता जेमिनाई गणेशन जिन्हें दक्षिण भारतीय सिनेमा में किंग ऑफ रोमांस कहा जाता था। एक बेहद प्रभावशाली और सफल अभिनेता थे। जेमिनाई स्टूडियोज के गलियारों में उनकी मुलाकात एक उभरती हुई और बेहद खूबसूरत अभिनेत्री पुष्पावली से हुई। पुष्पावली जेमिनाई गणेशन के प्यार में इस कदर दीवानी हो गई कि उन्होंने अपना अच्छा खासा चमकता हुआ करियर उनके लिए छोड़ दिया। लेकिन इस प्रेम कहानी का सच बहुत कड़वा था। क्योंकि जमिनाई गणेशन पहले से ही शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। इसके बावजूद उन्होंने पुष्पावली को झूठे ख्वाब दिखाए और अपने प्यार के जाल में उलझाए रखा। पुष्पावली गर्भवती हुई और एक बच्ची का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया भानु रेखा गणेशन। लेकिन जिस पिता के नाम का हिस्सा रेखा को मिला था, वह पिता कभी उनके जीवन का हिस्सा नहीं बन पाया। जैेमिनाई गणेशन ने पुष्पावली और नवजात रेखा को छोड़ दिया और कभी पलट कर उनकी सुध नहीं ली। एक सुपरस्टार पिता की बेटी होने के बावजूद रेखा का बचपन घोर गरीबी, मानसिक प्रताड़ना और एक गहरे अफादर वुंड के साए में बीता। उनकी मां पुष्पावली को अपना और अपनी बेटी का पेट पालने के लिए छोटे-मोटे और बी ग्रेड रोल्स करने पड़े।
एक तरफ उनके पिता महलों जैसी जिंदगी जी रहे थे और दूसरी तरफ उनकी मां फिल्म स्टूडियोज के बाहर काम के लिए धक्के खा रही थी। यह विरोधाभास रेखा के बाल मन पर गहरा असर डाल रहा था। रेखा का स्कूल का जीवन किसी मनोवैज्ञानिक नर्क से कम नहीं था। वह जिस स्कूल में पढ़ती थी, इत्तेफाक से उसी स्कूल में जेमिनाई गणेशन की पहली पत्नी के वैध बच्चे भी पढ़ते थे। जेमिनाई अक्सर अपनी वैध संतानों को स्कूल से लेने आते थे। एक छोटी सी बच्ची जो स्कूल के गेट पर खड़ी होकर अपने पिता को देखती थी, उसे यह समझ नहीं आता था कि उसका पिता उसे देखकर अपनी नज़रें क्यों फेर लेता है। वह पिता जो पर्दे पर महान प्रेमी बनता था। अपनी ही बेटी के लिए एक निर्दयी अजनबी से भी बदतर था। 60 के दशक के रूढ़िवादी समाज में बिना पिता की संतान होना एक बहुत बड़ा सामाजिक कलंक था। स्कूल के बच्चों ने रेखा को नाजायज कहकर चिढ़ाना शुरू कर दिया। इसके अलावा रेखा का रंग बचपन में सांवला था और उनका वजन भी थोड़ा ज्यादा था। बच्चों ने उनके डार्क स्किन कलर का बेरहमी से मजाक उड़ाया और उन पर भद्दी नस्लवादी टिप्पणियां की। इन सब से टूटकर एक दिन रेखा ने तय किया कि वह अब इस घुटन भरे स्कूल में नहीं जाएंगी और उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उस समय एक युवा और परेशान लड़की के रूप में रेखा का सपना कोई बड़ी हीरोइन बनना नहीं था बल्कि उनका सपना एयर होस्टेस बनने का था ताकि वह दुनिया की सैर कर सकें और आसमान में उड़ते हुए अपनी उन तमाम जमीनी तकलीफों और अपने पिता की कड़वी यादों से कोसों दूर जा सकें लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। आसमान में उड़ने का सपना देखने वाली उस लड़की को जमीन के सबसे अंधेरे और स्वार्थी दलदल में धकेला जाने वाला था। रेखा की उम्र एयर होस्टेस बनने के लिए बहुत कम थी