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गर्मी में Ac क्यों बन रही है मौ!त का सामान?ये है 5 कारण।

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देश की राजधानी दिल्ली समेत समूचे उत्तर भारत में तापमान 46 डिग्री टेंपरेचर को भी पार कर गया। तो ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए कोई पंखा यूज करता है कोई कूलर तो कोई एसी।

लेकिन आजकल बहुत ऐसी खबरें आ रही हैं जहां पता लगता है कि एसी का या तो इनडोर या फिर आउटडोर जो है वो कर जाता है और उसकी वजह से कई लोगों की जाने भी गई हैं। आखिर इसकी वजह क्या है? बात करने के लिए हम आए हैं एक जगह दरियागंज में जहां पर विशाल जी हैं जो कि काफी लंबे समय से जो हैं वो एसी में कारोबार करते रहे हैं।

उनसे जानते हैं कि आखिर कहां पर चूक होती है जिसकी वजह से यह जो चीजें आपको राहत देने के लिए बनी है वो आपके लिए जानलेवा भी हो सकती है। विशाल जी इधर आइए। ये बताइए कि इनडोर या आउटडोर इनमें ऐसा क्या होता है कि ब्लास्ट तक हो जाता है? इनडोर आउटडोर में इधर कंप्रेसर वगैरह होता है। आपका यह मेन इंडोर यूनिट रूम के अंदर लगता है।

यह बाहर लगता है। अब यह डिपेंड करता है आपके पास कहां पे स्पेस है। ये तो रूम के अंदर लगता है। मेन सबसे बड़ी चीज है इसमें आपकी मेंटेनेंस। एसी का जैसे फिल्टर होता है। लोग रेगुलर क्लीन नहीं करते। चोक हो जाता है। तो वो क्लीन करते रहना चाहिए। और कई बार आदमी को लगता है कि यार इसमें कहीं प्रॉब्लम आ रही है, स्पार्क हो रहा है, कुछ हो रहा है तो वो कहता है कोई बात नहीं चलने दो। उस टाइम यह नहीं करना चाहिए। लापरवाही नहीं करनी चाहिए। या तो उसको ऑफ कर दो या टेक्नशियन को बुला के पहले इलेक्ट्रिशियन या टेक्नशियन को उसको चेक करवा लो।

यह नहीं कि कंटीन्यूअस चलाते रहो। इनमें से ज्यादा मेंटेनेंस क्या मांगता है? इनडोर या ये आउटडोर? मेंटेनेंस तो दोनों में ही है। देखो केयर तो आपको दोनों प्रोडक्ट की करनी पड़ेगी क्योंकि साइड बाय साइड दोनों इंटररिलेटेड है। इनडोर और आउटडोर। उसमें यह होता है आउटडोर में थोड़ी सी प्रॉब्लम यह हो जाती है कि आउटडोर बाहर कहीं छत पे लगा है तो हर एक आदमी की रीच नहीं है। इनडोर तो आप अपना स्टेयर सीढ़ी लगा के कुछ भी करके फ़िल्टर निकाल के आप भी कर सकते हो। इलेक्ट्रिशियन भी कर सकता है। आउटडोर एक बार छत पे लग जाता है। कई बार लोग जाके चेक ही नहीं करते। साल में एक बार सर्विस हुआ तो हुआ।

नहीं हुआ तो उसको रनिंग करी जा रहे हैं। बेसिकली सर्विस बहुत जरूरी है। ऑथराइज चैनल से होनी चाहिए। कई बार क्या होता है? लोकल टेक्नशियन आते हैं। वो गैस पूरी फिल अप करने की बजाय आपको सिर्फ टॉप अप कर देते हैं। R2, R32, 290 ये सब होते हैं। हां, ये गैस होती है। अगर पूरी फिल करने की रिक्वायरमेंट है। वो सिर्फ टॉप अप कर जाता है कि इतना हो कि आपका एसी चल जाए कुछ दिन के लिए या गैस दूसरी डाल देते हैं तो उसमें प्रॉब्लम आ जाती है।