और घर की आर्थिक स्थिति दिन-बदिन बिगड़ती जा रही थी। पुष्पावली के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। जिस सिनेमा ने पुष्पावली का करियर और जिंदगी तबाह की थी, उसी सिनेमा में उन्होंने अपनी बेटी को झोंकने का कठोर फैसला लिया। रेखा को जबरदस्ती एक्टिंग की दुनिया में धकेल दिया गया। जबकि उन्हें कैमरे के सामने खड़े होने से नफरत थी। बचपन में ही उन्होंने अपनी मां की फिल्म में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था और 12 साल की उम्र में फिल्म रंगुला रत्नम से उनका प्रॉपर डेब्यू हुआ था।
लेकिन हिंदी सिनेमा में कदम रखना एक अलग ही दर्दनाक अनुभव था। जब रेखा मुंबई के स्टूडियोज में काम ढूंढने के लिए लाइनों में खड़ी होती थी तो अक्सर उनके सामने एक दूसरी लाइन उन लोगों की होती थी जो केवल उनके महान पिता जेमिनाई गणेशन की झलक पाने के लिए खड़े होते थे। इसी संघर्ष के दौरान डायरेक्टर कुलजीत पाल ने एक दिन रेखा को एक सेट पर मस्ती से लंच करते देखा और उस अल्हड़ लड़की की प्राकृतिक ऊर्जा से प्रभावित हुए। जब उन्होंने देखा कि रेखा कितनी जल्दी हिंदी डायलॉग्स याद कर लेती हैं तो उन्होंने तुरंत अपनी फिल्म अनजाना सफर में रेखा को साइन कर लिया। यह वही फिल्म थी जिसने रेखा की जिंदगी में एक ऐसा डार्क इंसिडेंट लिख दिया जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया और उनके मन में पुरुषों के प्रति एक गहरा डर पैदा कर दिया। फिल्म की शूटिंग चल रही थी और रेखा केवल 15 साल की एक नासमझ बच्ची थीं जिसे सिनेमा की चालाकियों और गंदी राजनीति का कोई अंदाजा नहीं था। फिल्म के हीरो थे बंगाली सिनेमा के मशहूर अभिनेता विश्वजीत चटर्जी जिनकी उम्र उस समय 32 साल थी। एक रोमांटिक सीन की शूटिंग होनी थी और जैसे ही डायरेक्टर ने एक्शन कहा, अचानक 32 साल के विश्वजीत ने रेखा को कसकर पकड़ लिया और उनके होठों पर किस करना शुरू कर दिया। रेखा इस अचानक हुए हमले से पूरी तरह सहम गई और डर गई। उन्होंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन विश्वजीत की पकड़ बहुत मजबूत थी। डायरेक्टर कुलजीत पाल ने जानबूझकर कठ नहीं बोला क्योंकि यह कोई स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था बल्कि डायरेक्टर और एक्टर की मिलीभगत थी। पूरे 5 मिनट तक यह डरावना और बिना सहमति का दृश्य चलता रहा। कैमरे के पीछे खड़े क्रू मेंबर्स सीटियां और तालियां बजा रहे थे। इस घटना ने रेखा के अवचेतन मन को गहरा आघात पहुंचाया। डायरेक्टर और एक्टर ने इस घटिया हरकत को केवल पब्लिसिटी और अपने पर्सनल फायदों के लिए अंजाम दिया था। जब यह फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची, तो इस आपत्त्यजनक सीन की वजह से फिल्म पर बैन लगा दिया गया। लेकिन दुर्भाग्य से उन लोगों ने इस किसिंग सीन की तस्वीरें खींच ली थी और जल्द ही यह तस्वीरें विदेशी मैगजीनंस विशेषकर लाइफ मैगजीन के एशियाई संस्करण में लीक कर दी गई। एक इंटरनेशनल न्यूज़पेपर ने इन तस्वीरों को छापते हुए रेखा को सेक्स किटन का शर्मनाक टैग दे दिया जो पहले से ही अपने पिता के ठुकराए जाने के दर्द से गुजर रही थी। उसे रातोंरात पूरे देश और दुनिया में एक व्गर और बदचलन लड़की के रूप में पेश कर दिया गया। 1970 में जब रेखा की पहली लीड हिंदी फिल्म सावन भादो रिलीज हुई, तो वह सुपरहिट रही और रेखा रातों-रात स्टार बन गई। लेकिन सफलता के साथ-साथ उन्हें भयंकर ताने भी सुनने पड़े। लोगों ने उनके सांवले रंग, उनके फिगर और उनकी इमेज पर भद्दी टिप्पणियां की। इन सब से आहत होकर रेखा ने अपनी डेब्यू फिल्मों से