कंज्यूमर को क्या पता कौन सी गैस है। कैसे सुनिश्चित करें कि जो हुआ है यही है कि ऑथराइज चैनल से कराओ कंपनी से करो बकायदा बिल लो आप ऑथराइज जैसे वोल्टा जो भी ब्रांड आप लेते हो उसी ब्रांड के प्रॉपर चैनल से कराओ और बेस्ट तो है कि कंपनी की तरफ से एएमसी कर लो एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट आते हैं आजकल कंपनी के वो ही लो दूसरा से कोई फायदा नहीं दूसरा वाला अब करके जाएगा वो इतना ट्रेंड तो है नहीं कंपनी वाला प्रॉपर उसे प्लस माइनस दोनों पता है उस हिसाब से होगा आपको बेसिकली एक केयर रखनी है कि इसकी जो एमसीबी और कनेक्शन है वह अलग होना चाहिए।

इंटररिलेटेड नहीं होना चाहिए कि बाकी क्योंकि पावर का प्रोडक्ट है। बाकी आप लोड इसी पे डाल रहे हो सारा तो वह ठीक नहीं है। एसी का जो भी आप वायरिंग करा रहे हो वायरिंग हैवी होनी चाहिए। कई बार क्या होता है पुरानी डेली में दो एसी लगे हुए हैं ऑलरेडी उसमें एक और आदमी लगा लेता है। वायर तो वही है ना। तो एटलीस्ट आप या वायर चेंज कराओ या एक एमसीबी का कनेक्शन उसके साथ अलग रखो।

एसी का कनेक्शन अलग होना चाहिए। रेगुलर इंटरवल पे सर्विस होनी चाहिए। फिल्टर वगैरह रेगुलर क्लीन होने चाहिए। मेन चीज ये है विशाल जी बात कर लेते हैं कंपोनेंट की तो इसके अंदर तो एक तरीके से जो है कॉइल होती है, फैन होता है और पीसीबी होता है। इसके अंदर जो है कॉइल और कंप्रेसर होता है। थोड़ा उसके बारे में बताइए थोड़ा। इसमें आउटडोर होता है। अब जैसे ये पोर्शन आप देख रहे हो इससे वेंटिलेशन जरूरी है। अगर अब हम इसका रास्ता ही चोक कर देंगे। ब्लॉक कर देंगे तो गरम हवा यहां से बाहर जा रही है। अगर यह बाहर ही नहीं जाएगी। अंदर से आ रही है। अगर अब यह बाहर नहीं जाएगी। इसको मैं ढक देता हूं किसी से या छत पे पड़ा है। कोई चीज गिर गई कवर हो गया तो उसको कैसे वे आउट है? कोई वे आउट ही नहीं है।

बाहर तो जाना चाहिए ना। गरम हवा तो बाहर जानी चाहिए। अगर वो बाहर ही नहीं जाएगी तो वो चौक होगा। मेन चीज वो है। मेन जो कंपोनेंट है जो कंप्रेसर उसी के अंदर है। हां जी। कंप्रेसर इसी के अंदर है। इसमें आपका पीसीबी होती है और आपका कूलिंग कॉइल होता है। फ़्टर होता है। जो इनडोर का फ़्टर होता है। यह इनडोर यूनिट होता है। इंडोर का मतलब जो रूम के अंदर लगा है। ये आउटडोर होता है। अब कई बार ये क्या होता है कि बाहर आपने कहीं स्टेयर्स पे स्टैंड रख के रूफ पे लगा दिया तो उसके लिए कई बार वो चीज ज्यादा प्रोटेक्शन करने की होती है क्योंकि वो आदमी देख नहीं पाता। इंडोर तो आपको सिम्टम यहां दे रहा है। P1 लिखा हुआ आ जाएगा।

अगर उसमें पीसीबी में कुछ फॉल्ट है कुछ है बस सबसे बड़ा मेन चीज है कि कंपनी से कराओ सर्विस जरूर रेगुलर इंटरवल तक ये आपने हसखास वाली घटना सुनी होगी जिसमें एक रिटायर्ड आईएएस हैं उसमें बताया जा रहा है कि जो इंडोर था उसमें आग लगी और इसकी वजह से दम घुटा उनकी जान चली गई तो इसमें ऐसा क्या होता है कि ये कर सकता है या जल्दी आग पकड़ लेता है देखो इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट है उसमें जो वायरिंग है मेन क्या है कि आपकी वायरिंग प्रॉपर होनी चाहिए उसका एमसीबी का कनेक्शन सेपरेट होना चाहिए। अब वो वायरिंग प्रॉपर थी नहीं थी वह तो वही जाके बता सकता है कि किस रीजन से हुआ। बट जो मेन चीज आप कवर कर सकते हो वो यही कर सकते हो। अपनी एक तो मेंटेन कर सकते हो।

सर्विस चैनल से करा सकते हो। फिल्टर वगैरह रेगुलर क्लीन कर सकते हो। जो चीज आपके हाथ में वो तो एटलीस्ट करो ना। कई बार क्या होता है 2 साल तक सर्विस ही नहीं कराई या आदमी बाहर रह रहा है। वो 2 महीने बाद आया उसने सर्विस नहीं कराई। इमीडिएट उसने ऑन कर दिया। प्रोडक्ट की केयर ही नहीं की। वह चीज हो जाती है और यह भी देखना होगा कि जहां इनडोर या आउटडोर रखा है वहां लकड़ी का फर्नीचर ना हो कम से हां लकड़ी का फर्नीचर ना हो कोई भी फ्लेमेबल प्रोडक्ट ना हो कि कोई और इस तरह का जो फ्लेमेबल है प्लास्टिक पॉलिथीन है कोई केमिकल सॉर्ट ऑफ है कोई ऑयल है इस तरह का कोई प्रोडक्ट नहीं होना चाहिए उसके पास जो वेलकम के उधर घटना घटी थी वो उसमें तो बताया जा रहा है जो आउटडोर है उसमें ही ब्लास्ट हुआ उसके बाद में आग पूरे घर में फैल गई तो क्या कंप्रेसर ऐसे फटता है कि पूरे घर को ऐसे नहीं फटता हीट ज्यादा है। अगर आपका टेंपरेचर बाहर का 44 है। अब इसमें इन्होंने वह कंटीन्यूअस यूज़ कर रहे हैं।

उसको रेस्ट ही नहीं दे रहे। है तो प्रोडक्ट ही ना इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट। उसको एटलीस्ट आप एक घंटे का या कुछ तो रेस्ट दोगे। आप कंटीन्यूअस चला रहे हो। फिर उसकी वेंटिलेशन का कोई सोर्स नहीं है। अगर वेंटिलेशन का सोर्स नहीं है तो फिर तो प्रॉब्लम आएगी आएगी। आप गाड़ी का भी एसी का फ़्टर लेते हो। अगर फ़्टर ही चोक हो जाएगा। उसको ही क्लीन नहीं करोगे तो कैसे होगा? एक हमने देखी है जब 45 46 टेंपरेचर होता है तो लोग क्या करते हैं कि जल्दी से रूम कूल हो जाए उसके लिए टेंपरेचर को जो है नीचे ले आते हैं। 16 पे भी देखा है मैंने। टेंपरेचर एक नॉर्मल लेवल पे रखना चाहिए कि आपके बॉडी के हिसाब से भी सूट करता है। कई बुजुर्ग वगैरह होते हैं उनको घुटने में दर्द शुरू हो जाती है कि कंटीन्यूअस आप उसको टेंपरेचर हाई पे चला रहे हो। एक कंप्रेसर पे जोर पे उससे कंप्रेसर पे जोर पड़ता है और बार-बार ट्रिप भी होता है और घटना की घटना के भी चांस ज्यादा है और बार-बार वो ट्रिप होगा ना जितना आपका उस पे करोगे आप एक्सट्रीम पे चलाओगे वो चीज है एक मिनिमम लेवल पे इस हिसाब से होना चाहिए कि आपकी बॉडी कंफर्ट लेवल में आप आ जाओ ये नहीं कि आपको प्रॉपर चिलिंग चाहिए अगर आज आप प्रॉपर चिल करके एकदम आप बाहर निकलोगे निकलोगे तो गर्मी में ही ना तो फिर उसके भी इशू रहता है ठीक है वो प्रॉब्लम आती है तो आपको ख्याल रखना है कि ये चीज़ आपकी सुविधा के लिए बनी है लेकिन जानलेवा ना बन के लिए बेहद जरूरी है कि एक तो टेंपरेचर के लिए देखिए सरकार भी की गाइडलाइन है कि 24 से 26 के बीच रखें। नीचे लेके आएंगे तो उससे बिजली की खपत भी ज्यादा होगी।

आपकी जेब पे भी ज्यादा जोर पड़ेगा। साथ ही साथ जो कंप्रेसर है उस पर भी दबाव पड़ता है। जरूरी है कि आप ऑथराइज चैनल से ही अपने एसी की प्रॉपर टाइम पे सर्विसिंग कराएं ताकि गलत गैस ना भरी जाए। साथ में जो उनकी वायरिंग है उसको भी प्रॉपर चेक कराएं। तो

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