पहले ही अपने नाम के आगे से अपने पिता गणेशन का नाम हमेशा के लिए हटा दिया। वह अब भानु रेखा गणेशन नहीं बल्कि केवल रेखा थी। एक ऐसी पहचान जिसे उन्होंने खुद गढ़ा था। लगातार आलोचनाओं, बॉडी शेमिंग और अपनी सेस्किटन इमेज से परेशान होकर रेखा ने फैसला किया कि वह खुद को पूरी तरह बदल देंगी। जब उन्हें एक साथ 50 फिल्में और मुंह मांगा पैसा मिलने लगा तो उन्होंने उस पैसे को खुद पर निवेश किया और कड़ा अनुशासन अपनाया। लगातार 2 साल की कड़ी मेहनत, कठोर वर्कआउट, डाइट और योग के बल पर रेखा ने अपना पूरा काया पलट कर लिया। उनका सांवलापन एक अजीब सी कशिश और निखार में बदल गया। उनका वजन कम हो गया और उनकी स्टाइलिंग पूरे बॉलीवुड के लिए एक फैशन स्टेटमेंट बन गई। जो दुनिया कल तक उनका मजाक उड़ा रही थी। आज वही दुनिया उनके कदमों में सजदा कर रही थी। रेखा की जिंदगी में कई मर्द आए। लेकिन वह हमेशा उनमें स्थायित्व ढूंढती रहीं। इसी कड़ी में उनका नाम मशहूर अभिनेता जितेंद्र के साथ जुड़ा। जो उस समय के सबसे हैंडसम और स्टाइलिश एक्टर्स में गिने जाते थे। रेखा उनके जेंटलमैन बर्ताव से बुरी तरह अट्रैक्ट हो गई थी। दोनों ने कई हिट फिल्मों में काम किया और जल्द ही वे एक प्रॉपर रिलेशनशिप में आ गए। रेखा को लगा कि आखिरकार उन्हें वह प्यार मिल गया है जिसकी उन्हें हमेशा से तलाश थी। लेकिन पुरुष प्रधान समाज में एक बोल्ड अभिनेत्री को अक्सर केवल उपभोग की वस्तु माना जाता था। फिल्म अनोखी अदा की शूटिंग के दौरान उनके रिश्ते में दरारें सरेआम दिखने लगी थी। एक दिन सेठ पर जब किसी ने जितेंद्र से रेखा के साथ उनके रिश्ते के बारे में पूछा तो अपनी मर्दानगी और इमेज को कूल दिखाने के चक्कर में जितेंद्र ने भरी महफिल में कहा कि रेखा उनके लिए सिर्फ एक टाइम पास है। टाइम पास शब्द भारतीय समाज में उस रिश्ते के लिए इस्तेमाल होता है जो केवल शारीरिक या क्षणिक आकर्षण के लिए हो जिसमें कोई सम्मान या भविष्य ना हो। एक महिला के लिए जो अपने रिश्ते में पूरी तरह समर्पित थी। यह शब्द किसी खंजर से कम नहीं था। रेखा ने यह बात छुप कर सुन ली थी। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वह वहां से रोती हुई भाग गई। जिस पुरुष को वह अपना मान रही थी, उसके लिए वह केवल एक मनोरंजन की वस्तु थी। इस घटना ने रेखा को पुरुषों पर भरोसा करने के मामले में और भी अधिक असुरक्षित बना दिया। जितेंद्र से मिले धोखे के बाद रेखा का दिल टूट चुका था। लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने का फैसला किया। 70 के दशक में जब अभिनेत्रियां दबी हुई आवाज में बात करती थी, रेखा ने एक इंटरव्यू में ऐसा बयान दिया जिसने पूरे देश में तहलका मचा दिया। उन्होंने कहा कि बिना सेक्स के एक मर्द के साथ रिलेशनशिप नहीं बनाया जा सकता। इस बयान ने समाज की जड़े हिला दी और मीडिया ने उनकी इमेज एक बेहद बोल्ड लड़की की बना दी जिसे मैन एटर तक कहा जाने लगा। इसी भयंकर कंट्रोवर्सी के बीच रेखा की जिंदगी में अभिनेता विनोद मेहरा का प्रवेश हुआ। विनोद मेहरा एक शांत और सुलझे हुए इंसान थे। जिन्होंने रेखा को एक मजबूत सहारा दिया और दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गए। रेखा ने एक इंटरव्यू व्यू में कबूल किया था कि विनोद मेहरा ने उनके जन्मदिन की सुबह उन्हें किस किया था जो उस समय के रूढ़िवादी प्रेस के लिए एक बहुत बोल्ड खुलासा था। लेकिन विनोद मेहरा की मां कमला मेहरा को रेखा बिल्कुल पसंद नहीं थी। वह रेखा जैसी स्वतंत्र और बदनाम छवि वाली लड़की को अपने घर की बहू के रूप में स्वीकार नहीं कर सकती थी। इसी बीच अफवाह उड़ी कि रेखा और विनोद मेहरा ने कोलकाता में छुपकर शादी कर ली है। जब शादी के बाद विनोद मेहरा रेखा को लेकर आशीर्वाद लेने अपने घर पहुंचे तो विनोद की मां कमला मेहरा ने दरवाजा खोला और रेखा को देखते ही
उनका खून खोल उठा। उन्होंने रेखा को घर में घुसने से साफ मना कर दिया। रेखा ने जब सम्मान पूर्वक उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने की कोशिश की, तो कमला मेहरा इतनी क्रोधित हो गई कि उन्होंने अपनी चप्पल उतार ली और रेखा को मारने के लिए दौड़ पड़ी। उन्होंने रेखा को गालियां दी और बेइज्जत किया और विनोद मेहरा के बीच बचाव के बावजूद उनकी एक ना चली। अपमान से आहत और आंसुओं में डूबी रेखा मुड़ी और भागकर बिल्डिंग की लिफ्ट की तरफ चली गई। विनोद मेहरा उनके पीछे भागे और उन्हें समझाया। लेकिन वह रिश्ता उसी अपमान के साथ खत्म हो गया। सालों बाद सिममी गरेवाल के शो में जब रेखा से विनोद मेहरा से शादी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि उन्होंने उनसे शादी नहीं की थी। इसके बाद रेखा का नाम अभिनेता किरण कुमार से भी जुड़ा। लेकिन वहां भी किरण के पिता ने रेखा को बहू बनाने से इंकार कर दिया। रेखा के लिए प्यार हर बार एक मृग तृष्णा साबित हो रहा था और फिर वह दौर आया जिसने भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल दिया। यह बॉलीवुड का सबसे बड़ा ओपन सीक्रेट था। फिल्म दो अनजाने के सेट पर रेखा की मुलाकात उस शख्स से हुई, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा अध्याय और उनका सबसे गहरा घाव बनने वाला था। अमिताभ बच्चन जब रेखा ने पहली बार अमिताभ को देखा तो वह उनकी गहरी भारी आवाज और गंभीर पर्सनालिटी से पूरी तरह इंटिमीडेट हो गई। रेखा ने बाद में फिल्मफेयर के इंटरव्यू में कबूल किया कि वह उनके प्यार में पागल हो चुकी थी। जो रेखा सेठ पर लेट आने के लिए बदनाम थी, वह अमिताभ बच्चन की पंकुलिटी और काम के प्रति उनके डेडिकेशन को देखकर पूरी तरह बदल गई। रेखा ने समय पर सेठ पर आना शुरू कर दिया और कहा जाता है कि अमिताभ को इंप्रेस करने के लिए ही उन्होंने वेजिटेरियन डाइट भी अपना ली थी। यह केवल एक क्रश नहीं था। यह एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान के पूरे वजूद को अपने अंदर समा लेने की कोशिश थी। समस्या यह थी कि अमिताभ बच्चन पहले से ही जया बच्चन के साथ शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। धीरे-धीरे उनके रिलेशनशिप की अफवाहें फिल्म इंडस्ट्री में फैलने लगी। इन अफवाहों को तब और हवा मिली जब फिल्म गंगा की सौगंध की शूटिंग के दौरान भीड़ में से एक आदमी बार-बार रेखा पर अश्लील कमेंट्स कर रहा था। अमिताभ बच्चन जो आमतौर पर बेहद शांत रहते थे। अपना आपा खो बैठे और उन्होंने उस आदमी को पकड़ कर बुरी तरह पीट दिया। इस घटना ने मीडिया को यह साफ संदेश दे दिया कि अमिताभ रेखा को लेकर बेहद पजेसिव हैं। गॉसिप पत्रिकाओं ने
यहां तक छाप दिया कि दोनों ने गुपचुप शादी कर ली है। जया बच्चन और रेखा जो एक समय में बहुत अच्छी दोस्त हुआ करती थी, अब आमने-सामने थी। रिशि की शादी वाला व सिंदूर का वाक्य जया के लिए बर्दाश्त से बाहर हो चुका था। जिसके बाद जया बच्चन ने एक बहुत ही कूटनीतिक चाल चली। एक दिन जब अमिताभ बाहर थे, जया ने रेखा को अपने घर पर डिनर के लिए बुलाया। रेखा को लगा कि शायद जया उनसे लड़ेंगी। लेकिन जया ने उनका बहुत अच्छे से स्वागत किया। जब रेखा वापस जाने लगी तो जया ने दरवाजे पर खड़े होकर उनकी आंखों में आंखें डालते हुए एक ऐसी लाइन कही जिसने रेखा के पैरों तले जमीन खिसका दी। जया ने कहा, देखो कुछ भी हो जाए। अमिताभ मेरा था, मेरा है और मेरा ही रहेगा। यह एक पत्नी का अल्टीमेटम था। इसके बाद यश चोपड़ा ने इनकी रियल लाइफ को पर्दे पर उतारते हुए सिलसिला बनाई और इस फिल्म के बाद अमिताभ और रेखा कभी साथ नजर नहीं आए। कुली के सेट पर हादसे के बाद अमिताभ पूरी तरह से अपने परिवार के करीब आ गए। सालों बाद सिममी गरेवाल के शो में अमिताभ ने शांत तरीके से कहा कि रेखा केवल उनकी सह कलाकार हैं। जबकि उसी शो में रेखा ने बेबाकी से कहा था मैं उनके प्यार में हूं। कौन उनके प्यार में नहीं है? रेखा ने यह भी कहा कि अमिताभ का सार्वजनिक रूप से रिश्ते से इंकार करना अपनी इमेज और परिवार को बचाने के लिए था। अमिताभ से अलग होने के बाद रेखा ने अपने दर्द को अपनी कला में पिरो दिया और बॉक्स ऑफिस की बेताज रानी बन गई। लेकिन निजी जिंदगी में वह अभी भी नितांत अकेली थी। इसी अकेलेपन के बीच उनकी मुलाकात दिल्ली के बिजनेसमैन मुकेश अग्रवाल से हुई जो रेखा के बहुत बड़े फैन थे। कुछ ही मुलाकातों के बाद मुकेश ने रेखा को प्रपोज कर दिया और रेखा ने इस उम्मीद में शादी कर ली कि शायद अब उन्हें एक स्थाई घर मिल जाएगा। लेकिन शादी के कुछ ही हफ्तों बाद पता चला कि मुकेश क्रॉनिक डिप्रेशन के शिकार थे। मुकेश रेखा को अपनी पत्नी कम और एक ट्रॉफी वाइफ ज्यादा मानते थे और उन्हें हाई प्रोफाइल पार्टियों में अपनी शान बघारने के लिए ले जाते थे। रेखा इस सबसे घुटने लगी थी और उन्होंने मुकेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। 1990 में जब रेखा अमेरिका में थी, तब मुकेश ने दिल्ली में अपने फार्म हाउस में रेखा के दुपट्टे से फांसी लगाकर हत्या कर ली। मुकेश ने अपने नोट में साफ लिखा था कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार मत ठहराना।
लेकिन समाज और मीडिया ने रेखा को मुकेश की मौत का सीधा जिम्मेदार ठहरा दिया। अखबारों में रेखा के लिए दी ब्लैक विडो और नेशनल वैंप जैसी शर्मनाक हेडलाइंस छापी गई। फिल्म इंडस्ट्री ने रातोंरात रेखा से मुंह मोड़ लिया और सुभाष घई जैसे डायरेक्टर्स ने कह दिया कि कोई भी समझदार डायरेक्टर रेखा के साथ काम नहीं करेगा। 80 और 90 के दशक में भी रेखा का नाम विवादों से दूर नहीं रह सका। जब रेखा और संजय दत्त फिल्म जमीन आसमान की शूटिंग कर रहे थे तब यह अफवाह उड़ी कि दोनों ने गुपचुप शादी कर ली है। संजय दत्त उस समय अपनी नशे की लत के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे और रेखा ने केवल एक दोस्त के नाते उन्हें इस लत से बाहर निकलने में मदद की थी। अफवाहें इतनी तेज हो गई कि संजय दत्त को एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में इस शादी की अफवाहों का कड़ाई से खंडन करना पड़ा था। इसी तरह 1996 में खिलाड़ियों का खिलाड़ी की शूटिंग के दौरान एक और बड़ा विवाद खड़ा हुआ जब रेखा और अक्षय कुमार के बीच बोल्ड सीन फिल्माए गए। मीडिया में खबरें आई कि रेखा, अक्षय और रवीना टंडन के ब्रेकअप का कारण बन रही हैं। रवीना टंडन ने इन अफवाहों के बीच दखल दिया और खुलासा किया कि अक्षय का रेखा के साथ कोई संबंध नहीं था बल्कि वह रेखा से दूर भागना चाहते थे। रवीना ने बताया कि रेखा अक्षय के लिए अपने घर से लंच बॉक्स बनाकर लाती थी जो रवीना को बिल्कुल पसंद नहीं आया
और उन्होंने बीच में आकर कदम उठाया। इन तमाम विवादों के बावजूद रेखा का जीवन केवल गॉसिप्स का पुलिंदा नहीं है। जिस पिता जेमिनाई गणेशन ने उन्हें जिंदगी भर नाजायज का दर्द दिया उसी पिता को सालों बाद रेखा ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड देकर फेमिनिज्म और क्षमा का सर्वोच्च उदाहरण पेश किया। आज भी रेखा जब सार्वजनिक समारोहों में आती हैं तो उनकी मांग में सिंदूर होता है जो किसी पति के नाम का नहीं बल्कि उनकी अपनी आजादी और पहचान का प्रतीक है। सिममी गरेवाल के इंटरव्यू में उन्होंने बेबाकी से कहा था कि उन्हें अपनी जिंदगी के किसी भी फैसले पर पछतावा नहीं है। भानु रेखा गणेशन से रेखा तक का यह सफर हमें सिखाता है कि रेखा को जिंदगी भर सिर्फ उस सच्चे प्यार की तलाश रही जो उन्हें कहीं नहीं मिला। लेकिन रेखा की सबसे बड़ी जीत यह है कि उन्होंने कभी भी अपने दर्द और अपमान को एक बहाने की तरह इस्तेमाल नहीं किया। वह गिरी, टूटी, अपमानित हुई। लेकिन हर बार अपनी राख से एक फिनिक्स पक्षी की तरह उठ खड़ी हुई। रेखा आज भी अकेली हैं, लेकिन वह अधूरी नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने एकांत को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है और वह आज भी बॉलीवुड की सबसे बड़ी पहेली हैं जिसने खुद अपने जवाब लिखे हैं। और दोस्तों अगर आपको बॉलीवुड के इन अनकही कहानियों और गहरे राजों को जानना पसंद है तो अभी इस वीडियो को लाइक करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना ना भूलें। ने